नई दिल्ली,3 नवंबर (युआईटीवी)- दिल्ली-एनसीआर में दीपावली के दौरान पटाखे जलाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट की ओर से दी गई सीमित अनुमति के बावजूद बाजारों में नियमों के उल्लंघन की शिकायतें सामने आई हैं। अदालत ने इस स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा है कि उसके आदेश के अनुसार केवल निर्धारित दो दिनों तक प्रमाणित ग्रीन पटाखे जलाने की इजाजत दी गई है, लेकिन बाजार में हर तरह के पटाखे बेचे जा रहे हैं। इतना ही नहीं,बिना क्यूआर कोड वाले पटाखों की बिक्री की खबरें भी सामने आई हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में सरकार का ध्यान आकर्षित करते हुए आदेश का पालन सुनिश्चित करने की जरूरत बताई है।
मामले की सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति एमएम सुंदरेश ने मीडिया में प्रकाशित खबरों का हवाला देते हुए सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी से इस विषय पर ध्यान देने को कहा। न्यायमूर्ति ने बताया कि अखबारों में छपी खबरों के अनुसार बाजार में प्रतिबंधित श्रेणी के पटाखे भी उपलब्ध हैं और कुछ जगहों पर बिना क्यूआर कोड वाले पटाखे बेचे जा रहे हैं। अदालत ने इस स्थिति को अपने निर्देशों की अवहेलना से जोड़ते हुए कहा कि सरकार को इस पर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए। अदालत की चिंता का मुख्य कारण यह है कि जब पटाखों की बिक्री और इस्तेमाल के लिए स्पष्ट नियम तय किए गए हैं,तो उनके बावजूद बाजार में नियमों से अलग उत्पाद कैसे पहुँच रहे हैं।
दरअसल,सुप्रीम कोर्ट ने 2 नवंबर को दीपावली के अवसर पर दिल्ली-एनसीआर में सीमित समय के लिए पटाखे जलाने की अनुमति दी थी। इससे पहले राजधानी और आसपास के क्षेत्रों में वायु प्रदूषण की गंभीर स्थिति को देखते हुए कई बार पटाखों पर प्रतिबंध लगाया जाता रहा है। इस बार अदालत ने लोगों को त्योहार मनाने का अवसर देने के साथ-साथ पर्यावरण और स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं को ध्यान में रखते हुए कुछ शर्तों के साथ ग्रीन पटाखों की अनुमति दी है।
अदालत के निर्देश के मुताबिक,दिल्ली-एनसीआर में 7 और 8 नवंबर को ही प्रमाणित ग्रीन पटाखे जलाए जा सकेंगे। इसके बाद 9 नवंबर से पटाखे जलाने पर पहले की तरह पूर्ण प्रतिबंध लागू हो जाएगा। इसका मतलब है कि निर्धारित दो दिनों के बाद किसी भी तरह के पटाखे जलाने की अनुमति नहीं होगी। अदालत ने यह व्यवस्था स्पष्ट समय सीमा के साथ लागू की है,ताकि त्योहार के दौरान होने वाले प्रदूषण को नियंत्रित रखने की कोशिश की जा सके।
पटाखे जलाने की अनुमति के लिए समय भी निर्धारित किया गया है। सुप्रीम कोर्ट के 15 अक्टूबर 2025 के आदेश के अनुसार,7 और 8 नवंबर को सुबह 6 बजे से 7 बजे तक तथा रात 8 बजे से 10 बजे तक ही ग्रीन पटाखे जलाए जा सकेंगे। इन समय सीमाओं के बाहर पटाखे चलाने की अनुमति नहीं होगी। अदालत ने साफ किया है कि यह छूट सामान्य पटाखों के लिए नहीं,बल्कि निर्धारित मानकों पर खरे उतरने वाले प्रमाणित ग्रीन पटाखों के लिए है।
सुप्रीम कोर्ट ने पटाखे जलाने को लेकर कुछ संवेदनशील स्थानों के लिए अलग से प्रतिबंध भी तय किया है। अस्पतालों, नर्सिंग होम, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, जिला स्वास्थ्य केंद्रों और वृद्धाश्रमों के आसपास पटाखे जलाने की अनुमति नहीं होगी। इसके अलावा अधिसूचित साइलेंस जोन के 300 मीटर के दायरे को भी नो क्रैकर जोन घोषित किया गया है। इन क्षेत्रों में पटाखे चलाने पर रोक रहेगी, ताकि मरीजों, बुजुर्गों और अन्य संवेदनशील लोगों को ध्वनि तथा वायु प्रदूषण से होने वाली परेशानी से बचाया जा सके।
