सना,30 अक्टूबर (युआईटीवी)- यमन में सक्रिय हूती विद्रोही समूह ने सऊदी अरब पर बड़े पैमाने पर मिसाइल और ड्रोन हमले करने का दावा किया है। समूह के मुताबिक, उसने सऊदी अरब की तेल सुविधाओं,अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डों और एक सैन्य ठिकाने को निशाना बनाते हुए कुल छह हमले किए। इन हमलों में तीन बैलिस्टिक मिसाइल हमले शामिल थे, जबकि अन्य हमलों में मिसाइल और ड्रोन का इस्तेमाल किया गया। हूतियों ने दावा किया कि उनकी कार्रवाई के कारण सऊदी अरब में हवाई यातायात भी प्रभावित हुआ है। हालाँकि,इन हमलों से हुए नुकसान और हताहतों की संख्या की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
हूती समूह के सैन्य प्रवक्ता याह्या सरिया ने हूती नियंत्रित टेलीविजन चैनल अल-मसीराह पर प्रसारित बयान में इन हमलों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि तीन बैलिस्टिक मिसाइल हमलों के जरिए सऊदी अरब के पूर्वी प्रांत में स्थित रास तनूरा रिफाइनरी और अब्काइक में सऊदी अरामको की तेल सुविधाओं को निशाना बनाया गया। इसके अलावा, लाल सागर के तट पर स्थित राबिग रिफाइनरी पर भी हमला करने का दावा किया गया है। ये सभी सुविधाएँ सऊदी अरब के ऊर्जा क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती हैं।
याह्या सरिया के अनुसार,हूतियों ने सऊदी अरब के हवाई अड्डों को भी निशाना बनाया। उन्होंने बताया कि राजधानी रियाद स्थित किंग खालिद अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर मिसाइलों से हमला किया गया। वहीं, पूर्वी प्रांत के दम्मम में स्थित किंग फहद अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे को ड्रोन के जरिए निशाना बनाने का दावा किया गया। हूती प्रवक्ता ने कहा कि इन अभियानों के कारण हवाई यातायात बाधित हुआ। हालाँकि,सऊदी अधिकारियों की ओर से इस दावे और हवाई अड्डों को हुए संभावित नुकसान की विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।
हूती समूह ने सऊदी अरब के दक्षिणी सीमावर्ती क्षेत्र नजरां में स्थित एक सैन्य ठिकाने पर भी हमले का दावा किया है। याह्या सरिया के मुताबिक,वहाँ सऊदी सैन्य बलों के कमांड सेंटर को निशाना बनाया गया। उन्होंने दावा किया कि इस कार्रवाई में कई सैनिक और अधिकारी हताहत हुए हैं। हालाँकि,इस दावे की भी स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। सऊदी पक्ष की ओर से सैन्य ठिकाने पर हुए नुकसान या किसी के हताहत होने को लेकर तत्काल कोई विस्तृत जानकारी नहीं दी गई।
हूती सैन्य प्रवक्ता ने इन हमलों को सऊदी अरब की हालिया सैन्य कार्रवाई का जवाब बताया। उनका कहना है कि यमन में हूती नियंत्रित क्षेत्रों पर सऊदी अरब की ओर से किए गए हवाई हमलों के बाद समूह ने यह कार्रवाई की। इस तरह हूतियों ने अपने हमलों को जवाबी सैन्य अभियान के रूप में पेश किया है। दोनों पक्षों के बीच हाल के हफ्तों में बढ़ती सैन्य गतिविधियों ने क्षेत्रीय तनाव को और गंभीर बना दिया है।
इससे पहले गुरुवार शाम सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन ने जानकारी दी थी कि देश की वायु रक्षा प्रणाली ने राजधानी रियाद की दिशा में दागी गई दो बैलिस्टिक मिसाइलों को रोककर नष्ट कर दिया। गठबंधन के मुताबिक,ये मिसाइलें हूतियों की ओर से दागी गई थीं। सऊदी वायु रक्षा प्रणाली की इस कार्रवाई के बाद क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सतर्कता बढ़ गई। इसके बाद हूती समूह की ओर से छह हमलों का दावा सामने आया, जिससे दोनों पक्षों के बीच टकराव और बढ़ने के संकेत मिले हैं।
दूसरी ओर,हूतियों का आरोप है कि यमन में उनके नियंत्रण वाले क्षेत्रों पर सऊदी अरब के हवाई हमलों में 27 लोगों की मौत हुई है। समूह ने इन मौतों को अपनी जवाबी कार्रवाई का कारण बताया है। हालाँकि,मृतकों की पहचान, हमलों के स्थान और नुकसान से संबंधित सभी विवरणों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। दोनों पक्ष एक-दूसरे पर हमले करने के आरोप लगा रहे हैं,जिससे मौजूदा स्थिति को लेकर स्पष्ट जानकारी जुटाना चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।
सऊदी अरब और हूतियों के बीच तनाव का इतिहास काफी पुराना है। यमन में संघर्ष की शुरुआत वर्ष 2014 के आखिर में तेज हुई थी,जब हूती विद्रोहियों ने राजधानी सना और उत्तरी यमन के बड़े हिस्से पर कब्जा कर लिया था। इसके बाद देश की तत्कालीन सरकार और हूतियों के बीच संघर्ष बढ़ता चला गया। वर्ष 2015 में सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन ने यमनी सरकार के समर्थन में सैन्य हस्तक्षेप किया। इसके बाद यमन का संघर्ष क्षेत्रीय स्तर पर भी महत्वपूर्ण हो गया और सऊदी अरब तथा हूतियों के बीच सैन्य टकराव लगातार जारी रहा।
यमन की भौगोलिक स्थिति भी इस संघर्ष को संवेदनशील बनाती है। यह देश लाल सागर और अदन की खाड़ी के आसपास स्थित महत्वपूर्ण समुद्री क्षेत्र के करीब है। इस क्षेत्र से अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा संसाधनों का बड़ा हिस्सा गुजरता है। ऐसे में यमन में बढ़ने वाला सैन्य तनाव केवल वहाँ की आंतरिक स्थिति तक सीमित नहीं रहता,बल्कि आसपास के देशों की सुरक्षा और समुद्री व्यापार पर भी असर डाल सकता है।
ताजा घटनाक्रम में तेल रिफाइनरियों,हवाई अड्डों और सैन्य कमांड सेंटर को निशाना बनाने के हूतियों के दावे ने सऊदी अरब की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर नई चिंताएँ पैदा की हैं। यदि ऊर्जा प्रतिष्ठानों और हवाई यातायात पर हमलों की पुष्टि होती है,तो इसका असर देश की आर्थिक और परिवहन व्यवस्था पर पड़ सकता है। फिलहाल,हमलों से हुए वास्तविक नुकसान और हताहतों की संख्या को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। दोनों पक्षों के बीच जारी आरोप-प्रत्यारोप और जवाबी कार्रवाइयों के बीच क्षेत्र में तनाव कम होने के संकेत भी नहीं दिखाई दे रहे हैं।
