लेफ्टिनेंट जनरल एनएस राजा सुब्रमणि बने नए सीडीएस (तस्वीर क्रेडिट@VijayKrSinhaBih)

लेफ्टिनेंट जनरल एनएस राजा सुब्रमणि बने नए सीडीएस,चार दशक की सैन्य सेवा के बाद मिली बड़ी जिम्मेदारी

नई दिल्ली,9 मई (युआईटीवी)- केंद्र सरकार ने देश की सैन्य व्यवस्था में बड़ा बदलाव करते हुए एनएस राजा सुब्रमणि को नया चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ नियुक्त किया है। वह मौजूदा सीडीएस अनिल चौहान का स्थान लेंगे,जिनका कार्यकाल 30 मई को समाप्त हो रहा है। सरकार की ओर से जारी आधिकारिक घोषणा के अनुसार,लेफ्टिनेंट जनरल राजा सुब्रमणि देश के सर्वोच्च सैन्य अधिकारी के रूप में कार्यभार सँभालने के साथ-साथ सैन्य मामलों के विभाग में सचिव की जिम्मेदारी भी निभाएँगे। यह जिम्मेदारी उन्हें पदभार ग्रहण करने की तिथि से अगले आदेश तक सौंपी गई है।

रक्षा मंत्रालय ने उनकी नियुक्ति की घोषणा करते हुए उन्हें चार दशकों से अधिक की विशिष्ट सैन्य सेवा वाले अत्यंत सम्मानित अधिकारी के रूप में वर्णित किया। मंत्रालय ने कहा कि लेफ्टिनेंट जनरल राजा सुब्रमणि ने अपने लंबे सैन्य करियर के दौरान कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों को सफलतापूर्वक निभाया है और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े कई संवेदनशील मोर्चों पर नेतृत्व प्रदान किया है। वर्तमान में वह राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय में सैन्य सलाहकार के रूप में कार्यरत हैं,जहाँ उन्होंने सितंबर 2025 से अपनी सेवाएँ दी हैं।

सरकार के अनुसार,राजा सुब्रमणि का सैन्य अनुभव केवल रणनीतिक स्तर तक सीमित नहीं है,बल्कि उन्होंने जमीनी स्तर पर भी कई चुनौतीपूर्ण अभियानों का नेतृत्व किया है। इससे पहले वह सेना के उप प्रमुख के पद पर कार्य कर चुके हैं। इसके अलावा उन्होंने केंद्रीय कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ के रूप में भी सेवाएँ दीं। पश्चिमी और उत्तरी सीमाओं पर प्रमुख परिचालन इकाइयों की कमान सँभालते हुए उन्होंने कई महत्वपूर्ण सैन्य अभियानों का नेतृत्व किया। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि सीमावर्ती क्षेत्रों में उनका अनुभव और रणनीतिक समझ उन्हें इस पद के लिए बेहद उपयुक्त बनाती है।

लेफ्टिनेंट जनरल राजा सुब्रमणि ने अपने सैन्य करियर की शुरुआत राष्ट्रीय रक्षा अकादमी से की थी। प्रशिक्षण पूरा करने के बाद उन्हें दिसंबर 1985 में गढ़वाल राइफल्स में कमीशन प्राप्त हुआ। शुरुआती दौर से ही उन्होंने कठिन सैन्य जिम्मेदारियों को सँभालते हुए अपनी नेतृत्व क्षमता और परिचालन कौशल का परिचय दिया। सेना में उनकी पहचान एक अनुशासित,रणनीतिक और दूरदर्शी अधिकारी के रूप में रही है।

अपने करियर के दौरान उन्होंने देश और विदेश दोनों जगहों पर कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ निभाईं। यूनाइटेड किंगडम के ब्रैक्नेल स्थित जॉइंट सर्विसेज कमांड एंड स्टाफ कॉलेज में प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद उन्होंने भारत लौटकर एक पर्वतीय ब्रिगेड में ब्रिगेड मेजर के रूप में कार्यभार सँभाला। इसके बाद उन्होंने नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय रक्षा कॉलेज में अध्ययन किया,जहाँ उच्च स्तरीय रक्षा और रणनीतिक मामलों की गहन समझ विकसित की जाती है।

