डोनाल्ड ट्रंप (तस्वीर क्रेडिट@rashtra_press)

ब्राजील चुनाव में लूला की जीत स्वीकार करने को तैयार बोल्सोनारो,ट्रंप के बयान के बाद बदला रुख; विपक्ष का नेतृत्व करने का ऐलान

वाशिंगटन,27 अक्टूबर (युआईटीवी)- ब्राजील के राष्ट्रपति चुनाव में लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा की जीत के बाद राजनीतिक उठापटक के बीच दक्षिणपंथी नेता फ्लावियो बोल्सोनारो ने चुनाव परिणाम रद्द कराने की माँग छोड़ दी है। उनकी लिबरल पार्टी ने भी आधिकारिक रूप से लूला की जीत स्वीकार कर ली है। यह बदलाव अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान के कुछ ही समय बाद सामने आया,जिसमें उन्होंने स्पष्ट किया कि वह ब्राजील के चुनाव में हस्तक्षेप नहीं करना चाहते। हालाँकि, ट्रंप ने चुनाव प्रक्रिया और मतगणना के कुछ पहलुओं पर सवाल भी उठाए। इस पूरे घटनाक्रम ने ब्राजील की राजनीति में सत्ता परिवर्तन,विपक्ष की रणनीति और अमेरिका की भूमिका को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है।

चुनाव के दूसरे चरण में लूला को लगभग 6.4 करोड़ वोट मिले,जबकि बोल्सोनारो के खाते में करीब 5.9 करोड़ मत आए। लूला को लगभग 51 प्रतिशत और बोल्सोनारो को करीब 48 प्रतिशत वोट हासिल हुए। दोनों नेताओं के बीच मुकाबला कड़ा रहा,लेकिन अंतिम नतीजों में लूला ने बढ़त बनाए रखी। इसके बावजूद बोल्सोनारो ने शुरुआत में परिणाम स्वीकार करने से इनकार कर दिया था और चुनाव रद्द कराने की माँग उठाई थी। बाद में उनके रुख में आए बदलाव को इस राजनीतिक घटनाक्रम का अहम मोड़ माना जा रहा है।

ब्राजील के चुनाव परिणामों को लेकर विवाद के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से पत्रकारों ने सवाल किया कि क्या वह मतदान प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर कोई कदम उठाना चाहते हैं। सोमवार को एयर फोर्स वन में सवार होने से पहले पूछे गए इस सवाल के जवाब में ट्रंप ने कहा, “मैं ब्राजील नहीं चला रहा हूँ,मैं अमेरिका चला रहा हूं।”

ट्रंप के इस बयान को ब्राजील के चुनाव में सीधे हस्तक्षेप से दूरी बनाने के संकेत के रूप में देखा गया। इसके कुछ ही समय बाद बोल्सोनारो ने चुनाव परिणाम रद्द कराने की मांग छोड़ दी। उनकी लिबरल पार्टी ने भी चुनावी प्राधिकरण की ओर से घोषित परिणाम को स्वीकार करने की घोषणा की।

हालाँकि,ट्रंप ने ब्राजील की चुनाव प्रक्रिया को लेकर अपनी असहमति भी जताई। उन्होंने कहा कि लूला के साथ उनके संबंध अच्छे हैं और उन्हें लूला पसंद हैं,लेकिन चुनाव कराने के तरीके और मतगणना की प्रक्रिया उन्हें ठीक नहीं लगी। ट्रंप ने मतदान का समय बढ़ाए जाने को असामान्य बताया। इस तरह उन्होंने एक ओर ब्राजील के चुनाव में हस्तक्षेप से दूरी दिखाई,तो दूसरी ओर चुनाव प्रक्रिया के कुछ पहलुओं पर सवाल भी उठाए।

बोल्सोनारो की लिबरल पार्टी ने सोमवार शाम चुनाव परिणाम पर अपना रुख स्पष्ट किया। पार्टी के अध्यक्ष वाल्देमार कोस्टा नेटो ने कहा कि पार्टी ब्राजील के सुपीरियर इलेक्टोरल कोर्ट की ओर से घोषित राष्ट्रपति चुनाव के नतीजे स्वीकार करती है। हालाँकि,उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव के दौरान उठाए गए सवालों पर संतुलित और लोकतांत्रिक राजनीतिक बहस के जरिए स्पष्टीकरण दिया जाना चाहिए।

