अदन (यमन),4 सितंबर (युआईटीवी)- यमन में लंबे समय से जारी गृहयुद्ध के बीच हिंसा एक बार फिर तेज हो गई है। दक्षिण-पश्चिमी ताइज प्रांत में गुरुवार को सरकारी बलों और हूती विद्रोहियों के बीच हुए भीषण संघर्ष में कम से कम 25 लोगों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य घायल बताए जा रहे हैं। एक सरकारी सैन्य अधिकारी ने बताया कि मारे गए लोगों में 15 सरकारी सैनिक और 10 हूती लड़ाके शामिल हैं। संघर्ष के कारण इलाके में तनाव बढ़ गया है और बड़ी संख्या में स्थानीय परिवार सुरक्षित स्थानों की ओर जाने को मजबूर हुए हैं।
समाचार एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार, सरकारी सैन्य अधिकारी ने बताया कि ताइज प्रांत में यह संघर्ष सुबह उस समय शुरू हुआ,जब हूती लड़ाकों ने मकबाना और अल-कधा गांवों में सरकारी बलों के ठिकानों पर बड़े पैमाने पर हमला किया। हमले के दौरान दोनों पक्षों की ओर से भारी हथियारों का इस्तेमाल किया गया। इलाके में तोपखाने और मोर्टार से लगातार गोलाबारी हुई, जिससे स्थिति बेहद तनावपूर्ण हो गई।
सरकारी अधिकारी के मुताबिक, शुरुआती चरण में हूती लड़ाके कुछ इलाकों पर कब्जा करने में सफल रहे। हालाँकि, बाद में सरकारी बलों को अतिरिक्त सैन्य सहायता मिली और उन्होंने जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी। सरकारी बलों ने पलटवार करते हुए कुछ क्षेत्रों पर दोबारा नियंत्रण हासिल कर लिया। इस दौरान दोनों पक्षों के बीच कई घंटे तक भीषण लड़ाई जारी रही।
संघर्ष के कारण स्थानीय आबादी पर भी गंभीर असर पड़ा है। स्थानीय निवासियों के हवाले से रिपोर्ट में बताया गया कि जैसे-जैसे लड़ाई तेज हुई, कई परिवार अपने घरों से निकलकर सुरक्षित इलाकों की ओर भागने लगे। भारी गोलाबारी और लगातार हमलों के बीच लोगों के लिए अपने घरों में रहना मुश्किल हो गया। हूती बलों की बढ़ती गोलाबारी ने क्षेत्र में एक बार फिर विस्थापन का संकट पैदा कर दिया है।
यमन में पहले से ही लंबे समय से जारी संघर्ष के कारण बड़ी संख्या में लोग विस्थापित हो चुके हैं। ऐसे में ताजा हिंसा ने उन परिवारों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं,जो पहले ही अस्थिर परिस्थितियों में जीवन गुजार रहे हैं। स्थानीय लोगों के लिए सुरक्षा, भोजन, आवास और बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।
ताइज में जमीनी संघर्ष के साथ-साथ पश्चिमी यमन के कई इलाकों में मिसाइल और ड्रोन हमलों की भी खबर सामने आई है। सरकारी बलों ने दावा किया है कि पिछले कुछ घंटों के दौरान हूतियों ने 14 बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। इसके अलावा ताइज और पड़ोसी होदेइदाह प्रांत के पश्चिमी तटीय क्षेत्रों में ड्रोन हमले किए गए। सरकारी पक्ष के अनुसार, उनकी वायु रक्षा प्रणालियों ने कई ड्रोन को हवा में ही मार गिराया।
हालाँकि, हूती समूह की ओर से अभी तक इन झड़पों, मिसाइल हमलों या ड्रोन हमलों को लेकर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। इसलिए सरकारी पक्ष की ओर से किए गए इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। संघर्ष वाले क्षेत्रों में लगातार जारी हिंसा और सीमित पहुँच के कारण जमीनी स्थिति की पूरी तस्वीर सामने आने में भी कठिनाई हो रही है।
यमन में हाल के दिनों में सरकारी बलों और हूती विद्रोहियों के बीच कई मोर्चों पर सैन्य गतिविधियाँ बढ़ी हैं। पिछले कुछ हफ्तों में देश के अलग-अलग हिस्सों में दोनों पक्षों के बीच झड़पों की तीव्रता बढ़ने की खबरें सामने आती रही हैं। सरकारी सेना ने हूती ठिकानों के खिलाफ ड्रोन और तोपखाने से हमले तेज किए हैं,जबकि हूती समूह ने सरकारी नियंत्रण वाले क्षेत्रों में मिसाइल और ड्रोन हमलों को बढ़ाया है।
