वाशिंगटन,5 नवंबर (युआईटीवी)- अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्वीकार किया है कि ईरान के साथ जारी संघर्ष का असर अमेरिका के मध्यावधि चुनावों पर पड़ा है और इसकी वजह से उनकी रिपब्लिकन पार्टी को राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ा। ट्रंप ने माना कि ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के बाद पेट्रोल की कीमतों में हुई बढ़ोतरी ने मतदाताओं को प्रभावित किया और इसका असर चुनावी नतीजों में भी देखने को मिला। हालाँकि,चुनावी नुकसान स्वीकार करने के बावजूद ट्रंप ने अपने फैसले का बचाव किया है। उन्होंने साफ कहा कि अगर उन्हें एक बार फिर ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई करने का मौका मिलता है, तो वह दोबारा यही फैसला लेंगे। उनके मुताबिक,ईरान को किसी भी कीमत पर परमाणु हथियार हासिल करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
बुधवार को व्हाइट हाउस में प्रस्तावित नए बॉलरूम के निर्माण कार्य की प्रगति से जुड़े एक कार्यक्रम के दौरान ट्रंप ने पत्रकारों से बातचीत की। इस दौरान उनसे ईरान के साथ संघर्ष और मध्यावधि चुनावों में रिपब्लिकन पार्टी के प्रदर्शन के बीच संबंध को लेकर सवाल पूछा गया। पत्रकारों ने जानना चाहा कि क्या ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान की वजह से उनकी पार्टी को चुनाव में नुकसान उठाना पड़ा है। इस पर ट्रंप ने स्वीकार किया कि संघर्ष का चुनावी नतीजों पर काफी हद तक असर पड़ा है।
ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ संघर्ष के कारण अल्पावधि में पेट्रोल की कीमतों में बढ़ोतरी हुई,जिसका सीधा असर आम अमेरिकी नागरिकों पर पड़ा। अमेरिका में ईंधन की कीमतें मतदाताओं के लिए महत्वपूर्ण मुद्दा मानी जाती हैं। पेट्रोल महँगा होने से लोगों के रोजमर्रा के खर्च पर असर पड़ता है और इसका राजनीतिक प्रभाव भी देखने को मिलता है। ट्रंप ने माना कि उनकी सरकार को इस सैन्य अभियान की वजह से राजनीतिक कीमत चुकानी पड़ी है।
हालाँकि,उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि चुनावी नुकसान की वजह से उनके फैसले पर कोई पछतावा नहीं है। जब उनसे पूछा गया कि क्या राजनीतिक नुकसान के बावजूद ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान चलाना सही फैसला था,तो उन्होंने दो टूक कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं है। ट्रंप के मुताबिक,अमेरिका की सुरक्षा और ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना किसी भी चुनावी फायदे से ज्यादा महत्वपूर्ण है।
ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान को लेकर ट्रंप ने अपना रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि अगर उन्हें दोबारा ऐसा फैसला लेने का अवसर मिलता है, तो वह फिर सैन्य कार्रवाई का विकल्प चुनेंगे। उन्होंने कहा कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना उनकी प्राथमिकता है और इस मामले में किसी तरह का समझौता नहीं किया जा सकता।
ट्रंप ने दलील दी कि यदि ईरान परमाणु हथियार हासिल कर लेता है,तो इससे अमेरिका और उसके सहयोगी देशों की सुरक्षा के सामने गंभीर चुनौती पैदा हो सकती है। इसलिए उन्होंने सैन्य अभियान को राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा जरूरी कदम बताया। उनके मुताबिक,इस तरह के फैसले लेते समय केवल चुनावी नतीजों या राजनीतिक लोकप्रियता को ध्यान में नहीं रखा जा सकता।
राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि उन्हें आशंका थी कि ईरान के साथ संघर्ष शुरू होने के बाद अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में कहीं ज्यादा तेजी आ सकती है। हालाँकि, उनके अनुसार तेल की कीमतों में उतनी बड़ी बढ़ोतरी नहीं हुई,जितनी उन्होंने पहले अनुमान लगाया था। उन्होंने इसे सैन्य अभियान के बावजूद ऊर्जा बाजार की स्थिति के लिहाज से राहत की बात बताया।
