किम जोंग-उन की बहन किम यो-जोंग (तस्वीर क्रेडिट@hyungjin1972)

बायनैंस से 6 अरब डॉलर की क्रिप्टो चोरी के आरोप पर भड़का उत्तर कोरिया,किम यो-जोंग ने अमेरिका को दी चेतावनी

सोल,3 नवंबर (युआईटीवी)- उत्तर कोरिया और अमेरिका के बीच पहले से जारी तनाव के बीच क्रिप्टोकरेंसी चोरी का एक नया मामला दोनों देशों के बीच कूटनीतिक टकराव की वजह बन गया है। दुनिया के सबसे बड़े क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज बायनैंस से 6 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक की क्रिप्टोकरेंसी चोरी के मामले में अमेरिकी जाँच एजेंसी एफबीआई ने उत्तर कोरिया को जिम्मेदार ठहराया है। हालाँकि,प्योंगयांग ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए इसे अपने खिलाफ राजनीतिक साजिश और उकसावे की कार्रवाई बताया है। उत्तर कोरिया की ओर से इस मामले पर नेता किम जोंग-उन की बहन किम यो-जोंग ने बयान जारी कर अमेरिका को कड़ी चेतावनी दी है।

किम यो-जोंग ने उत्तर कोरिया की आधिकारिक समाचार एजेंसी के माध्यम से जारी बयान में कहा कि अमेरिका उनके देश को एक साइबर अपराधी राष्ट्र के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने एफबीआई के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि वाशिंगटन अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को गुमराह कर रहा है। उनके मुताबिक, अमेरिका दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में होने वाली साइबर आपराधिक गतिविधियों के लिए उत्तर कोरिया को जिम्मेदार ठहराने की कोशिश करता रहा है। उन्होंने इसे प्योंगयांग की अंतर्राष्ट्रीय छवि, राष्ट्रीय प्रतिष्ठा और गरिमा को नुकसान पहुँचाने की दुर्भावनापूर्ण कोशिश करार दिया।

दरअसल,अमेरिकी संघीय जाँच ब्यूरो ने शनिवार को एक बयान जारी कर बायनैंस के माध्यम से 6 अरब डॉलर से अधिक की क्रिप्टोकरेंसी चोरी के पीछे उत्तर कोरियाई शासन का हाथ होने का दावा किया था। एफबीआई ने इस घटना को उत्तर कोरिया से जुड़े एक हैकिंग समूह से जोड़ा है,जिसे ट्रेडर ट्रेटर के नाम से जाना जाता है। इस समूह का नाम पहले भी क्रिप्टोकरेंसी से जुड़ी कई बड़ी चोरी की घटनाओं में सामने आ चुका है। अमेरिकी जाँच एजेंसी का मानना है कि इस तरह की साइबर गतिविधियों के जरिए उत्तर कोरिया को आर्थिक लाभ पहुँचाया जाता है।

हालाँकि,प्योंगयांग ने इन दावों को सिरे से नकार दिया है। किम यो-जोंग ने कहा कि उत्तर कोरिया को साइबर अपराधों से जोड़ने के लिए अमेरिका जिस तरह के आरोप लगा रहा है, वे राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित हैं। उन्होंने कहा कि किसी ठोस प्रमाण के बिना उत्तर कोरिया को ऐसी घटनाओं के लिए जिम्मेदार ठहराना अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उसके खिलाफ माहौल तैयार करने की कोशिश है। उनके अनुसार,अमेरिका इस तरह की कार्रवाई करके उत्तर कोरिया की छवि खराब करना चाहता है और उसे वैश्विक समुदाय के सामने एक गैरजिम्मेदार देश के रूप में पेश कर रहा है।

किम यो-जोंग ने अपने बयान में यह भी कहा कि अमेरिका का रवैया उत्तर कोरिया की संप्रभुता के प्रति सम्मान की कमी को दर्शाता है। उन्होंने साइबर स्पेस में देश की संप्रभुता का उल्लंघन करने का आरोप लगाते हुए कहा कि वाशिंगटन की ऐसी गतिविधियां दोनों देशों के बीच पहले से मौजूद अविश्वास को और गहरा कर सकती हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि उत्तर कोरिया अमेरिका की ओर से लगातार किए जा रहे उकसावे पर करीबी नजर रख रहा है और इस तरह के व्यवहार को नजरअंदाज नहीं करेगा।

