नीरज चोपड़ा (तस्वीर क्रेडिट@VPIndia)

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत की जैवलिन में डबल सफलता,नीरज चोपड़ा ने जीता रजत और यशवीर सिंह ने कांस्य पदक

ग्लासगो,1 अगस्त (युआईटीवी)- कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय एथलेटिक्स ने एक बार फिर शानदार प्रदर्शन करते हुए देश का गौरव बढ़ाया है। शुक्रवार देर रात भारतीय समयानुसार आयोजित पुरुषों की जैवलिन थ्रो स्पर्धा में भारत ने दो पदक अपने नाम किए। ओलंपिक पदक विजेता नीरज चोपड़ा ने शानदार प्रदर्शन करते हुए रजत पदक हासिल किया,जबकि युवा खिलाड़ी यशवीर सिंह ने अपने करियर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए कांस्य पदक जीता। इस स्पर्धा का स्वर्ण पदक श्रीलंका के रुमेश थरंगा पथिराज ने अपने नाम किया,जिन्होंने 89.75 मीटर का बेहतरीन थ्रो कर प्रतियोगिता में पहला स्थान हासिल किया।

जैवलिन थ्रो के फाइनल में शुरुआत से ही कड़ा मुकाबला देखने को मिला। सभी खिलाड़ियों ने अपने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन का प्रयास किया,लेकिन अंत में श्रीलंका के रुमेश थरंगा पथिराज सबसे आगे रहे। उन्होंने 89.75 मीटर का शानदार थ्रो कर न केवल स्वर्ण पदक जीता,बल्कि पूरे मुकाबले में अपना दबदबा भी बनाए रखा। भारतीय खिलाड़ियों ने भी लगातार चुनौती पेश की और अंततः दो पदक जीतकर देश को बड़ी सफलता दिलाई।

नीरज चोपड़ा ने प्रतियोगिता की शुरुआत 80.97 मीटर के थ्रो के साथ की। पहले प्रयास में उन्होंने संतुलित शुरुआत की और इसके बाद दूसरे प्रयास में अपने प्रदर्शन को और बेहतर बनाते हुए 85.83 मीटर की दूरी तक भाला फेंका। यह इस सत्र का उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन रहा। दूसरे प्रयास के बाद नीरज ने लगातार अपनी लय बनाए रखने की कोशिश की। तीसरे प्रयास में उन्होंने 81.29 मीटर और चौथे प्रयास में 80.73 मीटर का थ्रो किया। हालांकि वह अपने दूसरे प्रयास की दूरी को पार नहीं कर सके,लेकिन 85.83 मीटर का उनका सर्वश्रेष्ठ थ्रो उन्हें रजत पदक दिलाने के लिए पर्याप्त साबित हुआ।

ओलंपिक और विश्व स्तर की प्रतियोगिताओं में लगातार शानदार प्रदर्शन करने वाले नीरज चोपड़ा ने एक बार फिर बड़े मंच पर अपनी निरंतरता दिखाई। हालाँकि,इस बार वह स्वर्ण पदक से चूक गए,लेकिन उन्होंने सीजन का अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए यह स्पष्ट कर दिया कि वह अब भी दुनिया के शीर्ष जैवलिन खिलाड़ियों में शामिल हैं। उनका रजत पदक भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण रहा और इससे एथलेटिक्स में देश का पदक अभियान और मजबूत हुआ।

इस प्रतियोगिता की सबसे प्रेरणादायक कहानी यशवीर सिंह की रही। उन्होंने पूरे मुकाबले में धैर्य और आत्मविश्वास का परिचय दिया। शुरुआत में उनका प्रदर्शन सामान्य रहा, लेकिन अंतिम चरण में उन्होंने शानदार वापसी करते हुए कांस्य पदक अपने नाम कर लिया। यशवीर ने अपने दूसरे प्रयास में 78.55 मीटर की दूरी तय की। इसके बाद तीसरे प्रयास में उन्होंने 81.33 मीटर का थ्रो किया और पदक की दौड़ में बने रहे। पाँचवें प्रयास में वह केवल 76.95 मीटर तक ही भाला फेंक सके,जिससे ऐसा लगने लगा कि उनके लिए पदक जीतना मुश्किल हो सकता है।

लेकिन अंतिम प्रयास में यशवीर सिंह ने असाधारण प्रदर्शन किया। उन्होंने 85.41 मीटर का शानदार थ्रो किया,जो न केवल उनके करियर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन रहा,बल्कि उन्हें सीधे कांस्य पदक तक भी ले गया। अंतिम प्रयास में किया गया यह थ्रो पूरे मुकाबले का सबसे बड़ा मोड़ साबित हुआ। इस प्रदर्शन ने यह भी साबित किया कि दबाव की परिस्थितियों में भी वह बड़े मंच पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने की क्षमता रखते हैं।

