प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (तस्वीर क्रेडिट@MadhurYadav214)

फ्रांस में मोदी-ट्रंप मुलाकात पर दुनिया की नजर,व्यापार,तकनीक और वैश्विक सुरक्षा पर हो सकती है बड़ी चर्चा

वाशिंगटन,17 जून (युआईटीवी)- भारत और अमेरिका के संबंधों को नई दिशा देने वाली एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक मुलाकात फ्रांस में होने जा रही है,जहाँ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप आमने-सामने बैठकर कई अहम वैश्विक और द्विपक्षीय मुद्दों पर चर्चा करेंगे। दोनों नेताओं की यह मुलाकात ऐसे समय में हो रही है,जब दुनिया कई बड़े भू-राजनीतिक और आर्थिक बदलावों के दौर से गुजर रही है। पश्चिम एशिया में जारी संकट,वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं की चुनौतियाँ,कृत्रिम बुद्धिमत्ता का बढ़ता प्रभाव,ऊर्जा सुरक्षा और व्यापारिक सहयोग जैसे विषय इस बैठक के प्रमुख एजेंडे में शामिल बताए जा रहे हैं।

व्हाइट हाउस के अधिकारियों ने इस प्रस्तावित बैठक को भारत-अमेरिका संबंधों के लिए बेहद महत्वपूर्ण बताया है। व्हाइट हाउस के प्रवक्ता कुश देसाई ने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच वर्षों से मजबूत व्यक्तिगत संबंध रहे हैं और दोनों नेता अपने-अपने देशों के हितों को आगे बढ़ाने के साथ-साथ वैश्विक स्तर पर साझेदारी को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच रणनीतिक संबंध लगातार मजबूत हुए हैं और आने वाले समय में इन्हें नई ऊँचाइयों तक ले जाने की तैयारी की जा रही है।

फरवरी में हुई शिखर वार्ता के बाद यह दोनों नेताओं की पहली प्रत्यक्ष मुलाकात होगी। ऐसे में इस बैठक को केवल एक औपचारिक कूटनीतिक कार्यक्रम नहीं,बल्कि भविष्य की रणनीतिक दिशा तय करने वाले महत्वपूर्ण अवसर के रूप में देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि इस वार्ता में व्यापार समझौते से जुड़े लंबित मुद्दों पर भी गंभीर चर्चा होगी। दोनों देश लंबे समय से एक व्यापक व्यापार समझौते की संभावनाओं पर विचार कर रहे हैं,जिससे निवेश,बाजार पहुँच और आर्थिक सहयोग को और गति मिल सकती है।

व्हाइट हाउस की ओर से जारी जानकारी के अनुसार,जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान होने वाली इस बैठक में आर्थिक विकास,वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती,कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में सहयोग,निवेश साझेदारी और विभिन्न सुरक्षा चुनौतियों पर विचार-विमर्श किया जाएगा। अमेरिका और भारत दोनों ही वर्तमान समय में तकनीकी नवाचार के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। कृत्रिम बुद्धिमत्ता,सेमीकंडक्टर निर्माण,उन्नत विनिर्माण और डिजिटल अर्थव्यवस्था जैसे क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाएँ लगातार बढ़ रही हैं। ऐसे में यह बैठक इन क्षेत्रों में नए समझौतों और सहयोग की रूपरेखा तैयार कर सकती है।

कुश देसाई ने यह भी कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप ने हमेशा भारत के साथ अमेरिका की रणनीतिक साझेदारी का समर्थन किया है। उन्होंने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की हालिया भारत यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि इस यात्रा ने दोनों देशों के बीच व्यापार और राष्ट्रीय सुरक्षा सहयोग को और मजबूत किया है। उनके अनुसार,हाल के महीनों में कई ऐसे कदम उठाए गए हैं,जिनका उद्देश्य दोनों लोकतांत्रिक देशों के बीच विश्वास और सहयोग को नई मजबूती प्रदान करना है।

अधिकारियों का कहना है कि हाल ही में महत्वपूर्ण खनिजों से संबंधित एक ऐतिहासिक समझौते पर भी हस्ताक्षर किए गए हैं। यह समझौता इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि वैश्विक स्तर पर दुर्लभ खनिजों की माँग लगातार बढ़ रही है और आधुनिक तकनीक,रक्षा उत्पादन तथा हरित ऊर्जा परियोजनाओं में इनकी महत्वपूर्ण भूमिका है। भारत और अमेरिका दोनों इस क्षेत्र में आपसी सहयोग को बढ़ाकर अपनी आपूर्ति श्रृंखलाओं को अधिक सुरक्षित और विश्वसनीय बनाना चाहते हैं।

इस प्रस्तावित मुलाकात को लेकर अंतर्राष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञ भी काफी उत्साहित हैं। हडसन इंस्टीट्यूट की वरिष्ठ शोधकर्ता अपर्णा पांडे का मानना है कि यह बैठक ऐसे समय में हो रही है,जब दुनिया कई संकटों से जूझ रही है और ऐसे में भारत तथा अमेरिका जैसे बड़े लोकतांत्रिक देशों के बीच समन्वय बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है। उन्होंने कहा कि फरवरी में हुई पिछली शिखर बैठक के बाद यह पहली प्रत्यक्ष वार्ता होगी,इसलिए दोनों देशों की ओर से इससे काफी उम्मीदें जुड़ी हुई हैं।

