अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू (तस्वीर क्रेडिट@mdzishan0786)

इजरायल-लेबनान तनाव कम करने की दिशा में बड़ी पहल,संघर्षविराम प्रस्ताव पर बढ़ी सहमति की उम्मीद

वाशिंगटन,3 जून (युआईटीवी)- मध्य पूर्व में लंबे समय से जारी अस्थिरता और सैन्य तनाव के बीच इजरायल और लेबनान के बीच संबंधों को सामान्य बनाने तथा सीमा पर बढ़ते संघर्ष को रोकने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक पहल शुरू हुई है। दोनों पक्षों के बीच तनाव कम करने के उद्देश्य से वॉशिंगटन में प्रत्यक्ष वार्ता का नया दौर शुरू हो गया है। इस घटनाक्रम को क्षेत्रीय शांति के लिए एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है,क्योंकि पिछले कई महीनों से इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच लगातार हमलों और जवाबी कार्रवाइयों के कारण पूरे क्षेत्र में असुरक्षा और तनाव का माहौल बना हुआ था।

इस नई पहल को उस समय और अधिक महत्व मिल गया,जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि उन्होंने इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच तनाव कम करने को लेकर महत्वपूर्ण सहमति हासिल की है। ट्रंप के इस बयान के बाद अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की नजरें वॉशिंगटन में चल रही वार्ताओं पर टिक गई हैं,जहाँ संघर्षविराम और क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर महत्वपूर्ण चर्चाएँ जारी हैं।

लेबनान के राष्ट्रपति कार्यालय द्वारा जारी एक आधिकारिक बयान में कहा गया कि हिजबुल्लाह ने अमेरिका द्वारा प्रस्तुत उस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है,जिसमें दोनों पक्षों के बीच पारस्परिक रूप से हमले रोकने की बात कही गई है। इस प्रस्ताव का उद्देश्य सीमा पार होने वाली सैन्य कार्रवाइयों को रोकना और एक ऐसे माहौल का निर्माण करना है,जिसमें राजनीतिक और कूटनीतिक समाधान की दिशा में आगे बढ़ा जा सके।

लेबनानी अधिकारियों के अनुसार,यह घटनाक्रम लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ आउन और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के बीच हुई महत्वपूर्ण टेलीफोन वार्ता के बाद सामने आया। बातचीत के दौरान दोनों नेताओं ने लेबनान की मौजूदा स्थिति,क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों और तनाव कम करने के संभावित उपायों पर विस्तार से चर्चा की। माना जा रहा है कि इसी बातचीत के बाद संघर्षविराम प्रस्ताव को लेकर सकारात्मक प्रगति हुई।

प्रस्तावित समझौते के अनुसार इजरायल और हिजबुल्लाह दोनों एक-दूसरे के खिलाफ सैन्य कार्रवाई रोकेंगे। योजना के तहत इजरायल बेरूत के दक्षिणी उपनगरों पर हवाई हमले बंद करेगा,जबकि हिजबुल्लाह इजरायली क्षेत्रों को निशाना बनाकर किए जाने वाले हमलों को रोक देगा। यदि प्रारंभिक स्तर पर यह व्यवस्था सफल रहती है,तो बाद में इसे पूरे लेबनान में विस्तारित किया जा सकता है। इससे न केवल सीमा क्षेत्र में शांति स्थापित करने में मदद मिलेगी,बल्कि आम नागरिकों को भी राहत मिल सकेगी,जो लंबे समय से संघर्ष के प्रभावों का सामना कर रहे हैं।

लेबनान स्थित राजनयिक सूत्रों के अनुसार,अमेरिकी प्रशासन इस समझौते को सफल बनाने के लिए सक्रिय भूमिका निभा रहा है। लेबनान में अमेरिका के राजनयिक प्रतिनिधियों ने बताया कि राष्ट्रपति ट्रंप ने अमेरिका में लेबनान की राजदूत नादा हमादेह मुआवाद को व्यक्तिगत रूप से इस पहल की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी इस प्रस्ताव पर सकारात्मक रुख दिखाया है और सिद्धांत रूप में सहमति जताई है।

