नई दिल्ली,10 जून (युआईटीवी)- एक्टर और पॉलिटिशियन कंगना रनौत ने आने वाली फ़िल्म ‘पेद्दी’ को लेकर चल रही बहस पर अपनी राय दी है। उन्होंने कहा कि महिलाओं को सिर्फ़ एक ‘वस्तु’ (ऑब्जेक्ट) की तरह देखना समाज की एक बड़ी समस्या है,जो सिर्फ़ एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री तक ही सीमित नहीं है।
इस विवाद पर बात करते हुए रनौत ने कहा कि महिलाओं को रोज़मर्रा की ज़िंदगी में अक्सर ऐसी नज़र और सोच का सामना करना पड़ता है,जो उन्हें पसंद नहीं होती,चाहे उनका काम या लुक कुछ भी हो। उन्होंने कहा कि कई सार्वजनिक जगहों पर महिलाओं को ‘वस्तु’ की तरह देखा जाता है और ऐसा अनुभव “लोकल ट्रेन में भी” हो सकता है। उनकी बातों का मकसद यह बताना था कि यह सिर्फ़ सिनेमा तक सीमित मामला नहीं,बल्कि समाज की एक बड़ी समस्या है।
‘पेद्दी’ को लेकर यह चर्चा तब शुरू हुई जब फ़िल्म के कुछ प्रोमोशनल मटीरियल और सीन पर सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई और कुछ क्रिटिक्स ने फ़िल्म में महिला किरदारों को दिखाए जाने के तरीके पर सवाल उठाए। हालाँकि,फ़िल्म के सपोर्टर्स का कहना है कि क्रिएटिव कामों को उनकी कहानी के संदर्भ में देखा जाना चाहिए,न कि सिर्फ़ अलग-अलग दृश्यों या प्रोमोशनल कंटेंट के आधार पर उन्हें जज किया जाना चाहिए।
रनौत ने इस बात पर ज़ोर दिया कि महिलाओं को केवल एक ‘वस्तु’ या ‘चीज़’ के तौर पर देखने (ऑब्जेक्टिफिकेशन) की समस्या को सामाजिक स्तर पर हल किया जाना चाहिए और जीवन के हर क्षेत्र में महिलाओं का सम्मान और गरिमा बनाए रखने की ज़रूरत है। उन्होंने कहा कि अगर सिर्फ़ फ़िल्मों पर ही ध्यान दिया गया,तो उन रोज़मर्रा के अनुभवों को नज़रअंदाज़ करने का ख़तरा हो सकता है,जिनका सामना कई महिलाएँ कार्यस्थलों, सार्वजनिक परिवहन,शिक्षण संस्थानों और अन्य सामाजिक जगहों पर करती हैं।
इन टिप्पणियों पर ऑनलाइन मिली-जुली प्रतिक्रियाएँ आई हैं। कुछ यूज़र्स रनौत की इस बात से सहमत थे कि महिलाओं को ‘वस्तु’ समझने की सोच समाज में गहराई तक बसी है और इसके लिए सिर्फ़ मनोरंजन उद्योग को ज़िम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। वहीं,दूसरों का तर्क था कि फ़िल्में और लोकप्रिय संस्कृति लोगों की सोच बनाने में अहम भूमिका निभाती हैं,इसलिए महिलाओं को किस तरह दिखाया जाता है,इसके लिए उनकी भी ज़िम्मेदारी बनती है।
इस विवाद ने एक बार फिर जेंडर प्रतिनिधित्व,कलात्मक आज़ादी और सार्वजनिक जगहों पर महिलाओं को पेश आ रही चुनौतियों पर व्यापक बहस छेड़ दी है। ‘पेद्दी’ को लेकर चल रही बहस के बीच,रनौत की टिप्पणियों ने चर्चा में एक नया पहलू जोड़ा है और सिनेमा की दुनिया से परे मौजूद बड़ी सामाजिक सच्चाइयों की ओर ध्यान खींचा है।
