अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (तस्वीर क्रेडिट@ShpoolNews)

ट्रंप ने अलास्का से कैलिफोर्निया और ब्राजील तक के चुनावों पर उठाए सवाल, निष्पक्षता को लेकर लगाए गंभीर आरोप

वाशिंगटन,30 अक्टूबर (युआईटीवी)- अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर कई देशों और राज्यों में हुए चुनावों की निष्पक्षता पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने अलास्का और कैलिफोर्निया के चुनावों में कथित अनियमितताओं का आरोप लगाने के साथ ही ब्राजील के चुनाव को भी शर्मनाक करार दिया। ट्रंप ने अलास्का में मतपत्रों पर एक जैसे नाम वाले उम्मीदवारों की मौजूदगी को मतदाताओं को भ्रमित करने की कथित कोशिश बताया। वहीं, कैलिफोर्निया में बड़ी संख्या में अमान्य वोट होने का दावा किया। ब्राजील के मामले में उन्होंने मौजूदा राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा को स्पष्ट रूप से चुनाव का विजेता मानने से परहेज किया। हालाँकि, अपने आरोपों के समर्थन में उन्होंने कोई ठोस दस्तावेज या विशिष्ट प्रमाण पेश नहीं किया।

ट्रंप ने ये बातें एयर फोर्स वन से रवाना होने से पहले पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहीं। उनसे जब चुनावों की निष्पक्षता और उन्हें विश्वसनीय बनाने के मानकों के बारे में सवाल किया गया, तो उन्होंने अलास्का में मतपत्रों से जुड़े विवाद का उल्लेख किया। उनका आरोप था कि वहाँ बैलेट पेपर पर ऐसे उम्मीदवारों के नाम शामिल किए गए, जो रिपब्लिकन सीनेटर डैन सुलिवन के नाम से मिलते-जुलते हैं। ट्रंप के मुताबिक, इससे उन मतदाताओं के बीच भ्रम पैदा हो सकता है, जो सीनेटर डैन सुलिवन को वोट देना चाहते हैं।

ट्रंप ने कहा कि यदि इस विवाद को ठीक नहीं किया गया,तो अलास्का का चुनाव निश्चित रूप से बेईमानी भरा माना जाएगा। उन्होंने इस मामले में डेमोक्रेटिक पार्टी के सीनेट नेता चक शूमर और अन्य लोगों पर मतदाता धोखाधड़ी में शामिल होने का आरोप भी लगाया। हालाँकि,पत्रकारों के सामने उन्होंने ऐसा कोई सबूत प्रस्तुत नहीं किया,जिससे यह साबित हो सके कि चक शूमर या अन्य नेताओं ने मतदाताओं को भ्रमित करने की कोई साजिश रची थी। उनके आरोप मुख्य रूप से बैलेट पेपर पर समान नाम वाले उम्मीदवारों की मौजूदगी और उससे पैदा होने वाली संभावित उलझन पर केंद्रित रहे।

राष्ट्रपति ने दावा किया कि डैन सुलिवन नाम के एक अन्य उम्मीदवार ने चुनाव प्रचार भी नहीं किया था। उनके अनुसार,उस उम्मीदवार को मतपत्र पर शामिल करने का उद्देश्य रिपब्लिकन सीनेटर डैन सुलिवन के वोटों को बाँटना था। ट्रंप का कहना था कि मतदाता दोनों नामों के बीच अंतर नहीं कर पाएँगे और इस वजह से सीनेटर को नुकसान हो सकता है। उन्होंने अपने दावे के समर्थन में कुछ अध्ययनों का हवाला भी दिया और कहा कि उनसे पता चलता है कि मतदाता भ्रमित हुए थे। हालाँकि,उन्होंने न तो उन अध्ययनों के नाम बताए और न ही यह स्पष्ट किया कि उन्हें किस संस्था ने तैयार किया था या उनमें किस तरह के आँकड़ों का इस्तेमाल किया गया था।

