इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू

ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर इजरायल का सख्त रुख,बेंजामिन नेतन्याहू ने बढ़ाए रक्षा बजट और हथियार निर्माण के संकेत

जेरूसलम,10 जुलाई (युआईटीवी)- मिडिल ईस्ट में लगातार बढ़ते तनाव और ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर जारी अंतर्राष्ट्रीय चिंताओं के बीच इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने गुरुवार को स्पष्ट शब्दों में कहा कि उनका देश किसी भी परिस्थिति में ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देगा। उन्होंने दोहराया कि यह इजरायल की स्थायी और अटल नीति है तथा इस मुद्दे पर किसी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। इसके साथ ही उन्होंने आने वाले वर्षों में रक्षा क्षमता को और मजबूत बनाने के लिए रक्षा बजट में बड़े पैमाने पर वृद्धि तथा देश के भीतर हथियार निर्माण उद्योग का विस्तार करने की भी घोषणा की।

प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने यह बयान इजरायली वायु सेना के पायलटों के ग्रेजुएशन समारोह को संबोधित करते हुए दिया। उन्होंने कहा कि इजरायल की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े किसी भी खतरे को हल्के में नहीं ले सकती। उनके अनुसार ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर इजरायल का रुख पूरी तरह स्पष्ट है और इसमें किसी प्रकार की अस्पष्टता नहीं है।

उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि चाहे कोई अंतर्राष्ट्रीय समझौता हो या न हो,इजरायल यह सुनिश्चित करेगा कि ईरान परमाणु हथियार विकसित न कर सके। नेतन्याहू ने कहा कि यदि अमेरिका और इजरायल ने हाल के वर्षों में ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई नहीं की होती,तो तेहरान अब तक परमाणु हथियारों से लैस हो चुका होता। उन्होंने दावा किया कि दोनों देशों की कार्रवाई ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम की गति को प्रभावित किया और क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए संभावित खतरे को सीमित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

समाचार एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार,नेतन्याहू ने रक्षा क्षेत्र को लेकर एक बड़ी घोषणा करते हुए कहा कि अगले दस वर्षों में इजरायल का रक्षा बजट 350 अरब शेकेल तक बढ़ाया जाएगा। यह राशि लगभग 116 अरब अमेरिकी डॉलर के बराबर है। उन्होंने बताया कि इस अतिरिक्त बजट का बड़ा हिस्सा वायु सेना के आधुनिकीकरण,नई सैन्य तकनीकों के विकास और आधुनिक हथियार प्रणालियों को मजबूत करने पर खर्च किया जाएगा।

प्रधानमंत्री ने कहा कि बदलते वैश्विक हालात को देखते हुए इजरायल अब विदेशी हथियारों की खरीद पर अपनी निर्भरता कम करना चाहता है। इसके लिए देश में बड़े पैमाने पर हथियार और गोला-बारूद निर्माण उद्योग विकसित किया जाएगा। उनके अनुसार घरेलू स्तर पर रक्षा उत्पादन बढ़ाने से न केवल सैन्य जरूरतों को समय पर पूरा किया जा सकेगा, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा भी अधिक मजबूत होगी। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर रक्षा उद्योग भविष्य में किसी भी आपात स्थिति से निपटने की क्षमता को और सशक्त बनाएगा।

नेतन्याहू का यह बयान ऐसे समय में सामने आया है,जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर तेज हो गया है। हाल के दिनों में दोनों देशों के बीच नए सिरे से सैन्य हमलों की घटनाएँ सामने आई हैं,जिससे पूरे मिडिल ईस्ट में अस्थिरता बढ़ गई है। इन घटनाओं के बाद क्षेत्र में किसी बड़े संघर्ष की आशंका को लेकर अंतर्राष्ट्रीय समुदाय भी चिंतित है।

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी हाल ही में कहा कि तेहरान के साथ किसी नए समझौते की संभावना अब लगभग समाप्त हो चुकी है। उनके इस बयान को अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का संकेत माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कूटनीतिक प्रयासों में आई यह ठहराव क्षेत्रीय सुरक्षा की स्थिति को और जटिल बना सकता है।

