धीरेंद्र शास्त्री की भगवान कृष्ण पर टिप्पणी से मचा सियासी बवाल (तस्वीर क्रेडिट@NewsDeshbandhu)

धीरेंद्र शास्त्री की भगवान कृष्ण पर टिप्पणी से मचा सियासी बवाल,अखिलेश-तेजस्वी समेत कई नेताओं ने घेरा; विवाद बढ़ने पर माँगी माफी

नई दिल्ली,3 नवंबर (युआईटीवी)- मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के करैरा में आयोजित श्रीराम कथा के दौरान बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र शास्त्री की एक टिप्पणी को लेकर विवाद गहरा गया है। भगवान राम और भगवान श्रीकृष्ण के स्वरूप की तुलना करते हुए उन्होंने भगवान कृष्ण के खड़े होने के अंदाज को लेकर ‘टेढ़ा’ शब्द का इस्तेमाल किया था। उनका यह बयान सामने आने के बाद धार्मिक और राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रियाएँ शुरू हो गईं। विपक्षी दलों के कई नेताओं ने धीरेंद्र शास्त्री की टिप्पणी पर सवाल उठाते हुए इसे भगवान श्रीकृष्ण के प्रति अनुचित बताया। समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव, राष्ट्रीय जनता दल नेता तेजस्वी यादव, शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) की नेता प्रियंका चतुर्वेदी, तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा और छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इस मामले में अपनी नाराजगी जाहिर की। विवाद बढ़ने के बाद धीरेंद्र शास्त्री ने वीडियो जारी कर हाथ जोड़कर माफी भी माँगी और कहा कि उनका उद्देश्य किसी की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाना नहीं था।

दरअसल,करैरा में श्रीराम कथा के दौरान धीरेंद्र शास्त्री भगवान राम और भगवान श्रीकृष्ण के स्वरूपों का उल्लेख कर रहे थे। इसी दौरान उन्होंने भगवान कृष्ण की मुद्रा और उनके खड़े होने के तरीके को लेकर टिप्पणी की। उन्होंने भगवान कृष्ण के स्वरूप के लिए ‘टेढ़ा’ शब्द का इस्तेमाल किया। इस बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित होने लगा। इसके बाद कई लोगों ने आपत्ति जताई और कहा कि भगवान श्रीकृष्ण की पवित्र मुद्रा को इस तरह प्रस्तुत करना उचित नहीं है। मामला धीरे-धीरे धार्मिक चर्चा से निकलकर राजनीतिक विवाद में बदल गया और विपक्षी नेताओं ने भी इस पर प्रतिक्रिया देनी शुरू कर दी।

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट कर धीरेंद्र शास्त्री की टिप्पणी की कड़ी आलोचना की। उन्होंने लिखा कि मानवीय भूलों के लिए क्षमा दी जा सकती है,लेकिन ईशनिंदा को माफ नहीं किया जा सकता। अखिलेश ने मांग की कि ऐसे लोगों के कार्यक्रमों पर देशभर में रोक लगाई जाए और उन्हें भविष्य में किसी भी आयोजन की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि सार्वजनिक जीवन में आस्थावान लोगों को ऐसे व्यक्ति का बहिष्कार करना चाहिए। उनके अनुसार, इस तरह की टिप्पणी को गंभीरता से लिया जाना चाहिए और इसके लिए वैधानिक कार्रवाई भी होनी चाहिए।

अखिलेश यादव ने अपनी पोस्ट में आगे कहा कि किसी व्यक्ति के भीतर इतना अहंकार नहीं होना चाहिए कि वह स्वयं को ईश्वर से ऊपर समझने लगे। उन्होंने यह भी टिप्पणी की कि यदि कोई व्यक्ति अपने किए पर लंबे समय तक एकांत में रहकर पश्चाताप और प्रायश्चित करे,तब भी आस्थावान लोगों के लिए उसे क्षमा करना कठिन होगा। सपा प्रमुख की इस प्रतिक्रिया के बाद विवाद को लेकर राजनीतिक बहस और तेज हो गई।