अलास्का के चुनाव में मैरी पेल्टोला की संभावित जीत को लेकर भी ट्रंप से सवाल किया गया। पत्रकारों ने पूछा कि यदि मैरी पेल्टोला चुनाव जीत जाती हैं,तो क्या रिपब्लिकन नेताओं को उन्हें पद सँभालने से रोकना चाहिए? इस सवाल पर ट्रंप ने कोई सीधा जवाब नहीं दिया। उन्होंने कहा कि आगे क्या होता है,यह देखा जाएगा। साथ ही उन्होंने आश्चर्य जताया कि मैरी पेल्टोला को चुनाव लड़ने की अनुमति कैसे मिल गई। हालांकि, उन्होंने उनकी चुनावी पात्रता पर सवाल उठाने के लिए कोई कानूनी आधार नहीं बताया। इस तरह उनके जवाब में उम्मीदवार की योग्यता से अधिक मतपत्र पर समान नामों की मौजूदगी को लेकर लगाए गए आरोप ही प्रमुख रहे।

अलास्का के बाद ट्रंप ने कैलिफोर्निया की चुनाव प्रक्रिया पर भी निशाना साधा। उनसे एक न्यायाधीश के उस फैसले के बारे में पूछा गया, जिसमें 20 हजार वोटों से संबंधित चुनौती को खारिज कर दिया गया था। इस पर ट्रंप ने कहा कि फैसले के खिलाफ अपील की जाएगी। उन्होंने दावा किया कि कैलिफोर्निया में अमान्य वोटों की संख्या केवल 20 हजार तक सीमित नहीं है,बल्कि वहाँ लाखों खराब वोट मौजूद हैं। हालाँकि,उन्होंने इस दावे को साबित करने के लिए कोई आधिकारिक रिपोर्ट, दस्तावेज या आँकड़े पत्रकारों के सामने नहीं रखे।

ट्रंप ने कहा कि कैलिफोर्निया में लाखों वोटों को अमान्य माना जाना चाहिए और उनकी राय में वहाँ वोटों की संख्या को लेकर गंभीर समस्या है। उन्होंने यह भी दावा किया कि यदि राज्य में मतों की गिनती पूरी ईमानदारी और निष्पक्षता से की गई होती,तो वह कैलिफोर्निया में भी जीत हासिल कर सकते थे। उनका यह बयान ऐसे समय आया,जब उनसे अदालत के फैसले और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े कानूनी विवाद पर प्रतिक्रिया माँगी गई थी। हालाँकि,उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि उनके अनुसार कितने वोट गलत तरीके से गिने गए या किन आधारों पर उन्हें अमान्य माना जाना चाहिए।

कैलिफोर्निया को लेकर ट्रंप के आरोपों में भी ठोस प्रमाणों का अभाव दिखाई दिया। उन्होंने लाखों अमान्य वोट होने की बात कही, लेकिन किसी विशेष चुनाव,मतदान केंद्र या मतगणना प्रक्रिया का विस्तृत विवरण नहीं दिया। उन्होंने यह भी नहीं बताया कि जिन वोटों को वह खराब बता रहे हैं,उनकी पहचान किस जाँच के आधार पर की गई है। इस कारण पत्रकारों के सामने उनके दावों की पुष्टि करने वाला कोई स्पष्ट आधार नहीं आया। इसके बावजूद उन्होंने राज्य की चुनाव व्यवस्था पर अपनी आलोचना जारी रखी और अदालत के फैसले के खिलाफ अपील किए जाने की बात दोहराई।

ब्राजील के चुनाव को लेकर भी ट्रंप का रुख चर्चा में रहा। उन्होंने कहा कि वह ब्राजील के मौजूदा राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा से बातचीत करेंगे,लेकिन पत्रकारों के सवालों के जवाब में उन्हें चुनाव का वैध विजेता मानने से बचते रहे। ट्रंप ने ब्राजील में हुए चुनाव को शर्मनाक घटना बताया। जब उनसे पूछा गया कि वह किसे चुनाव का असली विजेता मानते हैं,तो उन्होंने कहा कि फिलहाल वह इस विषय पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहते। हालाँकि,उन्होंने फिर दोहराया कि उनके विचार में यह चुनाव ब्राजील के लोगों के लिए शर्मिंदगी की बात थी।

