तेहरान,2 जून (युआईटीवी)- पश्चिम एशिया में जारी अस्थिरता के बीच लेबनान में इजरायल की सैन्य गतिविधियों ने एक बार फिर क्षेत्रीय तनाव को बढ़ा दिया है। ईरान ने लेबनान में हालिया इजरायली हमलों को अमेरिका और ईरान के बीच हुए संघर्षविराम की भावना के खिलाफ बताते हुए कड़ी प्रतिक्रिया दी है। ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि यदि संघर्षविराम के नियमों का किसी भी मोर्चे पर उल्लंघन होता है,तो उसके परिणामों की जिम्मेदारी अमेरिका और इजरायल दोनों पर होगी।
ईरानी विदेश मंत्री ने सोशल मीडिया मंच पर जारी अपने बयान में कहा कि ईरान और अमेरिका के बीच हुआ संघर्षविराम केवल एक सीमित क्षेत्र तक नहीं,बल्कि पूरे क्षेत्रीय परिदृश्य पर लागू माना जाना चाहिए। उनके अनुसार लेबनान सहित किसी भी मोर्चे पर सैन्य कार्रवाई संघर्षविराम व्यवस्था को कमजोर करती है और इससे पूरे क्षेत्र में शांति प्रयासों को नुकसान पहुँच सकता है। उन्होंने कहा कि किसी एक क्षेत्र में समझौते का उल्लंघन सभी मोर्चों पर संघर्षविराम के उल्लंघन के समान माना जाएगा।
अराघची का यह बयान ऐसे समय में आया है,जब लेबनान के दक्षिणी हिस्सों में इजरायल ने अपने सैन्य अभियान को और तेज कर दिया है। हाल के दिनों में इजरायली सेना और हिज्बुल्लाह के बीच तनाव लगातार बढ़ता दिखाई दे रहा है। इजरायल का आरोप है कि हिज्बुल्लाह ने संघर्षविराम की शर्तों की अनदेखी करते हुए उसके क्षेत्रों को निशाना बनाया है,जिसके जवाब में सैन्य कार्रवाई आवश्यक हो गई है।
तनाव उस समय और बढ़ गया जब इजरायल ने रविवार को ऐतिहासिक और रणनीतिक महत्व वाले ब्यूफोर्ट किले पर कब्जा करने का दावा किया। यह किला लंबे समय से दक्षिणी लेबनान में एक महत्वपूर्ण सैन्य और सामरिक केंद्र माना जाता रहा है। इजरायली सेना ने वहाँ अपना झंडा फहराने के बाद इसे एक बड़ी उपलब्धि बताया। इजरायल के रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज ने इस कार्रवाई को रणनीतिक जीत करार देते हुए कहा कि इससे क्षेत्र में सुरक्षा स्थिति को मजबूत करने में मदद मिलेगी।
इसके बाद सोमवार को इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सेना को बेरूत के दक्षिणी उपनगर दहियेह में स्थित हिज्बुल्लाह के ठिकानों पर कार्रवाई करने का निर्देश दिया। दहियेह लंबे समय से हिज्बुल्लाह का प्रमुख गढ़ माना जाता है। नेतन्याहू ने कहा कि हिज्बुल्लाह द्वारा संघर्षविराम नियमों की अनदेखी और इजरायली क्षेत्रों पर हमलों के कारण उसके सैन्य ढाँचे को निशाना बनाया जाना आवश्यक हो गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इजरायल अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएगा।
प्रधानमंत्री के निर्देश के बाद इजरायली सेना ने दक्षिणी लेबनान के कई इलाकों में अभियान तेज कर दिया। सेना की ओर से जारी चेतावनी में सात गाँवों के निवासियों को तत्काल अपने घर छोड़ने और सुरक्षित स्थानों पर जाने को कहा गया। जिन गाँवों को खाली करने का निर्देश दिया गया उनमें हौमीन अल-फौका,बनाफौल,अरब सलीम,रौमीन,आज्जे,अर्की और जबा शामिल हैं। सेना ने कहा कि इन क्षेत्रों में संभावित सैन्य कार्रवाई की योजना बनाई जा रही है और नागरिकों की सुरक्षा के लिए उन्हें कम से कम एक हजार मीटर दूर जाने की सलाह दी गई है।
इजरायली सेना के अरबी भाषा के प्रवक्ता अविचाय अद्राई ने सोशल मीडिया के माध्यम से जारी संदेश में कहा कि सेना इन क्षेत्रों में मौजूद सैन्य ठिकानों और हथियार भंडारों को निशाना बना सकती है। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे अपनी सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए तुरंत क्षेत्र खाली करें। इस चेतावनी के बाद प्रभावित इलाकों में लोगों के बीच चिंता और भय का माहौल पैदा हो गया।
इस बीच दक्षिणी लेबनान के टायर शहर और उसके आसपास के इलाकों से लगातार धमाकों की खबरें सामने आई हैं। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार शाम के समय कई शक्तिशाली विस्फोटों की आवाजें सुनी गईं। टायर शहर के बाहरी इलाके अल-हौश में एक बड़े हमले की सूचना मिली,जिसके बाद पूरे क्षेत्र में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार हमले के बाद धुएं के बड़े गुबार आसमान में दिखाई दिए।
स्थानीय समाचार एजेंसियों ने यह भी बताया कि अल-हौश क्षेत्र में हुए हमले के कुछ समय बाद समुद्र तटीय इलाके के पास एक ड्रोन हमला भी किया गया। हालाँकि,इन हमलों में हुए नुकसान और संभावित हताहतों के संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक आँकड़ा सामने नहीं आया है। राहत और बचाव एजेंसियां स्थिति का आकलन करने में जुटी हुई हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि लेबनान में बढ़ती सैन्य गतिविधियाँ पूरे पश्चिम एशिया के लिए चिंता का विषय बन सकती हैं। एक ओर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने की कोशिशें चल रही हैं,वहीं दूसरी ओर लेबनान में बढ़ती हिंसा इन प्रयासों को कमजोर कर सकती है। ईरान की ओर से दी गई चेतावनी और इजरायल की आक्रामक सैन्य नीति संकेत देती है कि क्षेत्र में शांति स्थापित करने की राह अभी भी आसान नहीं है।
राजनयिक विशेषज्ञों का कहना है कि यदि लेबनान में संघर्ष और बढ़ता है,तो इसका प्रभाव केवल इजरायल और हिज्बुल्लाह तक सीमित नहीं रहेगा,बल्कि पूरे क्षेत्रीय सुरक्षा ढाँचे पर पड़ सकता है। ऐसे समय में अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है,क्योंकि किसी भी बड़े टकराव से पश्चिम एशिया में पहले से मौजूद अस्थिरता और गहरा सकती है। फिलहाल दुनिया की निगाहें लेबनान की स्थिति और उससे जुड़े अगले राजनीतिक तथा सैन्य घटनाक्रमों पर टिकी हुई हैं।
