बोस्टन,17 जून (युआईटीवी)- फीफा विश्व कप 2026 में नॉर्वे ने अपने अभियान की शुरुआत बेहद प्रभावशाली अंदाज में की है। ग्रुप आई के मुकाबले में नॉर्वे ने इराक को 4-1 से हराकर न केवल टूर्नामेंट में अपनी पहली जीत दर्ज की,बल्कि अपने इरादे भी साफ कर दिए कि वह इस बार विश्व फुटबॉल के सबसे बड़े मंच पर लंबी दूरी तय करने की क्षमता रखता है। बोस्टन स्टेडियम में खेले गए इस मुकाबले में नॉर्वे के स्टार स्ट्राइकर एर्लिंग हालैंड ने दो गोल दागकर जीत की नींव रखी,जबकि लियो ओस्टिगार्ड ने भी एक महत्वपूर्ण गोल कर टीम की बढ़त को मजबूत किया।
यह मुकाबला कई मायनों में खास था। नॉर्वे और इराक दोनों ही लंबे अंतराल के बाद विश्व कप के मंच पर वापसी कर रहे थे। ऐसे में दोनों टीमों के लिए यह मैच केवल तीन अंक हासिल करने का अवसर नहीं था,बल्कि अपने प्रशंसकों को उम्मीद और विश्वास देने का भी मौका था। हालाँकि,मैदान पर नॉर्वे का प्रदर्शन कहीं अधिक प्रभावशाली और संतुलित दिखाई दिया,जिसने इराक को शुरुआत से ही दबाव में रखा।
मैच की शुरुआत होते ही नॉर्वे ने आक्रामक रणनीति अपनाई। टीम के खिलाड़ी लगातार इराकी रक्षा पंक्ति पर दबाव बना रहे थे। इसका परिणाम 14वें मिनट में देखने को मिला,जब गोलकीपर ओरजान नाइलैंड द्वारा शुरू किए गए एक शानदार मूव ने गोल का रूप ले लिया। बाईं ओर से डेविड मोलर वोल्फ ने बेहतरीन क्रॉस दिया और एर्लिंग हालैंड ने बिना कोई गलती किए गेंद को जाल में पहुँचा दिया। इस गोल के साथ नॉर्वे ने 1-0 की बढ़त हासिल कर ली और इराक पर दबाव और बढ़ गया।
इस मैच में नॉर्वे के गोलकीपर ओरजान नाइलैंड ने भी एक खास उपलब्धि अपने नाम की। 35 वर्ष और 279 दिन की उम्र में वह विश्व कप में नॉर्वे का प्रतिनिधित्व करने वाले सबसे उम्रदराज खिलाड़ी बन गए। अनुभवी गोलकीपर ने पूरे मैच में अपनी भूमिका बखूबी निभाई और टीम के आत्मविश्वास को मजबूत बनाए रखा।
हालाँकि,शुरुआती झटके के बाद इराक ने हार नहीं मानी। टीम ने जवाबी हमला तेज किया और कुछ ही मिनटों में मैच में वापसी कर ली। मुकाबले के 24वें मिनट के आसपास इराक को वह मौका मिला,जिसका उसे इंतजार था। आमिर अल-अम्मारी ने दाईं ओर से शानदार क्रॉस दिया और अनुभवी स्ट्राइकर आयमन हुसैन ने सटीक हेडर लगाकर गेंद को गोल पोस्ट में पहुँचा दिया। इस गोल के साथ स्कोर 1-1 हो गया और इराकी प्रशंसकों में उत्साह की लहर दौड़ गई।
आयमन हुसैन का यह गोल कई मायनों में ऐतिहासिक भी रहा। वह विश्व कप इतिहास में गोल करने वाले इराक के केवल दूसरे खिलाड़ी बन गए। इस उपलब्धि ने उनके नाम को देश के फुटबॉल इतिहास में विशेष स्थान दिला दिया। इराक को लगा कि वह अब मुकाबले में बराबरी की स्थिति में आ चुका है और नॉर्वे को कड़ी चुनौती दे सकता है।
