भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश (तस्वीर क्रेडिट@rashtra_press)

‘उम्मीद’ का प्रतीक है संयुक्त राष्ट्र चार्टर,भारत ने दोहराई बहुपक्षवाद और वैश्विक सहयोग के प्रति अपनी प्रतिबद्धता

संयुक्त राष्ट्र,17 जून (युआईटीवी)- संयुक्त राष्ट्र चार्टर दिवस की तैयारियों के बीच संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने एक महत्वपूर्ण संदेश देते हुए कहा कि संयुक्त राष्ट्र चार्टर भारत के 140 करोड़ नागरिकों के लिए ‘उम्मीद’ का प्रतीक है। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र चार्टर की प्रस्तावना पर प्रतीकात्मक हस्ताक्षर कर उस ऐतिहासिक दस्तावेज को श्रद्धांजलि दी,जिसने 1945 में संयुक्त राष्ट्र संगठन की स्थापना का मार्ग प्रशस्त किया था। इस अवसर पर भारत ने एक बार फिर बहुपक्षवाद,अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और वैश्विक शांति के मूल सिद्धांतों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया।

संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में आयोजित इस विशेष कार्यक्रम का उद्देश्य चार्टर के मूल आदर्शों और उद्देश्यों के प्रति सदस्य देशों की निष्ठा को फिर से व्यक्त करना था। कार्यक्रम के दौरान विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों ने भी प्रतीकात्मक रूप से चार्टर पर हस्ताक्षर किए। यह पहल संयुक्त राष्ट्र महासभा की अध्यक्ष एनालेना बेयरबॉक के प्रस्ताव पर की गई,जिन्होंने सदस्य देशों से आग्रह किया था कि वे वर्तमान वैश्विक चुनौतियों के बीच संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों के प्रति अपने संकल्प को पुनः व्यक्त करें।

हस्ताक्षर करने के बाद पी. हरीश ने कहा कि यदि संयुक्त राष्ट्र चार्टर के महत्व को एक शब्द में व्यक्त करना हो,तो वह शब्द ‘उम्मीद’ होगा। उन्होंने कहा कि भारत जैसे विशाल और विविधतापूर्ण देश के लिए यह चार्टर केवल एक अंतर्राष्ट्रीय दस्तावेज नहीं है,बल्कि वह एक ऐसी व्यवस्था का प्रतीक है,जो राष्ट्रों के बीच शांति,समानता,सहयोग और न्याय को बढ़ावा देती है। उनके अनुसार,संयुक्त राष्ट्र चार्टर ने दशकों से दुनिया को संवाद और कूटनीति के माध्यम से समस्याओं का समाधान खोजने की दिशा दिखाई है।

संयुक्त राष्ट्र चार्टर दिवस हर वर्ष 26 जून को मनाया जाता है। यह वही दिन है जब 1945 में सैन फ्रांसिस्को में आयोजित सम्मेलन के दौरान संयुक्त राष्ट्र चार्टर पर हस्ताक्षर किए गए थे। इस दस्तावेज ने द्वितीय विश्व युद्ध के बाद एक नई वैश्विक व्यवस्था की नींव रखी और दुनिया को संघर्षों से बचाने के लिए एक संस्थागत ढाँचा प्रदान किया। चार्टर के लागू होने के साथ ही संयुक्त राष्ट्र का औपचारिक गठन हुआ,जिसने आने वाले दशकों में वैश्विक राजनीति,शांति स्थापना और विकास कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

भारत का संयुक्त राष्ट्र के साथ संबंध विशेष महत्व रखता है। स्वतंत्रता प्राप्त करने से पहले ही भारत उन 50 देशों में शामिल था,जिन्होंने संयुक्त राष्ट्र चार्टर पर हस्ताक्षर किए थे। उस समय संयुक्त राष्ट्र में भारत के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व ए. रामास्वामी मुदलियार ने किया था। उन्होंने 25 जून 1945 को सैन फ्रांसिस्को में भारत की ओर से मूल चार्टर पर हस्ताक्षर किए थे। यह तथ्य भारत की उस ऐतिहासिक भूमिका को दर्शाता है,जिसमें उसने वैश्विक सहयोग और बहुपक्षीय व्यवस्था के निर्माण में शुरुआती दौर से ही योगदान दिया।