इधर इजरायली सेना भी लगातार अपनी सुरक्षा तैयारियों को मजबूत कर रही है। इजरायल के सेना प्रमुख एयाल जमीर ने कहा कि सेना ईरान और लेबनान में हो रही सभी गतिविधियों पर लगातार नजर बनाए हुए है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि किसी भी समय राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा महसूस हुआ तो सेना तुरंत कार्रवाई करने के लिए पूरी तरह तैयार है। उनके अनुसार इजरायल किसी भी संभावित चुनौती का सामना करने के लिए अपनी सैन्य तैयारियों को लगातार मजबूत कर रहा है।

रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज ने भी सेना की तैयारियों को लेकर कड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि इजरायली सेना पूरी तरह सतर्क है और आवश्यकता पड़ने पर अपने सैन्य अभियान को दोबारा शुरू करने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि देश की सुरक्षा के मामले में किसी प्रकार की ढिलाई नहीं बरती जाएगी और सरकार हर संभावित खतरे से निपटने के लिए आवश्यक कदम उठाएगी।

इसी बीच रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज ने लेबनान में इजरायली सेना की मौजूदगी को लेकर भी सरकार का रुख स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि जब तक हिज्बुल्लाह पूरी तरह अपने हथियार नहीं छोड़ देता,तब तक इजरायली सेना दक्षिणी लेबनान में बनी रहेगी। उनके अनुसार यह निर्णय पूरी तरह सुरक्षा आवश्यकताओं के आधार पर लिया गया है और इसमें किसी बाहरी दबाव का कोई स्थान नहीं है।

रक्षा मंत्री के कार्यालय की ओर से जारी बयान में कहा गया कि इजरायल ने लेबनान में प्रवेश करने के लिए किसी से अनुमति नहीं माँगी थी और वहाँ अपनी सैन्य उपस्थिति बनाए रखने के लिए भी उसे किसी की अनुमति की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा कि इजरायल अपनी सुरक्षा जरूरतों के अनुसार ही निर्णय लेगा और सैनिक उतनी ही अवधि तक लेबनान में रहेंगे,जितनी देर तक इसकी आवश्यकता महसूस होगी।

काट्ज ने कहा कि दक्षिणी लेबनान में इजरायली सेना ने एक मजबूत सुरक्षा क्षेत्र स्थापित कर लिया है। उनके अनुसार यह सुरक्षा क्षेत्र पश्चिम में भूमध्य सागर से लेकर दक्षिणी लेबनान के अरनून क्षेत्र के निकट स्थित ब्यूफोर्ट किले तक फैला हुआ है। वहीं पूर्व दिशा में इसका विस्तार माउंट हरमोन के आसपास के क्षेत्रों तक है। उन्होंने कहा कि इस सुरक्षा क्षेत्र का उद्देश्य सीमावर्ती इलाकों में संभावित खतरों को रोकना और इजरायल की सीमाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

मिडिल ईस्ट में मौजूदा हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं। एक ओर ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर विवाद जारी है,वहीं दूसरी ओर लेबनान में हिज्बुल्लाह की गतिविधियाँ भी इजरायल की सुरक्षा चिंताओं का प्रमुख कारण बनी हुई हैं। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ती सैन्य गतिविधियों ने पूरे क्षेत्र में अनिश्चितता का माहौल पैदा कर दिया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इजरायल द्वारा रक्षा बजट में भारी वृद्धि और घरेलू हथियार निर्माण पर दिया गया जोर उसकी दीर्घकालिक सुरक्षा रणनीति का हिस्सा है। बदलते भू-राजनीतिक परिदृश्य में इजरायल अपनी सैन्य क्षमता को और मजबूत करने तथा किसी भी संभावित खतरे से निपटने के लिए आत्मनिर्भर रक्षा उत्पादन पर विशेष ध्यान दे रहा है।

फिलहाल मिडिल ईस्ट में सुरक्षा स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है। इजरायल,अमेरिका और उनके सहयोगी देश क्षेत्र की गतिविधियों पर लगातार नजर रखे हुए हैं,जबकि ईरान और लेबनान से जुड़े घटनाक्रम आने वाले दिनों में क्षेत्रीय राजनीति और सुरक्षा समीकरणों को प्रभावित कर सकते हैं। ऐसे में अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या कूटनीतिक प्रयास तनाव कम करने में सफल होंगे या फिर क्षेत्र में सैन्य टकराव का दायरा और व्यापक होगा।