इस पूरे विवाद में किम यो-जोंग ने अमेरिका पर पलटवार करते हुए क्रिप्टोकरेंसी को लेकर उसकी अपनी नीतियों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पिछले साल जब अमेरिका के मौजूदा प्रशासन ने सत्ता संभाली थी,तब उसने अवैध रूप से चुराई गई क्रिप्टोकरेंसी को जब्त करने और उसे देश के रणनीतिक भंडार के रूप में इस्तेमाल करने की बात कही थी। किम ने इसी घोषणा का हवाला देते हुए अमेरिकी सरकार की मंशा पर सवाल खड़े किए।

उन्होंने कहा कि यदि कोई यह जानने की कोशिश करे कि कथित तौर पर चोरी की गई क्रिप्टोकरेंसी बरामद होने के बाद आखिर किसके पास जाएगी,तो उसे इस साइबर घटना के पीछे जिम्मेदार पक्ष का सुराग मिल सकता है। हालाँकि,उन्होंने अपने आरोपों के समर्थन में कोई ठोस प्रमाण पेश नहीं किया। उनके इस बयान को अमेरिका पर सीधे राजनीतिक आरोप लगाने और क्रिप्टोकरेंसी चोरी के मामले में उसकी भूमिका पर सवाल उठाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

किम यो-जोंग ने कहा कि अमेरिका का यह गैरजिम्मेदाराना और शत्रुतापूर्ण रवैया उत्तर कोरिया को अपनी नीतियों और भविष्य की रणनीति पर दोबारा विचार करने के लिए मजबूर कर सकता है। उन्होंने चेतावनी दी कि वाशिंगटन को अपने व्यवहार के संभावित परिणामों को समझना चाहिए। उनके मुताबिक,उत्तर कोरिया के खिलाफ लगातार आरोप लगाने और उसकी प्रतिष्ठा को निशाना बनाने से दोनों देशों के संबंधों में सुधार की संभावनाएँ कमजोर हो सकती हैं।

उत्तर कोरिया पर पहले भी कई बार बड़े साइबर हमलों और डिजिटल संपत्तियों की चोरी में शामिल होने के आरोप लगते रहे हैं। अमेरिका और कुछ अन्य देशों की जाँच एजेंसियाँ लंबे समय से दावा करती रही हैं कि उत्तर कोरिया से जुड़े हैकर अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों, क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंजों और डिजिटल प्लेटफॉर्म को निशाना बनाते हैं। इन आरोपों के मुताबिक, चोरी की गई डिजिटल संपत्तियों का इस्तेमाल देश की आर्थिक जरूरतों को पूरा करने के लिए किया जा सकता है। हालाँकि,उत्तर कोरिया ने हमेशा ऐसे आरोपों से इनकार किया है और अपनी किसी भी तरह की संलिप्तता स्वीकार नहीं की है।

इस मामले में सबसे खास बात यह है कि किम यो-जोंग ने खुद बयान जारी कर अमेरिकी आरोपों का जवाब दिया है। उत्तर कोरिया में साइबर हैकिंग से जुड़े मामलों पर शीर्ष नेतृत्व के स्तर से सीधे प्रतिक्रिया देना असामान्य माना जाता है। आमतौर पर ऐसे मामलों में प्योंगयांग का विदेश मंत्रालय या सरकारी प्रवक्ता बयान जारी करते रहे हैं। ऐसे में किम यो-जोंग की टिप्पणी को इस विवाद के प्रति उत्तर कोरिया की गंभीरता के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

दक्षिण कोरिया के एकीकरण मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने भी इस प्रतिक्रिया को महत्वपूर्ण बताया है। अधिकारी के अनुसार, उत्तर कोरिया पर साइबर हैकिंग के आरोपों को लेकर किम यो-जोंग का यह पहला बयान है। उन्होंने कहा कि बायनैंस से जुड़ी घटना के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जिस तरह की प्रतिक्रिया सामने आ रही है,उससे प्योंगयांग इस मामले को गंभीरता से ले रहा है। संभव है कि इसी वजह से उसने अपने नेतृत्व के करीबी स्तर से जवाब देने का फैसला किया हो।

