वॉशिंगटन,28 मई (युआईटीवी)- अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव एक बार फिर गहरा गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ संकेत दिए हैं कि उनकी सरकार ईरान के साथ किसी भी समझौते को लेकर जल्दबाजी नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि अगर बातचीत अमेरिका की शर्तों और उम्मीदों के मुताबिक आगे नहीं बढ़ी,तो वॉशिंगटन दोबारा सैन्य कार्रवाई करने के लिए तैयार है। व्हाइट हाउस में आयोजित कैबिनेट बैठक के दौरान ट्रंप ने ईरान को लेकर बेहद सख्त बयान दिया और कहा कि अमेरिका किसी भी दबाव में झुकने वाला नहीं है।
डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान को उम्मीद थी कि अमेरिका में होने वाले मिडटर्म चुनावों का राजनीतिक दबाव उनकी बातचीत की स्थिति को कमजोर कर देगा,लेकिन ऐसा नहीं होने वाला। उन्होंने कहा कि उन्हें मिडटर्म चुनावों की कोई चिंता नहीं है और राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर वह किसी तरह का समझौता नहीं करेंगे। ट्रंप ने कहा कि ईरान यह सोच रहा था कि समय खींचकर वह अमेरिका पर दबाव बना लेगा, लेकिन उनकी सरकार अपने फैसले खुद लेती है और किसी राजनीतिक मजबूरी में नहीं आती।
कैबिनेट बैठक के दौरान ट्रंप ने कहा कि फिलहाल अमेरिका बातचीत में रखी गई शर्तों से पूरी तरह संतुष्ट नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि ईरान अमेरिकी मांगों को स्वीकार नहीं करता,तो अमेरिका के पास सैन्य विकल्प हमेशा मौजूद रहेगा। ट्रंप ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि बातचीत किसी सकारात्मक नतीजे तक पहुँचेगी,लेकिन अगर ऐसा नहीं हुआ,तो अमेरिका “काम पूरा” करने के लिए तैयार है। उनके इस बयान को ईरान के लिए सीधी चेतावनी माना जा रहा है।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि ईरान को अपने उच्च स्तर पर समृद्ध यूरेनियम के भंडार को छोड़ने के बदले किसी प्रकार की प्रतिबंध राहत नहीं दी जाएगी। उन्होंने कहा कि अमेरिका इस मुद्दे पर बेहद सख्त रुख अपनाए हुए है और ईरान को यह उम्मीद नहीं करनी चाहिए कि केवल बातचीत के आधार पर उस पर लगे आर्थिक प्रतिबंधों को हटा दिया जाएगा। पीबीएस न्यूज के साथ एक फोन इंटरव्यू में ट्रंप से पूछा गया कि क्या मौजूदा बातचीत के तहत ईरान को प्रतिबंधों में राहत मिल सकती है,तो उन्होंने साफ जवाब देते हुए कहा, “बिल्कुल नहीं, कोई प्रतिबंध राहत नहीं।”
ट्रंप के इस बयान ने साफ कर दिया है कि अमेरिका ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर कोई नरमी दिखाने के मूड में नहीं है। पिछले कई वर्षों से अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु गतिविधियों को लेकर विवाद बना हुआ है। अमेरिका का आरोप है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम का इस्तेमाल सैन्य उद्देश्यों के लिए कर सकता है,जबकि ईरान लगातार यह दावा करता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण और ऊर्जा जरूरतों के लिए है।
इसी बीच व्हाइट हाउस ने ईरानी मीडिया में आई एक रिपोर्ट को पूरी तरह खारिज कर दिया है। रिपोर्ट में दावा किया गया था कि अमेरिका और ईरान के बीच एक कथित ड्राफ्ट समझौते पर चर्चा चल रही है। ईरानी सरकारी चैनल आईआरआईबी टीवी के मुताबिक,इस प्रस्तावित समझौते में अमेरिका ईरान के आसपास के इलाकों से अपनी सैन्य मौजूदगी कम करेगा और ईरानी बंदरगाहों पर लगी अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी को समाप्त करेगा। रिपोर्ट में यह भी कहा गया था कि अमेरिका क्षेत्र में अपने कुछ प्रतिबंधात्मक कदमों को वापस ले सकता है।
हालाँकि,व्हाइट हाउस ने इन दावों को “पूरी तरह मनगढ़ंत” बताया। अमेरिकी प्रशासन ने कहा कि ऐसी कोई योजना या समझौता मौजूद नहीं है और मीडिया में फैल रही खबरें तथ्यहीन हैं। अधिकारियों का कहना है कि अमेरिका की नीति में कोई बदलाव नहीं हुआ है और ईरान को लेकर दबाव की रणनीति जारी रहेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि डोनाल्ड ट्रंप का यह सख्त रुख केवल ईरान के लिए नहीं,बल्कि वैश्विक स्तर पर अमेरिका की शक्ति और राजनीतिक संदेश को भी दर्शाता है। अमेरिका यह दिखाना चाहता है कि वह अपने रणनीतिक हितों और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर किसी तरह का समझौता नहीं करेगा। ट्रंप प्रशासन लगातार यह संकेत दे रहा है कि यदि बातचीत से वांछित परिणाम नहीं निकले,तो सैन्य विकल्प को भी नजरअंदाज नहीं किया जाएगा।
मध्य पूर्व में पहले से ही तनावपूर्ण हालात के बीच ट्रंप के इस बयान ने क्षेत्रीय चिंता बढ़ा दी है। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते टकराव का असर वैश्विक तेल बाजार,समुद्री व्यापार और क्षेत्रीय सुरक्षा पर पड़ सकता है। खासकर फारस की खाड़ी और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में किसी भी प्रकार का सैन्य तनाव पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकता है।
विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि अमेरिका का सख्त रुख ईरान पर अधिक दबाव बनाने की रणनीति का हिस्सा हो सकता है। ट्रंप प्रशासन चाहता है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय गतिविधियों को लेकर अमेरिका की शर्तों को माने। वहीं ईरान भी अपने हितों और संप्रभुता को लेकर पीछे हटने के संकेत नहीं दे रहा है। ऐसे में दोनों देशों के बीच बातचीत का भविष्य अभी अनिश्चित बना हुआ है।
डोनाल्ड ट्रंप के ताजा बयान ने यह स्पष्ट कर दिया है कि आने वाले समय में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव और बढ़ सकता है। हालाँकि,दोनों देशों के बीच बातचीत जारी है,लेकिन जिस तरह के बयान सामने आ रहे हैं,उससे यह साफ है कि फिलहाल किसी बड़े समझौते की संभावना आसान नहीं दिख रही। दुनिया की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या बातचीत किसी समाधान तक पहुँचेगी या फिर हालात एक बार फिर सैन्य टकराव की ओर बढ़ेंगे।
