वॉशिंगटन,22 अगस्त (युआईटीवी)- अमेरिका में कमर्शियल ड्राइवरों की निजी जानकारी को लेकर ट्रंप प्रशासन और कई राज्यों के बीच चल रहे विवाद में एक संघीय अदालत ने बड़ा अंतरिम आदेश जारी किया है। अदालत ने ट्रंप प्रशासन को 1.7 करोड़ से अधिक कमर्शियल ड्राइवरों की संवेदनशील व्यक्तिगत जानकारी वाले डेटाबेस तक पहुँच हासिल करने से फिलहाल रोक दिया है। इस डेटाबेस में ड्राइवरों के नाम,जन्मतिथि,सोशल सिक्योरिटी नंबर और ड्राइविंग लाइसेंस नंबर जैसी बेहद संवेदनशील जानकारियां मौजूद हैं। अदालत के इस आदेश को राज्यों की ओर से ड्राइवरों की निजता और डेटा सुरक्षा के अधिकारों की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
अदालत ने इसके साथ ही ट्रंप प्रशासन को अमेरिकन एसोसिएशन ऑफ मोटर व्हीकल एडमिनिस्ट्रेटर्स को मिलने वाली 1 करोड़ डॉलर से अधिक की संघीय फंडिंग रोकने से भी फिलहाल मना किया है। यह संस्था देश के कमर्शियल ड्राइविंग लाइसेंस से जुड़े रिकॉर्ड के एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय सिस्टम को संचालित करती है। अदालत का आदेश तब आया है जब वर्जीनिया समेत कई राज्यों के अटॉर्नी जनरल ने संघीय सरकार की उस कोशिश को अदालत में चुनौती दी,जिसके तहत राज्यों से जुड़े कमर्शियल ड्राइवर रिकॉर्ड हासिल करने और उनका अलग डेटाबेस तैयार करने की योजना का आरोप लगाया गया है।
वर्जीनिया के अटॉर्नी जनरल जय जोन्स और कई अन्य राज्यों के अटॉर्नी जनरल ने अमेरिकी परिवहन विभाग,फेडरल मोटर कैरियर सेफ्टी एडमिनिस्ट्रेशन और होमलैंड सिक्योरिटी विभाग की कार्रवाई को चुनौती देते हुए मुकदमा दायर किया था। वर्जीनिया के अटॉर्नी जनरल के कार्यालय के अनुसार,अदालत के अस्थायी आदेश के बाद परिवहन विभाग को संबंधित रिकॉर्ड हासिल करने से फिलहाल रोक दिया गया है। इसके अलावा कानूनी प्रक्रिया पूरी होने तक होमलैंड सिक्योरिटी विभाग की ओर से जारी समन पर भी रोक लगा दी गई है।
जय जोन्स ने अदालत के फैसले को लाखों कमर्शियल ड्राइवरों की निजता की रक्षा के लिए बड़ी जीत बताया। उन्होंने कहा कि संघीय परिवहन विभाग को 1.7 करोड़ से अधिक संवेदनशील रिकॉर्ड हासिल करने से रोकने और होमलैंड सिक्योरिटी विभाग के समन पर रोक लगाने से यह सुनिश्चित हुआ है कि कानूनी प्रक्रिया के दौरान वर्जीनिया के लोगों का डेटा सुरक्षित रहे और राज्य के नियंत्रण में बना रहे। उन्होंने यह भी कहा कि अदालत का फैसला ड्राइवरों की जानकारी पर राज्यों के लंबे समय से चले आ रहे निजता और प्रशासनिक नियंत्रण से जुड़े सुरक्षा उपायों को मजबूत करता है।
हालाँकि,वर्जीनिया के अटॉर्नी जनरल के कार्यालय की ओर से जारी जानकारी में संघीय सरकार या संबंधित विभागों का पक्ष शामिल नहीं किया गया। इसलिए ट्रंप प्रशासन इस मामले में अदालत के आदेश और राज्यों की ओर से लगाए गए आरोपों को किस तरह देखता है,इस पर उसकी विस्तृत प्रतिक्रिया का इंतजार है।
यह पूरा विवाद कमर्शियल ड्राइवर लाइसेंस इन्फॉर्मेशन सिस्टम यानी सीडीएलआईएस से जुड़ा है। इस सिस्टम की स्थापना अमेरिकी कांग्रेस ने वर्ष 1986 में की थी। इसका उद्देश्य राज्यों के बीच कमर्शियल ड्राइविंग लाइसेंस से जुड़ी जानकारी साझा करने की व्यवस्था तैयार करना था। इस सिस्टम की मदद से यह पता लगाया जा सकता है कि किसी व्यक्ति ने किसी दूसरे राज्य में भी कमर्शियल ड्राइविंग लाइसेंस हासिल किया है या नहीं। इसका उद्देश्य एक व्यक्ति द्वारा अलग-अलग राज्यों से कई कमर्शियल लाइसेंस हासिल करने जैसी संभावित गड़बड़ियों को रोकना और लाइसेंसिंग प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाना था।