पार्टी के इस बयान से चुनाव परिणाम को लेकर चल रहा विवाद एक नए चरण में पहुंच गया। हालाँकि,परिणाम स्वीकार करने का अर्थ यह नहीं है कि बोल्सोनारो और उनका राजनीतिक खेमा अपनी सभी आपत्तियाँ वापस ले चुका है। उनके बयान से संकेत मिलता है कि वे अब चुनाव परिणाम को रद्द कराने के बजाय राजनीतिक और संसदीय स्तर पर अपनी रणनीति आगे बढ़ाना चाहते हैं।

इस बदलाव के बावजूद चुनाव प्रक्रिया पर उठाए गए सवालों को लेकर राजनीतिक बहस जारी रहने की संभावना है। लिबरल पार्टी ने परिणाम स्वीकार करते हुए भी अपने समर्थकों के सामने उन मुद्दों को उठाने का रास्ता खुला रखा है,जिन्हें वह चुनाव के दौरान विवादास्पद मानती रही है।

सोशल मीडिया पर जारी एक वीडियो में बोल्सोनारो ने स्पष्ट शब्दों में अपनी हार स्वीकार नहीं की, लेकिन उन्होंने कहा कि वह संसद में विपक्ष का नेतृत्व करेंगे। उन्होंने दावा किया कि वह विपक्षी दलों को एकजुट कर सरकार के खिलाफ राजनीतिक मोर्चा तैयार करेंगे।

बोल्सोनारो ने कहा कि वह अराजकता का मुकाबला करने के लिए विपक्ष को संगठित करेंगे। उन्होंने चैंबर ऑफ डेप्युटीज और सीनेट को अपनी राजनीतिक ताकत का प्रमुख आधार बनाने की बात भी कही। चुनाव में दक्षिणपंथी खेमे को कांग्रेस में बहुमत मिलने का दावा उनके लिए संसदीय राजनीति में प्रभाव बनाए रखने का अवसर प्रदान करता है।

इस रणनीति के तहत बोल्सोनारो राष्ट्रपति पद हासिल नहीं कर पाने के बावजूद विधायी संस्थाओं में अपनी ताकत का इस्तेमाल करना चाहते हैं। संसद में मजबूत विपक्ष सरकार की नीतियों,बजट,कानूनों और प्रशासनिक फैसलों पर दबाव बना सकता है। ऐसे में ब्राजील की राजनीति में राष्ट्रपति पद पर लूला की वापसी के बाद भी दोनों खेमों के बीच टकराव जारी रहने की संभावना है।

बोल्सोनारो ने यह भी कहा कि उनका चुनावी अभियान लूला के चुनावी गठबंधन को आर्थिक शक्ति के कथित दुरुपयोग के आरोप में अयोग्य ठहराने की माँग करेगा। उन्होंने अपने समर्थकों के बीच यह संदेश देने की कोशिश की कि उनकी राजनीतिक लड़ाई समाप्त नहीं हुई है। उनका कहना था, “हार मेरी नहीं हुई,लेकिन व्यवस्था जीत गई।” इस बयान के जरिए उन्होंने चुनाव परिणाम को लेकर अपनी असहमति और राजनीतिक व्यवस्था पर अपने आरोपों को दोहराया।

चुनाव के दूसरे चरण के बाद बोल्सोनारो ने परिणाम स्वीकार करने से इनकार करते हुए इसे रद्द कराने की माँग की थी। उन्होंने सुप्रीम फेडरल कोर्ट के न्यायाधीश क्रिस्टियानो जानिन के उस फैसले का हवाला दिया, जिसके तहत मतदान का समय बढ़ाया गया था। बोल्सोनारो के खेमे ने इस फैसले को चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाने का आधार बनाया।

हालाँकि,मतदान का समय बढ़ाने की माँग मूल रूप से लूला की वर्कर्स पार्टी की ओर से की गई थी। पार्टी ने शिकायत की थी कि मतदाताओं को मतदान केंद्रों तक पहुँचाने के लिए पर्याप्त परिवहन उपलब्ध नहीं था। इस समस्या को देखते हुए मतदान की समय-सीमा बढ़ाने का अनुरोध किया गया था।

बाद में बोल्सोनारो की लिबरल पार्टी भी इस अनुरोध में शामिल हो गई थी। इसके बावजूद चुनाव के बाद इसी फैसले को लेकर आपत्तियाँ उठाई गईं। मतदान का समय बढ़ाने के मुद्दे ने दोनों राजनीतिक खेमों के बीच आरोप-प्रत्यारोप को तेज किया और चुनाव परिणाम के बाद विवाद का एक प्रमुख आधार बना।