लेकिन हाफ टाइम से ठीक पहले एर्लिंग हालैंड ने एक बार फिर अपनी विश्व स्तरीय क्षमता का प्रदर्शन किया। इराकी डिफेंडर जैद तहसीन और गोलकीपर जलाल हसन के बीच तालमेल की कमी का फायदा हालैंड ने तुरंत उठा लिया। दोनों खिलाड़ियों के बीच हुई छोटी सी गलती नॉर्वे के स्टार स्ट्राइकर के लिए अवसर बन गई। हालैंड ने गेंद पर कब्जा जमाया और उसे गोल में पहुँचाकर नॉर्वे को 2-1 की बढ़त दिला दी। यह गोल इराक के लिए बड़ा झटका साबित हुआ,क्योंकि टीम ने बराबरी हासिल करने के लिए काफी मेहनत की थी।
दूसरे हाफ में नॉर्वे ने खेल पर पूरी तरह नियंत्रण बनाए रखा। टीम के मिडफील्ड और आक्रमण ने लगातार इराकी खिलाड़ियों को दबाव में रखा। इराक ने कुछ मौकों पर वापसी की कोशिश जरूर की,लेकिन नॉर्वे की संगठित रक्षा पंक्ति और गोलकीपर नाइलैंड ने उन्हें सफल नहीं होने दिया।
मुकाबले का निर्णायक क्षण तब आया,जब दूसरे हाफ में बतौर सब्स्टीट्यूट मैदान पर उतरे लियो ओस्टिगार्ड ने शानदार प्रदर्शन किया। एक कॉर्नर किक पर उन्होंने ऊँची छलांग लगाते हुए बेहतरीन हेडर लगाया और गेंद सीधे गोल में पहुँच गई। इस गोल ने नॉर्वे की बढ़त को 3-1 कर दिया। इसके बाद इराक की वापसी की उम्मीदें लगभग खत्म हो गईं।
इराक ने हार नहीं मानी और लगातार हमले करता रहा,लेकिन उसे सफलता नहीं मिली। दूसरी ओर नॉर्वे के खिलाड़ी आत्मविश्वास से भरे नजर आए और उन्होंने खेल की गति पर पूरा नियंत्रण बनाए रखा। मैच के अंतिम चरण में इराक की मुश्किलें और बढ़ गईं,जब एक दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति में आत्मघाती गोल हो गया। इस गोल के साथ नॉर्वे की बढ़त 4-1 हो गई और मुकाबले का परिणाम पूरी तरह तय हो गया।
अंतिम सीटी बजने तक नॉर्वे ने अपनी बढ़त बरकरार रखी और टूर्नामेंट में शानदार जीत के साथ आगाज किया। इस जीत ने टीम को न केवल तीन महत्वपूर्ण अंक दिलाए,बल्कि गोल अंतर के आधार पर ग्रुप आई में शीर्ष स्थान भी दिला दिया। फ्रांस के समान अंक होने के बावजूद बेहतर गोल अंतर के कारण नॉर्वे पहले स्थान पर पहुँच गया है।
मैच के बाद एर्लिंग हालैंड ने अपनी खुशी जाहिर करते हुए कहा कि उनका पहला गोल अच्छा था,लेकिन उन्हें दूसरा गोल और भी ज्यादा पसंद आया। उन्होंने कहा कि टीम ने शानदार प्रदर्शन किया,लेकिन यह सिर्फ शुरुआत है। उनके अनुसार,टूर्नामेंट के आगामी मुकाबले और भी कठिन होंगे तथा टीम को लगातार बेहतर प्रदर्शन करना होगा।
नॉर्वे की इस जीत ने उसके प्रशंसकों की उम्मीदों को नई उड़ान दी है। लंबे समय बाद विश्व कप में लौटी टीम ने दिखा दिया है कि वह केवल भाग लेने नहीं,बल्कि प्रभाव छोड़ने आई है। दूसरी ओर इराक को अपने अगले मुकाबलों में वापसी करने के लिए रणनीति और प्रदर्शन दोनों स्तरों पर सुधार करना होगा। यदि इराक को अगले दौर की उम्मीदें जिंदा रखनी हैं,तो उसे आने वाले मैचों में अधिक संगठित और प्रभावी खेल दिखाना होगा।
विश्व कप का यह शुरुआती मुकाबला नॉर्वे के लिए यादगार साबित हुआ,जबकि इराक के लिए यह सीख लेने और आगे बढ़ने का अवसर बन गया। अब दोनों टीमों की नजर अपने अगले मैचों पर होगी,जहाँ उनके सामने नई चुनौतियां और नए अवसर इंतजार कर रहे हैं।
