वाशिंगटन,14 जुलाई (युआईटीवी)- अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए संकेत दिया है कि ईरान का कथित परमाणु ठिकाना ‘पिकएक्स माउंटेन’ जल्द ही अमेरिकी सैन्य कार्रवाई का निशाना बन सकता है। ट्रंप ने कहा कि यह ठिकाना लगातार अमेरिकी निगरानी में है और संभावित सैन्य लक्ष्यों की सूची में शामिल है। उन्होंने यह भी दोहराया कि अमेरिका किसी भी कीमत पर ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने की अनुमति नहीं देगा और यदि तेहरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम को आगे बढ़ाने की कोशिश की तो उसे गंभीर परिणामों का सामना करना पड़ेगा।
एक रेडियो साक्षात्कार में राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी खुफिया एजेंसियाँ और सैन्य तंत्र ‘पिकएक्स माउंटेन’ पर चौबीसों घंटे नजर बनाए हुए हैं। उनके अनुसार यह स्थान अमेरिका के लिए एक महत्वपूर्ण रणनीतिक लक्ष्य है और आवश्यकता पड़ने पर इसके मुख्य प्रवेश द्वार पर बड़े पैमाने पर सैन्य हमला किया जा सकता है। ट्रंप ने कहा कि यह ठिकाना उन स्थानों में शामिल है,जिन पर अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियां लगातार निगरानी रख रही हैं।
राष्ट्रपति ने दावा किया कि फिलहाल वहाँ किसी प्रकार की असामान्य गतिविधि दिखाई नहीं दे रही है,लेकिन अमेरिका किसी भी संभावित खतरे को नजरअंदाज नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम अब पहले जैसी स्थिति में नहीं है और अमेरिका उसकी हर गतिविधि पर बारीकी से नजर रखे हुए है। ट्रंप के अनुसार जैसे ही किसी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी मिलती है,अमेरिका उसे निष्क्रिय करने के लिए कार्रवाई करता है। उन्होंने कहा कि इसी कारण ईरान अब अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर पहले की तरह खुलकर बात भी नहीं करता।
ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि यदि परिस्थितियाँ बनीं तो ‘पिकएक्स माउंटेन’ पर अमेरिकी कार्रवाई जल्द देखने को मिल सकती है। हालाँकि,उन्होंने किसी संभावित सैन्य अभियान की समय-सीमा या रणनीति का खुलासा नहीं किया। उन्होंने केवल इतना कहा कि यह विकल्प पूरी तरह खुला हुआ है और अमेरिकी सुरक्षा हितों को ध्यान में रखते हुए निर्णय लिया जाएगा।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपने बयान में ईरान पर कूटनीतिक समझौतों का सम्मान नहीं करने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच ऐसा समझौता होने की स्थिति बन गई थी,जिसमें अमेरिका की अधिकांश प्रमुख शर्तों को स्वीकार कर लिया गया था, लेकिन अंतिम समय में ईरान उससे पीछे हट गया। ट्रंप ने आरोप लगाया कि ईरानी नेतृत्व समझौते करता है,लेकिन बाद में उन्हें तोड़ देता है और इसी कारण उस पर भरोसा करना बेहद कठिन है।
उन्होंने कहा कि अमेरिका ने कई बार कूटनीतिक समाधान की दिशा में प्रयास किए, लेकिन हर बार ईरान ने अपने व्यवहार से यह संकेत दिया कि वह अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं को गंभीरता से नहीं लेता। ट्रंप ने कहा कि यदि कोई देश अपने वादों का पालन नहीं करता तो उसके साथ विश्वास के आधार पर आगे बढ़ना संभव नहीं होता।
ईरान के शीर्ष नेतृत्व पर निशाना साधते हुए ट्रंप ने तीखी टिप्पणी भी की। उन्होंने कहा कि यदि ईरान कभी परमाणु हथियार हासिल करने में सफल हो गया तो वह उसका इस्तेमाल करने से पीछे नहीं हटेगा। ट्रंप ने दावा किया कि यही कारण है कि अमेरिका ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर किसी प्रकार का जोखिम लेने के पक्ष में नहीं है। उनके अनुसार परमाणु हथियारों का प्रसार पूरी दुनिया की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।
