वॉशिंगटन,19 सितंबर (युआईटीवी)- अमेरिका और चीन के बीच संबंधों को लेकर चल रही अहम बातचीत के बीच चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की आगामी अमेरिका यात्रा पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हैं। इस यात्रा के दौरान वॉशिंगटन में उनके सम्मान में व्हाइट हाउस में एक भव्य राजकीय रात्रिभोज का आयोजन किया जाएगा। इस खास आयोजन में दुनिया की प्रमुख तकनीकी और कारोबारी कंपनियों से जुड़े कई बड़े नाम शामिल होंगे। मेहमानों की घोषित सूची में गूगल के प्रमुख सुंदर पिचाई,टेस्ला और स्पेसएक्स से जुड़े कारोबारी एलन मस्क तथा अमेजन के संस्थापक जेफ बेजोस के नाम भी शामिल बताए गए हैं। इनके अलावा माइकल डेल,जेन्सेन हुआंग, सैम ऑल्टमैन,जेन फ्रेजर और टिम कुक जैसे कारोबारी दिग्गज भी इस आयोजन का हिस्सा होंगे।
यह राजकीय रात्रिभोज ऐसे समय में आयोजित किया जा रहा है,जब अमेरिका और चीन के बीच कई महत्वपूर्ण आर्थिक और रणनीतिक मुद्दों पर बातचीत की तैयारी चल रही है। दोनों देशों के बीच कृत्रिम बुद्धिमत्ता, व्यापार, निर्यात नियंत्रण, दुर्लभ खनिजों की आपूर्ति और औद्योगिक क्षेत्र में निवेश जैसे विषय पहले से ही चर्चा के केंद्र में हैं। ऐसे में व्हाइट हाउस के इस आयोजन में दुनिया की बड़ी तकनीकी कंपनियों के प्रमुखों की मौजूदगी को खास महत्व दिया जा रहा है। हालांकि अमेरिकी अधिकारियों ने अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि डिनर में शामिल होने वाले कारोबारी नेताओं की दोनों राष्ट्राध्यक्षों के बीच होने वाली औपचारिक बातचीत में कोई प्रत्यक्ष भूमिका होगी या नहीं।
व्हाइट हाउस के ईस्ट रूम में गुरुवार को आयोजित होने वाले इस विशेष रात्रिभोज की मेजबानी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनकी पत्नी मेलानिया ट्रंप करेंगे। उनके साथ चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग,उनकी पत्नी पेंग लियुआन और चीन का प्रतिनिधिमंडल भी मौजूद रहेगा। कार्यक्रम की शुरुआत दोनों राष्ट्रपतियों के संबोधन से होने की संभावना है। अमेरिकी प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इस आयोजन को वॉशिंगटन में काफी चर्चित कार्यक्रम बताते हुए कहा कि इसमें राजनीति, कूटनीति, तकनीक और व्यापार जगत की कई प्रमुख हस्तियों की मौजूदगी रहेगी।
मेहमानों की सूची में तकनीकी क्षेत्र के जिन नामों को शामिल किया गया है,वे अमेरिका और चीन के बीच होने वाली कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जुड़ी बातचीत के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण माने जाते हैं। सुंदर पिचाई, जेन्सेन हुआंग, सैम ऑल्टमैन और टिम कुक जैसी हस्तियाँ वैश्विक तकनीकी उद्योग की प्रमुख आवाजों में शामिल हैं। वहीं एलन मस्क और जेफ बेजोस जैसे कारोबारी अंतरिक्ष, इलेक्ट्रिक वाहन, ई-कॉमर्स और अन्य उभरती तकनीकों से जुड़े बड़े कारोबारी हितों का प्रतिनिधित्व करते हैं। माइकल डेल और जेन फ्रेजर की मौजूदगी भी व्यापार और वित्तीय क्षेत्र के नजरिए से महत्वपूर्ण होगी।
अमेरिका और चीन के शीर्ष नेताओं की बातचीत में कृत्रिम बुद्धिमत्ता को प्रमुख मुद्दों में से एक माना जा रहा है। एआई तकनीक को लेकर दोनों देशों के बीच प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ी है और इसके साथ ही उन्नत तकनीकी उपकरणों तथा चिप से जुड़ी तकनीक के निर्यात पर लगाए गए नियंत्रण भी चर्चा का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, दोनों नेताओं के एजेंडे में एआई के साथ मौजूदा व्यापार व्यवस्था भी शामिल है। ब्रीफिंग के दौरान इस व्यवस्था को ‘बुसान ट्रूस’ के नाम से भी संबोधित किया गया। हालांकि अधिकारियों ने यह अनुमान लगाने से इनकार किया कि आगामी बातचीत के दौरान किसी बड़े नए समझौते पर सहमति बन सकती है या नहीं।
राष्ट्रपतियों की मुलाकात से पहले न्यूयॉर्क में दोनों देशों के वरिष्ठ प्रतिनिधियों के बीच बातचीत होने की भी उम्मीद जताई गई थी। इन वार्ताओं में एआई से जुड़े मुद्दों पर चर्चा को भी शामिल किया गया। हालाँकि,अमेरिकी अधिकारियों ने यह जानकारी सार्वजनिक नहीं की कि इन वार्ताओं में वॉशिंगटन की ओर से कौन-कौन से विशेष प्रस्ताव रखे जाएंगे। व्यापार के मोर्चे पर कुछ ऐसे सामानों पर शुल्क में सीमित कटौती की संभावना पर चर्चा हो सकती है, जिन्हें संवेदनशील या रणनीतिक श्रेणी में नहीं रखा जाता। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, उत्पादों की एक सीमित श्रेणी के लिए शुल्क में कमी पर विचार हुआ है,लेकिन संबंधित वस्तुओं के नाम सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।
