तेहरान,9 सितंबर (युआईटीवी)- ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के बीच एक और बड़ा दावा सामने आया है। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी आईआरजीसी की नौसेना ने दावा किया है कि उसने होर्मुज स्ट्रेट के प्रवेश क्षेत्र के पास एक अमेरिकी मानवरहित पनडुब्बी को अपने कब्जे में ले लिया है। ईरान के अनुसार, यह पानी के भीतर निगरानी और सैन्य अभियानों के लिए इस्तेमाल होने वाले अमेरिका के सबसे आधुनिक मानवरहित अंडरवॉटर वाहनों में से एक है। ईरान ने इस उपकरण की पहचान ‘डाइव-एलडी’ के रूप में की है। आईआरजीसी का कहना है कि इसे एक जटिल खुफिया और सैन्य अभियान के दौरान कब्जे में लिया गया।
आईआरजीसी की आधिकारिक समाचार एजेंसी सेपाह न्यूज की ओर से मंगलवार को जारी बयान में इस कार्रवाई की जानकारी दी गई। बयान के अनुसार,ईरानी नौसेना ने होर्मुज स्ट्रेट के प्रवेश क्षेत्र में पानी के भीतर चलने वाले अमेरिकी वाहन को अपने नियंत्रण में लिया। ईरान ने दावा किया कि यह उपकरण अत्याधुनिक अंडरवॉटर तकनीक से लैस है और इसका इस्तेमाल समुद्र के भीतर निगरानी,सूचनाएँ एकत्र करने तथा रणनीतिक गतिविधियों पर नजर रखने जैसे अभियानों के लिए किया जा सकता है।
आईआरजीसी ने कहा कि अमेरिकी मानवरहित वाहन को पकड़ना सामान्य सैन्य कार्रवाई नहीं थी,बल्कि इसके लिए एक जटिल खुफिया अभियान चलाया गया। ईरानी पक्ष के अनुसार, इस अभियान में समुद्री क्षेत्र की निगरानी के साथ-साथ अमेरिकी गतिविधियों पर लगातार नजर रखी गई। आईआरजीसी ने यह भी कहा कि कब्जे में लिए गए मानवरहित पानी के भीतर चलने वाले वाहन की तस्वीरें आने वाले कुछ घंटों में सार्वजनिक की जाएँगी। हालाँकि, ईरान की ओर से अभी तक ऐसी तस्वीरें जारी किए जाने की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
चीन की समाचार एजेंसी शिन्हुआ ने सेपाह न्यूज के हवाले से बताया कि आईआरजीसी ने मंगलवार को एक अलग बयान में अमेरिकी सैन्य ड्रोन को मार गिराने का भी दावा किया। ईरानी संगठन के मुताबिक, उसकी वायु रक्षा प्रणालियों ने होर्मुज स्ट्रेट के ऊपर उड़ रहे अमेरिकी एमक्यू-9 रीपर ड्रोन को निशाना बनाकर गिरा दिया। एमक्यू-9 रीपर अमेरिका का एक अत्याधुनिक मानवरहित हवाई वाहन है,जिसका इस्तेमाल निगरानी और सैन्य अभियानों के लिए किया जाता है। ईरान के इस दावे से क्षेत्र में पहले से जारी तनाव और बढ़ने की आशंका है।
हालाँकि,अमेरिकी सेना ने ईरान के मानवरहित अंडरवॉटर वाहन को कब्जे में लेने के दावे पर अलग जानकारी दी है। अमेरिकी सेना की ओर से जारी बयान में कहा गया कि उसका एक पानी के भीतर काम करने वाला ड्रोन क्षेत्रीय जल क्षेत्र का सर्वेक्षण करने के दौरान एक दिन पहले तकनीकी खराबी का शिकार हो गया था। अमेरिका ने यह तो स्वीकार किया कि उसका एक अंडरवॉटर ड्रोन तकनीकी समस्या का सामना कर चुका है,लेकिन उसने यह स्पष्ट नहीं किया कि वह उपकरण ईरान के कब्जे में है या नहीं। इस तरह ईरान के दावे और अमेरिकी बयान के बीच स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो पाई है।
ईरान और अमेरिका के बीच यह नया घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है,जब दोनों देशों के बीच तनाव लगातार गहरा रहा है। होर्मुज स्ट्रेट इस पूरे विवाद का एक बेहद महत्वपूर्ण क्षेत्र बना हुआ है। यह समुद्री मार्ग फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है तथा वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद अहम माना जाता है। इस क्षेत्र में किसी भी तरह की सैन्य गतिविधि का असर केवल ईरान और अमेरिका तक सीमित नहीं रहता,बल्कि अंतर्राष्ट्रीय तेल बाजार और वैश्विक व्यापार पर भी पड़ सकता है।
