जयप्रकाश एसोसिएट्स के लिए अदाणी समूह की योजना को मिली मंजूरी (तस्वीर क्रेडिट@beatsinbrief)

जयप्रकाश एसोसिएट्स के लिए अदाणी समूह की योजना को एनसीएलएटी से मिली मंजूरी,वेदांता की याचिका खारिज

नई दिल्ली,4 मई (युआईटीवी)- कॉर्पोरेट क्षेत्र से जुड़ी एक महत्वपूर्ण कानूनी लड़ाई में बड़ा फैसला सामने आया है,जहाँ राष्ट्रीय कंपनी विधि अपील अधिकरण ने जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड के लिए अदाणी समूह की समाधान योजना को मंजूरी दे दी है। इस फैसले के साथ ही वेदांता समूह की उस याचिका को भी खारिज कर दिया गया है,जिसमें समाधान प्रक्रिया को चुनौती दी गई थी। इस निर्णय ने लंबे समय से चल रही अनिश्चितता को खत्म करते हुए अब कंपनी के पुनर्गठन का रास्ता साफ कर दिया है।

अपीलीय अधिकरण की पीठ,जिसकी अध्यक्षता न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) अशोक भूषण और तकनीकी सदस्य बरुन मित्रा कर रहे थे,ने अपने फैसले में स्पष्ट कहा कि राष्ट्रीय कंपनी विधि अधिकरण द्वारा पारित आदेश में हस्तक्षेप करने का कोई ठोस आधार नहीं है। पीठ ने यह भी माना कि लेनदारों की समिति द्वारा लिए गए निर्णय पूरी तरह उचित और कानूनी दायरे में थे,जिन्हें चुनौती देने का कोई कारण नहीं बनता।

मामले की सुनवाई के दौरान यह सवाल उठाया गया था कि क्या वेदांता समूह की ओर से प्रस्तुत की गई समाधान योजना को नजरअंदाज किया गया। इस पर न्यायाधिकरण ने कहा कि लेनदारों की समिति को अपने व्यावसायिक विवेक के आधार पर निर्णय लेने का पूरा अधिकार है। समिति ने 14 नवंबर 2025 को हुई अपनी 24वीं बैठक में जिस तरह से प्रस्तावों पर विचार किया,वह प्रक्रिया के अनुरूप था और उसमें किसी प्रकार की अनियमितता नहीं पाई गई।

न्यायाधिकरण ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि समाधान योजना को लेकर कोई प्रक्रियात्मक त्रुटि या कानूनी खामी सामने नहीं आई है। ऐसे में यह कहना उचित नहीं होगा कि निर्णय प्रक्रिया में किसी प्रकार की गड़बड़ी हुई है। अदालत ने यह भी कहा कि समिति का व्यावसायिक विवेक सर्वोपरि है और उसमें हस्तक्षेप केवल असाधारण परिस्थितियों में ही किया जा सकता है,जो इस मामले में मौजूद नहीं थीं।

इस पूरे मामले की शुरुआत तब हुई थी,जब जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड को भारी कर्ज के कारण दिवालियापन प्रक्रिया में शामिल किया गया। कंपनी पर 57,000 करोड़ रुपए से अधिक का कर्ज था और वह अपने वित्तीय दायित्वों को पूरा करने में असमर्थ हो गई थी। इसके बाद राष्ट्रीय कंपनी विधि अधिकरण की इलाहाबाद पीठ ने 3 जून 2024 को कंपनी को कॉर्पोरेट दिवालियापन समाधान प्रक्रिया के तहत लाने का आदेश दिया था।

इसके बाद विभिन्न कंपनियों ने कंपनी के अधिग्रहण के लिए अपनी-अपनी बोलियाँ पेश कीं। इस प्रक्रिया में अदाणी समूह और वेदांता समूह प्रमुख दावेदार के रूप में सामने आए। अदाणी समूह ने 14,535 करोड़ रुपए की बोली लगाई,जबकि वेदांता समूह ने दावा किया कि उसकी पेशकश का शुद्ध वर्तमान मूल्य इससे अधिक,लगभग 12,505 करोड़ रुपए ज्यादा था। इसी आधार पर वेदांता ने समाधान प्रक्रिया को चुनौती दी और अपनी बोली को बेहतर बताया।

हालाँकि,अपीलीय अधिकरण ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया और कहा कि केवल वित्तीय आँकड़ों के आधार पर निर्णय नहीं लिया जाता,बल्कि अन्य कई पहलुओं को भी ध्यान में रखा जाता है। लेनदारों की समिति को यह अधिकार है कि वह विभिन्न प्रस्तावों का मूल्यांकन कर यह तय करे कि कौन सा प्रस्ताव कंपनी के लिए अधिक उपयुक्त है। इस मामले में समिति ने अदाणी समूह की योजना को प्राथमिकता दी,जिसे अदालत ने सही ठहराया।

इससे पहले भी अपीलीय अधिकरण ने वेदांता की आपत्तियों के बावजूद अदाणी समूह की योजना के कार्यान्वयन पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया था। उस समय अदालत ने यह स्पष्ट किया था कि अदाणी समूह द्वारा उठाए गए कदम अंतिम फैसले के अधीन रहेंगे। अब अंतिम निर्णय आने के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि अदाणी समूह की योजना को पूरी तरह लागू किया जा सकेगा।

इस फैसले के बाद अब जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड के पुनर्गठन और पुनर्जीवन की प्रक्रिया तेज होने की संभावना है। अदाणी समूह की योजना के तहत कंपनी के कर्ज का पुनर्संरचना किया जाएगा और उसकी परिसंपत्तियों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित किया जाएगा। इससे न केवल कंपनी को पुनर्जीवित करने में मदद मिलेगी,बल्कि लेनदारों को भी अपने बकाया की वसूली का बेहतर मौका मिलेगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला दिवालियापन और दिवाला संहिता के तहत लेनदारों की समिति के अधिकारों को और मजबूत करता है। इससे यह संदेश भी जाता है कि अदालतें केवल उन्हीं मामलों में हस्तक्षेप करेंगी,जहाँ स्पष्ट रूप से किसी प्रकार की अनियमितता या कानूनी उल्लंघन पाया जाए। अन्यथा,व्यावसायिक निर्णयों का सम्मान किया जाएगा।

यह निर्णय कॉर्पोरेट जगत के लिए एक महत्वपूर्ण मिसाल बन सकता है,जहाँ अदालत ने स्पष्ट किया है कि समाधान प्रक्रिया में पारदर्शिता और नियमों का पालन सर्वोपरि है। वेदांता की याचिका खारिज होने के साथ ही अब अदाणी समूह के लिए जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड के अधिग्रहण का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है,जिससे कंपनी के भविष्य को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।