नई दिल्ली,29 जुलाई (युआईटीवी)- विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बुधवार को भारत में जर्मनी के राजदूत फिलिप एकरमैन से उनकी विदाई से पहले मुलाकात की और भारत-जर्मनी संबंधों को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाने में उनके योगदान की सराहना की। इस अवसर पर दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय सहयोग,रणनीतिक साझेदारी और भविष्य के संबंधों को लेकर चर्चा हुई। विदेश मंत्री ने एकरमैन के कार्यकाल को भारत और जर्मनी के रिश्तों के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए उनके आगामी दायित्वों के लिए शुभकामनाएँ भी दीं। यह मुलाकात ऐसे समय हुई है,जब भारत और जर्मनी रक्षा,व्यापार, प्रौद्योगिकी,ऊर्जा,जलवायु परिवर्तन और वैश्विक मुद्दों पर अपने सहयोग को लगातार विस्तार दे रहे हैं।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने इस मुलाकात की जानकारी सोशल मीडिया मंच एक्स पर साझा की। उन्होंने लिखा कि जर्मनी के राजदूत फिलिप एकरमैन के विदा होने से पहले उनसे मुलाकात कर खुशी हुई। उन्होंने कहा कि भारत-जर्मनी रणनीतिक साझेदारी को मजबूत बनाने में एकरमैन के बहुमूल्य योगदान की उन्होंने सराहना की और उनके भविष्य के लिए अपनी शुभकामनाएँ व्यक्त कीं। विदेश मंत्री का यह संदेश दोनों देशों के बीच गहरे होते संबंधों और एकरमैन की भूमिका को रेखांकित करता है।
पिछले कुछ वर्षों में भारत और जर्मनी के संबंधों में उल्लेखनीय विस्तार देखने को मिला है। दोनों देश केवल आर्थिक साझेदार ही नहीं,बल्कि वैश्विक रणनीतिक सहयोगी के रूप में भी अपनी भूमिका को लगातार मजबूत कर रहे हैं। रक्षा सहयोग, हरित ऊर्जा, जलवायु परिवर्तन,डिजिटल तकनीक,कौशल विकास,विज्ञान एवं अनुसंधान,सेमीकंडक्टर,कृत्रिम बुद्धिमत्ता और स्वच्छ प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच सहयोग लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में फिलिप एकरमैन का कार्यकाल भारत-जर्मनी संबंधों के लिए एक महत्वपूर्ण दौर माना जाता है।
फिलिप एकरमैन का भारत से जुड़ाव केवल उनके राजदूत कार्यकाल तक सीमित नहीं रहा है। वह इससे पहले भी नई दिल्ली में महत्वपूर्ण कूटनीतिक जिम्मेदारियां निभा चुके हैं। जर्मन मिशन के अनुसार उन्होंने बॉन,हीडलबर्ग और उट्रेक्ट विश्वविद्यालयों से कला इतिहास और अर्थशास्त्र का अध्ययन किया। वर्ष 1993 में उन्होंने कला इतिहास में डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की और उसी वर्ष जर्मन विदेश सेवा में शामिल हुए। शैक्षणिक पृष्ठभूमि और प्रशासनिक अनुभव का यह संयोजन उनके पूरे कूटनीतिक करियर में स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।
Pleased to receive German Ambassador @AmbAckermann for a farewell call-on.
Appreciated his valuable contributions to the strengthening of 🇮🇳 🇩🇪 Strategic Partnership. Conveyed my best wishes for future endeavours. pic.twitter.com/wkRUPY97AV
— Dr. S. Jaishankar (@DrSJaishankar) July 29, 2026
जर्मन विदेश सेवा में शामिल होने के बाद फिलिप एकरमैन ने दुनिया के कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में अपनी सेवाएं दीं। उन्होंने मोरक्को की राजधानी रबात में जर्मनी का प्रतिनिधित्व किया और बाद में न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र में जर्मनी के स्थायी मिशन में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। बहुपक्षीय कूटनीति और अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं के साथ काम करने का यह अनुभव आगे चलकर उनके करियर की महत्वपूर्ण पूँजी बना।
वर्ष 2006 और 2007 के दौरान उन्होंने अफगानिस्तान के कुंदुज में जर्मन प्रांतीय पुनर्निर्माण दल का नेतृत्व किया। यह वह समय था,जब अफगानिस्तान पुनर्निर्माण और स्थिरता की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास कर रहा था। चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में नेतृत्व करते हुए एकरमैन ने विकास,पुनर्निर्माण और स्थानीय प्रशासन के साथ समन्वय स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस अनुभव ने उन्हें संघर्षग्रस्त क्षेत्रों में कार्य करने की व्यावहारिक समझ भी प्रदान की।
भारत के साथ उनका संबंध वर्ष 2007 से और मजबूत हुआ,जब उन्हें नई दिल्ली स्थित जर्मन दूतावास में राजनीतिक सलाहकार के रूप में नियुक्त किया गया। वर्ष 2007 से 2010 तक उन्होंने भारत की राजनीतिक व्यवस्था,विदेश नीति और द्विपक्षीय संबंधों से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण विषयों पर कार्य किया। भारत में उनका यह शुरुआती कार्यकाल आगे चलकर उन्हें भारतीय परिदृश्य को गहराई से समझने में सहायक बना और यही अनुभव बाद में राजदूत के रूप में उनकी भूमिका में भी दिखाई दिया।