ट्रंप ने ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य अभियान की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए दावा किया कि अमेरिकी कार्रवाई में ईरान की नौसेना,वायुसेना और हवाई रक्षा प्रणालियों को भारी नुकसान पहुँचा है। उनके मुताबिक,सैन्य अभियान के दौरान ईरान की कई महत्वपूर्ण रक्षा क्षमताओं को कमजोर किया गया है।
उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य से होने वाली तेल आपूर्ति को लेकर भी बड़ा दावा किया। ट्रंप के अनुसार,इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से अब युद्ध से पहले की तुलना में अधिक तेल की आपूर्ति हो रही है। हालाँकि,उन्होंने इस दावे के समर्थन में कोई विस्तृत आँकड़ा या आधिकारिक विवरण प्रस्तुत नहीं किया।
होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। यहां से बड़ी मात्रा में कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों का परिवहन होता है। इस क्षेत्र में किसी भी तरह का सैन्य तनाव अंतर्राष्ट्रीय तेल बाजार और कई देशों की अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकता है। ऐसे में ट्रंप का यह बयान महत्वपूर्ण माना जा रहा है,क्योंकि ईरान के साथ संघर्ष का असर केवल अमेरिका तक सीमित नहीं है,बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी पड़ सकता है।
बातचीत के दौरान ट्रंप से उपराष्ट्रपति की उस विस्तृत सोशल मीडिया पोस्ट के बारे में भी सवाल किया गया,जिसमें ईरान के साथ संघर्ष और मध्यावधि चुनावों के नतीजों के बीच संबंध का जिक्र किया गया था। पत्रकार ने पूछा कि क्या उपराष्ट्रपति ने भी यह माना है कि सैन्य अभियान की वजह से रिपब्लिकन पार्टी को राजनीतिक नुकसान हुआ है।
इस पर ट्रंप ने कहा कि उन्हें पहले से ही अंदाजा था कि ईरान के साथ संघर्ष का चुनावों पर असर पड़ सकता है। उन्होंने बताया कि वह उपराष्ट्रपति की सोच से परिचित हैं और उनकी सोशल मीडिया पोस्ट में व्यक्त विचारों से सहमत भी हैं।
ट्रंप के इस बयान से स्पष्ट है कि वह चुनावी नुकसान की संभावना को पहले से समझ रहे थे। इसके बावजूद उन्होंने सैन्य कार्रवाई को प्राथमिकता दी। उन्होंने एक बार फिर दोहराया कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना उनकी सरकार का महत्वपूर्ण उद्देश्य है और इस नीति में बदलाव की कोई संभावना नहीं है।
ईरान के साथ चल रहे संघर्ष के समाप्त होने के समय को लेकर भी ट्रंप से सवाल किया गया। इस पर उन्होंने कोई निश्चित समयसीमा बताने से परहेज किया। उन्होंने कहा कि सैन्य अभियान कब समाप्त होगा,यह इस बात पर निर्भर करेगा कि आगे की कार्रवाई किस तरह और कितनी प्रभावी तरीके से की जाती है।
ट्रंप ने दोहराया कि अमेरिका का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ईरान परमाणु हथियार विकसित न कर सके। उनके मुताबिक,जब तक इस लक्ष्य को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं होती,तब तक संघर्ष की समाप्ति को लेकर निश्चित समय बताना संभव नहीं है।
इस बयान से संकेत मिलता है कि अमेरिकी प्रशासन ईरान के खिलाफ अपने रुख में फिलहाल नरमी लाने के लिए तैयार नहीं है। हालाँकि,सैन्य अभियान को आगे किस दिशा में ले जाया जाएगा और इसके समाप्त होने के लिए किन शर्तों को जरूरी माना जाएगा,इस बारे में ट्रंप ने कोई विस्तृत जानकारी नहीं दी।
मध्यावधि चुनावों में रिपब्लिकन पार्टी के प्रदर्शन पर चर्चा के दौरान ट्रंप ने अपनी चुनावी रैलियों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि अगर उनका नाम भी चुनावी मतपत्र पर होता, तो नतीजे अलग हो सकते थे। ट्रंप ने दावा किया कि यदि वह खुद चुनाव मैदान में होते,तो उनकी पार्टी को जीत मिलती।
