नई दिल्ली,6 नवंबर (युआईटीवी)- भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने एक बार फिर अपनी ताकत का लोहा मनवाते हुए एशियन चैंपियंस ट्रॉफी 2026 का खिताब अपने नाम कर लिया है। फाइनल मुकाबले में कप्तान हरमनप्रीत सिंह की अगुवाई वाली टीम इंडिया ने जापान को 4-1 से करारी शिकस्त दी। इस शानदार जीत के साथ भारत ने न केवल अपने खिताब का बचाव किया,बल्कि लगातार तीसरी बार ट्रॉफी जीतकर टूर्नामेंट में अपना दबदबा भी कायम रखा। भारतीय टीम की इस उपलब्धि ने देशभर के हॉकी प्रशंसकों को जश्न मनाने का मौका दिया है। खास बात यह रही कि टीम ने शुरुआती पिछड़ने के बावजूद जबरदस्त वापसी करते हुए मुकाबले को एकतरफा बना दिया।
इस जीत के साथ भारत ने एशियन चैंपियंस ट्रॉफी के इतिहास में छठी बार चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया। इससे पहले भारतीय टीम 2011, 2016, 2018, 2023 और 2024 में भी यह खिताब जीत चुकी थी। लगातार तीसरी बार ट्रॉफी अपने नाम करना भारतीय हॉकी की निरंतर सफलता और टीम के मजबूत प्रदर्शन को दर्शाता है। फाइनल तक पहुँचने के लिए भारत ने सेमीफाइनल में कोरिया को हराया था। इसके बाद खिताबी मुकाबले में जापान को मात देकर टीम ने अपनी बादशाहत बरकरार रखी।
फाइनल मुकाबले की शुरुआत भारतीय टीम के लिए उम्मीद के मुताबिक नहीं रही। जापान ने पहले ही मिनटों से आक्रामक खेल दिखाया और भारतीय खिलाड़ियों पर दबाव बनाने में कामयाबी हासिल की। मैच के तीसरे मिनट में जापान के काजुमासा मात्सुमोतो ने शानदार फील्ड गोल दागकर अपनी टीम को 1-0 की बढ़त दिला दी। इस शुरुआती गोल ने भारतीय खेमे को सतर्क कर दिया,वहीं घरेलू दर्शकों के बीच भी कुछ देर के लिए सन्नाटा छा गया।
पहला गोल करने के बाद जापानी खिलाड़ियों का आत्मविश्वास बढ़ गया। उन्होंने भारतीय फॉरवर्ड्स को खुलकर खेलने का मौका नहीं दिया और अपनी रक्षापंक्ति को मजबूती से संभाले रखा। शुरुआती दो क्वार्टर में भारत ने बराबरी हासिल करने के लिए कई प्रयास किए,लेकिन जापान के मजबूत डिफेंस के सामने उसे सफलता नहीं मिली। भारतीय खिलाड़ियों को गोल करने के लिए लगातार संघर्ष करना पड़ा। पहले हाफ के समाप्त होने तक जापान 1-0 से आगे था।
हालाँकि,भारतीय टीम ने हार नहीं मानी। हाफ-टाइम के दौरान टीम ने अपनी रणनीति में बदलाव किया और दूसरे हाफ में अधिक आक्रामक अंदाज के साथ मैदान पर वापसी की। भारतीय खिलाड़ियों ने गेंद पर नियंत्रण बढ़ाया और जापान की रक्षापंक्ति पर लगातार दबाव बनाना शुरू कर दिया। इसका फायदा भी टीम को जल्द मिला।
मैच के 42वें मिनट में भारतीय टीम को आखिरकार सफलता मिल गई। कप्तान हरमनप्रीत सिंह की रणनीति के बाद शिलानंद लाकड़ा ने बेहतरीन तालमेल दिखाते हुए गेंद को जापान के गोलपोस्ट में पहुँचा दिया। इस गोल के साथ भारत ने मुकाबले में 1-1 की बराबरी हासिल कर ली। गोल होते ही स्टेडियम में मौजूद भारतीय समर्थक खुशी से झूम उठे। बराबरी के बाद भारतीय खिलाड़ियों का आत्मविश्वास और बढ़ गया।