राजदूत मुआवाद ने इसके बाद पूरे घटनाक्रम की जानकारी राष्ट्रपति जोसेफ आउन को दी। राष्ट्रपति कार्यालय के अनुसार,इसके बाद हिजबुल्लाह नेतृत्व को भी प्रस्ताव की शर्तों और संभावित समझौते के बारे में अवगत कराया गया। इस प्रक्रिया ने संघर्षविराम को लेकर दोनों पक्षों के बीच संवाद की संभावनाओं को मजबूत किया है।

वॉशिंगटन में मंगलवार और बुधवार को आयोजित वार्ता बैठकों को इस दिशा में बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इन बैठकों में अब तक हुई प्रगति की समीक्षा की जाएगी और संघर्षविराम व्यवस्था को लागू करने के व्यावहारिक पहलुओं पर चर्चा होगी। कूटनीतिक सूत्रों का मानना है कि यदि दोनों पक्ष प्रस्तावित शर्तों पर सहमत रहते हैं,तो आने वाले दिनों में औपचारिक समझौते की दिशा में ठोस कदम उठाए जा सकते हैं।

इससे पहले लेबनानी संसद के अध्यक्ष नबीह बेरी ने भी अमेरिकी प्रशासन को संकेत दिया था कि हिजबुल्लाह तत्काल और पूर्ण संघर्षविराम के लिए तैयार है। अमेरिकी मीडिया में प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार,बेरी ने यह भरोसा भी दिलाया था कि यदि कोई समझौता होता है,तो उसके पालन को सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएँगे। इस बयान को भी संघर्षविराम प्रयासों के लिए महत्वपूर्ण माना गया था।

विशेषज्ञों का मानना है कि पिछले कुछ वर्षों में इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच टकराव लगातार बढ़ा है। सीमा क्षेत्रों में रॉकेट हमले,हवाई हमले और सैन्य झड़पों ने दोनों देशों के बीच तनाव को नई ऊँचाइयों तक पहुँचा दिया था। इसके कारण हजारों लोगों को अपने घर छोड़ने पड़े और सीमावर्ती इलाकों में सामान्य जीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ। ऐसे में यदि वर्तमान वार्ता सफल होती है,तो यह न केवल दोनों पक्षों के लिए,बल्कि पूरे मध्य पूर्व क्षेत्र के लिए राहत की खबर होगी।

अंतर्राष्ट्रीय समुदाय भी इस पहल पर करीबी नजर बनाए हुए है। कई देशों और वैश्विक संगठनों ने लंबे समय से क्षेत्र में स्थायी शांति स्थापित करने की आवश्यकता पर जोर दिया है। उनका मानना है कि निरंतर संघर्ष और हिंसा से केवल मानवीय संकट बढ़ता है,जबकि संवाद और कूटनीति ही स्थायी समाधान का रास्ता प्रदान कर सकते हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार,यदि प्रस्तावित संघर्षविराम लागू हो जाता है,तो यह हाल के वर्षों में क्षेत्रीय स्थिरता की दिशा में सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में से एक माना जाएगा। इससे न केवल सैन्य तनाव कम होगा,बल्कि भविष्य में व्यापक राजनीतिक संवाद और विश्वास बहाली की प्रक्रिया भी शुरू हो सकती है।

फिलहाल सभी की निगाहें वॉशिंगटन में चल रही वार्ताओं पर टिकी हुई हैं। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि दोनों पक्ष संघर्षविराम प्रस्ताव को किस हद तक लागू कर पाते हैं। हालाँकि,अब तक सामने आए संकेत यह दर्शाते हैं कि लंबे समय से चले आ रहे तनाव को कम करने और शांति की दिशा में आगे बढ़ने की वास्तविक संभावना बनती दिखाई दे रही है। यदि यह प्रयास सफल होता है तो यह पूरे क्षेत्र के लिए एक नई शुरुआत साबित हो सकता है।