उनकी शैक्षणिक उपलब्धियाँ भी बेहद प्रभावशाली मानी जाती हैं। उन्होंने किंग्स कॉलेज लंदन से मास्टर ऑफ आर्ट्स की डिग्री प्राप्त की,जबकि मद्रास विश्वविद्यालय से रक्षा अध्ययन में एम.फिल की उपाधि हासिल की। सैन्य विशेषज्ञों के अनुसार,उनकी अकादमिक पृष्ठभूमि और व्यावहारिक सैन्य अनुभव का संयोजन उन्हें रणनीतिक नीति निर्माण और आधुनिक सैन्य चुनौतियों से निपटने में सक्षम बनाता है।

राजा सुब्रमणि ने अपने 35 वर्षों से अधिक लंबे सैन्य करियर के दौरान विभिन्न प्रकार के सैन्य अभियानों और संघर्ष क्षेत्रों में सक्रिय भूमिका निभाई। जम्मू-कश्मीर में उन्होंने राष्ट्रीय राइफल्स सेक्टर के उप कमांडर के रूप में सेवा दी,जहाँ आतंकवाद विरोधी अभियानों में उनका योगदान महत्वपूर्ण माना जाता है। इसके अलावा उन्होंने सेना मुख्यालय में सैन्य सचिव शाखा में सहायक सैन्य सचिव के रूप में भी कार्य किया। बाद में उन्हें पूर्वी कमान मुख्यालय में कर्नल जनरल स्टाफ (ऑपरेशन) की जिम्मेदारी सौंपी गई,जहाँ उन्होंने परिचालन रणनीतियों और सैन्य तैयारियों पर काम किया।

अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी उन्होंने भारत का प्रतिनिधित्व किया है। कजाकिस्तान की राजधानी अस्ताना स्थित भारतीय दूतावास में रक्षा अटैची के रूप में उन्होंने भारत और मध्य एशियाई देशों के बीच रक्षा सहयोग को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके इस अनुभव को भारत की रक्षा कूटनीति के लिहाज से भी अहम माना जाता है।

राष्ट्रीय सुरक्षा और सैन्य सेवा में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए उन्हें कई प्रतिष्ठित सैन्य सम्मानों से सम्मानित किया जा चुका है। उन्हें परम विशिष्ट सेवा पदक,अति विशिष्ट सेवा पदक,सेना पदक और विशिष्ट सेवा पदक जैसे सम्मान प्राप्त हुए हैं। ये सम्मान भारतीय सेना में उनके उत्कृष्ट नेतृत्व,बहादुरी और विशिष्ट सेवा को दर्शाते हैं।

रक्षा मामलों के जानकारों का मानना है कि नए सीडीएस के रूप में राजा सुब्रमणि के सामने कई महत्वपूर्ण चुनौतियाँ होंगी। वर्तमान वैश्विक और क्षेत्रीय सुरक्षा परिस्थितियों को देखते हुए तीनों सेनाओं के बीच तालमेल को और मजबूत करना,आधुनिक युद्ध तकनीकों को अपनाना और सैन्य आधुनिकीकरण की प्रक्रिया को गति देना उनकी प्रमुख जिम्मेदारियों में शामिल होगा। इसके अलावा थिएटर कमांड व्यवस्था और संयुक्त सैन्य संचालन जैसे मुद्दों पर भी उनसे अहम भूमिका निभाने की उम्मीद की जा रही है।

भारत में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ का पद तीनों सेनाओं के बीच समन्वय स्थापित करने और रक्षा मामलों में एकीकृत दृष्टिकोण सुनिश्चित करने के उद्देश्य से बनाया गया था। ऐसे में लेफ्टिनेंट जनरल राजा सुब्रमणि की नियुक्ति को भारत की रक्षा रणनीति और सैन्य संरचना के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। सरकार और सैन्य नेतृत्व को उम्मीद है कि उनका व्यापक अनुभव और रणनीतिक दृष्टिकोण भारतीय सशस्त्र बलों को नई दिशा देने में सहायक साबित होगा।