चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नहयान (तस्वीर क्रेडिट@loong_of)

मध्य पूर्व में शांति के लिए चीन का चार सूत्रीय प्रस्ताव,शी जिनपिंग ने दिया वैश्विक संदेश

बीजिंग,15 अप्रैल (युआईटीवी)- मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और अस्थिरता के बीच चीन ने शांति और स्थिरता के लिए एक अहम पहल की है। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने क्षेत्र में स्थायी समाधान की दिशा में चार सूत्रीय प्रस्ताव पेश किया है। यह प्रस्ताव उन्होंने चीन के दौरे पर आए अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नहयान के साथ बैठक के बाद रखा।

चीन की सरकारी समाचार एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार,शी जिनपिंग ने इस दौरान कहा कि मध्य पूर्व और खाड़ी क्षेत्र में शांति बनाए रखने के लिए शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व का सिद्धांत बेहद आवश्यक है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि क्षेत्र के देशों को आपसी सहयोग और समझ के जरिए एक साझा,व्यापक और टिकाऊ सुरक्षा ढांचा तैयार करना चाहिए,जिससे दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित हो सके।

शी जिनपिंग ने अपने प्रस्ताव के पहले बिंदु में शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व की प्रतिबद्धता को सबसे अहम बताया। उन्होंने कहा कि खाड़ी क्षेत्र के देश एक-दूसरे के पड़ोसी हैं और उन्हें अलग नहीं किया जा सकता। ऐसे में उनके बीच सहयोग और संवाद को बढ़ावा देना बेहद जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि क्षेत्रीय देशों को अपने संबंधों को मजबूत बनाने के लिए हरसंभव प्रयास करना चाहिए,ताकि एक स्थायी शांति व्यवस्था स्थापित हो सके।

दूसरे बिंदु में शी जिनपिंग ने राष्ट्रीय संप्रभुता के सिद्धांत पर जोर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि हर देश की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान किया जाना चाहिए। खासकर विकासशील देशों के लिए यह उनके अस्तित्व और प्रगति का आधार है। उन्होंने कहा कि किसी भी परिस्थिति में किसी देश की संप्रभुता का उल्लंघन नहीं होना चाहिए और यह अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था का मूल सिद्धांत होना चाहिए।

तीसरे बिंदु में उन्होंने अंतरराष्ट्रीय कानून के सम्मान को आवश्यक बताया। शी जिनपिंग ने कहा कि वैश्विक शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए अंतर्राष्ट्रीय नियमों और कानूनों का पालन करना अनिवार्य है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इन सिद्धांतों की अनदेखी की गई,तो दुनिया फिर से ताकत के आधार पर चलने वाली व्यवस्था की ओर लौट सकती है,जो वैश्विक अस्थिरता को जन्म दे सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि दुनिया को ‘जंगल के कानून’ जैसी अराजक स्थिति से बचाना जरूरी है।

अपने चौथे और अंतिम बिंदु में चीनी राष्ट्रपति ने विकास और सुरक्षा के बीच संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि सभी देशों को मिलकर ऐसा वातावरण तैयार करना चाहिए,जिसमें खाड़ी देशों का आर्थिक और सामाजिक विकास सुचारू रूप से हो सके। इसके लिए सकारात्मक सहयोग और पारस्परिक विश्वास बेहद जरूरी है।

शी जिनपिंग ने यह भी स्पष्ट किया कि क्षेत्र में शांति स्थापित करने के लिए सभी देशों की सुरक्षा,नागरिकों की रक्षा और संस्थानों की सुरक्षा सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि यह केवल किसी एक देश की जिम्मेदारी नहीं है,बल्कि पूरी अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को मिलकर इस दिशा में प्रयास करने होंगे।

विशेषज्ञों का मानना है कि चीन का यह प्रस्ताव ऐसे समय में आया है,जब मध्य पूर्व में कई मोर्चों पर तनाव बना हुआ है। ईरान,इजरायल और अन्य क्षेत्रीय शक्तियों के बीच बढ़ते टकराव ने स्थिति को और जटिल बना दिया है। ऐसे में चीन की यह पहल एक संतुलित और कूटनीतिक समाधान की दिशा में एक प्रयास के रूप में देखी जा रही है।

चीन लंबे समय से खुद को एक जिम्मेदार वैश्विक शक्ति के रूप में प्रस्तुत करता रहा है और यह प्रस्ताव उसी नीति का हिस्सा माना जा रहा है। बीजिंग की कोशिश है कि वह मध्य पूर्व में एक स्थिर और शांतिपूर्ण वातावरण बनाने में रचनात्मक भूमिका निभाए।

राष्ट्रपति शी जिनपिंग का चार सूत्रीय प्रस्ताव न केवल मध्य पूर्व के लिए,बल्कि वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए भी महत्वपूर्ण संदेश देता है। यह प्रस्ताव दर्शाता है कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में संवाद,सहयोग और अंतर्राष्ट्रीय नियमों का पालन ही स्थायी समाधान का मार्ग हो सकता है। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि इस प्रस्ताव को अंतर्राष्ट्रीय समुदाय किस तरह से स्वीकार करता है और इसे लागू करने की दिशा में क्या कदम उठाए जाते हैं।