नई दिल्ली,3 नवंबर (युआईटीवी)- धनतेरस और दिवाली जैसे बड़े त्योहारों से पहले सोने और चाँदी की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। पिछले कारोबारी सत्र में मामूली रिकवरी के बाद मंगलवार को एक बार फिर दोनों कीमती धातुओं की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। घरेलू वायदा बाजार से लेकर अंतर्राष्ट्रीय बाजार तक सोने और चाँदी पर बिकवाली का दबाव बना रहा। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर सोने की कीमत में एक समय 1.07 प्रतिशत तक की गिरावट आई,जबकि चाँदी करीब 3.08 प्रतिशत तक टूट गई। इस गिरावट के कारण सोना 1.39 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के नीचे और चांदी 1.78 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के करीब पहुँच गई।
कीमती धातुओं की कीमतों में आई इस कमजोरी के पीछे अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति, ब्याज दरों के लंबे समय तक ऊँचे बने रहने की आशंका और रुपये की मजबूती को प्रमुख कारण माना जा रहा है। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय बाजार में निवेशकों की सतर्कता और भू-राजनीतिक घटनाक्रम भी सोने-चाँदी की चाल को प्रभावित कर रहे हैं। त्योहारों के दौरान आमतौर पर सोने और चांदी की खरीदारी बढ़ जाती है,लेकिन मौजूदा गिरावट ने खरीदारों और निवेशकों दोनों का ध्यान बाजार की ओर खींचा है।
मंगलवार को अंतर्राष्ट्रीय कमोडिटी बाजार में भी दोनों कीमती धातुओं की कीमतों में गिरावट देखने को मिली। कॉमेक्स पर सोने का भाव करीब 1.05 प्रतिशत टूटकर 3,928 डॉलर प्रति औंस पर पहुँच गया। वहीं चाँदी की कीमत में ज्यादा कमजोरी देखने को मिली और यह करीब 3.22 प्रतिशत गिरकर 59.25 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार करती दिखाई दी।
विश्लेषकों के मुताबिक,अमेरिकी मिडटर्म चुनावों से पहले निवेशक बाजार को लेकर सतर्क रुख अपना रहे हैं। राजनीतिक और आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच फिलहाल निवेशक जोखिम लेने से बच रहे हैं। यही वजह है कि सोमवार को कीमतों में आई मामूली रिकवरी के बावजूद मंगलवार को बाजार में मजबूत खरीदारी नहीं देखने को मिली।
अंतर्राष्ट्रीय बाजार में डॉलर, बॉन्ड यील्ड और अमेरिकी केंद्रीय बैंक की नीतियों का सोने की कीमतों पर सीधा प्रभाव पड़ता है। जब ब्याज दरें ऊँची रहती हैं,तब निवेशकों के लिए ब्याज देने वाली संपत्तियों में निवेश आकर्षक हो सकता है। इसके मुकाबले सोना कोई नियमित ब्याज नहीं देता। ऐसे में ऊँची ब्याज दरों की आशंका सोने की माँग और कीमतों पर दबाव डाल सकती है।
घरेलू वायदा बाजार में मंगलवार को दिसंबर डिलीवरी वाला सोना पिछले कारोबारी सत्र के मुकाबले गिरावट के साथ खुला। एमसीएक्स पर इसका पिछला बंद भाव 1,40,186 रुपये प्रति 10 ग्राम था। मंगलवार को कारोबार की शुरुआत में यह 766 रुपये यानी 0.54 प्रतिशत गिरकर 1,39,420 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुँच गया।
दिन के कारोबार में सोने की कीमतों में गिरावट और बढ़ गई। एक समय दिसंबर डिलीवरी वाला सोना 1,508 रुपये यानी 1.07 प्रतिशत टूटकर 1,38,678 रुपये प्रति 10 ग्राम के निचले स्तर पर पहुँच गया। इस तरह सोने ने एक बार फिर 1.40 लाख रुपये के महत्वपूर्ण स्तर को नीचे की ओर तोड़ दिया।
सोने की कीमतों में आई इस कमजोरी से उन खरीदारों को कुछ राहत मिल सकती है,जो त्योहारों के दौरान आभूषण खरीदने की योजना बना रहे हैं। हालाँकि,वायदा बाजार के भाव और स्थानीय सर्राफा बाजार में मिलने वाली कीमतों में अंतर हो सकता है। आभूषण खरीदते समय मेकिंग चार्ज,जीएसटी और अन्य लागू शुल्क भी कुल कीमत को प्रभावित करते हैं।
सोने के मुकाबले मंगलवार को चाँदी में ज्यादा तेज गिरावट देखने को मिली। एमसीएक्स पर दिसंबर डिलीवरी वाली चाँदी का पिछला बंद भाव 1,83,779 रुपये प्रति किलोग्राम था। मंगलवार को कारोबार शुरू होने पर यह 892 रुपये यानी 0.48 प्रतिशत गिरकर 1,82,887 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुँच गई।
हालाँकि,दिन बढ़ने के साथ चाँदी पर बिकवाली का दबाव और गहरा गया। कारोबार के दौरान इसकी कीमत एक समय 5,667 रुपये यानी 3.08 प्रतिशत गिरकर 1,78,112 रुपये प्रति किलोग्राम के निचले स्तर पर पहुँच गई। इस गिरावट ने चाँदी बाजार में निवेश करने वालों की चिंता बढ़ा दी है।