सरकारी बलों के मुताबिक,हूतियों की गतिविधियां केवल जमीनी मोर्चों तक सीमित नहीं हैं। लाल सागर के आसपास समुद्री क्षेत्र में भी उनकी गतिविधियों को लेकर चिंता बढ़ी है। सोमवार को यमनी सरकारी बलों ने दावा किया था कि उन्होंने विस्फोटकों से भरी हूती समूह की चार नौकाओं को रोक लिया। सरकारी पक्ष के अनुसार, ये नौकाएँ लाल सागर में अंतर्राष्ट्रीय समुद्री मार्गों के नजदीक स्थित रणनीतिक हनिश द्वीप समूह और जुकर द्वीप की दिशा में बढ़ रही थीं।
यमनी सरकारी समाचार एजेंसी सबा के मुताबिक,सरकारी नौसेना ने इन नौकाओं को उनके लक्ष्य तक पहुँचने से पहले ही रोक दिया। सैन्य सूत्रों ने बताया कि रविवार और सोमवार को भी हूती नौकाओं की कई गतिविधियां देखी गई थीं। इन नौकाओं के रणनीतिक द्वीपों के आसपास पहुँचने की कोशिश करने की जानकारी सामने आई थी। हालाँकि,इस संबंध में भी हूती समूह की ओर से कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई।
लाल सागर और उसके आसपास के समुद्री मार्गों का रणनीतिक महत्व काफी अधिक है। इस क्षेत्र में बढ़ती सैन्य गतिविधियाँ न केवल यमन की आंतरिक स्थिति को प्रभावित करती हैं,बल्कि अंतर्राष्ट्रीय समुद्री यातायात के लिए भी चिंता पैदा करती हैं। लाल सागर से होकर गुजरने वाले समुद्री मार्ग वैश्विक व्यापार के लिए महत्वपूर्ण हैं। ऐसे में यहाँ किसी भी तरह का सैन्य तनाव बढ़ने से क्षेत्रीय सुरक्षा के साथ-साथ अंतर्राष्ट्रीय व्यापार पर भी असर पड़ सकता है।
ताइज प्रांत यमन के उन क्षेत्रों में शामिल है, जहाँ लंबे समय से सरकारी बलों और हूती विद्रोहियों के बीच संघर्ष चलता रहा है। भौगोलिक और रणनीतिक स्थिति के कारण इस क्षेत्र पर नियंत्रण दोनों पक्षों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। समय-समय पर यहाँ लड़ाई तेज होती रही है और इसके चलते स्थानीय नागरिकों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है।
ताजा संघर्ष ने एक बार फिर यमन में स्थायी शांति की चुनौती को सामने ला दिया है। वर्षों से चले आ रहे संघर्ष के कारण देश की अर्थव्यवस्था,स्वास्थ्य व्यवस्था और बुनियादी ढाँचा बुरी तरह प्रभावित हुआ है। लाखों लोगों को विस्थापन का सामना करना पड़ा है और बड़ी आबादी मानवीय सहायता पर निर्भर है। ऐसे में किसी भी नए सैन्य अभियान या बड़े संघर्ष का सीधा असर आम नागरिकों पर पड़ता है।
ताइज में हुई ताजा हिंसा के बाद अब सबसे बड़ी चिंता यह है कि संघर्ष कहीं दूसरे इलाकों तक न फैल जाए। यदि जमीनी लड़ाई के साथ मिसाइल, ड्रोन और समुद्री गतिविधियाँ भी बढ़ती हैं,तो यमन में सुरक्षा स्थिति और जटिल हो सकती है। इससे पहले से गंभीर मानवीय संकट का भी विस्तार होने की आशंका बढ़ जाती है।
फिलहाल सरकारी बलों और हूतियों के बीच संघर्ष जारी रहने की स्थिति में इलाके में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। 25 लोगों की मौत और कई लोगों के घायल होने के अलावा बड़ी संख्या में परिवारों का विस्थापन इस ताजा हिंसा की गंभीरता को दर्शाता है। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर यमन में संघर्ष को समाप्त करने और राजनीतिक समाधान की दिशा में प्रयासों की जरूरत लगातार बनी हुई है। ताजा घटनाक्रम ने यह भी दिखाया है कि सैन्य तनाव कम होने के बावजूद देश के कई हिस्सों में हिंसा का खतरा अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।