जब उनसे ईरान के शीर्ष नेताओं के खिलाफ संभावित कार्रवाई के बारे में सवाल किया गया,तो ट्रंप ने इस पर सीधा जवाब देने से परहेज किया। हालाँकि,उन्होंने कहा कि अमेरिकी एजेंसियों के पास ईरानी नेतृत्व से जुड़ी विस्तृत खुफिया जानकारी उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों पर सार्वजनिक रूप से अधिक चर्चा करना उचित नहीं होगा,लेकिन अमेरिका पूरी स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है।
राष्ट्रपति ट्रंप ने यह दावा भी किया कि ईरान की पारंपरिक सैन्य क्षमता पहले की तुलना में काफी कमजोर हो चुकी है। उन्होंने कहा कि ईरान की वायुसेना और नौसेना अब पहले जैसी ताकत नहीं रखती और उसकी सैन्य क्षमताओं को काफी नुकसान पहुँचा है। ट्रंप के अनुसार अमेरिकी दबाव और विभिन्न सैन्य अभियानों के कारण ईरान की रक्षा क्षमता कमजोर हुई है,जिससे वह पहले की तरह क्षेत्रीय प्रभाव नहीं दिखा पा रहा।
इससे पहले व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान भी ट्रंप ने स्पष्ट शब्दों में कहा था कि अमेरिका किसी भी परिस्थिति में ईरान को परमाणु हथियार विकसित नहीं करने देगा। उन्होंने दोहराया कि यह अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा और उसके सहयोगी देशों की सुरक्षा से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा है। ट्रंप ने कहा कि यदि आवश्यक हुआ तो अमेरिका अपने सभी विकल्पों का इस्तेमाल करेगा।
हालाँकि,राष्ट्रपति ट्रंप ने सैन्य कार्रवाई की संभावना जताने के साथ यह भी कहा कि कूटनीतिक रास्ते पूरी तरह बंद नहीं हुए हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यदि ईरान गंभीरता से बातचीत करना चाहे और अंतर्राष्ट्रीय नियमों का पालन करने को तैयार हो तो समझौते की संभावना अब भी बनी हुई है। उनके अनुसार अमेरिका का उद्देश्य युद्ध नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि ईरान कभी परमाणु हथियार हासिल न कर सके।
ट्रंप ने कहा कि यदि तेहरान पारदर्शिता दिखाए और अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की चिंताओं का समाधान करे तो बातचीत आगे बढ़ सकती है,लेकिन यदि ईरान अपने वर्तमान रुख पर कायम रहता है और परमाणु गतिविधियों को जारी रखता है तो अमेरिका अपने हितों और सहयोगियों की सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप के ताजा बयान ऐसे समय आए हैं,जब पश्चिम एशिया में पहले से ही तनावपूर्ण माहौल बना हुआ है। ईरान के परमाणु कार्यक्रम,क्षेत्रीय सुरक्षा और समुद्री मार्गों को लेकर अमेरिका तथा ईरान के बीच लगातार बयानबाजी जारी है। ऐसे में ‘पिकएक्स माउंटेन’ को लेकर ट्रंप की टिप्पणी ने एक बार फिर संभावित सैन्य टकराव की आशंकाओं को बढ़ा दिया है।
अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी इस बयान पर नजर रखी जा रही है,क्योंकि ईरान के परमाणु कार्यक्रम का मुद्दा लंबे समय से वैश्विक कूटनीति का केंद्र बना हुआ है। कई देशों का मानना है कि इस विवाद का समाधान बातचीत और अंतर्राष्ट्रीय समझौतों के जरिए होना चाहिए,जबकि अमेरिका लगातार दबाव की नीति अपनाने की बात करता रहा है।
फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि अमेरिका वास्तव में ‘पिकएक्स माउंटेन’ के खिलाफ कोई सैन्य कार्रवाई करेगा या यह केवल ईरान पर दबाव बनाने की रणनीति का हिस्सा है। हालाँकि,राष्ट्रपति ट्रंप के ताजा बयान से इतना जरूर साफ हो गया है कि वॉशिंगटन ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर किसी भी तरह की ढिलाई बरतने के पक्ष में नहीं है और आने वाले समय में इस मुद्दे पर अमेरिका का रुख और अधिक आक्रामक दिखाई दे सकता है।
