अमिताभ बच्चन

जेन-जी की भाषा समझने में अमिताभ बच्चन भी हुए कन्फ्यूज,बोले- ‘यू आर किलिंग इट’ सुनकर लगा मौत की बात क्यों कर रहे हैं?

मुंबई,31 अगस्त (युआईटीवी)- बदलते समय के साथ हर पीढ़ी की सोच,बातचीत करने का अंदाज, पहनावा और भाषा भी बदलती रहती है। एक पीढ़ी के लिए जो शब्द सामान्य होते हैं,वही दूसरी पीढ़ी के लोगों को अजीब या समझ से परे लग सकते हैं। मौजूदा दौर में जेनरेशन गैप की यह झलक खासतौर पर जेन-जी यानी नई युवा पीढ़ी की बातचीत की शैली में देखने को मिलती है। सोशल मीडिया और इंटरनेट के बढ़ते प्रभाव के साथ युवाओं ने बातचीत के लिए कई नए शब्द और स्लैंग अपनाए हैं। अब इन बदलते शब्दों को समझने की कोशिश मेगास्टार अमिताभ बच्चन भी करते नजर आ रहे हैं।

क्विज रियलिटी शो ‘कौन बनेगा करोड़पति’ के हालिया एपिसोड में अमिताभ बच्चन ने जेन-जी की भाषा को लेकर अपनी उलझन और मजाकिया अंदाज में अपनी प्रतिक्रिया साझा की। उन्होंने बताया कि समय के साथ भाषा और शब्दों के इस्तेमाल का तरीका बदलता रहता है। खासतौर पर आज के युवाओं द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले कुछ अंग्रेजी शब्दों का शाब्दिक अर्थ निकालने पर उनका मतलब बिल्कुल अलग नजर आता है। अमिताभ बच्चन ने ‘रॉकिंग’ और ‘किलिंग इट’ जैसे लोकप्रिय शब्दों का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्हें इनका वास्तविक संदर्भ समझने में परेशानी होती है।

अमिताभ बच्चन ने मजाकिया अंदाज में कहा कि आजकल की जेन-जी या जेन-ए पीढ़ी बातचीत में ऐसे शब्दों का इस्तेमाल करती है,जिनका मतलब उनकी पीढ़ी के लोग अलग तरीके से समझ सकते हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जब कोई उन्हें देखकर कहता है, ‘यू आर रॉकिंग’, तो वह सोचने लगते हैं कि आखिर उन्होंने कौन-सा पत्थर उठाया है। इसी तरह जब कोई उनकी तस्वीर देखकर कहता है, ‘सर, यू आर किलिंग इट’, तो उन्हें लगता है कि सामने वाला उनसे मौत की बात क्यों कर रहा है।

अमिताभ बच्चन ने कहा कि भाषा में बदलाव स्वाभाविक प्रक्रिया है। हर पीढ़ी अपने समय और सामाजिक माहौल के हिसाब से नए शब्दों को अपनाती है। इंटरनेट,सोशल मीडिया और मनोरंजन की दुनिया ने इस बदलाव की गति को और तेज कर दिया है। ऐसे में कई ऐसे शब्द युवाओं की रोजमर्रा की बातचीत का हिस्सा बन गए हैं,जिनका पारंपरिक अंग्रेजी अर्थ कुछ और होता है,जबकि बोलचाल में उनका इस्तेमाल प्रशंसा, उत्साह या किसी उपलब्धि के लिए किया जाता है।

‘यू आर रॉकिंग’ आम तौर पर किसी व्यक्ति की शानदार प्रस्तुति या बेहतरीन प्रदर्शन की तारीफ के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इसी तरह ‘किलिंग इट’ का इस्तेमाल किसी काम को बेहद शानदार तरीके से करने के संदर्भ में किया जाता है,लेकिन अमिताभ बच्चन ने इन शब्दों के शाब्दिक अर्थ को पकड़कर जिस अंदाज में प्रतिक्रिया दी,उससे शो का माहौल हल्का-फुल्का और मनोरंजक हो गया। उनकी बातों ने यह भी दिखाया कि अलग-अलग पीढ़ियों के बीच भाषा का अंतर किस तरह मजेदार परिस्थितियां पैदा कर सकता है।

अमिताभ बच्चन इससे पहले भी जेन-जी की नई शब्दावली को लेकर अपनी उलझन जाहिर कर चुके हैं। उन्होंने कहा था कि जेन-जी की भाषा और नई टर्मिनोलॉजी को समझना उनके लिए कई बार मुश्किल हो जाता है। सोशल मीडिया पर लगातार नए स्लैंग और छोटे-छोटे शब्द लोकप्रिय होते रहते हैं और कुछ ही समय में वे युवाओं की आम बातचीत का हिस्सा बन जाते हैं। अमिताभ बच्चन भी इन शब्दों को समझने और उनके अर्थ जानने की कोशिश करते रहते हैं।