वर्ष 1988 से अमेरिकी परिवहन विभाग ने राज्यों के लिए इस सिस्टम को संचालित करने की जिम्मेदारी अमेरिकन एसोसिएशन ऑफ मोटर व्हीकल एडमिनिस्ट्रेटर्स नाम की निजी गैर-लाभकारी संस्था को दी हुई है। यही संस्था संबंधित डेटाबेस के संचालन और राज्यों से प्राप्त रिकॉर्ड के प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। डेटाबेस में लाखों कमर्शियल ड्राइवरों से संबंधित व्यक्तिगत जानकारी मौजूद है,जिसके कारण इसकी सुरक्षा और उपयोग को लेकर गंभीर निजता संबंधी सवाल उठते रहे हैं।
इस डेटाबेस में ड्राइवर का नाम,जन्म की तारीख,सोशल सिक्योरिटी नंबर,ड्राइविंग लाइसेंस नंबर और उस राज्य का नाम शामिल होता है जिसने संबंधित जानकारी उपलब्ध कराई है। सोशल सिक्योरिटी नंबर और ड्राइविंग लाइसेंस नंबर जैसी जानकारी को अत्यंत संवेदनशील माना जाता है,क्योंकि इनके गलत इस्तेमाल से पहचान की चोरी और अन्य प्रकार की धोखाधड़ी का खतरा पैदा हो सकता है। यही कारण है कि राज्यों के अटॉर्नी जनरल ने संघीय सरकार द्वारा इन रिकॉर्ड तक पहुंच हासिल करने की कोशिश पर गंभीर आपत्ति जताई है।
जय जोन्स और अन्य राज्यों के अटॉर्नी जनरल ने पिछले सप्ताह इस मामले से जुड़े दो अलग-अलग मुकदमे दायर किए। पहले मुकदमे में परिवहन विभाग,फेडरल मोटर कैरियर सेफ्टी एडमिनिस्ट्रेशन और डेटाबेस का संचालन करने वाली अमेरिकन एसोसिएशन ऑफ मोटर व्हीकल एडमिनिस्ट्रेटर्स को पक्ष बनाया गया है। दूसरे मुकदमे में होमलैंड सिक्योरिटी विभाग की ओर से ड्राइवर रिकॉर्ड हासिल करने की कोशिश को चुनौती दी गई है।
मुकदमों में आरोप लगाया गया है कि संघीय एजेंसियाँ राज्यों से प्राप्त रिकॉर्ड का इस्तेमाल करके एक अलग डेटाबेस तैयार करने की कोशिश कर रही हैं। राज्यों के अटॉर्नी जनरल का दावा है कि इस प्रस्तावित व्यवस्था में सोशल सिक्योरिटी नंबर और अन्य निजी जानकारी के इस्तेमाल तथा साझा किए जाने को नियंत्रित करने वाले पर्याप्त सुरक्षा उपाय नहीं होंगे। उनका यह भी आरोप है कि संघीय एजेंसियों ने इस दिशा में कदम उठाने से पहले राज्यों या जनता को पर्याप्त सार्वजनिक सूचना नहीं दी।
राज्यों का कहना है कि कमर्शियल ड्राइवरों की जानकारी मुख्य रूप से राज्यों की ओर से तैयार और सुरक्षित रखी जाती है। ऐसे में संघीय एजेंसियों द्वारा इन रिकॉर्ड को अपने नियंत्रण में लेकर एक अलग राष्ट्रीय डेटाबेस तैयार करने की कोशिश राज्यों के अधिकारों और नागरिकों की निजता से जुड़े कानूनों को प्रभावित कर सकती है। अटॉर्नी जनरल का तर्क है कि डेटा का इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया जाएगा,इसे लेकर पर्याप्त पारदर्शिता और कानूनी सुरक्षा आवश्यक है।
जय जोन्स ने संकेत दिया है कि वह मुकदमे की अगली प्रक्रिया में प्रारंभिक निषेधाज्ञा की माँग करेंगे। इसका उद्देश्य मुकदमे के दौरान संबंधित जानकारी को राज्यों के सिस्टम से बाहर ट्रांसफर होने से रोकना होगा। यदि ऐसी रोक आगे भी जारी रहती है,तो संघीय सरकार के लिए प्रस्तावित डेटा व्यवस्था को लागू करना मुश्किल हो सकता है। हालाँकि, मामले की अंतिम दिशा अदालत में होने वाली आगे की सुनवाई और दोनों पक्षों की दलीलों पर निर्भर करेगी।