दक्षिण कोरियाई अधिकारी ने यह भी कहा कि उत्तर कोरिया अपनी अंतर्राष्ट्रीय छवि को लेकर संवेदनशील है। प्योंगयांग लंबे समय से खुद को एक सामान्य और जिम्मेदार राष्ट्र के रूप में पेश करने की कोशिश करता रहा है। ऐसे में साइबर अपराधों से जुड़े गंभीर आरोप उसकी इस कोशिश को प्रभावित कर सकते हैं। किम यो-जोंग का बयान इसी चिंता का हिस्सा हो सकता है। इसके जरिए उत्तर कोरिया यह संदेश देना चाहता है कि वह अमेरिका के आरोपों को स्वीकार नहीं करेगा और अपनी छवि को नुकसान पहुँचाने वाली किसी भी कोशिश का विरोध करेगा।

विश्लेषकों के नजरिए से इस बयान के दो महत्वपूर्ण पहलू हैं। पहला,उत्तर कोरिया ने अमेरिकी आरोपों को केवल जाँच से जुड़ा मामला मानने के बजाय राजनीतिक और कूटनीतिक विवाद का रूप दे दिया है। दूसरा, प्योंगयांग ने अमेरिका पर दबाव बनाने की कोशिश की है कि वह उत्तर कोरिया के प्रति अपनी कथित शत्रुतापूर्ण नीति में बदलाव करे। उत्तर कोरिया का मानना है कि अमेरिका उस पर लगातार आरोप लगाकर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उसे अलग-थलग करने की कोशिश कर रहा है। ऐसे में साइबर चोरी का यह मामला दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ाने का एक और कारण बन सकता है।

इस विवाद का असर अमेरिका और उत्तर कोरिया के बीच संभावित उच्चस्तरीय बातचीत पर भी पड़ सकता है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कई बार किम जोंग-उन के साथ शिखर वार्ता दोबारा शुरू करने की इच्छा जाहिर कर चुके हैं। हालाँकि,उनकी इन पहलों पर उत्तर कोरिया की ओर से अब तक कोई स्पष्ट सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिली है। दोनों देशों के बीच बातचीत फिर से शुरू होने की संभावनाएँ कई राजनीतिक और सुरक्षा संबंधी मुद्दों पर निर्भर करती हैं। ऐसे में बायनैंस से जुड़ा साइबर चोरी का विवाद भी दोनों पक्षों के बीच विश्वास बहाली की राह में एक नई बाधा बन सकता है।

दक्षिण कोरिया के एकीकरण मंत्रालय के अधिकारी ने कहा कि फिलहाल यह अनुमान लगाना मुश्किल है कि इस घटना का किम जोंग-उन और डोनाल्ड ट्रंप के बीच संभावित शिखर वार्ता पर कितना असर पड़ेगा। यह स्पष्ट नहीं है कि उत्तर कोरिया इस मुद्दे को बातचीत में शामिल करेगा या इसे अमेरिका के खिलाफ अपने व्यापक विरोध का हिस्सा बनाए रखेगा। हालाँकि,किम यो-जोंग की कड़ी प्रतिक्रिया से संकेत मिलता है कि प्योंगयांग इस मामले को सामान्य आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं रखना चाहता।

कुल मिलाकर,बायनैंस से 6 अरब डॉलर से अधिक की क्रिप्टोकरेंसी चोरी का मामला अब केवल साइबर सुरक्षा और डिजिटल संपत्तियों की सुरक्षा तक सीमित नहीं रह गया है। एफबीआई के आरोपों और उत्तर कोरिया के तीखे जवाब ने इसे अमेरिका-उत्तर कोरिया के बीच एक नए राजनीतिक विवाद में बदल दिया है। एक ओर अमेरिका अपनी जांच के आधार पर उत्तर कोरियाई हैकिंग समूह की संलिप्तता का दावा कर रहा है,वहीं दूसरी ओर प्योंगयांग इन आरोपों को अपनी राष्ट्रीय प्रतिष्ठा और संप्रभुता पर हमला बता रहा है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस विवाद पर अमेरिका की अगली प्रतिक्रिया क्या होती है और क्या इसका असर दोनों देशों के बीच संभावित कूटनीतिक बातचीत पर पड़ता है।