विशेषज्ञों का मानना है कि संयुक्त राष्ट्र के संस्थापक सदस्य के रूप में भारत की भागीदारी केवल एक औपचारिक उपस्थिति नहीं थी,बल्कि यह उस व्यापक दृष्टिकोण का हिस्सा थी जिसमें अंतर्राष्ट्रीय सहयोग,शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व और वैश्विक साझेदारी को महत्व दिया गया था। आज भी भारत संयुक्त राष्ट्र के विभिन्न मंचों पर विकासशील देशों की आवाज को मजबूती से उठाता है और वैश्विक मुद्दों पर सक्रिय भूमिका निभाता है।

कार्यक्रम के दौरान संयुक्त राष्ट्र महासभा की अध्यक्ष एनालेना बेयरबॉक ने भी चार्टर की प्रासंगिकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि यह प्रतीकात्मक हस्ताक्षर केवल एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं है,बल्कि संयुक्त राष्ट्र के उद्देश्यों और सिद्धांतों के प्रति सामूहिक प्रतिबद्धता की नई अभिव्यक्ति है। उनके अनुसार,वर्तमान समय में जब दुनिया अनेक राजनीतिक,आर्थिक और सुरक्षा संबंधी चुनौतियों का सामना कर रही है,तब संयुक्त राष्ट्र चार्टर के मूल्यों को याद करना और उन्हें मजबूत करना पहले से कहीं अधिक आवश्यक हो गया है।

बेयरबॉक के कार्यालय की ओर से जारी एक नोट में कहा गया कि इस वर्ष का चार्टर दिवस विशेष महत्व रखता है क्योंकि संयुक्त राष्ट्र कई प्रकार के दबावों और चुनौतियों का सामना कर रहा है। नोट में उल्लेख किया गया कि चार्टर पर हस्ताक्षर किए जाने के 81 वर्ष बाद दुनिया एक महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़ी है। वैश्विक संस्थानों पर बढ़ते राजनीतिक और वित्तीय दबावों के साथ-साथ विभिन्न क्षेत्रों में संघर्ष और अस्थिरता ने संयुक्त राष्ट्र की भूमिका को और अधिक चुनौतीपूर्ण बना दिया है।

नोट में यह भी कहा गया कि संयुक्त राष्ट्र केवल संसाधनों की कमी या राजनीतिक मतभेदों जैसी चुनौतियों का सामना नहीं कर रहा,बल्कि उसके मूल सिद्धांतों और उद्देश्यों पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। ऐसे समय में चार्टर दिवस का आयोजन केवल अतीत को याद करने का अवसर नहीं है,बल्कि यह भविष्य के लिए सामूहिक कार्रवाई का आह्वान भी है। इसका उद्देश्य सदस्य देशों को यह याद दिलाना है कि अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और बहुपक्षीय व्यवस्था ही वैश्विक समस्याओं के समाधान का सबसे प्रभावी माध्यम है।

वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में संयुक्त राष्ट्र की भूमिका लगातार चर्चा का विषय बनी हुई है। यूक्रेन संघर्ष,मध्य पूर्व में अस्थिरता,जलवायु परिवर्तन,खाद्य सुरक्षा,आर्थिक चुनौतियाँ और मानवाधिकारों से जुड़े मुद्दे ऐसे क्षेत्र हैं,जहाँ संयुक्त राष्ट्र की सक्रिय भागीदारी की आवश्यकता बनी हुई है। ऐसे में चार्टर के सिद्धांतों की प्रासंगिकता और भी बढ़ जाती है।

भारत ने भी इस अवसर पर यह स्पष्ट संकेत दिया कि वह संयुक्त राष्ट्र के उद्देश्यों और आदर्शों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता बनाए रखेगा। दुनिया की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक व्यवस्था और तेजी से उभरती वैश्विक शक्ति के रूप में भारत बहुपक्षवाद को अंतर्राष्ट्रीय संबंधों की आधारशिला मानता है। यही कारण है कि संयुक्त राष्ट्र चार्टर भारत के लिए केवल एक ऐतिहासिक दस्तावेज नहीं,बल्कि एक ऐसे भविष्य की आशा का प्रतीक है,जिसमें शांति, सहयोग और समान अवसरों पर आधारित वैश्विक व्यवस्था स्थापित हो सके।

संयुक्त राष्ट्र चार्टर दिवस के अवसर पर दिया गया भारत का यह संदेश न केवल उसके अंतर्राष्ट्रीय दृष्टिकोण को दर्शाता है,बल्कि यह भी बताता है कि बदलती वैश्विक परिस्थितियों के बीच भी बहुपक्षीय सहयोग और नियम आधारित अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था की आवश्यकता पहले की तरह ही महत्वपूर्ण बनी हुई है।