इस गोल ने मुकाबले की दिशा बदल दी। अब भारतीय टीम लगातार हमले कर रही थी, जबकि जापान की टीम दबाव में नजर आने लगी। भारतीय खिलाड़ियों ने अपनी गति और तालमेल का शानदार इस्तेमाल किया। तीसरे क्वार्टर के बाद मुकाबला पूरी तरह भारत के नियंत्रण में आता दिखाई देने लगा।
मैच के अंतिम 15 मिनट भारतीय टीम के लिए बेहद यादगार साबित हुए। चौथे क्वार्टर में भारतीय खिलाड़ियों ने आक्रामक खेल का ऐसा प्रदर्शन किया कि जापान की टीम सँभल नहीं सकी। 48वें मिनट में हार्दिक सिंह ने शानदार पास दिया,जिस पर दिलप्रीत सिंह ने बेहतरीन फिनिशिंग करते हुए गेंद को गोलपोस्ट में पहुँचा दिया। इस गोल के साथ भारत ने 2-1 की बढ़त हासिल कर ली। अब खिताब भारतीय टीम की पहुँच में नजर आने लगा था।
इसके बाद 53वें मिनट में भारत को पेनल्टी कॉर्नर मिला। इस मौके का पूरा फायदा उठाते हुए जुगराज सिंह ने दमदार फ्लिक लगाई और गेंद को जापानी गोलपोस्ट में पहुंचा दिया। इस गोल के साथ भारत की बढ़त 3-1 हो गई। जापान के लिए अब मुकाबले में वापसी करना बेहद मुश्किल हो गया था।
भारतीय टीम यहीं नहीं रुकी। अगले ही मिनट यानी 54वें मिनट में विवेक सागर प्रसाद ने हाफ वॉली पर शानदार शॉट लगाकर एक और गोल दाग दिया। इस गोल ने भारत की जीत लगभग पक्की कर दी। स्कोर 4-1 होने के बाद जापानी टीम के पास वापसी का कोई खास मौका नहीं बचा। अंतिम सीटी बजते ही भारतीय खिलाड़ियों ने जीत का जश्न मनाना शुरू कर दिया। इस तरह टीम इंडिया ने शानदार अंदाज में फाइनल मुकाबला अपने नाम कर लिया।
एशियन चैंपियंस ट्रॉफी 2026 में भारतीय टीम का प्रदर्शन पूरे टूर्नामेंट के दौरान शानदार रहा। टीम ने अपने अभियान में लगातार अच्छा खेल दिखाया और बिना हार का सामना किए खिताब तक पहुँची। कप्तान हरमनप्रीत सिंह के नेतृत्व में खिलाड़ियों ने हर विभाग में बेहतरीन तालमेल दिखाया। खासकर फाइनल में शुरुआती झटके से उबरकर जिस तरह टीम ने वापसी की,उसने उसके मजबूत इरादों को साबित कर दिया।
भारत के लिए यह जीत इसलिए भी खास रही,क्योंकि टीम ने घरेलू मैदान पर अपने समर्थकों के सामने खिताब का बचाव किया। पंजाब की धरती पर परिवारों और हजारों प्रशंसकों की मौजूदगी में मिली इस सफलता ने खिलाड़ियों की खुशी को और बढ़ा दिया। मैदान पर भारतीय खिलाड़ियों के शानदार प्रदर्शन के साथ दर्शकों का उत्साह भी पूरे मुकाबले के दौरान देखने लायक रहा।
छठी बार एशियन चैंपियंस ट्रॉफी जीतना भारतीय हॉकी के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। लगातार तीसरी बार चैंपियन बनकर टीम इंडिया ने साफ कर दिया है कि एशियाई हॉकी में उसका दबदबा कायम है। जापान के खिलाफ 4-1 की यह जीत केवल एक खिताबी सफलता नहीं,बल्कि भारतीय टीम के संघर्ष,एकजुटता और शानदार वापसी की कहानी भी है। अब इस ऐतिहासिक प्रदर्शन के बाद भारतीय हॉकी प्रशंसकों की उम्मीदें आने वाले अंतर्राष्ट्रीय टूर्नामेंटों में भी टीम से और बेहतर प्रदर्शन की होंगी।
