इक्वाडोर ने कोलंबियाई सामान पर 100 प्रतिशत टैरिफ हटाया (तस्वीर क्रेडिट@rashtra_press)

इक्वाडोर ने कोलंबियाई सामान पर 100 प्रतिशत टैरिफ हटाया,महीनों पुराना व्यापार विवाद समाप्त होने की उम्मीद

क्विटो,1 जून (युआईटीवी)- दक्षिण अमेरिका के दो पड़ोसी देशों इक्वाडोर और कोलंबिया के बीच पिछले कई महीनों से चल रहा व्यापारिक तनाव अब समाप्त होने की दिशा में बढ़ता दिखाई दे रहा है। इक्वाडोर ने कोलंबिया से आने वाले सामान पर लगाए गए 100 प्रतिशत सुरक्षा शुल्क को समाप्त करने का फैसला किया है। यह निर्णय एक जून से प्रभावी हो गया है और इसे दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों को सामान्य बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इस फैसले के बाद व्यापारिक गतिविधियों में तेजी आने और द्विपक्षीय संबंधों में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है।

इक्वाडोर की राष्ट्रीय कस्टम सेवा के महानिदेशक सैंड्रो कैस्टिलो ने सोशल मीडिया मंच पर इस निर्णय की घोषणा करते हुए कहा कि कोलंबिया से आने वाले अथवा उसके माध्यम से परिवहन किए जाने वाले सभी सामानों पर लगाया गया सुरक्षा शुल्क अब शून्य कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि यह केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं है,बल्कि दोनों देशों के बीच सहयोग,विश्वास और क्षेत्रीय विकास को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

कैस्टिलो के अनुसार,कस्टम विभाग यह सुनिश्चित करेगा कि नए नियमों को प्रभावी और पारदर्शी तरीके से लागू किया जाए। उनका कहना था कि इस कदम से कानूनी व्यापार को बढ़ावा मिलेगा,क्षेत्रीय आर्थिक एकीकरण मजबूत होगा और सीमा पार होने वाली अवैध गतिविधियों के खिलाफ संयुक्त प्रयासों को भी नई गति मिलेगी। उन्होंने यह भी कहा कि दोनों देशों के बीच सहयोग का नया अध्याय शुरू होने जा रहा है,जिसमें सुरक्षा और आर्थिक विकास को समान प्राथमिकता दी जाएगी।

यह फैसला ऐसे समय में आया है,जब दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों में लंबे समय से तनाव बना हुआ था। इक्वाडोर के राष्ट्रपति डेनियल नोबोआ ने पिछले सप्ताह इस महत्वपूर्ण निर्णय की घोषणा की थी। बताया गया कि यह घोषणा कोलंबिया के राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार बेलार्डो डे ला एस्प्रीला के साथ हुई बातचीत के बाद की गई। दोनों पक्षों के बीच हाल के महीनों में बढ़े तनाव को कम करने और व्यापारिक सहयोग बहाल करने पर चर्चा हुई थी।

दरअसल,इस विवाद की शुरुआत इसी वर्ष जनवरी में हुई थी,जब इक्वाडोर ने कोलंबिया से आने वाले उत्पादों पर 30 प्रतिशत सुरक्षा शुल्क लगाने का फैसला किया था। उस समय इक्वाडोर सरकार ने इस कदम के पीछे सीमा सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं और मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ सहयोग में कमी को प्रमुख कारण बताया था। सरकार का तर्क था कि सीमावर्ती क्षेत्रों में अवैध गतिविधियाँ बढ़ रही हैं और कस्टम नियंत्रण को मजबूत करने के लिए विशेष उपायों की आवश्यकता है।

समय के साथ यह विवाद और गहराता गया। शुरुआती 30 प्रतिशत शुल्क को बढ़ाकर पहले 50 प्रतिशत किया गया और बाद में एक मई से इसे बढ़ाकर 100 प्रतिशत कर दिया गया। इस फैसले ने दोनों देशों के बीच व्यापारिक गतिविधियों पर गंभीर असर डाला। नया शुल्क कोलंबिया से आने वाले अथवा वहां निर्मित लगभग सभी उत्पादों पर लागू किया गया था और इसकी गणना उत्पादों के कस्टम मूल्य के आधार पर की जाती थी।

