नई दिल्ली,25 जून (युआईटीवी)- देश के रक्षा क्षेत्र को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए भारत डायनामिक्स लिमिटेड को हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड से 1,347.71 करोड़ रुपये का बड़ा सैन्य ऑर्डर प्राप्त हुआ है। यह ऑर्डर स्वदेशी रक्षा तकनीक को बढ़ावा देने और भारतीय सशस्त्र बलों की मारक क्षमता को मजबूत करने की दिशा में एक अहम उपलब्धि माना जा रहा है। सरकारी रक्षा कंपनी भारत डायनामिक्स ने बुधवार को शेयर बाजार को दी गई जानकारी में इस महत्वपूर्ण अनुबंध की घोषणा की।
कंपनी के अनुसार इस ऑर्डर में हेलीकॉप्टरों पर लगाए जाने वाले हेलिना मिसाइल लॉन्चर, लाइन रिप्लेसेबल यूनिट्स तथा काउंटर मेजर्स डिस्पेंसिंग सिस्टम से जुड़े उपकरणों की आपूर्ति शामिल है। कुल अनुबंध मूल्य में से 1,109.37 करोड़ रुपये हेलिना लॉन्चर और संबंधित लाइन रिप्लेसेबल यूनिट्स के लिए निर्धारित किए गए हैं,जबकि 238.34 करोड़ रुपये काउंटर मेजर्स डिस्पेंसिंग सिस्टम की लाइन रिप्लेसेबल यूनिट्स के लिए हैं। कंपनी ने बताया कि इस परियोजना को 24 से 60 महीनों की अवधि में पूरा किया जाएगा।
यह ऑर्डर ऐसे समय में मिला है,जब भारत स्वदेशी रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देने और आयात पर निर्भरता कम करने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है। केंद्र सरकार की आत्मनिर्भर भारत पहल के तहत रक्षा क्षेत्र में घरेलू उत्पादन को विशेष प्राथमिकता दी जा रही है। भारत डायनामिक्स और हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड जैसे सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम इस लक्ष्य को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
हेलिना मिसाइल प्रणाली भारतीय रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन द्वारा विकसित एक अत्याधुनिक स्वदेशी हथियार प्रणाली है। हेलिना का पूरा नाम हेलीकॉप्टर से लॉन्च होने वाली नाग मिसाइल है। यह तीसरी पीढ़ी की फायर-एंड-फॉरगेट एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल है,जिसे विशेष रूप से दुश्मन के भारी बख्तरबंद वाहनों और टैंकों को नष्ट करने के लिए विकसित किया गया है। फायर-एंड-फॉरगेट तकनीक का अर्थ है कि मिसाइल को लक्ष्य की ओर दागने के बाद उसे लगातार नियंत्रित करने की आवश्यकता नहीं होती। मिसाइल स्वयं अपने लक्ष्य को पहचानकर उसे नष्ट करने में सक्षम होती है।
हेलिना लॉन्चर इस मिसाइल प्रणाली का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। ये विशेष प्रकार के ट्विन-ट्यूब स्टब-विंग माउंट होते हैं,जिन्हें भारतीय सेना के उन्नत हेलीकॉप्टरों पर लगाया जाता है। इनमें मुख्य रूप से रुद्र और प्रचंड जैसे स्वदेशी लड़ाकू हेलीकॉप्टर शामिल हैं। इन लॉन्चरों की मदद से हेलीकॉप्टर दूर से ही दुश्मन के टैंकों और अन्य बख्तरबंद लक्ष्यों पर सटीक हमला कर सकते हैं। आधुनिक युद्ध परिस्थितियों में ऐसी प्रणालियाँ सेना की आक्रामक क्षमता को कई गुना बढ़ा देती हैं।