दूसरी ओर,दुर्लभ खनिजों की आपूर्ति और निर्यात नियंत्रण को लेकर दोनों देशों के बीच मतभेद बने हुए हैं। दुर्लभ खनिज आधुनिक तकनीक, इलेक्ट्रिक वाहन, रक्षा उपकरण और कई औद्योगिक उत्पादों के निर्माण के लिए महत्वपूर्ण माने जाते हैं। चीन वैश्विक दुर्लभ खनिज आपूर्ति श्रृंखला में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है। ऐसे में इन खनिजों की आपूर्ति को लेकर दोनों देशों के बीच बातचीत का आर्थिक और रणनीतिक महत्व बढ़ जाता है।
अमेरिकी अधिकारी ने स्पष्ट किया कि वॉशिंगटन खनिजों की आपूर्ति के बदले अपने निर्यात नियंत्रण में ढील देने के लिए तैयार नहीं है। अमेरिकी पक्ष का मानना है कि चीन पहले ही कुछ खनिजों की आपूर्ति करने पर सहमति जता चुका है। हालाँकि,अधिकारी के अनुसार, चीन की ओर से हुई आपूर्ति अमेरिका की अपेक्षाओं के अनुरूप नहीं रही है। यही वजह है कि आगामी वार्ता में इस विषय को फिर से उठाया जा सकता है। इससे संकेत मिलता है कि दोनों देशों के बीच व्यापार संबंधों में केवल शुल्क ही नहीं,बल्कि आपूर्ति श्रृंखला और तकनीकी नियंत्रण भी अहम मुद्दे बने हुए हैं।
अमेरिकी ऑटोमोबाइल बाजार में चीनी निवेश को लेकर भी सवाल उठाए गए। इस पर अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि चीन से आने वाले निवेश को अमेरिका के मौजूदा सुरक्षा नियमों और संबंधित कानूनों का पालन करना होगा। इससे स्पष्ट है कि वॉशिंगटन चीनी कंपनियों के निवेश को केवल आर्थिक दृष्टिकोण से नहीं,बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े नियमों के दायरे में भी देख रहा है।
शी जिनपिंग की राजकीय यात्रा बुधवार से शुरू होगी। उनकी यात्रा के दौरान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और अमेरिकी प्रशासन की ओर से कई औपचारिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। शी जिनपिंग और पेंग लियुआन के अमेरिका पहुँचने पर जॉइंट बेस एंड्रयूज में औपचारिक स्वागत समारोह आयोजित किया जाएगा। इसके बाद गुरुवार को मुख्य राजकीय कार्यक्रम होंगे। इनमें स्वागत समारोह, सैन्य परेड और दोनों राष्ट्रपतियों के बीच द्विपक्षीय बैठक शामिल होगी।
गुरुवार को मेलानिया ट्रंप और पेंग लियुआन के लिए भी अलग कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। अमेरिकी प्रथम महिला का कार्यालय इस कार्यक्रम से जुड़ी अतिरिक्त जानकारी जारी कर सकता है। इसके बाद दोनों राष्ट्राध्यक्ष और उनकी पत्नियाँ शुक्रवार को व्हाइट हाउस में निजी चाय के लिए दोबारा मुलाकात करेंगी। इस मुलाकात के बाद वे राष्ट्रीय अभिलेखागार का दौरा करेंगे।
राष्ट्रीय अभिलेखागार की यात्रा का भी विशेष महत्व होगा। अमेरिका अपनी 250वीं वर्षगांठ मना रहा है और इस अवसर पर दोनों देशों के शीर्ष नेताओं को अमेरिकी इतिहास से जुड़े महत्वपूर्ण शुरुआती दस्तावेज दिखाए जाएँगे। इसके बाद शी जिनपिंग जॉइंट बेस एंड्रयूज के लिए रवाना होंगे और वहाँ से उनकी अमेरिका यात्रा का अगला चरण पूरा होगा।
शी जिनपिंग की यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है,जब अमेरिका और चीन के रिश्तों में आर्थिक प्रतिस्पर्धा के साथ-साथ सहयोग की संभावनाएँ भी चर्चा में हैं। व्यापार शुल्क, एआई,तकनीकी निर्यात, दुर्लभ खनिजों की आपूर्ति और निवेश जैसे मुद्दों पर दोनों देशों के हित कई जगह एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं, जबकि कुछ क्षेत्रों में मतभेद भी मौजूद हैं। ऐसे में राजकीय रात्रिभोज केवल एक औपचारिक कूटनीतिक कार्यक्रम नहीं होगा,बल्कि इसमें शामिल होने वाली कारोबारी और तकनीकी दुनिया की प्रमुख हस्तियों के कारण इसकी व्यावसायिक और तकनीकी पृष्ठभूमि भी महत्वपूर्ण होगी। हालांकि इन मेहमानों की मौजूदगी को दोनों राष्ट्राध्यक्षों की आधिकारिक बातचीत से जोड़कर कोई औपचारिक भूमिका अभी तय नहीं की गई है। आने वाले दिनों में अमेरिका और चीन के बीच होने वाली बैठकों से यह स्पष्ट होगा कि व्यापार और तकनीक से जुड़े मुद्दों पर दोनों पक्ष किस स्तर तक सहमति बना पाते हैं।
