ममता बनर्जी (तस्वीर क्रेडिट@VidyanandAITC)

आई-पैक और ईडी रेड विवाद पर कलकत्ता हाई कोर्ट में आज अहम सुनवाई,कोर्टरूम एंट्री सीमित

कोलकाता,14 जनवरी (युआईटीवी)- इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी (आई-पैक) के कार्यालय और इसके को-फाउंडर प्रतीक जैन के घर पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा की गई रेड और सर्च ऑपरेशन से जुड़े विवाद ने अब गंभीर कानूनी और राजनीतिक रूप ले लिया है। इस मामले में दायर तीन याचिकाओं और जवाबी याचिकाओं पर बुधवार को कलकत्ता हाई कोर्ट की सिंगल-जज बेंच सुनवाई करने जा रही है। यह सुनवाई जस्टिस सुव्रा घोष की बेंच में होनी है,जिनके समक्ष पहले भी यह मामला सूचीबद्ध था,लेकिन भारी भीड़ और अव्यवस्था के चलते सुनवाई नहीं हो सकी थी।

दरअसल, 9 जनवरी को जब इस मामले की सुनवाई होनी थी,उस समय कोर्टरूम में अत्यधिक भीड़ जमा हो गई थी। स्थिति इतनी अव्यवस्थित हो गई कि जस्टिस सुव्रा घोष को कोर्टरूम छोड़कर जाना पड़ा और उस दिन कोई प्रभावी सुनवाई नहीं हो सकी। इसके बाद अदालत ने अगली तारीख बुधवार तय की। इसी घटनाक्रम को ध्यान में रखते हुए कलकत्ता हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सुजॉय पॉल ने मंगलवार को एक विशेष नोटिफिकेशन जारी किया। इस नोटिफिकेशन में निर्देश दिया गया कि सुनवाई के दौरान कोर्टरूम में प्रवेश को सीमित रखा जाएगा और केवल उन्हीं पक्षकारों तथा उनके वकीलों को अंदर जाने की अनुमति होगी,जो सीधे तौर पर इन तीनों याचिकाओं से जुड़े हैं।

हालाँकि,इस बात को लेकर अब भी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है कि क्या जस्टिस सुव्रा घोष ही अंततः इस मामले की सुनवाई करेंगी। इसकी वजह यह है कि इसी विवाद से जुड़ी प्रवर्तन निदेशालय की एक याचिका सुप्रीम कोर्ट में भी लंबित है। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि हाई कोर्ट में समानांतर सुनवाई किस हद तक आगे बढ़ पाएगी और क्या सुप्रीम कोर्ट के किसी संभावित निर्देश का इस पर असर पड़ेगा।

जस्टिस घोष की बेंच के समक्ष जिस याचिका पर सुनवाई होनी है,वह स्वयं ईडी द्वारा दायर की गई है। इस याचिका में ईडी ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। एजेंसी का कहना है कि 8 जनवरी को जब ईडी के अधिकारी आई-पैक के कार्यालय और प्रतीक जैन के घर पर रेड और सर्च ऑपरेशन कर रहे थे,उस दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मौके पर पहुँचकर केंद्रीय एजेंसी के अधिकारियों के सरकारी कार्य में बाधा डाली। ईडी ने आरोप लगाया है कि मुख्यमंत्री ने अपने संवैधानिक पद का दुरुपयोग किया और जांच प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश की।

ईडी ने अपनी याचिका में इस पूरे घटनाक्रम की जाँच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से कराए जाने की माँग भी की है। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को इस मामले में एक पक्षकार बनाया गया है। एजेंसी ने यह भी कहा है कि रेड के दौरान मुख्यमंत्री के साथ मौजूद कुछ वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध है और इसकी भी जाँच होनी चाहिए। ईडी का आरोप है कि ये पुलिस अधिकारी ईडी के अधिकारियों के साथ मौके पर पहुँचे और कथित तौर पर कुछ कागजी फाइलें तथा इलेक्ट्रॉनिक दस्तावेज इकट्ठा कर वहाँ से चले गए,जिससे जाँच प्रभावित हुई।

इस मामले में तृणमूल कांग्रेस ने भी जोरदार पलटवार किया है। पार्टी की ओर से दायर काउंटर-पिटीशन में ईडी की कार्रवाई के पीछे राजनीतिक मंशा होने का आरोप लगाया गया है। तृणमूल का कहना है कि इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी इस समय पार्टी की वोटर-स्ट्रेटेजी एजेंसी के तौर पर काम कर रही है और 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के लिए रणनीति तैयार कर रही है। पार्टी का आरोप है कि ईडी की रेड का असली मकसद इसी चुनावी रणनीति से जुड़े अहम दस्तावेजों को जब्त करना था।

तृणमूल कांग्रेस ने अपनी याचिका में यह भी दावा किया है कि इन दस्तावेजों को जब्त कर उन्हें भारतीय जनता पार्टी के साथ साझा करने की साजिश रची जा रही थी,ताकि आगामी विधानसभा चुनावों में सत्तारूढ़ पार्टी को नुकसान पहुँचाया जा सके। पार्टी ने ईडी की कार्रवाई को पूरी तरह राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित बताया है और इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर हमला करार दिया है।

यह मामला अब केवल एक जाँच एजेंसी की कार्रवाई तक सीमित नहीं रह गया है,बल्कि इसमें संवैधानिक पदों की मर्यादा,केंद्रीय एजेंसियों की भूमिका और संघीय ढाँचे से जुड़े गंभीर सवाल भी उठ खड़े हुए हैं। एक तरफ ईडी मुख्यमंत्री पर जाँच में हस्तक्षेप का आरोप लगा रही है,तो दूसरी ओर सत्तारूढ़ दल इसे चुनाव से पहले विपक्ष को कमजोर करने की कोशिश बता रहा है।

बुधवार को होने वाली सुनवाई को इस लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है कि इसमें अदालत यह तय कर सकती है कि इस विवाद में आगे की कानूनी दिशा क्या होगी। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि हाई कोर्ट इस मामले में कोई अंतरिम आदेश देता है या सुप्रीम कोर्ट में लंबित याचिका के मद्देनज़र सुनवाई को सीमित रखता है। कुल मिलाकर, आई-पैक और ईडी रेड से जुड़ा यह मामला आने वाले दिनों में पश्चिम बंगाल की राजनीति और केंद्र-राज्य संबंधों पर गहरा असर डाल सकता है।