वाशिंगटन,3 सितंबर (युआईटीवी)- अमेरिका में स्थायी निवास यानी ग्रीन कार्ड पाने का इंतजार कर रहे भारतीय पेशेवरों की मुश्किलें आने वाले दिनों में और बढ़ सकती हैं। अमेरिकी विदेश विभाग ने सितंबर के वीजा बुलेटिन में चेतावनी दी है कि रोजगार आधारित पहली प्राथमिकता वाली ईबी-1 श्रेणी में भारत के लिए निर्धारित वीजा संख्या वित्तीय वर्ष समाप्त होने से पहले पूरी तरह इस्तेमाल हो सकती है। यदि ऐसा होता है,तो इस श्रेणी को अस्थायी रूप से ‘अनुपलब्ध’ घोषित किया जा सकता है। इस संभावित स्थिति ने उन भारतीय आवेदकों की चिंता बढ़ा दी है,जो लंबे समय से अमेरिकी स्थायी निवास की कतार में हैं।
अमेरिकी वित्तीय वर्ष 30 सितंबर को समाप्त होता है। विदेश विभाग के अनुसार, भारत से ईबी-1 श्रेणी के तहत आने वाले आवेदनों की संख्या काफी अधिक है और इस श्रेणी में माँग लगातार बनी हुई है। उपलब्ध वीजा संख्या के तेजी से इस्तेमाल होने की आशंका के चलते विभाग ने पहले ही संकेत दे दिया है कि वित्तीय वर्ष खत्म होने से पहले ईबी-1 इंडिया की स्थिति बदल सकती है। यदि निर्धारित संख्या पूरी हो जाती है,तो नए मामलों में उस वित्तीय वर्ष के दौरान वीजा जारी करना रोकना पड़ सकता है।
विदेश विभाग ने कहा है कि वह वीजा उपलब्धता की स्थिति पर लगातार नजर रख रहा है। परिस्थितियों के अनुसार वीजा संख्या और तारीखों में आवश्यक बदलाव किए जा सकते हैं। हालाँकि,विभाग की इस चेतावनी ने भारतीय पेशेवरों के बीच चिंता बढ़ा दी है,क्योंकि रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड के लिए भारतीय आवेदकों को पहले से ही अन्य देशों के मुकाबले बेहद लंबी प्रतीक्षा अवधि का सामना करना पड़ रहा है।
ईबी-1 अमेरिका की रोजगार आधारित पहली प्राथमिकता वाली श्रेणी है। इस श्रेणी में असाधारण क्षमता रखने वाले पेशेवर, उत्कृष्ट प्रोफेसर और शोधकर्ता तथा कुछ बहुराष्ट्रीय कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारी और प्रबंधक शामिल होते हैं। सामान्य तौर पर इसे रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड की अपेक्षाकृत उच्च प्राथमिकता वाली श्रेणी माना जाता है। ऐसे में अगर भारत के लिए ईबी-1 वीजा संख्या भी वित्तीय वर्ष के दौरान समाप्त हो जाती है,तो लंबे समय से प्रक्रिया में शामिल आवेदकों के लिए यह एक और बड़ी बाधा बन सकती है।
सितंबर के वीजा बुलेटिन में ईबी-1 इंडिया की अंतिम कार्रवाई तारीख 15 अक्टूबर 2022 निर्धारित की गई है। इसका अर्थ यह है कि सामान्य परिस्थितियों में उन्हीं भारतीय आवेदकों के मामलों में अंतिम कार्रवाई की जा सकती है,जिनकी प्राथमिकता तारीख 15 अक्टूबर 2022 से पहले की है। प्राथमिकता तारीख किसी आवेदक के ग्रीन कार्ड आवेदन की कतार में उसकी स्थिति निर्धारित करने वाली महत्वपूर्ण तारीख होती है। इसलिए जिन आवेदकों की प्राथमिकता तारीख इस सीमा के बाद की है,उन्हें आगे इंतजार करना पड़ सकता है।