शिवसेना (यूबीटी) की नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने भी धीरेंद्र शास्त्री की टिप्पणी को अनुचित बताया। उन्होंने एक्स पर अपनी प्रतिक्रिया में संत सूरदास और गोस्वामी तुलसीदास के बीच भगवान विष्णु के अलग-अलग स्वरूपों को लेकर भक्ति के भाव का उल्लेख किया। प्रियंका चतुर्वेदी के अनुसार,दोनों संतों के बीच भगवान के स्वरूपों को लेकर होने वाला संवाद किसी एक को दूसरे से श्रेष्ठ बताने के लिए नहीं था। उन्होंने कहा कि भगवान राम और भगवान कृष्ण एक ही दिव्य सत्ता के अलग-अलग स्वरूप हैं। एक ओर अयोध्या में भगवान राम की मर्यादा का भाव है,तो दूसरी ओर वृंदावन में भगवान कृष्ण की माधुर्य लीला का उत्सव दिखाई देता है। उनके मुताबिक,धनुष और बाँसुरी एक ही परम सत्ता के दो अभिन्न रूपों का प्रतीक हैं।

प्रियंका चतुर्वेदी ने अपनी पोस्ट में भगवान कृष्ण की त्रिभंगी मुद्रा का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस मुद्रा को केवल टेढ़ापन बताना उसके आध्यात्मिक सौंदर्य और गहरे भाव को कम करके देखने जैसा है। उनके अनुसार,भगवान कृष्ण की मुद्रा भक्ति और आध्यात्मिक अभिव्यक्ति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने आरोप लगाया कि धीरेंद्र शास्त्री ने दिव्य लीलाओं और आध्यात्मिक भावों को सामान्य गतिविधि की तरह प्रस्तुत कर दिया। प्रियंका ने कहा कि किसी पवित्र स्वरूप की गरिमा को केवल सनसनी पैदा करने या अपनी बात को नाटकीय बनाने के लिए कमतर नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने लोगों से ऐसी टिप्पणियों का बचाव बंद करने की अपील भी की।

राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव ने भी इस मामले में तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण के महत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि वे जन-जन के पूजनीय हैं और धार्मिक सीमाओं से परे लोगों की आस्था के केंद्र हैं। तेजस्वी ने धीरेंद्र शास्त्री की टिप्पणी को अशोभनीय,अमर्यादित और अक्षम्य बताया। उन्होंने कहा कि भगवान राम और भगवान कृष्ण एक-दूसरे के पूरक हैं। उनके अनुसार,पहले नफरत फैलाने वाले लोग इंसानों को बाँटने की कोशिश करते थे और अब भगवान के स्वरूपों को लेकर भी विभाजन पैदा किया जा रहा है।

तेजस्वी यादव ने अपनी प्रतिक्रिया में भारतीय जनता पार्टी के नेताओं को भी निशाने पर लिया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा नेताओं से इस मामले पर सामने आकर जवाब देने की माँग की। तेजस्वी का आरोप था कि राजनीतिक लाभ के लिए धार्मिक एकता और सामाजिक समरसता को नुकसान पहुँचाने वाली बातें की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि भगवान राम और भगवान कृष्ण को अलग-अलग करके देखने की कोशिश सनातन परंपरा की एकता के विचार के विपरीत है। हालाँकि,यह उनकी राजनीतिक प्रतिक्रिया थी, जबकि विवाद का केंद्र धीरेंद्र शास्त्री द्वारा कथा के दौरान की गई टिप्पणी बनी रही।

तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा ने भी इस मुद्दे पर भाजपा से सवाल किया। उन्होंने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण को लेकर की गई टिप्पणी पर भाजपा नेताओं की चुप्पी समझ से परे है। महुआ ने सवाल उठाया कि यदि किसी अन्य व्यक्ति ने भगवान कृष्ण के बारे में इस तरह की बात कही होती,तो भाजपा से जुड़े लोग तीखी प्रतिक्रिया देते। उन्होंने यह भी पूछा कि पार्टी अपने करीबी माने जाने वाले कथावाचकों और बाबाओं की टिप्पणियों पर नियंत्रण या जवाबदेही सुनिश्चित क्यों नहीं करती। उनकी प्रतिक्रिया के जरिए इस विवाद को लेकर भाजपा की भूमिका पर सवाल उठाया गया।

छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी धीरेंद्र शास्त्री पर निशाना साधा। उन्होंने व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा कि इस तरह की टिप्पणी करने वाले व्यक्ति की जाँच कराई जानी चाहिए। भूपेश बघेल ने भगवान राम और भगवान कृष्ण के बीच अंतर बताने की कोशिश पर सवाल उठाते हुए कहा कि अयोध्या और वृंदावन के धार्मिक महत्व को एक-दूसरे के खिलाफ खड़ा नहीं किया जा सकता। उन्होंने आरोप लगाया कि हिंदू धर्म की बात करने वाले कुछ लोग अब हिंदुओं के आराध्य देवी-देवताओं को लेकर ही ऐसी टिप्पणियाँ कर रहे हैं। उन्होंने उन लोगों से भी सवाल किया जो धार्मिक भावनाओं को लेकर मुखर रहते हैं, लेकिन इस मामले पर प्रतिक्रिया नहीं दे रहे हैं।

विपक्षी नेताओं की प्रतिक्रियाओं के बीच विवाद बढ़ता देख धीरेंद्र शास्त्री ने भी अपना पक्ष रखा। उन्होंने एक वीडियो जारी किया,जिसमें हाथ जोड़कर माफी मांगी। उन्होंने कहा कि कथा के दौरान कही गई उनकी बात का गलत अर्थ निकाला गया है। उनके अनुसार, वह विनोद और भक्ति भाव के बीच अपनी बात रख रहे थे। उनका उद्देश्य भगवान श्रीकृष्ण के स्वरूप का अपमान करना या किसी की धार्मिक भावनाओं को चोट पहुँचाना नहीं था। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी टिप्पणी को जिस तरह समझा जा रहा है,उनका आशय वैसा नहीं था।

धीरेंद्र शास्त्री ने माफी माँगते हुए यह भी संकेत दिया कि कथा के दौरान कही गई बात को संदर्भ से अलग करके देखा जा रहा है। उनका कहना था कि वह भक्ति रस और सहज हास्य के भाव में बोल रहे थे। हालाँकि,उनके बयान के बाद उठे विवाद ने यह सवाल खड़ा कर दिया कि धार्मिक मंचों पर देवी-देवताओं के स्वरूप और उनकी लीलाओं का उल्लेख करते समय शब्दों के चयन में कितनी सावधानी बरतनी चाहिए। खासकर तब,जब बड़ी संख्या में श्रद्धालु किसी कथा या धार्मिक आयोजन को सुनने के लिए उपस्थित होते हैं और वक्ता की बातों को आस्था से जोड़कर देखते हैं।

इस पूरे विवाद में भगवान राम और भगवान श्रीकृष्ण के स्वरूपों को लेकर अलग-अलग धार्मिक भावनाओं और व्याख्याओं का मुद्दा भी सामने आया है। प्रियंका चतुर्वेदी ने जहाँ त्रिभंगी मुद्रा के आध्यात्मिक महत्व पर जोर दिया,वहीं तेजस्वी यादव ने दोनों अवतारों को एक-दूसरे का पूरक बताया। अखिलेश यादव ने टिप्पणी को धार्मिक मर्यादा के खिलाफ बताते हुए कार्रवाई की माँग की,जबकि महुआ मोइत्रा और भूपेश बघेल ने भाजपा नेताओं की चुप्पी पर सवाल उठाए। दूसरी ओर,धीरेंद्र शास्त्री ने अपनी बात को विनोद और भक्ति भाव में कही गई टिप्पणी बताते हुए माफी माँग ली है।

फिलहाल इस मामले में राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ और धार्मिक बहस दोनों जारी हैं। धीरेंद्र शास्त्री की माफी के बावजूद विपक्षी नेताओं की नाराजगी सामने आ रही है। इस विवाद ने एक बार फिर धार्मिक आयोजनों में दिए जाने वाले बयानों,आस्था से जुड़े विषयों पर सार्वजनिक टिप्पणी और उनके राजनीतिक प्रभाव को चर्चा में ला दिया है। अब यह देखना होगा कि माफी के बाद विवाद शांत होता है या इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी आगे भी जारी रहती है।