हाल ही में उन्होंने ‘बीवी पगलू’ जैसे एक नए जेन-जी टर्म का भी जिक्र किया था। इस शब्द का अर्थ जानने के बाद अमिताभ बच्चन ने इसे अपने चिर-परिचित मजाकिया अंदाज में स्वीकार किया। उन्होंने कहा था कि यह बिल्कुल सही है और पत्नी को बॉस मानना चाहिए। उन्होंने मजाक में यह भी कहा कि हर पति को इस नियम को मानकर चलना चाहिए,क्योंकि ऐसा करने पर जीवन आसानी से चल सकता है,जबकि इसके विपरीत स्थिति में ‘नौकरी से निकाल दिए जाने’ का खतरा हो सकता है। अमिताभ की इस टिप्पणी ने दर्शकों को खूब हँसाया था।

जेन-जी भाषा की बात करें तो यह मुख्य रूप से इंटरनेट,सोशल मीडिया, मीम संस्कृति और पॉप कल्चर से विकसित हुई संवाद शैली है। आमतौर पर 1997 से 2012 के बीच जन्मे लोगों को जेन-जी पीढ़ी के तौर पर वर्गीकृत किया जाता है। इस पीढ़ी के बीच बातचीत का तरीका पहले की पीढ़ियों की तुलना में काफी अलग है। लंबे वाक्यों और विस्तृत अभिव्यक्ति के बजाय छोटे शब्दों,संक्षिप्त रूपों,मीम्स,इमोजी और विशेष स्लैंग का इस्तेमाल अधिक होता है।

जेन-जी की भाषा की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें शब्दों के पारंपरिक अर्थ से ज्यादा संदर्भ और भावनाओं को महत्व दिया जाता है। कोई शब्द मजाक,व्यंग्य,प्रशंसा या आश्चर्य व्यक्त करने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। इसका अर्थ उस बातचीत के संदर्भ पर निर्भर करता है। यही वजह है कि पुरानी पीढ़ी के लोगों के लिए कई बार इन शब्दों को समझना मुश्किल हो जाता है।

सोशल मीडिया मंचों ने इस भाषा को तेजी से लोकप्रिय बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इंस्टाग्राम और टिकटॉक जैसे मंचों पर वायरल होने वाले शब्द और वाक्य कुछ ही समय में लाखों लोगों की बातचीत का हिस्सा बन जाते हैं। इसके अलावा फिल्मों,वेब सीरीज,संगीत और इंटरनेट मीम्स का भी जेन-जी की भाषा पर गहरा प्रभाव है। अंग्रेजी और हिंदी के मिश्रण से बनी हिंग्लिश ने भी इस संवाद शैली को नया रूप दिया है।

अमिताभ बच्चन का जेन-जी भाषा को लेकर मजाकिया अंदाज में बात करना यह दिखाता है कि पीढ़ियों के बीच भाषा का अंतर केवल भ्रम पैदा करने वाला नहीं है,बल्कि यह एक दिलचस्प सांस्कृतिक बदलाव भी है। खुद अमिताभ बच्चन जैसे वरिष्ठ अभिनेता नई पीढ़ी के शब्दों को समझने की कोशिश कर रहे हैं। उनका यह अंदाज दर्शाता है कि बदलते समय के साथ भाषा को समझना और नई पीढ़ी की संवाद शैली से जुड़ना किसी उम्र की सीमा में बँधा नहीं है।

‘कौन बनेगा करोड़पति’ में अमिताभ बच्चन अक्सर अपनी निजी टिप्पणियों और हास्य के जरिए प्रतियोगियों तथा दर्शकों के साथ जुड़ते हैं। इस बार जेन-जी की भाषा पर उनकी टिप्पणी भी इसी अंदाज का हिस्सा रही। ‘रॉकिंग’ और ‘किलिंग इट’ जैसे शब्दों को लेकर उनकी मासूम उलझन ने एक गंभीर सामाजिक बदलाव को मनोरंजक तरीके से सामने रखा।

दरअसल,भाषा हमेशा बदलती रहती है और हर पीढ़ी उसे अपने तरीके से नया रूप देती है। जिस तरह पिछली पीढ़ियों ने अपने दौर में नए शब्दों और बोलचाल की शैलियों को अपनाया, उसी तरह आज की जेन-जी इंटरनेट और सोशल मीडिया के प्रभाव से अपनी अलग भाषाई पहचान बना रही है। अमिताभ बच्चन की टिप्पणियाँ इसी बदलाव को समझने की एक मजेदार कोशिश हैं। उनकी बातों से यह भी साफ होता है कि पीढ़ियों के बीच अंतर चाहे कितना भी हो,हास्य और बातचीत के जरिए उसे आसानी से पाटा जा सकता है।