नई दिल्ली,17 अक्टूबर (युआईटीवी)- दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दिपके को गिरफ्तार कर लिया गया है। शुक्रवार को कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में आयोजित ‘लहरा दो तिरंगा’ रैली के दौरान उन्हें हिरासत में लिया गया था। अब उन्हें शनिवार को एसईएम अदालत के सामने पेश किया जाएगा। उनकी गिरफ्तारी की खबर सामने आने के बाद पार्टी से जुड़े लोगों और समर्थकों के बीच हलचल तेज हो गई है। सीजेपी की ओर से आरोप लगाया गया है कि गिरफ्तारी के बाद भी उनके वकीलों को दिपके से मिलने का अवसर नहीं मिला है और उनकी स्थिति तथा स्थान की जानकारी हासिल करने में भी परेशानी हो रही है।
सीजेपी की कानूनी मामलों की प्रमुख रत्ना सिंह ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट के जरिए दिपके की गिरफ्तारी की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि दिपके को गिरफ्तार कर लिया गया है और उन्हें एसईएम अदालत में पेश किया जाएगा। उनके मुताबिक, उस समय तक उनके ठिकाने का स्पष्ट पता नहीं चल पाया था और वकीलों की उनसे मुलाकात भी नहीं हो सकी थी। इस घटनाक्रम ने पहले से जारी विरोध प्रदर्शन और पुलिस की कार्रवाई को लेकर विवाद को और बढ़ा दिया है।
अभिजीत दिपके को शुक्रवार को कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में सीजेपी की प्रस्तावित ‘लहरा दो तिरंगा’ रैली के दौरान हिरासत में लिया गया। इस कार्यक्रम को लेकर दिल्ली पुलिस और पार्टी के बीच पहले से ही विवाद की स्थिति बनी हुई थी। पुलिस ने रैली से पहले दिपके को नोटिस जारी कर बताया था कि कनॉट प्लेस विरोध प्रदर्शन के लिए अधिकृत स्थान नहीं है। साथ ही,नई दिल्ली नगर परिषद की ओर से प्रस्तावित तिरंगा यात्रा के लिए अनुमति नहीं दी गई थी।
पुलिस की ओर से जारी नोटिस में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 का हवाला दिया गया था। इसके तहत इलाके में लागू निषेधाज्ञा के दौरान मार्च निकालने या भीड़ एकत्र करने पर कार्रवाई की चेतावनी दी गई थी। पुलिस का कहना था कि राष्ट्रीय ध्वज फहराने पर कोई सामान्य प्रतिबंध नहीं है, लेकिन निर्धारित नियमों और लागू पाबंदियों का उल्लंघन करके जुलूस निकालना या लोगों को इकट्ठा करना कानूनी कार्रवाई का आधार बन सकता है।
इस मामले में पुलिस और सीजेपी के बीच मुख्य विवाद रैली के आयोजन और उसके लिए आवश्यक अनुमति को लेकर सामने आया। पार्टी की ओर से तिरंगा यात्रा निकालने की तैयारी की गई थी,जबकि पुलिस ने इसे संबंधित क्षेत्र में लागू प्रतिबंधों और अनुमति की शर्तों के मद्देनजर रोकने की कोशिश की।
रैली से पहले जब पुलिसकर्मी दिपके के आवास पर पहुँचे,तब उन्होंने अपनी हिरासत के आधार पर सवाल उठाए। उन्होंने पुलिस से पूछा कि उन पर किस तरह का आरोप लगाया गया है और किस कानून के उल्लंघन के कारण उन्हें रोका जा रहा है।
दिपके ने यह भी सवाल किया कि यदि उन्हें नई दिल्ली जाने से रोका जा रहा है,तो क्या वह किसी अन्य स्थान पर नहीं जा सकते। उन्होंने पुलिस से उस कानूनी प्रावधान के बारे में स्पष्ट जानकारी माँगी,जिसके तहत उनके खिलाफ कार्रवाई की जा रही थी।