इस ऑर्डर का दूसरा महत्वपूर्ण हिस्सा काउंटर मेजर्स डिस्पेंसिंग सिस्टम से जुड़ा है। यह प्रणाली किसी भी सैन्य हेलीकॉप्टर या विमान की आत्मरक्षा क्षमता का बेहद महत्वपूर्ण घटक मानी जाती है। इसके अंतर्गत इस्तेमाल होने वाली लाइन रिप्लेसेबल यूनिट्स मॉड्यूलर और मानकीकृत हार्डवेयर इकाइयाँ होती हैं,जिन्हें आवश्यकता पड़ने पर आसानी से बदला जा सकता है। इनका मुख्य कार्य हेलीकॉप्टर की ओर आने वाली रडार-निर्देशित या इंफ्रारेड तकनीक से संचालित मिसाइलों को भ्रमित करना और उनके हमले को विफल करना होता है।
जब किसी विमान या हेलीकॉप्टर पर दुश्मन की मिसाइल हमला करती है,तब यह प्रणाली स्वचालित या मैन्युअल रूप से चैफ और फ्लेयर्स छोड़ती है। चैफ धातु के छोटे-छोटे टुकड़े होते हैं,जो रडार को भ्रमित करते हैं,जबकि फ्लेयर्स अत्यधिक ताप पैदा करके इंफ्रारेड मिसाइलों को वास्तविक लक्ष्य से भटका देते हैं। इस प्रकार यह प्रणाली पायलट और विमान दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
भारत डायनामिक्स लिमिटेड देश की प्रमुख रक्षा उत्पादन कंपनियों में शामिल है। कंपनी मुख्य रूप से विभिन्न प्रकार की मिसाइलों,टॉरपीडो और अन्य उन्नत हथियार प्रणालियों के निर्माण में विशेषज्ञता रखती है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन के साथ मिलकर कंपनी कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर काम करती है। पिछले कुछ वर्षों में कंपनी ने भारतीय सेना,नौसेना और वायुसेना के लिए अनेक स्वदेशी रक्षा प्रणालियों का उत्पादन किया है।
हालाँकि,इस बड़े ऑर्डर के बावजूद कंपनी के हालिया वित्तीय नतीजे कुछ चुनौतियों की ओर संकेत करते हैं। वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही में भारत डायनामिक्स के मुनाफे में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई थी। कंपनी का शुद्ध लाभ सालाना आधार पर 58.5 प्रतिशत घटकर 113 करोड़ रुपये रह गया,जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में यह आंकड़ा 273 करोड़ रुपये था।
राजस्व के मोर्चे पर भी कंपनी को दबाव का सामना करना पड़ा। चौथी तिमाही में कंपनी की कुल आय 73 प्रतिशत घटकर 480 करोड़ रुपये रह गई,जबकि एक वर्ष पहले इसी अवधि में यह 1,777 करोड़ रुपये थी। आय में आई इस बड़ी गिरावट का असर कंपनी की लाभप्रदता पर भी देखने को मिला।
कंपनी का एबिटा भी सालाना आधार पर 81.5 प्रतिशत घटकर 55.2 करोड़ रुपये रह गया। वित्त वर्ष 2025 की चौथी तिमाही में यह आँकड़ा 299 करोड़ रुपये था। इसके साथ ही कंपनी का एबिटा मार्जिन भी घटकर 11.5 प्रतिशत पर पहुँच गया,जो एक साल पहले समान अवधि में 16.5 प्रतिशत था। ये आँकड़े बताते हैं कि कंपनी को उत्पादन,आपूर्ति और परियोजना निष्पादन से जुड़ी कुछ चुनौतियों का सामना करना पड़ा है।
इसके बावजूद विशेषज्ञों का मानना है कि हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड से मिला यह नया ऑर्डर भारत डायनामिक्स के लिए सकारात्मक साबित हो सकता है। इससे न केवल कंपनी की ऑर्डर बुक मजबूत होगी,बल्कि आने वाले वर्षों में राजस्व और लाभ में भी सुधार की संभावना बढ़ेगी। साथ ही यह अनुबंध भारतीय रक्षा उद्योग की बढ़ती क्षमताओं और स्वदेशी तकनीक पर बढ़ते भरोसे का भी प्रतीक है।
रक्षा क्षेत्र में तेजी से बढ़ते निवेश और स्वदेशीकरण पर जोर के बीच यह सौदा भारत की रक्षा तैयारियों को और मजबूत करने वाला माना जा रहा है। आने वाले वर्षों में ऐसे और बड़े अनुबंध भारतीय रक्षा कंपनियों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
