कफ सिरप

कफ सिरप की बिना पर्ची बिक्री पर सख्ती,केंद्र सरकार ने बदले नियम;अब डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन के बिना नहीं मिलेगी दवा

नई दिल्ली,17 जून (युआईटीवी)- देश में दवाओं की बिक्री और वितरण व्यवस्था को अधिक सुरक्षित और नियंत्रित बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। सरकार ने ड्रग्स रूल्स,1945 में संशोधन करते हुए कफ सिरप सहित विभिन्न सिरप आधारित दवाओं की बिना डॉक्टर की पर्ची के ओवर-द-काउंटर बिक्री पर रोक लगा दी है। इस फैसले के बाद अब उपभोक्ताओं को ऐसी दवाएँ खरीदने के लिए पंजीकृत चिकित्सा विशेषज्ञ द्वारा जारी वैध प्रिस्क्रिप्शन प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा। सरकार का मानना है कि इस कदम से दवाओं के अनियंत्रित उपयोग पर रोक लगेगी और सार्वजनिक स्वास्थ्य सुरक्षा को मजबूती मिलेगी।

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार यह बदलाव ड्रग्स (पाँचवां संशोधन) नियम, 2026 के तहत लागू किया गया है। संशोधन के तहत ड्रग्स रूल्स, 1945 की अनुसूची-के में शामिल छूट प्राप्त दवाओं की श्रेणी से “सिरप” शब्द को हटा दिया गया है। इस बदलाव का सीधा असर उन दवाओं पर पड़ेगा,जो अब तक कुछ विशेष परिस्थितियों में बिना सख्त नियामकीय प्रक्रियाओं के बेची जा सकती थीं।

अनुसूची-के भारतीय दवा नियमन प्रणाली का एक महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती है। इसमें उन दवाओं और परिस्थितियों का उल्लेख होता है,जिन्हें निर्माण,बिक्री और वितरण से जुड़े कुछ कानूनी प्रावधानों से सीमित छूट प्रदान की गई थी। इन छूटों का उद्देश्य दूरदराज के क्षेत्रों और विशेष परिस्थितियों में लोगों को आवश्यक दवाएँ आसानी से उपलब्ध कराना था। हालाँकि,समय के साथ दवाओं के दुरुपयोग और स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों को देखते हुए सरकार ने इन नियमों की समीक्षा की और अब उनमें बदलाव किया है।

संशोधन से पहले एक व्यवस्था यह थी कि एक हजार से कम आबादी वाले गाँवों में कफ सिरप जैसी कुछ दवाओं को सीमित नियमों के तहत बेचा जा सकता था। ऐसे क्षेत्रों में खुदरा बिक्री लाइसेंस से जुड़ी कुछ शर्तों में छूट उपलब्ध थी ताकि ग्रामीण आबादी को आवश्यक दवाएँ आसानी से मिल सकें,लेकिन अब नई अधिसूचना लागू होने के बाद यह छूट समाप्त हो गई है। इसका मतलब यह है कि देश के किसी भी हिस्से में कफ सिरप और अन्य सिरप आधारित दवाओं की बिक्री केवल वैध लाइसेंस प्राप्त फार्मेसी के माध्यम से ही की जा सकेगी।

सरकार का कहना है कि यह बदलाव केवल प्रशासनिक नहीं,बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ा एक महत्वपूर्ण निर्णय है। पिछले कुछ वर्षों में विभिन्न प्रकार के कफ सिरप और अन्य सिरप आधारित दवाओं के दुरुपयोग के मामले सामने आए हैं। कई बार इन दवाओं का इस्तेमाल चिकित्सकीय आवश्यकता के बजाय अन्य उद्देश्यों के लिए किया जाता रहा है,जिससे स्वास्थ्य संबंधी गंभीर खतरे पैदा हो सकते हैं। इसी पृष्ठभूमि में सरकार ने इन दवाओं पर निगरानी और नियंत्रण बढ़ाने का फैसला किया है।

स्वास्थ्य मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि संशोधन का मुख्य उद्देश्य सिरप आधारित दवाओं के निर्माण,वितरण और बिक्री पर बेहतर नियामकीय नियंत्रण स्थापित करना है। मंत्रालय का मानना है कि इससे दवाओं की उपलब्धता पूरी तरह समाप्त नहीं होगी,बल्कि यह सुनिश्चित होगा कि उनका उपयोग केवल चिकित्सकीय सलाह और आवश्यकता के अनुसार ही किया जाए। इसके साथ ही देशभर में दवा बिक्री से जुड़े नियमों का एक समान पालन सुनिश्चित किया जा सकेगा।

नई व्यवस्था के तहत फार्मेसियों और दवा विक्रेताओं को भी अतिरिक्त सावधानी बरतनी होगी। उन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि कफ सिरप जैसी दवाएँ केवल वैध डॉक्टर की पर्ची दिखाने वाले ग्राहकों को ही बेची जाएँ। नियमों का उल्लंघन करने पर संबंधित प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जा सकती है। सरकार ने दवा निर्माताओं,वितरकों और खुदरा विक्रेताओं को भी निर्देश दिया है कि वे ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट,1940 तथा ड्रग्स रूल्स, 1945 के सभी नियामकीय प्रावधानों का कड़ाई से पालन करें।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम दवा बाजार में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने में सहायक हो सकता है। चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े जानकारों के अनुसार,कई बार लोग मामूली खांसी या सर्दी के लिए बिना चिकित्सकीय सलाह के बार-बार कफ सिरप का सेवन करते हैं,जिससे दुष्प्रभावों का खतरा बढ़ जाता है। डॉक्टर की सलाह के बिना दवा लेने की प्रवृत्ति को नियंत्रित करना सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए आवश्यक माना जाता है।

हालाँकि,कुछ ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को इस बदलाव के कारण शुरुआती असुविधा का सामना करना पड़ सकता है,क्योंकि अब उन्हें दवा खरीदने से पहले चिकित्सकीय परामर्श लेना होगा,लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय में यह व्यवस्था मरीजों के हित में साबित होगी। इससे यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि मरीजों को उनकी वास्तविक स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार उचित उपचार मिले और दवाओं का अनावश्यक या गलत उपयोग न हो।

सरकार ने यह भी संकेत दिया है कि दवाओं की बिक्री और वितरण से जुड़े नियमों को समय-समय पर सार्वजनिक स्वास्थ्य की जरूरतों के अनुसार अपडेट किया जाता रहेगा। बदलते चिकित्सा परिदृश्य और दवाओं के उपयोग से जुड़े नए जोखिमों को देखते हुए नियामकीय व्यवस्था को मजबूत बनाना आवश्यक है। इसी सोच के तहत यह संशोधन किया गया है।

नई अधिसूचना लागू होने के बाद देशभर में दवा दुकानों,फार्मेसियों और वितरकों को अपनी प्रक्रियाओं में आवश्यक बदलाव करने होंगे। उपभोक्ताओं को भी यह समझना होगा कि कफ सिरप जैसी दवाएँ अब सामान्य उपभोक्ता उत्पाद की तरह उपलब्ध नहीं होंगी,बल्कि उन्हें प्राप्त करने के लिए वैध चिकित्सकीय पर्ची आवश्यक होगी। सरकार का विश्वास है कि इस कदम से दवाओं के जिम्मेदाराना उपयोग को बढ़ावा मिलेगा,नियामकीय मानकों का बेहतर पालन सुनिश्चित होगा और सार्वजनिक स्वास्थ्य सुरक्षा को नई मजबूती मिलेगी।