पुलिस ने अपनी ओर से स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय ध्वज फहराने पर रोक नहीं है। हालाँकि, बिना अनुमति जुलूस निकालना और निषेधाज्ञा का उल्लंघन करते हुए भीड़ एकत्र करना कानून के तहत कार्रवाई का कारण बन सकता है। अधिकारियों ने दिपके को राष्ट्रीय ध्वज के सम्मानजनक प्रदर्शन से संबंधित ध्वज संहिता के नियमों की भी याद दिलाई।
इस तरह, प्रस्तावित रैली से पहले ही मामला प्रशासनिक अनुमति,सार्वजनिक व्यवस्था और विरोध प्रदर्शन के अधिकार से जुड़े सवालों के बीच उलझ गया था। शुक्रवार को हुई हिरासत के बाद यह विवाद और गहरा गया।
अभिजीत दिपके की गिरफ्तारी ऐसे समय हुई है,जब सीजेपी के दो सह-संयोजकों सौरव दास और आशुतोष रांका को पहले ही गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा जा चुका है। दोनों को 13 अक्टूबर को जंतर-मंतर में कथित तौर पर प्रवेश करने और वहाँ राष्ट्रीय ध्वज फहराने के मामले में पाँच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया था।
इस घटनाक्रम से एक दिन पहले विरोध प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थान को अधिसूचना से बाहर कर दिया गया था। इसके बाद जंतर-मंतर पर प्रदर्शन और राष्ट्रीय ध्वज फहराने से जुड़ी कार्रवाई को लेकर विवाद सामने आया। सह-संयोजकों की गिरफ्तारी के बाद पार्टी से जुड़े विरोध प्रदर्शनों को लेकर तनाव बढ़ गया था।
दिपके की गिरफ्तारी को इसी घटनाक्रम की अगली कड़ी के रूप में देखा जा रहा है। हालाँकि,उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों और गिरफ्तारी के कानूनी आधार से संबंधित अंतिम स्थिति अदालत में पेश किए जाने के बाद ही अधिक स्पष्ट हो सकेगी।
अभिजीत दिपके को एक सप्ताह के भीतर दूसरी बार दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया है। इससे पहले वह विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची में कथित हेरफेर के मुद्दे पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के लिए मुंबई से दिल्ली पहुँचे थे। राजधानी पहुँचने के तुरंत बाद उन्हें हिरासत में ले लिया गया था।
मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों का मुद्दा और जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन से जुड़ा विवाद पहले से ही राजनीतिक तथा प्रशासनिक चर्चा का विषय बना हुआ है। अब तिरंगा रैली के दौरान दिपके की गिरफ्तारी ने इस मामले को एक नया मोड़ दे दिया है।
फिलहाल इस पूरे मामले में शनिवार को होने वाली अदालत की कार्यवाही महत्वपूर्ण मानी जा रही है। दिपके को एसईएम अदालत में पेश किया जाना है,जहाँ उनकी गिरफ्तारी और आगे की कानूनी प्रक्रिया से संबंधित पहलुओं पर स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।
एक ओर सीजेपी की ओर से गिरफ्तारी के बाद दिपके के ठिकाने और वकीलों की उनसे मुलाकात नहीं हो पाने को लेकर चिंता जताई गई है,वहीं पुलिस ने प्रस्तावित रैली के संबंध में अनुमति और निषेधाज्ञा का हवाला दिया है। ऐसे में अदालत में होने वाली सुनवाई से मामले के कानूनी पहलुओं पर आगे की जानकारी सामने आ सकती है।
कनॉट प्लेस की प्रस्तावित तिरंगा रैली से शुरू हुआ यह घटनाक्रम अब गिरफ्तारी, सार्वजनिक प्रदर्शन की अनुमति और राष्ट्रीय ध्वज फहराने से जुड़े नियमों के सवालों तक पहुँच गया है। आने वाले समय में अदालत की कार्यवाही और प्रशासन की ओर से सामने आने वाली जानकारी इस मामले की अगली दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगी।