हालाँकि,बोल्सोनारो की ओर से परिणाम रद्द कराने की माँग छोड़ने और उनकी पार्टी द्वारा नतीजों को स्वीकार करने के बाद विवाद की दिशा बदलती नजर आ रही है। अब विपक्ष की रणनीति चुनाव को दोबारा कराने की माँग के बजाय संसद और राजनीतिक बहस के माध्यम से सरकार को चुनौती देने पर केंद्रित हो सकती है।

ब्राजील के चुनाव पर बयान देने के साथ ही ट्रंप ने इजरायल के चुनाव में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के समर्थन में दिए गए अपने बयानों का भी बचाव किया। उनसे पूछा गया कि क्या नेतन्याहू ने उनसे दूसरी बार समर्थन देने का अनुरोध किया था। ट्रंप ने कहा कि इस विषय पर उनकी ऐसी कोई बातचीत नहीं हुई थी और उन्होंने दोनों मौकों पर नेतन्याहू के समर्थन में बयान दिया था।

ट्रंप ने नेतन्याहू के कामकाज की सराहना करते हुए कहा कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने प्रधानमंत्री के रूप में अच्छा काम किया है। उनका यह बयान उस समय आया,जब ब्राजील के चुनाव में उनके संभावित हस्तक्षेप को लेकर सवाल उठ रहे थे। इससे स्पष्ट हुआ कि ट्रंप विदेशी चुनावों के संदर्भ में अपने बयानों को लेकर पूछे जा रहे सवालों का जवाब देने के साथ-साथ अपने राजनीतिक रुख का भी बचाव कर रहे थे।

इसी बीच,अमेरिका में तीन नवंबर को होने वाले मध्यावधि चुनाव से पहले ट्रंप ने मतदाता धोखाधड़ी की जानकारी देने वालों के लिए 10 लाख डॉलर के इनाम की घोषणा की। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में जानकारी देने वाले व्यक्ति को यह राशि दी जाएगी, जिनके परिणामस्वरूप गिरफ्तारी और दोषसिद्धि होती है।

यह घोषणा अमेरिकी चुनाव प्रक्रिया और मतदाता धोखाधड़ी को लेकर चल रही बहस के बीच सामने आई है। हालाँकि,इनाम की घोषणा अपने आप में किसी चुनाव में धोखाधड़ी होने का प्रमाण नहीं है। ऐसे मामलों में आरोपों और उनकी पुष्टि के बीच अंतर करना महत्वपूर्ण है।

लूला की जीत स्वीकार करने के बाद बोल्सोनारो के सामने अब विपक्ष की भूमिका को प्रभावी बनाने की चुनौती होगी। राष्ट्रपति पद पर लूला के नेतृत्व में सरकार बनने के बाद संसद में दक्षिणपंथी खेमे की ताकत नीतिगत फैसलों और कानून निर्माण पर असर डाल सकती है। वहीं,लूला के लिए भी राजनीतिक विरोध के बीच अपनी सरकार की प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाना महत्वपूर्ण होगा।

चुनाव में दोनों नेताओं के बीच वोटों का अंतर अपेक्षाकृत सीमित रहा। ऐसे में देश की राजनीति में ध्रुवीकरण और नीतिगत मतभेद आगे भी चर्चा के केंद्र में रह सकते हैं। बोल्सोनारो ने चुनाव परिणाम स्वीकार करने के बावजूद अपने राजनीतिक अभियान को जारी रखने और विपक्ष को संगठित करने का संकेत दिया है।

ट्रंप के बयान के बाद बोल्सोनारो और उनकी पार्टी के रुख में आए बदलाव ने इस घटनाक्रम को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी ध्यान आकर्षित करने वाला बना दिया है। हालाँकि, केवल समय के मेल के आधार पर यह निश्चित रूप से नहीं कहा जा सकता कि उनके फैसले में ट्रंप के बयान ने ही निर्णायक भूमिका निभाई। फिलहाल इतना स्पष्ट है कि लूला की जीत को चुनौती देने की शुरुआती कोशिश के बाद बोल्सोनारो का खेमा अब संसदीय राजनीति और विपक्षी गतिविधियों के जरिए अपनी स्थिति मजबूत करने की तैयारी में है।