भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई )(तस्वीर क्रेडिट@AIRNewsHindi)

एफसीएनआर जमा को मिली जबरदस्त प्रतिक्रिया, 31 अगस्त तक आया 127 अरब डॉलर का विदेशी मुद्रा प्रवाह

नई दिल्ली,3 सितंबर (युआईटीवी)- भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से अमेरिकी डॉलर को आकर्षित करने के लिए शुरू की गई विदेशी मुद्रा अनिवासी बैंक यानी एफसीएनआर (बी) जमा योजना को निवेशकों की ओर से जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली है। 31 अगस्त 2026 तक इस योजना के तहत कुल 127.226 अरब डॉलर का विदेशी मुद्रा प्रवाह दर्ज किया गया है। यह आँकड़ा आरबीआई के शुरुआती अनुमान 100 अरब डॉलर से काफी अधिक है। विदेशी मुद्रा के इस बड़े प्रवाह को भारतीय अर्थव्यवस्था और रुपये के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे देश के भुगतान संतुलन को मजबूती मिलने के साथ ही विदेशी मुद्रा बाजार में भी स्थिरता बढ़ने की उम्मीद है।

भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से जारी आँकड़ों के मुताबिक,31 अगस्त तक एफसीएनआर (बी) जमा के माध्यम से 127.226 अरब डॉलर का प्रवाह दर्ज किया गया। इसके अलावा बाह्य वाणिज्यिक उधारी यानी ईसीबी के माध्यम से 3.891 अरब डॉलर और विदेशों से विदेशी मुद्रा में उधार यानी ओएफसीबी के तहत 5.260 अरब डॉलर का प्रवाह आया। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि केंद्रीय बैंक की ओर से विदेशी मुद्रा जुटाने के लिए शुरू की गई विशेष व्यवस्था को बाजार से अपेक्षा से बेहतर प्रतिक्रिया मिली है।

आरबीआई ने रुपये की स्थिति को मजबूत करने और देश में विदेशी मुद्रा की उपलब्धता बढ़ाने के उद्देश्य से विशेष अमेरिकी डॉलर स्वैप सुविधा के तहत एफसीएनआर (बी), ईसीबी और ओएफसीबी योजनाओं की शुरुआत करने का ऐलान 8 जून को किया था। इस पहल का प्रमुख उद्देश्य विदेशी मुद्रा को भारतीय वित्तीय व्यवस्था में आकर्षित करना और वैश्विक स्तर पर बदलती परिस्थितियों के बीच रुपये पर पड़ने वाले दबाव को कम करना था। योजना शुरू होने के बाद निवेशकों की प्रतिक्रिया उम्मीद से काफी बेहतर रही और एफसीएनआर (बी) जमा के जरिए अनुमान से कहीं अधिक विदेशी मुद्रा देश में आई।

एफसीएनआर (बी) जमा योजना के तहत निवेशकों के लिए जमा करने की अवधि 31 अगस्त तक निर्धारित की गई थी। वहीं,ईसीबी और ओएफसीबी योजनाओं के तहत निवेशक 31 दिसंबर 2026 तक धन जुटाने की प्रक्रिया में हिस्सा ले सकते हैं। इस तरह एफसीएनआर (बी) के लिए निर्धारित अवधि अब समाप्त हो चुकी है,जबकि अन्य दोनों व्यवस्थाओं के तहत विदेशी मुद्रा प्रवाह आने की संभावना बनी हुई है।

दिलचस्प बात यह है कि आरबीआई ने शुरुआत में एफसीएनआर (बी) जमा के लिए निवेश की अंतिम तारीख 11 सितंबर 2026 निर्धारित की थी। हालाँकि,योजना को मिली उत्साहजनक प्रतिक्रिया को देखते हुए केंद्रीय बैंक ने इसकी समयसीमा को संशोधित कर 31 अगस्त 2026 कर दिया। आरबीआई ने इस बदलाव के पीछे एफसीएनआर (बी) जमा के लिए स्वैप सुविधा को मिली मजबूत प्रतिक्रिया और इसके परिणामस्वरूप हुए विदेशी मुद्रा प्रवाह को प्रमुख कारण बताया।

केंद्रीय बैंक ने स्पष्ट किया कि एफसीएनआर (बी) जमा के लिए स्वैप सुविधा केवल 31 अगस्त 2026 तक जुटाई गई जमा राशि के लिए उपलब्ध होगी। हालाँकि,इस सुविधा के तहत एफसीएनआर (बी) जमा का स्वैप लाभ आरबीआई से 11 सितंबर 2026 तक लिया जा सकता है। इस व्यवस्था के जरिए बैंकों और संबंधित संस्थाओं को विदेशी मुद्रा जुटाने के बाद उसे भारतीय वित्तीय प्रणाली में उपयोग करने के लिए निर्धारित सुविधा का लाभ उठाने का अवसर मिला है।

एफसीएनआर (बी) योजना के तहत बड़ी मात्रा में डॉलर आने का सीधा फायदा भारत की विदेशी मुद्रा स्थिति को मिल सकता है। जब देश में पर्याप्त विदेशी मुद्रा उपलब्ध रहती है, तो बाहरी भुगतान संबंधी जरूरतों को पूरा करने में आसानी होती है। इसके साथ ही भुगतान संतुलन यानी बैलेंस ऑफ पेमेंट को भी सहारा मिलता है। विदेशी मुद्रा प्रवाह बढ़ने से आयात भुगतान और अन्य अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय दायित्वों के प्रबंधन में भी मदद मिल सकती है।

