वॉशिंगटन,14 मार्च (युआईटीवी)- अमेरिका में उपभोक्ता अधिकारों और घरेलू उद्योग की सुरक्षा को मजबूत करने के उद्देश्य से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। शुक्रवार को उन्होंने एक नए कार्यकारी आदेश (एग्जीक्यूटिव ऑर्डर) पर हस्ताक्षर किए,जिसका मकसद उन कंपनियों और विक्रेताओं के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करना है,जो अपने उत्पादों को गलत तरीके से “मेड इन अमेरिका” बताकर बेचते हैं। इस आदेश के जरिए संघीय एजेंसियों को निर्देश दिया गया है कि वे ऐसे मामलों की सख्ती से जाँच करें और दोषी पाए जाने पर कंपनियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करें।
व्हाइट हाउस के मुताबिक यह आदेश उपभोक्ताओं को गुमराह करने वाले व्यापारिक व्यवहार को रोकने और उन कंपनियों की रक्षा करने के लिए लाया गया है,जो वास्तव में अमेरिका में ही अपने उत्पादों का निर्माण करती हैं। प्रशासन का कहना है कि हाल के वर्षों में डिजिटल मार्केटप्लेस और ऑनलाइन बिक्री प्लेटफॉर्म के तेजी से विस्तार के कारण कई विदेशी कंपनियाँ अपने उत्पादों को अमेरिकी निर्मित बताकर बेच रही हैं,जबकि वास्तव में वे दूसरे देशों में तैयार किए जाते हैं। इससे न केवल उपभोक्ताओं को गलत जानकारी मिलती है,बल्कि घरेलू उद्योग को भी आर्थिक नुकसान होता है।
कार्यकारी आदेश में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि अमेरिकी नागरिकों को यह जानने का पूरा अधिकार है कि जिस उत्पाद का प्रचार “मेड इन अमेरिका” या “मेड इन यूएसए” के रूप में किया जा रहा है,वह वास्तव में संयुक्त राज्य अमेरिका में बना है या नहीं। इस आदेश के जरिए सरकार ने यह संकेत दिया है कि उपभोक्ताओं को सही जानकारी उपलब्ध कराना और पारदर्शिता बनाए रखना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।
नए आदेश के तहत अमेरिकी व्यापार नियामक संस्था संघीय व्यापार आयोग यानी एफटीसी को विशेष रूप से निर्देश दिए गए हैं कि वे ऐसे मामलों को प्राथमिकता दें,जिनमें उत्पादों पर “मेड इन अमेरिका” या “मेड इन यूएसए” जैसे दावे किए जाते हैं। एफटीसी को यह अधिकार भी दिया गया है कि वह ऑनलाइन मार्केटप्लेस के लिए नए नियमों का प्रस्ताव तैयार करे,ताकि उत्पादों की वास्तविक उत्पत्ति की पुष्टि की जा सके।
आदेश के अनुसार यदि कोई ऑनलाइन प्लेटफॉर्म अपने प्लेटफॉर्म पर बेचे जा रहे उत्पादों के देश-उत्पत्ति संबंधी दावों की पुष्टि नहीं करता,तो इसे अमेरिकी कानून के तहत “भ्रामक या अनुचित व्यापारिक व्यवहार” माना जा सकता है। ऐसे मामलों में संबंधित विक्रेता और प्लेटफॉर्म दोनों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। सरकार का मानना है कि डिजिटल व्यापार के तेजी से बढ़ते दौर में इस तरह की निगरानी बेहद जरूरी हो गई है।
व्हाइट हाउस के अधिकारियों का कहना है कि कई विदेशी निर्माता और विक्रेता अमेरिकी उपभोक्ताओं की देशभक्ति की भावना का फायदा उठाने की कोशिश करते हैं। वे अपने उत्पादों को “मेड इन अमेरिका” बताकर बेचते हैं,जबकि असल में वे दूसरे देशों में बनाए जाते हैं। इस तरह के झूठे दावे उपभोक्ताओं को भ्रमित करते हैं और अमेरिकी कंपनियों के लिए असमान प्रतिस्पर्धा की स्थिति पैदा करते हैं।