अंतर्राष्ट्रीय बाजार में भी चाँदी सोने की तुलना में अधिक कमजोर रही। कॉमेक्स पर चाँदी में 3.22 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। चाँदी की कीमतों में अधिक उतार-चढ़ाव का कारण औद्योगिक माँग और निवेश संबंधी गतिविधियाँ भी हैं। इसका इस्तेमाल आभूषणों के अलावा इलेक्ट्रॉनिक्स, सौर ऊर्जा और कई औद्योगिक क्षेत्रों में किया जाता है। इसलिए वैश्विक आर्थिक गतिविधियों में बदलाव का असर भी इसकी कीमतों पर पड़ता है।
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार,अमेरिकी फेडरल रिजर्व का सख्त रुख सोने और चाँदी की कीमतों पर दबाव बनाए हुए है। सामान्य तौर पर अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में गिरावट और डॉलर की कमजोरी सोने के लिए सकारात्मक मानी जाती है। लेकिन फिलहाल ब्याज दरों को लेकर बनी अनिश्चितता ने इन सकारात्मक संकेतों के प्रभाव को सीमित कर दिया है।
निवेशक इस बात का आकलन कर रहे हैं कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक आने वाले महीनों में ब्याज दरों को किस स्तर पर रख सकता है। बाजार में दिसंबर में ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना को पहले के मुकाबले कुछ कम माना जा रहा है,लेकिन इसे लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
इसके अलावा पश्चिम एशिया में जारी तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव भी महँगाई को लेकर चिंताएँ बढ़ा रहे हैं। यदि ऊर्जा की कीमतें लंबे समय तक ऊँची रहती हैं तो इसका असर वैश्विक महँगाई पर पड़ सकता है। ऐसी स्थिति में केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में कटौती को लेकर सतर्क रुख अपना सकते हैं। इसका असर सोने और चांदी की मांग पर पड़ सकता है।
तकनीकी विश्लेषण के अनुसार, एमसीएक्स पर सोने के लिए 1.40 लाख रुपये से 1.41 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम का स्तर महत्वपूर्ण प्रतिरोध क्षेत्र माना जा रहा है। इसका अर्थ है कि कीमतों में दोबारा तेजी आने की स्थिति में इन स्तरों पर बिकवाली का दबाव सामने आ सकता है।
वहीं,नीचे की तरफ 1.37 लाख रुपये से 1.38 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम का क्षेत्र सोने के लिए अहम सपोर्ट माना जा रहा है। यदि कीमतें इस दायरे में टिकती हैं,तो यहाँ से खरीदारी आने की संभावना पर नजर रखी जाएगी। हालाँकि,बाजार में कमजोरी जारी रहने पर आगे की दिशा बदल सकती है।
चांदी के लिए 1.78 लाख रुपये से 1.80 लाख रुपये प्रति किलोग्राम का स्तर महत्वपूर्ण सपोर्ट जोन है। दूसरी तरफ तेजी लौटने पर 1.86 लाख रुपये से 1.88 लाख रुपये प्रति किलोग्राम का क्षेत्र मजबूत प्रतिरोध माना जा रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक, इन स्तरों के आसपास होने वाली गतिविधियाँ आने वाले कारोबारी सत्रों में चाँदी की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
इस बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भी हाल के दिनों में गिरावट देखने को मिली है। ब्रेंट और डब्ल्यूटीआई क्रूड में बिकवाली के कारण ऊर्जा बाजार में दबाव बना हुआ है। ईरान से जुड़े घटनाक्रमों के बाद पश्चिम एशिया में तनाव कम होने की उम्मीदों ने भी कच्चे तेल की कीमतों को प्रभावित किया है।
हालाँकि,भू-राजनीतिक जोखिम पूरी तरह समाप्त नहीं हुए हैं। इसलिए निवेशक अभी भी किसी बड़े घटनाक्रम को लेकर सतर्क हैं। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से महँगाई संबंधी चिंताओं को कुछ राहत मिल सकती है, लेकिन इसका सोने और चाँदी पर कितना असर होगा,यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।
त्योहारों का मौसम सोने और चांदी के कारोबार के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। धनतेरस और दिवाली पर बड़ी संख्या में लोग सोने के सिक्के,आभूषण और चाँदी के उत्पाद खरीदते हैं। ऐसे में कीमतों में आई मौजूदा गिरावट से बाजार में खरीदारी को लेकर उत्सुकता बढ़ सकती है।
हालाँकि,विशेषज्ञों का मानना है कि केवल एक दिन की गिरावट को कीमतों में स्थायी बदलाव का संकेत नहीं मानना चाहिए। सोने और चाँदी की आगे की चाल अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतियों, महँगाई के आँकड़ों,डॉलर की स्थिति और वैश्विक घटनाक्रमों पर निर्भर करेगी।
फिलहाल दोनों कीमती धातुओं में उतार-चढ़ाव जारी रहने की संभावना है। ऐसे में त्योहारों के लिए खरीदारी करने वाले लोगों को स्थानीय बाजार में भाव की जानकारी लेने के साथ मेकिंग चार्ज और शुद्धता की भी जाँच करनी चाहिए। निवेशकों के लिए भी जल्दबाजी में फैसला लेने के बजाय बाजार के महत्वपूर्ण स्तरों और आर्थिक संकेतकों पर नजर रखना जरूरी होगा।
