नई दिल्ली,17 अक्टूबर (युआईटीवी)- रूस ने यूक्रेन पर आरोप लगाया है कि उसने मॉस्को के दक्षिण-पूर्व में स्थित रियाज़ान क्षेत्र में एक तेल रिफाइनरी पर ड्रोन हमला किया है। यह घटना तब हुई है,जब यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की ने घोषणा की कि कीव रूस के ऊर्जा बुनियादी ढाँचे पर फिर से हमले शुरू करेगा। इस घटना ने मॉस्को और कीव के बीच तनाव बढ़ा दिया है और ऊर्जा सुविधाओं को निशाना बनाने वाले हमलों को रोकने के लिए संघर्ष विराम (सीज़फायर) की कोशिशों पर और सवाल खड़े कर दिए हैं।
रूस के रक्षा मंत्रालय ने गुरुवार को बताया कि यूक्रेन ने मॉस्को से लगभग 180 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व में स्थित रियाज़ान की रिफाइनरी पर बड़े पैमाने पर ड्रोन हमला करने की कोशिश की। रूसी अधिकारियों के अनुसार,मार गिराए गए ड्रोनों के मलबे रिफाइनरी परिसर में गिरे,जिससे वहाँ आग लग गई। क्षेत्रीय गवर्नर पावेल माल्कोव ने इस घटना की पुष्टि की और कहा कि आपातकालीन सेवाएं नुकसान का आकलन कर रही हैं। यह रिफाइनरी रूस की प्रमुख तेल कंपनी ‘रोसनेफ्ट’ की है और मॉस्को क्षेत्र में ईंधन की आपूर्ति करती है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार,रूस की कुल तेल रिफाइनिंग क्षमता में इस रिफाइनरी का हिस्सा लगभग पाँच प्रतिशत है।
यह हमला ठीक उस समय हुआ,जब ज़ेलेंस्की ने घोषणा की कि यूक्रेन अब रूसी ऊर्जा सुविधाओं पर हमले रोकने के अस्थायी विराम का पालन नहीं करेगा। ‘फाइनेंशियल टाइम्स’ को दिए एक साक्षात्कार में, यूक्रेनी राष्ट्रपति ने कहा कि अमेरिका के अनुरोध पर कीव ने तीन दिनों के लिए ऐसे हमले रोक दिए थे। हालाँकि,उन्होंने तर्क दिया कि इस दौरान रूस ने यूक्रेन के ऊर्जा बुनियादी ढाँचे को निशाना बनाना जारी रखा।
ज़ेलेंस्की की यह घोषणा, सप्ताहांत में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा ‘ऊर्जा युद्धविराम’ की घोषणा के बाद आई है। इस प्रस्ताव में रूस और यूक्रेन से ऊर्जा सुविधाओं पर हमले रोकने के लिए कहा गया था,हालाँकि दोनों पक्षों की ओर से इसकी शर्तों की औपचारिक पुष्टि नहीं की गई थी। कीव ने कहा कि उसने इस पहल को एक मौका देने के लिए कुछ समय तक रूसी रिफाइनरियों पर हमले नहीं किए।
वहीं,मॉस्को ने यूक्रेन के इस दावे पर सवाल उठाए हैं। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा कि रूसी तेल सुविधाओं पर यूक्रेनी हमले वाशिंगटन के राजनयिक प्रयासों के विपरीत हैं। उन्होंने कीव पर शांति वार्ता को आगे बढ़ाने की कोशिशों को कमजोर करने का आरोप लगाया। रूसी अधिकारियों का यह भी कहना है कि यूक्रेन ने प्रस्तावित युद्धविराम का पूरी तरह से पालन नहीं किया।
इस बीच,यूक्रेन ने रूस पर पावर स्टेशनों और अन्य ऊर्जा बुनियादी ढाँचे (इंफ्रास्ट्रक्चर) पर लगातार मिसाइल और ड्रोन हमले करने का आरोप लगाया है। यूक्रेनी अधिकारियों ने बताया है कि बिजली आपूर्ति बाधित होने से लाखों लोग प्रभावित हुए हैं। कीव का कहना है कि उनके ये नए हमले,राजनयिक प्रयासों को खारिज करने के बजाय,रूस के लगातार हमलों का जवाब हैं।
इस विवाद ने ज़ेलेंस्की और ट्रम्प के बीच बढ़ते तनाव को भी उजागर कर दिया है। वाशिंगटन ने यूक्रेन से रूसी तेल रिफाइनरियों को निशाना बनाना बंद करने को कहा है। उनका तर्क है कि ईंधन उत्पादन सुविधाओं पर हमलों से वैश्विक स्तर पर ऊर्जा की कीमतें बढ़ सकती हैं। इसके बाद ट्रंप ने हमलों को फिर से शुरू करने के कीव के फैसले की आलोचना की। उन्होंने इसे ‘शर्मनाक’ करार दिया और कहा कि डीजल रिफाइनरियों को नुकसान पहुंचने से अंतर्राष्ट्रीय ईंधन आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।
सैन्य सहायता,खुफिया जानकारी साझा करने और यूक्रेन की सैटेलाइट संचार तक पहुंच को लेकर असहमति के कारण दोनों पक्षों के बीच रिश्ते और खराब हो गए हैं। ज़ेलेंस्की ने चिंता जताई है कि इन सुविधाओं पर पाबंदियाँ लगने से रूसी हमलों के खिलाफ खुद का बचाव करने की यूक्रेन की क्षमता कमजोर हो सकती है। वहीं,अमेरिकी प्रशासन संघर्ष को खत्म करने के लिए बातचीत पर जोर दे रहा है।
रिफाइनरी पर हुआ ताजा हमला यह दिखाता है कि दोनों देशों के बीच एक सीमित युद्धविराम (सीजफायर) कराने की कोशिशों में कितनी मुश्किलें आ रही हैं। दोनों पक्ष एक-दूसरे पर युद्धविराम के उल्लंघन का आरोप लगा रहे हैं। वहीं,यूक्रेन ने संकेत दिया है कि वह रूसी ऊर्जा बुनियादी ढाँचे को निशाना बनाना जारी रखेगा। ऐसे में,किसी स्थायी समझौते की संभावना अनिश्चित बनी हुई है।
जैसे-जैसे लड़ाई जारी है,ऊर्जा बुनियादी ढाँचे और अंतर्राष्ट्रीय ईंधन बाजारों पर इस संघर्ष का असर एक बड़ी चिंता का विषय बना हुआ है। रिफाइनरियों,पावर स्टेशनों और अन्य महत्वपूर्ण सुविधाओं पर और हमले होने से युद्ध के मानवीय और आर्थिक परिणाम और गंभीर हो सकते हैं। साथ ही,इससे संघर्ष को खत्म करने के राजनयिक प्रयासों में भी मुश्किलें आ सकती हैं।