प्रशासन का कहना है कि अमेरिका में निर्माण करने वाली कंपनियाँ अक्सर अधिक लागत का सामना करती हैं क्योंकि उन्हें श्रम मानकों,पर्यावरण नियमों और गुणवत्ता नियंत्रण जैसे कई कड़े मानकों का पालन करना पड़ता है। ऐसे में यदि विदेशी कंपनियाँ झूठे दावे कर बाजार में प्रतिस्पर्धा करती हैं,तो यह घरेलू उद्योग के लिए नुकसानदायक साबित होता है। इसलिए सरकार ने इस समस्या को रोकने के लिए सख्त कदम उठाने का फैसला किया है।
नए आदेश में संघीय सरकारी खरीद व्यवस्था यानी फेडरल प्रोक्योरमेंट के संबंध में भी सख्ती का प्रावधान किया गया है। सरकार के लिए वस्तुओं और सेवाओं की खरीद करने वाली एजेंसियों को समय-समय पर यह समीक्षा करनी होगी कि जिन उत्पादों को “मेड इन अमेरिका” बताकर सरकार को बेचा जा रहा है,वे वास्तव में अमेरिकी मूल के हैं या नहीं। यदि जाँच में यह पाया जाता है कि किसी कंपनी ने झूठा दावा किया है,तो उस कंपनी के उत्पादों को सरकारी खरीद सूची से हटा दिया जाएगा।
इसके अलावा ऐसे मामलों को आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए यूनाइटेड स्टेट्स न्याय विभाग यानी अमेरिकी न्याय विभाग के पास भी भेजा जा सकता है। इसका मतलब यह है कि दोषी कंपनियों को न केवल आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है,बल्कि उन्हें कानूनी दंड का भी सामना करना पड़ सकता है।
व्हाइट हाउस ने अपने बयान में कहा कि इस आदेश का मुख्य उद्देश्य उपभोक्ताओं का विश्वास मजबूत करना और उन व्यवसायों को संरक्षण देना है,जो वास्तव में अमेरिका के भीतर उत्पादन करते हैं। प्रशासन का मानना है कि यदि उपभोक्ताओं को उत्पादों की वास्तविक उत्पत्ति के बारे में सही जानकारी मिलेगी,तो इससे बाजार में पारदर्शिता बढ़ेगी और घरेलू उद्योग को प्रोत्साहन मिलेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम अमेरिकी प्रशासन की व्यापक आर्थिक रणनीति का हिस्सा है,जिसका उद्देश्य देश के भीतर विनिर्माण गतिविधियों को बढ़ावा देना है। ट्रंप प्रशासन लंबे समय से “अमेरिका फर्स्ट” नीति पर जोर देता रहा है,जिसके तहत घरेलू उद्योगों की रक्षा और रोजगार सृजन को प्राथमिकता दी जाती है।
दरअसल अपने पहले कार्यकाल के दौरान भी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने “बाय अमेरिकन एंड हायर अमेरिकन” नीति को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाए थे। इस नीति का उद्देश्य सरकारी खरीद और निजी क्षेत्र में अमेरिकी उत्पादों और श्रमिकों को प्राथमिकता देना था। इसी नीति के तहत स्टील,एल्युमिनियम,कॉपर और ऑटोमोबाइल जैसे कई महत्वपूर्ण औद्योगिक क्षेत्रों में विदेशी आयात पर टैरिफ लगाए गए थे।
ट्रंप प्रशासन का तर्क रहा है कि ऐसे कदमों से अमेरिकी उद्योगों को विदेशी प्रतिस्पर्धा से बचाने में मदद मिलती है और घरेलू रोजगार को बढ़ावा मिलता है। हालाँकि,आलोचकों का कहना है कि इस तरह की नीतियाँ कभी-कभी अंतर्राष्ट्रीय व्यापार संबंधों को प्रभावित कर सकती हैं और वैश्विक व्यापार में तनाव पैदा कर सकती हैं।
फिर भी प्रशासन का मानना है कि घरेलू उत्पादन और उपभोक्ता संरक्षण को मजबूत करना जरूरी है। नए कार्यकारी आदेश के जरिए सरकार ने यह स्पष्ट संदेश दिया है कि झूठे “मेड इन अमेरिका” दावों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई की जाएगी।
कुल मिलाकर यह कदम अमेरिकी बाजार में पारदर्शिता बढ़ाने,उपभोक्ताओं को सही जानकारी देने और घरेलू उद्योग को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि इस आदेश के लागू होने के बाद ऑनलाइन मार्केटप्लेस और वैश्विक व्यापार पर इसका क्या प्रभाव पड़ता है और क्या इससे अमेरिकी निर्माताओं को वास्तविक लाभ मिल पाता है या नहीं।