ईबी-1 जैसी उच्च प्राथमिकता वाली श्रेणी में भी भारत के लिए कई वर्षों पुरानी कतार होना भारतीय आवेदकों के सामने मौजूद समस्या को दर्शाता है। अमेरिका में रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड की माँग और उपलब्ध वार्षिक वीजा संख्या के बीच अंतर के कारण विभिन्न श्रेणियों में बैकलॉग बना हुआ है। भारत जैसे बड़े आवेदक आधार वाले देशों के लिए यह समस्या विशेष रूप से गंभीर है।
भारतीय आवेदकों के लिए रोजगार आधारित दूसरी प्राथमिकता वाली श्रेणी ईबी-2 की स्थिति भी चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। सितंबर के वीजा बुलेटिन में ईबी-2 इंडिया को ‘यू’ यानी अनुपलब्ध बताया गया है। अमेरिकी वीजा व्यवस्था में ‘यू’ का अर्थ है कि संबंधित अवधि में उस श्रेणी के लिए कोई वीजा जारी नहीं किया जा सकता। ईबी-2 इंडिया अगस्त में भी अनुपलब्ध था और सितंबर में भी इसकी स्थिति में बदलाव नहीं हुआ है।
ईबी-2 श्रेणी में उच्च डिग्री वाले पेशेवरों तथा विशेष योग्यता वाले कुछ कर्मचारियों के मामले शामिल होते हैं। बड़ी संख्या में भारतीय पेशेवर इस श्रेणी के माध्यम से अमेरिकी स्थायी निवास की प्रक्रिया में हैं। ऐसे में इस श्रेणी का लगातार अनुपलब्ध रहना उन आवेदकों के लिए चिंता का कारण है,जो वर्षों से अपने ग्रीन कार्ड का इंतजार कर रहे हैं।
रोजगार आधारित तीसरी प्राथमिकता वाली श्रेणी ईबी-3 में भी भारतीय आवेदकों की स्थिति आसान नहीं है। सितंबर के लिए ईबी-3 इंडिया की अंतिम कार्रवाई तारीख 1 जनवरी 2014 निर्धारित की गई है। इसका सीधा मतलब है कि इस श्रेणी में भारतीय आवेदकों की कतार 12 साल से भी ज्यादा पुरानी है। जिन आवेदकों की प्राथमिकता तारीख 1 जनवरी 2014 के बाद की है,उनके मामलों में अंतिम कार्रवाई के लिए अभी और इंतजार करना पड़ सकता है।
ईबी-3 में भारत और दूसरे देशों के बीच प्रतीक्षा अवधि का अंतर काफी बड़ा दिखाई देता है। सितंबर में ज्यादातर अन्य देशों के लिए ईबी-3 की अंतिम कार्रवाई तारीख 1 सितंबर 2024 है। चीन के लिए यह तारीख 1 जनवरी 2022 और फिलीपींस के लिए 1 अगस्त 2023 है। इसके मुकाबले भारत के लिए 1 जनवरी 2014 की तारीख निर्धारित होना बताता है कि भारतीय आवेदकों को इसी श्रेणी में भी कई अतिरिक्त वर्षों तक इंतजार करना पड़ सकता है।
भारतीय पेशेवरों के लिए ग्रीन कार्ड की लंबी कतार का असर उनके करियर और व्यक्तिगत योजनाओं पर भी पड़ता है। स्थायी निवास की प्रक्रिया लंबी होने के कारण कई आवेदक वर्षों तक अपने आव्रजन मामलों में अनिश्चितता का सामना करते हैं। ईबी-2 और ईबी-3 में पहले से मौजूद लंबा बैकलॉग अब ईबी-1 में संभावित वीजा समाप्ति की चेतावनी के कारण चिंता को और बढ़ा रहा है।