हालाँकि,कुछ महत्वपूर्ण क्षेत्रों को इस शुल्क से छूट दी गई थी। तेल और ऊर्जा जैसे रणनीतिक क्षेत्रों से जुड़े उत्पादों को विशेष राहत दी गई। इसके अलावा अस्थायी आयात,कस्टम ट्रांजिट और पुनः निर्यात जैसी विशेष व्यापारिक व्यवस्थाओं को भी शुल्क के दायरे से बाहर रखा गया था। निजी पर्यटक वाहनों को भी इस नियम से छूट प्रदान की गई थी,ताकि लोगों की आवाजाही और पर्यटन गतिविधियों पर नकारात्मक प्रभाव न पड़े।

इसके बावजूद व्यापारिक संगठनों और उद्योग जगत ने इस फैसले पर गंभीर चिंता व्यक्त की थी। व्यापार विशेषज्ञों का कहना था कि इतने ऊँचे शुल्क से दोनों देशों के बीच आपूर्ति श्रृंखला बाधित हो सकती है। इससे न केवल व्यापार की मात्रा में कमी आती,बल्कि कई उद्योगों में रोजगार और निवेश पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता था। विशेष रूप से वे कंपनियाँ प्रभावित हो रही थीं जो दोनों देशों के बीच नियमित आयात-निर्यात गतिविधियों पर निर्भर थीं।

इक्वाडोर के इस कदम का जवाब कोलंबिया ने भी अपने तरीके से दिया। कोलंबियाई प्रशासन ने कुछ इक्वाडोरियन उत्पादों पर 75 प्रतिशत तक का टैरिफ लगा दिया। इसके साथ ही कुछ समय के लिए इक्वाडोर को बिजली निर्यात करना भी बंद कर दिया गया। इससे दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ गया तथा क्षेत्रीय आर्थिक सहयोग को लेकर चिंताएँ पैदा होने लगीं।

जैसे-जैसे विवाद बढ़ता गया,मामला एंडियन कम्युनिटी की महासचिव संस्था तक पहुँच गया। यह संस्था क्षेत्रीय आर्थिक सहयोग और व्यापारिक नियमों के पालन की निगरानी करती है। संस्था ने दोनों देशों को निर्देश दिया कि वे अपने-अपने व्यापारिक प्रतिबंधों को हटाएँ और क्षेत्रीय समझौतों तथा नियमों का सम्मान करें। संगठन का मानना था कि व्यापारिक अवरोध क्षेत्रीय आर्थिक विकास के लिए नुकसानदायक साबित हो सकते हैं।

विश्लेषकों का मानना है कि अब टैरिफ हटाने का निर्णय दोनों देशों के लिए लाभदायक साबित हो सकता है। इससे न केवल व्यापारिक गतिविधियाँ सामान्य होंगी,बल्कि निवेशकों का विश्वास भी मजबूत होगा। साथ ही सीमा पार व्यापार से जुड़े उद्योगों को राहत मिलेगी और आर्थिक गतिविधियों में तेजी आने की संभावना बढ़ेगी।

क्षेत्रीय राजनीति और अर्थव्यवस्था पर नजर रखने वाले विशेषज्ञों के अनुसार,यह निर्णय दक्षिण अमेरिका में सहयोग और आर्थिक एकीकरण को मजबूत करने की दिशा में एक सकारात्मक संकेत है। वर्तमान वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों में जब कई देश व्यापारिक चुनौतियों का सामना कर रहे हैं,ऐसे समय में पड़ोसी देशों के बीच सहयोग और संवाद का महत्व और भी बढ़ जाता है।

इक्वाडोर और कोलंबिया के बीच व्यापारिक संबंध लंबे समय से मजबूत रहे हैं और दोनों देश एक-दूसरे के महत्वपूर्ण आर्थिक साझेदार माने जाते हैं। ऐसे में टैरिफ हटाने का यह फैसला केवल व्यापारिक बाधाओं को समाप्त करने तक सीमित नहीं है,बल्कि यह दोनों देशों के बीच विश्वास बहाली और भविष्य में व्यापक सहयोग की संभावनाओं को भी मजबूत करता है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह नया कदम द्विपक्षीय व्यापार,निवेश और क्षेत्रीय विकास को किस प्रकार नई दिशा देता है।