नई दिल्ल,29 जुलाई (युआईटीवी)- कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर और सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। पार्टी के प्रवक्ता सौरव दास ने मंगलवार को जारी अपने बयान में सरकार पर लोकतांत्रिक अधिकारों की अनदेखी करने का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार अपने राजनीतिक हितों की पूर्ति के लिए सुप्रीम कोर्ट का इस्तेमाल नहीं कर सकती और न ही अदालत के आदेशों को अपने फायदे के लिए हथियार की तरह प्रयोग किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार को प्रदर्शनकारियों से किए गए सार्वजनिक वादों का सम्मान करना चाहिए और शांतिपूर्ण आंदोलन में शामिल लोगों के खिलाफ दर्ज सभी एफआईआर वापस लेनी चाहिए।
सौरव दास ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर अपनी प्रतिक्रिया साझा करते हुए कहा कि प्रदर्शनकारियों को लेकर देश के सामने जो सार्वजनिक आश्वासन दिए गए थे,अब उन्हें लागू करने का समय आ गया है। उनके अनुसार,सरकार को अपने वादों से पीछे नहीं हटना चाहिए और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने वाले छात्रों और युवाओं को कानूनी कार्रवाई के दायरे में नहीं लाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि सरकार अपने ही आश्वासनों का पालन नहीं करती है,तो इससे जनता का विश्वास कमजोर होगा और लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति लोगों की आस्था पर भी असर पड़ सकता है।
सीजेपी प्रवक्ता ने अपने बयान में यह भी कहा कि यदि किसी मामले में कोई वास्तविक अपराधी खुला घूम रहा है,तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में पुलिस को पुराने मामलों के आधार पर संबंधित व्यक्ति की जमानत रद्द कराने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाना चाहिए। साथ ही उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि यदि कोई व्यक्ति वास्तव में गंभीर अपराधों में शामिल था, तो वह अब तक बिना किसी कार्रवाई के कैसे खुलेआम घूमता रहा। उनके अनुसार,ऐसे मामलों की जवाबदेही तय होना भी उतना ही आवश्यक है।
सौरव दास ने आरोप लगाया कि सरकार कुछ चुनिंदा मामलों का हवाला देकर सभी एफआईआर को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रही है। उनका कहना था कि यदि इस तरह की प्रक्रिया को सामान्य बना दिया गया,तो भविष्य में शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले नागरिक भी कानूनी कार्रवाई के दायरे में लाए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को ऐसी व्यापक व्याख्या से बचना चाहिए,क्योंकि इससे लोकतांत्रिक विरोध की भावना प्रभावित हो सकती है और नागरिकों में भय का वातावरण पैदा हो सकता है।
उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन प्रत्येक नागरिक का संवैधानिक अधिकार है। यदि कोई व्यक्ति या समूह शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को सामने रखता है, तो उसके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई करना उचित नहीं माना जा सकता। उनके अनुसार,सरकार की जिम्मेदारी केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखना ही नहीं है, बल्कि लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा करना भी है। इसलिए आंदोलन में शामिल लोगों के खिलाफ दर्ज मामलों की समीक्षा की जानी चाहिए और जिन लोगों ने शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन किया है,उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस ली जानी चाहिए।
सीजेपी प्रवक्ता ने विशेष रूप से युवाओं और छात्रों का उल्लेख करते हुए कहा कि देश के भविष्य से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपनी आवाज उठाना उनका अधिकार है। उन्होंने दावा किया कि आंदोलन में शामिल अधिकांश छात्र और युवा लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत अपनी बात सरकार तक पहुँचाना चाहते थे। ऐसे में उनके खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई करना न केवल अनुचित है,बल्कि इससे युवाओं में असंतोष भी बढ़ सकता है। उन्होंने कहा कि सरकार को युवाओं की भावनाओं को समझते हुए संवाद और समाधान का रास्ता अपनाना चाहिए।
सौरव दास ने कहा कि सीजेपी उन सभी प्रदर्शनकारियों के साथ मजबूती से खड़ी रहेगी, जिन्होंने अपने अधिकारों और देश के भविष्य से जुड़े मुद्दों को लेकर शांतिपूर्ण आंदोलन किया। उन्होंने कहा कि किसी भी लोकतंत्र की मजबूती इस बात पर निर्भर करती है कि वहाँ नागरिकों को अपनी बात रखने की कितनी स्वतंत्रता प्राप्त है। यदि शांतिपूर्ण विरोध को भी संदेह की दृष्टि से देखा जाएगा,तो लोकतांत्रिक मूल्यों को नुकसान पहुँच सकता है।
उन्होंने केंद्र सरकार से अपील की कि वह प्रदर्शनकारियों से किए गए सार्वजनिक वादों को पूरा करे और एफआईआर वापस लेने सहित सभी आश्वासनों को लागू करे। उनके अनुसार,सरकार यदि अपने वादों पर अमल करती है,तो इससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया में लोगों का विश्वास मजबूत होगा और सरकार तथा युवाओं के बीच संवाद का सकारात्मक माहौल बनेगा,लेकिन यदि ऐसा नहीं किया गया,तो युवाओं के भीतर असंतोष और अविश्वास की भावना बढ़ सकती है।
सीजेपी का यह बयान ऐसे समय आया है,जब प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों और उनसे जुड़े कानूनी घटनाक्रम पर राजनीतिक बहस तेज है। विभिन्न राजनीतिक दल इस मुद्दे पर अलग-अलग रुख अपना रहे हैं। विपक्षी दल लगातार सरकार से आंदोलन में शामिल लोगों के खिलाफ दर्ज मामलों की समीक्षा करने और शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को राहत देने की माँग कर रहे हैं,जबकि सरकार की ओर से अब तक इस विषय पर विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश को लेकर भी राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर जारी है। अलग-अलग दल अपने-अपने दृष्टिकोण से अदालत की टिप्पणियों और कानूनी प्रक्रिया की व्याख्या कर रहे हैं। इसी क्रम में सीजेपी ने यह स्पष्ट किया है कि न्यायपालिका के आदेशों का सम्मान किया जाना चाहिए,लेकिन उनका उपयोग किसी राजनीतिक उद्देश्य की पूर्ति के लिए नहीं होना चाहिए। पार्टी का कहना है कि कानून का समान और निष्पक्ष तरीके से पालन होना चाहिए तथा किसी भी नागरिक के साथ राजनीतिक आधार पर भेदभाव नहीं किया जाना चाहिए।
फिलहाल सीजेपी ने सरकार से संवाद के माध्यम से समाधान निकालने और शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस लेने की माँग दोहराई है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सरकार की प्रतिक्रिया और न्यायिक प्रक्रिया की दिशा पर सभी की नजरें रहेंगी। यह मामला केवल कानूनी प्रक्रिया तक सीमित नहीं है,बल्कि लोकतांत्रिक अधिकारों,नागरिक स्वतंत्रता और सरकार द्वारा किए गए सार्वजनिक आश्वासनों के पालन से भी जुड़ा हुआ माना जा रहा है। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार इस विवाद पर आगे क्या रुख अपनाती है और प्रदर्शनकारियों की मांगों को किस प्रकार संबोधित करती है।