निवेश के माध्यम से ग्रीन कार्ड हासिल करने वाली ईबी-5 श्रेणी में भी सितंबर के दौरान भारत के लिए अंतिम कार्रवाई उपलब्ध नहीं है। हालाँकि,ईबी-5 के कुछ आरक्षित वर्गों में स्थिति अलग है। ग्रामीण क्षेत्रों,अधिक बेरोजगारी वाले क्षेत्रों और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए आरक्षित ईबी-5 श्रेणी सभी देशों के लिए ‘करंट’ यानी उपलब्ध है। इसका अर्थ है कि इन आरक्षित श्रेणियों में निर्धारित शर्तों को पूरा करने वाले आवेदकों के लिए वीजा उपलब्धता की स्थिति सामान्य श्रेणी से अलग है।
ईबी-1 को संभावित रूप से अनुपलब्ध घोषित किए जाने की चेतावनी इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह श्रेणी आम तौर पर असाधारण क्षमता वाले लोगों और उच्च स्तर के पेशेवरों के लिए महत्वपूर्ण रास्ता मानी जाती है। अगर वित्तीय वर्ष समाप्त होने से पहले भारत के लिए निर्धारित संख्या समाप्त हो जाती है,तो संबंधित आवेदकों को तत्काल अंतिम कार्रवाई का लाभ नहीं मिल पाएगा। उन्हें अगले वित्तीय वर्ष में वीजा उपलब्धता बहाल होने का इंतजार करना पड़ सकता है।
हालाँकि,इसका यह मतलब नहीं है कि ईबी-1 श्रेणी स्थायी रूप से बंद हो जाएगी। ‘अनुपलब्ध’ स्थिति वीजा संख्या की उपलब्धता से जुड़ी होती है और नई वित्तीय अवधि शुरू होने पर स्थिति में बदलाव संभव होता है। अमेरिकी विदेश विभाग ने भी संकेत दिया है कि वह उपलब्धता पर नजर रख रहा है और आवश्यकता के अनुसार तारीखों तथा वीजा संख्या में बदलाव कर सकता है।
फिलहाल सबसे बड़ी चिंता यह है कि भारतीय आवेदकों के लिए रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड की लगभग सभी प्रमुख श्रेणियों में लंबी कतारें दिखाई दे रही हैं। ईबी-1 में जहाँ अक्टूबर 2022 की अंतिम कार्रवाई तारीख निर्धारित है,वहीं ईबी-2 सितंबर में अनुपलब्ध है और ईबी-3 में अंतिम कार्रवाई तारीख जनवरी 2014 तक सीमित है। इससे भारतीय पेशेवरों के लिए स्थायी निवास हासिल करने की प्रक्रिया की जटिलता साफ नजर आती है।
आने वाले हफ्ते इस लिहाज से महत्वपूर्ण होंगे,क्योंकि 30 सितंबर को अमेरिकी वित्तीय वर्ष समाप्त होने वाला है। यदि ईबी-1 इंडिया के लिए उपलब्ध वीजा संख्या वास्तव में समाप्त हो जाती है,तो इस श्रेणी की स्थिति में अस्थायी बदलाव देखने को मिल सकता है। ऐसे में लंबे समय से ग्रीन कार्ड की प्रतीक्षा कर रहे भारतीय पेशेवरों को अमेरिकी विदेश विभाग की अगली घोषणाओं और वीजा बुलेटिन में होने वाले बदलावों पर नजर रखनी होगी।
कुल मिलाकर,सितंबर वीजा बुलेटिन ने अमेरिका में स्थायी निवास की कतार में खड़े भारतीयों के सामने मौजूद चुनौती को फिर उजागर किया है। ईबी-2 का अनुपलब्ध होना, ईबी-3 में एक दशक से भी ज्यादा पुरानी कतार और अब ईबी-1 के लिए वीजा संख्या समाप्त होने की संभावित चेतावनी भारतीय आवेदकों के लिए स्थिति को और कठिन बना रही है। आने वाले समय में वीजा उपलब्धता में बदलाव ही यह तय करेगा कि इन आवेदकों को राहत मिलती है या उन्हें अपनी प्रतीक्षा और आगे बढ़ानी पड़ती है।