अपर्णा पांडे के अनुसार,इस बैठक का महत्व केवल नीतिगत निर्णयों तक सीमित नहीं रहेगा,बल्कि इसका एक बड़ा प्रतीकात्मक पक्ष भी होगा। दुनिया के सामने यह संदेश जाएगा कि वैश्विक चुनौतियों और बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों के बावजूद भारत और अमेरिका के रिश्ते मजबूत बने हुए हैं। उन्होंने कहा कि दोनों नेता रक्षा और तकनीकी क्षेत्रों में कुछ महत्वपूर्ण घोषणाएँ करने की दिशा में भी आगे बढ़ सकते हैं,जिससे साझेदारी को और अधिक संस्थागत रूप मिल सके।

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और अमेरिका के बीच रक्षा सहयोग पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ा है। संयुक्त सैन्य अभ्यास,रक्षा उपकरणों की खरीद,खुफिया जानकारी साझा करने और समुद्री सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच लगातार समन्वय बढ़ा है। ऐसे में यह संभव है कि बैठक के दौरान रक्षा क्षेत्र में कुछ नई पहलों पर चर्चा हो और भविष्य के सहयोग की दिशा तय की जाए।

उधर,उत्तरी अमेरिका में अलब्राइट स्टोनब्रिज समूह के साझेदार आत्मन त्रिवेदी ने इस बैठक को द्विपक्षीय संबंधों को नई गति देने का अवसर बताया है। उनके अनुसार,दोनों नेताओं के पास यह मौका है कि वे हाल के घटनाक्रमों के बाद संबंधों को और अधिक मजबूत बनाने का संदेश दें। उन्होंने कहा कि यह मुलाकात ऐसे समय में हो रही है,जब कुछ घटनाओं ने दोनों देशों के बीच सहयोग को लेकर नई चुनौतियाँ खड़ी की थीं। इसलिए यह वार्ता विश्वास बहाली और साझा हितों को आगे बढ़ाने के लिहाज से महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।

हालाँकि,आत्मन त्रिवेदी ने यह भी कहा कि इस बैठक से बहुत बड़े और नाटकीय परिणामों की अपेक्षा नहीं की जानी चाहिए। उनके अनुसार,सबसे महत्वपूर्ण बात यह होगी कि दोनों नेता ऊर्जा,रक्षा और तकनीकी सहयोग जैसे उन क्षेत्रों में अपनी प्रतिबद्धता दोहराएँ,जहाँ लंबे समय से दोनों देशों के साझा हित जुड़े हुए हैं। यदि इन क्षेत्रों में आगे बढ़ने के स्पष्ट संकेत मिलते हैं,तो इसे भी एक बड़ी सफलता माना जाएगा।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में भारत और अमेरिका दोनों को एक-दूसरे की आवश्यकता पहले से अधिक महसूस हो रही है। एक ओर अमेरिका इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अपने रणनीतिक साझेदारों को मजबूत करना चाहता है, वहीं भारत भी आर्थिक विकास, तकनीकी प्रगति और राष्ट्रीय सुरक्षा के लक्ष्यों को हासिल करने के लिए विश्व की प्रमुख शक्तियों के साथ सहयोग बढ़ाने पर जोर दे रहा है। यही कारण है कि दोनों देशों के बीच संबंध लगातार गहरे होते जा रहे हैं।

इस बीच, जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ‘नई साझेदारियाँ बनाने और अंतर्राष्ट्रीय एकजुटता को फिर से मजबूत करने’ विषय पर आयोजित सत्र में एक-दूसरे का अभिवादन भी किया। यह संकेत माना जा रहा है कि दोनों नेता आगामी वार्ता को लेकर सकारात्मक दृष्टिकोण रखते हैं। फ्रांस पहुँचने के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने भी कहा कि वह विश्व नेताओं के साथ वैश्विक मुद्दों पर सार्थक चर्चा करने के लिए उत्सुक हैं।

फ्रांस में होने वाली यह मुलाकात केवल भारत और अमेरिका तक सीमित नहीं रहेगी,बल्कि इसके परिणामों पर दुनिया भर की निगाहें टिकी रहेंगी। यदि दोनों देश व्यापार,तकनीक,निवेश और सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग को और आगे बढ़ाने में सफल होते हैं,तो इसका प्रभाव वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था पर भी दिखाई दे सकता है। यही वजह है कि इस बैठक को वर्ष की सबसे महत्वपूर्ण कूटनीतिक घटनाओं में से एक माना जा रहा है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि दोनों नेता अपने साझा दृष्टिकोण को किस प्रकार ठोस नीतियों और समझौतों में बदलते हैं,लेकिन इतना तय है कि यह मुलाकात भारत-अमेरिका संबंधों के भविष्य को नई दिशा देने की क्षमता रखती है।