गुवाहाटी,5 मई (युआईटीवी)- असम विधानसभा चुनावों के नतीजों ने राज्य की राजनीति की दिशा को एक बार फिर स्पष्ट कर दिया है। इस बार के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए स्पष्ट बहुमत हासिल किया है और लगातार तीसरी बार सरकार बनाने की स्थिति में पहुँच गई है। चुनाव परिणामों में जहाँ मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा समेत कई भाजपा नेताओं ने बड़ी जीत दर्ज की,वहीं कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के कई दिग्गज नेताओं को करारी हार का सामना करना पड़ा।
सबसे प्रमुख जीत मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की रही,जिन्होंने जालुकबारी सीट से 89 हजार से अधिक मतों के भारी अंतर से जीत हासिल की। यह जीत न केवल उनकी व्यक्तिगत लोकप्रियता को दर्शाती है,बल्कि राज्य में भाजपा के मजबूत जनाधार की भी पुष्टि करती है। इस जीत के साथ उन्होंने अपने राजनीतिक कद को और ऊँचा किया है और यह संकेत दिया है कि असम में उनका नेतृत्व अभी भी पूरी तरह प्रभावी है।
भाजपा के अन्य वरिष्ठ नेताओं ने भी अपने-अपने क्षेत्रों में शानदार प्रदर्शन किया। दिसपुर से प्रद्युत बोरदोलोई,गुवाहाटी सेंट्रल से विजय गुप्ता और न्यू गुवाहाटी से दीप्लू रंजन सरमा ने निर्णायक जीत दर्ज की। इन नेताओं की जीत से यह स्पष्ट होता है कि शहरी और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में भी भाजपा की पकड़ मजबूत बनी हुई है।
इसी तरह जगीरोड से पिजुश हजारिका,नलबाड़ी से जयंता मल्ला बरुआ और धेमाजी से रानोज पेगु ने भी प्रभावशाली जीत दर्ज की। इन परिणामों ने भाजपा के संगठनात्मक ढाँचे और जमीनी स्तर पर उसकी पकड़ को और मजबूत किया है।
पार्टी के प्रदर्शन को और मजबूती देते हुए जोनाई से भाबानंद पेगु,लखीमपुर से मनाब डेका और बिहपुरिया से भूपेन बोरा भी विजयी रहे। इन जीतों ने यह साबित कर दिया है कि भाजपा को राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में व्यापक समर्थन प्राप्त है और उसका जनाधार केवल कुछ इलाकों तक सीमित नहीं है।
एनडीए के सहयोगी दलों ने भी इस जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। असम गण परिषद के तपन दास ने डिमोरिया सीट से जीत दर्ज कर गठबंधन को मजबूती दी। इससे यह स्पष्ट होता है कि गठबंधन की रणनीति भी इस चुनाव में सफल रही और मतदाताओं ने इसे स्वीकार किया।
जहाँ एक ओर भाजपा के लिए यह चुनाव बेहद सफल रहा,वहीं दूसरी ओर विपक्ष के लिए यह बड़ा झटका साबित हुआ। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गौरव गोगोई को जोरहाट सीट से 23 हजार से अधिक मतों से हार का सामना करना पड़ा। इसी तरह नाजिरा सीट से देबब्रता सैकिया भी चुनाव हार गए। इन हारों ने कांग्रेस के लिए गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं,खासकर उसके संगठन और नेतृत्व को लेकर।
क्षेत्रीय दलों का प्रदर्शन भी उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा। असम जातीय परिषद के प्रमुख लुरिंज्योति गोगोई खोवांग सीट से जीत दर्ज करने में असफल रहे,जबकि बरहामपुर से राजेन गोहेन भी चुनाव हार गए। इन परिणामों ने क्षेत्रीय दलों की सीमित प्रभावशीलता को उजागर किया है।
अन्य प्रमुख हारने वालों में कांग्रेस की मीरा बोरठाकुर दिसपुर सीट से हार गईं,जबकि गुवाहाटी सेंट्रल में निर्दलीय उम्मीदवार जयन्त दास और एजेपी के कांकी चौधरी को भी हार का सामना करना पड़ा। बरखेत्री से दिगंता बर्मन और हाजो-सुआलकुची से नंदिता दास भी अपनी सीट बचाने में असफल रहीं।
यदि पूरे चुनाव परिणामों पर नजर डालें तो भाजपा ने 126 सदस्यीय विधानसभा में 82 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया है। कांग्रेस को केवल 19 सीटों पर संतोष करना पड़ा,जो उसके लिए बड़ी निराशा का कारण है। वहीं बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट और असम गण परिषद जैसी क्षेत्रीय पार्टियों ने 10-10 सीटें जीतीं। ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट और रायजोर दल ने दो-दो सीटें हासिल कीं,जबकि तृणमूल कांग्रेस ने एक सीट जीतकर अपनी मौजूदगी दर्ज कराई।
इन नतीजों से यह साफ हो गया है कि असम की जनता ने एक बार फिर भाजपा के नेतृत्व पर भरोसा जताया है। यह लगातार तीसरी बार है,जब भाजपा राज्य में सरकार बनाने जा रही है,जो उसके लिए एक बड़ी राजनीतिक उपलब्धि है। इससे न केवल राज्य में उसकी स्थिति मजबूत हुई है,बल्कि पूर्वोत्तर भारत में भी उसका प्रभाव और बढ़ा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस जीत के पीछे कई कारण हैं,जिनमें सरकार की नीतियाँ,संगठन की मजबूती और नेतृत्व की प्रभावशीलता प्रमुख हैं। वहीं विपक्ष की कमजोर रणनीति और आंतरिक मतभेद भी उसके खराब प्रदर्शन का कारण बने।
असम विधानसभा चुनाव 2026 ने राज्य की राजनीति में भाजपा के वर्चस्व को और मजबूत कर दिया है। जहाँ एक ओर सत्तारूढ़ दल के लिए यह जीत आत्मविश्वास बढ़ाने वाली है, वहीं विपक्ष के लिए यह आत्ममंथन का अवसर भी है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि विपक्ष इस हार से क्या सीख लेता है और किस तरह अपनी रणनीति में बदलाव करता है।