अदालत ने संबंधित अधिकारियों को इन प्रतिबंधित क्षेत्रों की पहचान जमीन पर स्पष्ट रूप से करने के निर्देश भी दिए थे। अधिकारियों को इन स्थानों की मार्किंग करानी होगी और इसकी जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध करानी होगी। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आम लोगों को पता रहे कि किन क्षेत्रों में पटाखे जलाना प्रतिबंधित है। साथ ही प्रशासन के लिए भी नियमों की निगरानी और उल्लंघन पर कार्रवाई करना आसान हो सके।
ग्रीन पटाखों के निर्माण और बिक्री को लेकर भी सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट शर्तें रखी हैं। अदालत के अनुसार, केवल वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद-राष्ट्रीय पर्यावरण अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान यानी सीएसआईआर-नीरी से प्रमाणित और पेट्रोलियम तथा विस्फोटक सुरक्षा संगठन यानी पीईएसओ से संबंधित वैध मंजूरी प्राप्त ग्रीन पटाखों का ही निर्माण किया जा सकता है। इन संस्थाओं से निर्धारित प्रमाणन और मंजूरी प्राप्त उत्पादों को ही नियमों के तहत अनुमति दी गई है। इसका उद्देश्य ऐसे पटाखों की बिक्री और इस्तेमाल को सीमित करना है,जिनका प्रदूषणकारी प्रभाव निर्धारित मानकों के अनुरूप नियंत्रित किया गया हो।
अदालत के निर्देश के अनुसार, 2 से 6 नवंबर के बीच निर्माता केवल उन्हीं प्रमाणित ग्रीन पटाखों का निर्माण कर सकेंगे,जिनकी जानकारी सीएसआईआर-नीरी की वेबसाइट पर अपलोड की गई है। यानी निर्माता अपनी मर्जी से किसी भी उत्पाद को ग्रीन पटाखा बताकर उसका निर्माण नहीं कर सकते। उत्पाद का निर्धारित संस्थाओं से प्रमाणित होना जरूरी है। इसी तरह बाजार में बिक्री के दौरान भी यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि ग्राहकों को केवल मंजूर श्रेणी के पटाखे ही उपलब्ध कराए जाएं।
ऐसे में बाजार में बिना क्यूआर कोड और गैर-प्रमाणित पटाखे मिलने की खबरों ने अदालत की चिंता बढ़ा दी है। क्यूआर कोड के जरिए किसी उत्पाद की प्रमाणिकता और उससे जुड़ी जानकारी की जाँच करने में मदद मिल सकती है। यदि बाजार में ऐसे पटाखे बेचे जा रहे हैं जिनकी पहचान और प्रमाणन स्पष्ट नहीं है,तो निर्धारित नियमों को लागू करना मुश्किल हो सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने इसी स्थिति की ओर इशारा करते हुए सरकार और संबंधित अधिकारियों से निगरानी पर ध्यान देने को कहा है।
अदालत ने अपने पहले के निर्देशों में यह भी स्पष्ट किया था कि दीपावली खुशियों और उत्सव का त्योहार है,लेकिन इसके साथ लोगों की सेहत और पर्यावरण की जिम्मेदारी को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। प्रदूषण का असर खास तौर पर सांस संबंधी बीमारियों से जूझ रहे लोगों,बच्चों, बुजुर्गों और अन्य संवेदनशील व्यक्तियों पर पड़ सकता है। इसलिए त्योहार मनाते समय यह ध्यान रखना जरूरी है कि किसी दूसरे व्यक्ति के स्वास्थ्य को नुकसान न पहुँचे।
फिलहाल सुप्रीम कोर्ट की ताजा टिप्पणी के बाद दिल्ली-एनसीआर में पटाखों की बिक्री और नियमों के पालन को लेकर प्रशासन की जिम्मेदारी बढ़ गई है। अदालत ने सीमित समय के लिए ग्रीन पटाखों की अनुमति दी है,लेकिन बाजार में सभी तरह के पटाखे उपलब्ध होने की खबरें इस व्यवस्था के प्रभावी क्रियान्वयन पर सवाल खड़े करती हैं। अब संबंधित अधिकारियों के सामने चुनौती यह है कि वे प्रमाणित पटाखों की बिक्री सुनिश्चित करें,प्रतिबंधित उत्पादों पर रोक लगाएँ और निर्धारित समय तथा नो क्रैकर जोन के नियमों का पालन कराएँ। त्योहार के दौरान लोगों की सुरक्षा और वायु गुणवत्ता को ध्यान में रखते हुए इन निर्देशों का पालन बेहद महत्वपूर्ण होगा।