बर्लिन में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने जर्मनी के पूर्व विदेश मंत्रियों जोश्का फिशर और फ्रैंक-वाल्टर स्टाइनमायर के कार्यालयों में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। वर्ष 2002 से 2006 के बीच विदेश नीति से जुड़े विभिन्न विषयों पर उनका अनुभव और मजबूत हुआ। इसके बाद वर्ष 2010 से 2014 तक उन्होंने जर्मन विदेश मंत्रालय में अफगानिस्तान-पाकिस्तान टास्क फोर्स के प्रमुख के रूप में कार्य किया। इसी अवधि में उन्होंने अफगानिस्तान और पाकिस्तान के लिए उप-विशेष प्रतिनिधि की जिम्मेदारी भी निभाई। यह पद अत्यंत संवेदनशील माना जाता है, क्योंकि उस समय दक्षिण एशिया क्षेत्र सुरक्षा और राजनीतिक चुनौतियों का सामना कर रहा था।
वर्ष 2014 से 2016 तक फिलिप एकरमैन वाशिंगटन स्थित जर्मन दूतावास में उप-मिशन प्रमुख रहे। इस दौरान उन्होंने जर्मनी और अमेरिका के बीच रणनीतिक संबंधों को मजबूत करने में योगदान दिया। भारत में राजदूत बनने से पहले उन्होंने लगभग पाँच वर्षों तक जर्मन विदेश मंत्रालय में अफ्रीका,लैटिन अमेरिका तथा निकट और मध्य पूर्व मामलों के महानिदेशक के रूप में कार्य किया। इस भूमिका में उन्हें विभिन्न क्षेत्रों की विदेश नीति, विकास सहयोग और वैश्विक रणनीतिक मामलों का व्यापक अनुभव प्राप्त हुआ।
भारत में राजदूत के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान फिलिप एकरमैन ने दोनों देशों के बीच व्यापार,निवेश,तकनीकी सहयोग और ऊर्जा साझेदारी को नई दिशा देने का प्रयास किया। विशेष रूप से हरित ऊर्जा,जलवायु परिवर्तन से निपटने की रणनीति और सतत विकास के क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच सहयोग को बढ़ाने में उन्होंने सक्रिय भूमिका निभाई। भारत और जर्मनी दोनों ही स्वच्छ ऊर्जा और कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने के लिए कई साझा परियोजनाओं पर काम कर रहे हैं।
इस महीने की शुरुआत में एक विशेष साक्षात्कार में फिलिप एकरमैन ने कहा था कि भारत और जर्मनी नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में दीर्घकालिक और सतत विकास के लिए मिलकर कार्य कर रहे हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया था कि आने वाले वर्षों में यह साझेदारी और मजबूत होगी। उनके अनुसार दोनों देशों के पास स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन,हरित हाइड्रोजन, सौर ऊर्जा और पवन ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में सहयोग की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं।
उन्होंने पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के संदर्भ में ऊर्जा सुरक्षा के महत्व पर भी जोर दिया था। उनका कहना था कि वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए किसी एक क्षेत्र पर अत्यधिक ऊर्जा निर्भरता उचित नहीं है। उन्होंने ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा था कि इससे भविष्य में संभावित संकटों का बेहतर तरीके से सामना किया जा सकेगा। यह दृष्टिकोण भारत और जर्मनी दोनों की ऊर्जा रणनीति के अनुरूप माना जाता है।
भारत और जर्मनी के बीच संबंध पिछले कुछ वर्षों में लगातार मजबूत हुए हैं। दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के बीच नियमित संवाद,अंतर-सरकारी परामर्श,व्यापारिक साझेदारी और वैश्विक मंचों पर सहयोग ने इस रिश्ते को नई मजबूती प्रदान की है। विज्ञान,नवाचार,रक्षा, शिक्षा,कौशल विकास और जलवायु परिवर्तन जैसे अनेक क्षेत्रों में दोनों देश मिलकर काम कर रहे हैं। ऐसे में फिलिप एकरमैन का कार्यकाल इस बढ़ती साझेदारी का महत्वपूर्ण अध्याय माना जाएगा।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर द्वारा फिलिप एकरमैन को दी गई विदाई केवल एक औपचारिक कूटनीतिक मुलाकात नहीं थी,बल्कि यह भारत और जर्मनी के बीच मजबूत होते विश्वास,सहयोग और दीर्घकालिक साझेदारी का भी प्रतीक रही। आने वाले समय में दोनों देशों के बीच रणनीतिक,आर्थिक और तकनीकी सहयोग के और अधिक विस्तार की उम्मीद की जा रही है। फिलिप एकरमैन के योगदान को दोनों देशों के रिश्तों को नई दिशा देने वाले महत्वपूर्ण प्रयासों के रूप में याद किया जाएगा,जबकि उनकी विदाई के साथ भारत-जर्मनी संबंधों का यह अध्याय नई संभावनाओं की ओर आगे बढ़ता दिखाई देता है।