भारत की ओर से इस स्पर्धा में रोहित यादव ने भी हिस्सा लिया। उन्होंने प्रतियोगिता में कुल 81.56 मीटर की सर्वश्रेष्ठ दूरी तय की और सातवें स्थान पर रहे। रोहित ने पहले प्रयास में 77.50 मीटर का थ्रो किया। इसके बाद दूसरे प्रयास में उन्होंने 81.56 मीटर की दूरी हासिल की,जो उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन रहा। चौथे प्रयास में उन्होंने 73.70 मीटर और छठे प्रयास में 79.55 मीटर की दूरी तय की। हालाँकि,वह पदक की दौड़ में शामिल नहीं हो सके,लेकिन उनका प्रदर्शन भी संतोषजनक माना गया।

पुरुषों की जैवलिन थ्रो स्पर्धा में भारत के दो खिलाड़ियों का पदक जीतना भारतीय एथलेटिक्स के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। पिछले कुछ वर्षों में भारत ने जैवलिन थ्रो में लगातार अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी मजबूत पहचान बनाई है। नीरज चोपड़ा की सफलता के बाद इस स्पर्धा में कई नए खिलाड़ी सामने आए हैं और यशवीर सिंह का प्रदर्शन इसी सकारात्मक बदलाव का उदाहरण माना जा रहा है।

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में इस सफलता के साथ भारत का कुल पदक प्रदर्शन भी और बेहतर हो गया है। अब तक भारतीय दल 23 पदक अपने नाम कर चुका है। इनमें 5 स्वर्ण, 12 रजत और 6 कांस्य पदक शामिल हैं। विभिन्न खेलों में भारतीय खिलाड़ियों के निरंतर अच्छे प्रदर्शन ने पदक तालिका में देश की स्थिति को मजबूत किया है और आने वाले मुकाबलों से भी पदकों की उम्मीद बनी हुई है।

एथलेटिक्स और पैरा एथलेटिक्स भारत के लिए सबसे सफल खेलों में से एक बनकर उभरे हैं। इन दोनों वर्गों को मिलाकर भारत अब तक कुल 11 पदक जीत चुका है। ट्रैक और फील्ड स्पर्धाओं में भारतीय खिलाड़ियों ने कई ऐतिहासिक प्रदर्शन किए हैं और देश को लगातार गौरव दिलाया है। जैवलिन थ्रो में मिले दो नए पदकों ने इस उपलब्धि को और मजबूत कर दिया है।

जूडो में भी भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया है। इस खेल में भारत ने दो स्वर्ण पदकों सहित कुल तीन पदक जीते हैं। वहीं वेटलिफ्टिंग में भारतीय दल ने आठ पदक अपने नाम किए हैं,जिससे यह खेल भी भारत के सबसे सफल खेलों में शामिल हो गया है। इसके अतिरिक्त पैरा पावरलिफ्टिंग में भी भारत को एक कांस्य पदक मिला है,जिसने देश के कुल पदक अभियान में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

पदक तालिका की बात करें तो भारत फिलहाल 23 पदकों के साथ दसवें स्थान पर बना हुआ है। शीर्ष स्थान पर ऑस्ट्रेलिया का दबदबा कायम है। ऑस्ट्रेलिया अब तक कुल 128 पदक जीत चुका है,जिनमें 55 स्वर्ण,30 रजत और 43 कांस्य पदक शामिल हैं। दूसरे स्थान पर इंग्लैंड है,जिसने कुल 80 पदक अपने नाम किए हैं। वहीं कनाडा 53 पदकों के साथ तीसरे स्थान पर बना हुआ है।

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय खिलाड़ियों का प्रदर्शन लगातार उम्मीदों पर खरा उतर रहा है। नीरज चोपड़ा का अनुभव और यशवीर सिंह की उभरती प्रतिभा भारतीय जैवलिन थ्रो के उज्ज्वल भविष्य का संकेत दे रही है। दोनों खिलाड़ियों के पदक जीतने से यह स्पष्ट हो गया है कि भारत अब केवल एक स्टार खिलाड़ी पर निर्भर नहीं है,बल्कि उसके पास इस स्पर्धा में मजबूत और प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की नई पीढ़ी भी तैयार हो चुकी है। यही कारण है कि आने वाले अंतर्राष्ट्रीय टूर्नामेंटों में भी भारतीय जैवलिन थ्रो से बड़ी उपलब्धियों की उम्मीद की जा रही है। कॉमनवेल्थ गेम्स में मिली यह डबल सफलता भारतीय एथलेटिक्स के आत्मविश्वास को नई ऊँचाई देने वाली उपलब्धि मानी जा रही है।