इस विदेशी मुद्रा प्रवाह का असर रुपये की विनिमय दर पर भी पड़ सकता है। हाल के समय में मध्य पूर्व में जारी तनाव के कारण वैश्विक वित्तीय बाजारों में अनिश्चितता बढ़ी है और रुपये पर दबाव देखने को मिला है। ऐसे माहौल में देश में डॉलर का अतिरिक्त प्रवाह रुपये को समर्थन दे सकता है। विदेशी मुद्रा बाजार में डॉलर की उपलब्धता बढ़ने से माँग और आपूर्ति के बीच संतुलन बेहतर हो सकता है,जिससे रुपये पर अचानक पड़ने वाले दबाव को कुछ हद तक कम करने में मदद मिल सकती है।

एफसीएनआर (बी) जमा का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि इसमें भारत से बाहर रहने वाले निवेशकों और भारतीय बैंकों के बीच विदेशी मुद्रा आधारित जमा व्यवस्था के जरिए डॉलर जुटाए जाते हैं। इससे भारतीय वित्तीय तंत्र को विदेशी मुद्रा संसाधन उपलब्ध होते हैं। वैश्विक स्तर पर ब्याज दरों,भू-राजनीतिक तनाव और पूँजी के प्रवाह में होने वाले बदलावों के बीच इस तरह की व्यवस्थाएँ विदेशी मुद्रा प्रबंधन में केंद्रीय बैंक के लिए उपयोगी साबित हो सकती हैं।

आरबीआई की इस पहल को मिली प्रतिक्रिया यह भी दर्शाती है कि विदेशी निवेशकों और संबंधित बाजार प्रतिभागियों ने इस विशेष व्यवस्था में पर्याप्त रुचि दिखाई। 100 अरब डॉलर के अनुमान के मुकाबले 127.226 अरब डॉलर का प्रवाह इस बात का संकेत है कि योजना के तहत विदेशी मुद्रा जुटाने की क्षमता अपेक्षा से अधिक रही। हालाँकि,इस प्रवाह के दीर्घकालिक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेंगे कि वैश्विक वित्तीय परिस्थितियाँ किस दिशा में आगे बढ़ती हैं और देश में विदेशी मुद्रा की माँग तथा आपूर्ति किस तरह बदलती है।

एफसीएनआर (बी), ईसीबी और ओएफसीबी के माध्यम से आया विदेशी मुद्रा प्रवाह मिलाकर देश के वित्तीय तंत्र को अतिरिक्त डॉलर उपलब्ध हुए हैं। हालाँकि,इन तीनों व्यवस्थाओं की प्रकृति अलग-अलग है,लेकिन इनका व्यापक उद्देश्य विदेशी मुद्रा संसाधनों को बढ़ाना और भारतीय वित्तीय प्रणाली को बाहरी दबावों से निपटने में अधिक सक्षम बनाना है। एफसीएनआर (बी) के लिए निर्धारित अवधि समाप्त हो चुकी है, जबकि ईसीबी और ओएफसीबी के लिए दिसंबर तक अवसर उपलब्ध रहने से आने वाले महीनों में भी अतिरिक्त विदेशी मुद्रा प्रवाह देखने को मिल सकता है।

मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच वैश्विक निवेशक सुरक्षित परिसंपत्तियों की ओर रुख कर सकते हैं और इससे उभरती अर्थव्यवस्थाओं की मुद्राओं पर दबाव बढ़ सकता है। भारत जैसे बड़े आयातक देश के लिए डॉलर की उपलब्धता महत्वपूर्ण है। ऐसे में एफसीएनआर (बी) के जरिए आया 127.226 अरब डॉलर का प्रवाह अर्थव्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण सुरक्षा कवच के रूप में काम कर सकता है। इससे विदेशी मुद्रा बाजार में तरलता को सहारा मिलने के साथ रुपये में अत्यधिक उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने में भी मदद मिल सकती है।

केंद्रीय बैंक की ओर से उठाए गए इस कदम का एक व्यापक उद्देश्य बाजार में विश्वास बनाए रखना भी है। विदेशी मुद्रा भंडार और डॉलर की उपलब्धता मजबूत रहने से अंतर्राष्ट्रीय निवेशकों तथा बाजार प्रतिभागियों को भारतीय अर्थव्यवस्था की बाहरी वित्तीय स्थिति को लेकर सकारात्मक संकेत मिल सकते हैं। खासकर ऐसे समय में जब वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक घटनाक्रम तेजी से बदल रहे हैं,विदेशी मुद्रा की पर्याप्त उपलब्धता किसी भी अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण होती है।

कुल मिलाकर,एफसीएनआर (बी) जमा योजना को मिली प्रतिक्रिया भारतीय रिजर्व बैंक की उम्मीदों से कहीं अधिक रही है। 31 अगस्त तक 127.226 अरब डॉलर का प्रवाह केंद्रीय बैंक के 100 अरब डॉलर के शुरुआती अनुमान से काफी ऊपर है। इसके साथ ईसीबी और ओएफसीबी के जरिए भी विदेशी मुद्रा देश में आई है। एफसीएनआर (बी) जमा के लिए निर्धारित अवधि समाप्त हो चुकी है,लेकिन ईसीबी और ओएफसीबी के तहत 31 दिसंबर 2026 तक निवेश की गुंजाइश बनी हुई है। ऐसे में आने वाले महीनों में भी विदेशी मुद्रा प्रवाह जारी रह सकता है। बड़ी मात्रा में डॉलर की उपलब्धता से भारत के भुगतान संतुलन को मजबूती मिलने और मध्य पूर्व के तनाव के बीच दबाव झेल रहे रुपये को सहारा मिलने की उम्मीद है।