ट्रंप ने बताया कि उन्होंने ब्राजील के चुनाव पर नजर रखी थी। उनके अनुसार,मौजूदा राष्ट्रपति के कहने पर उन्होंने चुनाव के दौरान किसी एक पक्ष का खुलकर समर्थन करने से परहेज किया था। इसके बावजूद उन्होंने चुनाव की प्रक्रिया पर सवाल उठाए। हालाँकि, उन्होंने अपने आरोपों को स्पष्ट करने के लिए किसी खास मतदान केंद्र,मतगणना में गड़बड़ी या चुनावी नियमों के उल्लंघन का उल्लेख नहीं किया। उन्होंने यह भी नहीं बताया कि ब्राजील के चुनाव में ऐसी कौन-सी घटना हुई थी,जिसके आधार पर वह उसे शर्मनाक बता रहे हैं।

ब्राजील की अर्थव्यवस्था का जिक्र करते हुए ट्रंप ने वहां के बाजार में आई गिरावट को भी अपने तर्क का हिस्सा बनाया,लेकिन उन्होंने किसी विशेष शेयर बाजार सूचकांक का नाम नहीं लिया और न ही गिरावट की अवधि या उससे जुड़े आँकड़े बताए। इस वजह से यह स्पष्ट नहीं हो पाया कि वह किस आर्थिक घटनाक्रम की बात कर रहे थे और उसका चुनाव की निष्पक्षता से क्या संबंध था। उन्होंने लूला दा सिल्वा के साथ प्रस्तावित बातचीत की तारीख भी नहीं बताई। ऐसे में दोनों नेताओं के बीच बातचीत कब होगी और उसमें किन मुद्दों पर चर्चा की जाएगी,इसे लेकर फिलहाल कोई जानकारी सामने नहीं आई है।

ट्रंप के इन बयानों में एक समान बात यह रही कि उन्होंने अलग-अलग चुनावों पर गंभीर आरोप लगाए,लेकिन कई मामलों में अपने दावों के समर्थन में विशिष्ट प्रमाण नहीं दिए। अलास्का में उन्होंने समान नाम वाले उम्मीदवारों को लेकर मतदाताओं के भ्रमित होने की आशंका जताई। कैलिफोर्निया में लाखों अमान्य वोट होने का दावा किया और ब्राजील के चुनाव को शर्मनाक बताया। हालाँकि,इन तीनों मामलों में उन्होंने कथित अनियमितताओं का विस्तृत विवरण या ऐसी कोई आधिकारिक सामग्री पेश नहीं की,जिससे उनके आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि हो सके।

इसी बातचीत के दौरान ट्रंप से डेमोक्रेटिक नेताओं की ओर से महाभियोग को लेकर हो रही चर्चा पर भी सवाल पूछा गया। इस पर उन्होंने अमेरिका के रक्षा सचिव पीट हेगसेथ का बचाव किया और उनके काम की तारीफ की। ट्रंप ने डेमोक्रेट्स पर आरोप लगाया कि वे लगातार सरकारी अधिकारियों के खिलाफ महाभियोग लाने की कोशिश करते रहते हैं। उन्होंने इस चर्चा को राजनीतिक विरोध का हिस्सा बताया और हेगसेथ के प्रति अपना समर्थन दोहराया।

राष्ट्रपति के इन बयानों से अमेरिकी राजनीति में चुनावी प्रक्रिया और उसकी विश्वसनीयता को लेकर जारी बहस फिर सामने आ गई है। अलास्का और कैलिफोर्निया के चुनावों से जुड़े विवादों पर ट्रंप ने अपनी चिंताएँ जाहिर की हैं,जबकि ब्राजील के मामले में उन्होंने वहाँ के चुनावी नतीजों को लेकर असहमति जताई है। हालाँकि,उनके आरोपों की पुष्टि के लिए संबंधित कानूनी प्रक्रियाओं,आधिकारिक आँकड़ों और स्वतंत्र जाँच के नतीजों का सामने आना जरूरी होगा। फिलहाल,पत्रकारों से हुई बातचीत में ट्रंप ने चुनावों पर अपने सवाल तो रखे,लेकिन कई महत्वपूर्ण दावों के समर्थन में ठोस विवरण नहीं दिया।