उन्होंने अपनी रैलियों में उमड़ने वाली भारी भीड़ का हवाला देते हुए कहा कि उनके प्रति लोगों का उत्साह काफी अधिक रहा है। हालाँकि,वह इस लोकप्रियता को रिपब्लिकन उम्मीदवारों के पक्ष में वोटों में बदलने में सफल नहीं हो सके। ट्रंप ने स्वीकार किया कि उनकी पार्टी के उम्मीदवारों तक उनके प्रति लोगों का समर्थन और प्यार पूरी तरह नहीं पहुँच पाया।
उनके इस बयान से यह भी साफ हुआ कि वह चुनावी हार के लिए केवल ईरान संघर्ष को जिम्मेदार नहीं मानते,बल्कि पार्टी के उम्मीदवारों और उनके चुनाव प्रचार के बीच तालमेल की कमी को भी एक कारण के रूप में देखते हैं।
चुनाव के बाद राजनीतिक परिस्थितियों और विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी के साथ काम करने की संभावनाओं को लेकर भी ट्रंप ने अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि वह डेमोक्रेटिक नेताओं के साथ मिलकर काम करने के लिए तैयार हैं,लेकिन इसके लिए जरूरी है कि वे ऐसे कदम न उठाएँ,जिन्हें वह अमेरिका के हितों के खिलाफ मानते हैं।
ट्रंप ने बताया कि डेमोक्रेटिक पार्टी के नेताओं ने विभिन्न मुद्दों पर बातचीत करने के लिए उनसे संपर्क किया है। उन्होंने संकेत दिया कि अगर विपक्ष सहयोगात्मक रवैया अपनाता है,तो सरकार और विपक्ष के बीच कुछ महत्वपूर्ण मुद्दों पर सहमति बन सकती है।
हालाँकि,ट्रंप ने यह भी याद दिलाया कि राष्ट्रपति के रूप में उनके पास विरोध वाले विधेयकों को वीटो करने का अधिकार है। यानी अगर कांग्रेस में डेमोक्रेटिक पार्टी की ओर से कोई ऐसा प्रस्ताव पारित किया जाता है,जिससे ट्रंप सहमत नहीं हैं,तो वह उसे रोकने के लिए अपने संवैधानिक अधिकार का इस्तेमाल कर सकते हैं।
ट्रंप से संभावित महाभियोग की कार्रवाई को लेकर भी सवाल पूछे गए। इस पर उन्होंने किसी तरह की चिंता जाहिर नहीं की। उन्होंने कहा कि यदि डेमोक्रेटिक पार्टी बिना किसी ठोस आधार के महाभियोग की कोशिश करती है,तो इसका राजनीतिक नुकसान उसी को उठाना पड़ सकता है।
ट्रंप का मानना है कि विपक्ष को राजनीतिक विरोध और वास्तविक संवैधानिक उल्लंघन के बीच अंतर समझना चाहिए। उन्होंने संकेत दिया कि केवल राजनीतिक असहमति के आधार पर महाभियोग की प्रक्रिया शुरू करना उचित नहीं होगा।
अमेरिका में मध्यावधि चुनाव राष्ट्रपति के चार साल के कार्यकाल के बीच में आयोजित किए जाते हैं। इन चुनावों में प्रतिनिधि सभा की सभी सीटों और सीनेट की लगभग एक-तिहाई सीटों के लिए मतदान होता है। इसके अलावा अलग-अलग राज्यों में गवर्नर,राज्य विधानसभाओं और स्थानीय निकायों के पदों के लिए भी चुनाव कराए जाते हैं।
इन चुनावों को राष्ट्रपति के कार्यकाल के लिए एक महत्वपूर्ण राजनीतिक परीक्षा माना जाता है। इनके नतीजों से यह पता चलता है कि मतदाता राष्ट्रपति की नीतियों और सरकार के कामकाज से कितने संतुष्ट हैं। यदि राष्ट्रपति की पार्टी को नुकसान होता है,तो कांग्रेस में विपक्ष की स्थिति मजबूत हो सकती है। इसका असर राष्ट्रपति के कानून बनाने, बजट पारित कराने और अन्य नीतिगत फैसलों पर पड़ता है।
ऐसे में ट्रंप का ईरान संघर्ष को चुनावी नुकसान की एक वजह स्वीकार करना राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। एक तरफ उन्होंने माना है कि पेट्रोल की बढ़ती कीमतों और सैन्य अभियान का असर उनकी पार्टी के प्रदर्शन पर पड़ा,वहीं दूसरी तरफ उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देकर अपने फैसले का मजबूती से बचाव किया है। फिलहाल उनका स्पष्ट संदेश है कि चुनावी परिणाम चाहे जो हों,ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने की अमेरिकी नीति में वह कोई बदलाव नहीं करना चाहते।