इस कानूनी कार्रवाई में कई राज्यों ने एकजुट होकर संघीय सरकार की कार्रवाई को चुनौती दी है। एरिजोना,कैलिफोर्निया,कोलोराडो,कनेक्टिकट,डेलावेयर,हवाई,इलिनॉय, मेन,मैरीलैंड,मैसाचुसेट्स,मिशिगन,नेवादा,न्यू जर्सी,न्यू मैक्सिको,न्यूयॉर्क,ओरेगन,वरमोंट, वाशिंगटन और विस्कॉन्सिन के अटॉर्नी जनरल इस कार्रवाई में शामिल हैं। इसके अलावा डिस्ट्रिक्ट ऑफ कोलंबिया और पेंसिल्वेनिया भी कानूनी प्रयास का हिस्सा हैं। मिनेसोटा के अटॉर्नी जनरल होमलैंड सिक्योरिटी विभाग से जुड़े मामले में शामिल हुए हैं।
कमर्शियल ड्राइविंग लाइसेंस रिकॉर्ड की व्यवस्था अमेरिका के संघीय ढाँचे में राज्यों और केंद्र के बीच साझा जिम्मेदारी का उदाहरण है। लाइसेंस रिकॉर्ड मुख्य रूप से अलग-अलग राज्यों द्वारा बनाए और संभाले जाते हैं,लेकिन ट्रक, बस और अन्य बड़े कमर्शियल वाहनों को चलाने वाले लोगों के लाइसेंस से जुड़े मामलों में संघीय सरकार देशव्यापी मानक तय करती है। इसी व्यवस्था के तहत राज्यों को लाइसेंस जारी करते समय कई महत्वपूर्ण पहलुओं की जाँच करनी होती है।
किसी व्यक्ति को कमर्शियल ड्राइविंग लाइसेंस देने से पहले राज्य उसकी पहचान, मेडिकल फिटनेस, इमिग्रेशन स्थिति और दूसरे राज्यों में उसके लाइसेंस तथा ड्राइविंग रिकॉर्ड की जाँच करते हैं। यह जाँच इसलिए महत्वपूर्ण है,ताकि कोई व्यक्ति अलग-अलग राज्यों में अलग पहचान या लाइसेंस के आधार पर नियमों से बचने की कोशिश न कर सके। राष्ट्रीय स्तर पर जानकारी साझा करने की व्यवस्था इसी उद्देश्य से बनाई गई थी।
लेकिन अब विवाद इस बात पर केंद्रित है कि इस जानकारी तक संघीय सरकार की पहुँच की सीमा क्या होनी चाहिए और क्या वह राज्यों से प्राप्त रिकॉर्ड के आधार पर अलग डेटाबेस बना सकती है। राज्यों के अटॉर्नी जनरल का कहना है कि ड्राइवरों की निजी जानकारी का इस्तेमाल स्पष्ट कानूनी अधिकार और पर्याप्त सुरक्षा उपायों के बिना नहीं किया जाना चाहिए। उनका दावा है कि सोशल सिक्योरिटी नंबर और अन्य संवेदनशील रिकॉर्ड के व्यापक इस्तेमाल से नागरिकों की निजता खतरे में पड़ सकती है।
इस मामले में अदालत का अंतरिम आदेश फिलहाल केवल अस्थायी सुरक्षा प्रदान करता है। इसका अर्थ यह नहीं है कि अदालत ने राज्यों की सभी दलीलों को अंतिम रूप से स्वीकार कर लिया है या संघीय सरकार की कार्रवाई को पूरी तरह गैरकानूनी घोषित कर दिया है। अंतिम निर्णय आने तक दोनों पक्षों को अपनी दलीलें और कानूनी आधार अदालत के सामने रखने होंगे।
फिलहाल इस आदेश से 1.7 करोड़ से अधिक कमर्शियल ड्राइवरों के संवेदनशील रिकॉर्ड को तत्काल संघीय पहुँच से सुरक्षा मिली है। राज्यों के लिए यह आदेश उनकी डेटा गवर्नेंस और निजता संबंधी चिंताओं को अदालत के सामने रखने का महत्वपूर्ण अवसर है,जबकि ट्रंप प्रशासन के लिए यह मामला संघीय अधिकारों,राष्ट्रीय परिवहन सुरक्षा और राज्यों के नियंत्रण के बीच संतुलन का सवाल बन गया है।
अब इस मामले में आगे होने वाली सुनवाई पर नजर रहेगी। अदालत यह तय करेगी कि संघीय एजेंसियां कमर्शियल ड्राइवर लाइसेंस से जुड़े रिकॉर्ड किस सीमा तक हासिल कर सकती हैं और क्या राज्यों से प्राप्त जानकारी के आधार पर अलग डेटाबेस तैयार करने की अनुमति दी जा सकती है। साथ ही यह भी महत्वपूर्ण होगा कि ड्राइवरों के सोशल सिक्योरिटी नंबर और अन्य संवेदनशील जानकारी की सुरक्षा के लिए कौन से कानूनी और तकनीकी उपाय अनिवार्य होंगे। तब तक संघीय अदालत का अस्थायी आदेश लाखों कमर्शियल ड्राइवरों की निजी जानकारी को लेकर चल रहे इस विवाद में एक महत्वपूर्ण सुरक्षा कवच के रूप में काम करेगा।