इस बीच ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने भी मंगलवार को देश की मौजूदा स्थिति को लेकर कड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि ईरान पूरी ताकत के साथ अपना प्रतिरोध जारी रखेगा और तब तक पीछे नहीं हटेगा,जब तक कि ‘आक्रमण करने वालों’ को अपने कदमों पर पूरी तरह पछतावा न हो जाए। राष्ट्रपति ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान हमेशा युद्ध के खिलाफ रहा है और उसका मानना है कि लोगों के हितों की रक्षा करने तथा पश्चिम एशिया में सुरक्षा बनाए रखने का सबसे अच्छा तरीका युद्ध को भड़काने से बचना है।
मसूद पेजेश्कियन ने हालाँकि यह भी स्पष्ट किया कि युद्ध से बचने की ईरान की नीति को उसकी कमजोरी नहीं समझा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जिस तरह ईरान ने अब तक साहस के साथ हर आक्रमण का मुकाबला किया है, उसी तरह वह आगे भी पूरी ताकत से अपना प्रतिरोध जारी रखेगा। उन्होंने कहा कि ईरान तब तक अपने प्रतिरोध से पीछे नहीं हटेगा,जब तक आक्रमण करने वालों को अपने किए पर पूरा पछतावा नहीं हो जाता। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान अपने लोगों के अधिकारों की रक्षा करता रहेगा।
ईरान और इजरायल के बीच मौजूदा संघर्ष की पृष्ठभूमि में अमेरिका की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही है। 28 फरवरी को इजरायल और अमेरिका ने तेहरान तथा ईरान के अन्य शहरों पर हमले किए थे। इसके बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए इजरायल और पश्चिम एशिया में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों तथा संपत्तियों को निशाना बनाया। ईरान की ओर से मिसाइलों और ड्रोन हमलों की कई लहरें चलाई गईं। इन घटनाओं के बाद क्षेत्र में तनाव तेजी से बढ़ा और होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान ने अपनी पकड़ को और मजबूत कर लिया।
होर्मुज स्ट्रेट को लेकर बढ़ती गतिविधियाँ अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के लिए भी चिंता का विषय हैं। दुनिया के ऊर्जा बाजार के लिए यह समुद्री मार्ग बेहद महत्वपूर्ण है। यहाँ सैन्य तनाव बढ़ने से तेल और गैस की आवाजाही प्रभावित होने की आशंका रहती है। यही वजह है कि ईरान और अमेरिका के बीच किसी भी समुद्री या हवाई टकराव को केवल स्थानीय सैन्य घटना के रूप में नहीं देखा जा रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक,अगर तनाव लंबे समय तक जारी रहता है,तो इसका असर वैश्विक ऊर्जा कीमतों और समुद्री व्यापार पर भी पड़ सकता है।
दोनों देशों के बीच तनाव कम करने की कोशिशें भी पहले की जा चुकी हैं। 18 जून को अमेरिका और ईरान ने क्षेत्र में युद्ध खत्म करने के उद्देश्य से एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए थे। इस समझौते के तहत दोनों देशों को 60 दिनों के भीतर बातचीत के जरिए एक अंतिम समझौते तक पहुँचना था। हालाँकि,यह समयसीमा 17 अगस्त को समाप्त हो गई। इसके बावजूद दोनों देशों के बीच कोई अंतिम समझौता नहीं हो सका। हाल के घटनाक्रमों के बाद बातचीत की प्रक्रिया का भविष्य भी अनिश्चित नजर आ रहा है।
अमेरिकी मानवरहित पनडुब्बी पर कब्जे और एमक्यू-9 रीपर ड्रोन को मार गिराने के ईरानी दावे ने स्थिति को और संवेदनशील बना दिया है। यदि ईरान का दावा सही साबित होता है तो यह अमेरिका के अत्याधुनिक मानवरहित सैन्य उपकरणों को लेकर एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जाएगा। दूसरी ओर,अमेरिकी सेना द्वारा अंडरवॉटर ड्रोन के तकनीकी खराबी के कारण निष्क्रिय होने की बात कहे जाने से दोनों पक्षों के दावों में अंतर स्पष्ट दिखाई देता है।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि होर्मुज स्ट्रेट के पास वास्तव में क्या हुआ और अमेरिकी मानवरहित अंडरवॉटर वाहन की मौजूदा स्थिति क्या है। ईरान ने इसकी तस्वीरें जारी करने की बात कही है। यदि तस्वीरें और अन्य प्रमाण सामने आते हैं,तो इस घटनाक्रम की वास्तविक स्थिति और स्पष्ट हो सकती है। वहीं,अमेरिकी पक्ष की ओर से भी इस मामले पर आगे कोई विस्तृत जानकारी सामने आने का इंतजार है। दोनों देशों के बीच पहले से मौजूद तनाव को देखते हुए आने वाले दिनों में होर्मुज स्ट्रेट और आसपास के समुद्री क्षेत्र की गतिविधियों पर पूरी दुनिया की नजर बनी रहेगी।
