डोनाल्ड ट्रंप (तस्वीर क्रेडिट@wsyx6)

अंकारा में नाटो समिट पर दुनिया की नजर, रक्षा खर्च, यूक्रेन युद्ध और नए सुरक्षा ढाँचे पर ट्रंप करेंगे अहम बातचीत

वाशिंगटन,6 जुलाई (युआईटीवी)- तुर्किए की राजधानी अंकारा में आयोजित होने जा रहे नाटो शिखर सम्मेलन पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं। यह सम्मेलन ऐसे समय में हो रहा है,जब यूरोप की सुरक्षा व्यवस्था रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण बड़े बदलावों के दौर से गुजर रही है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए सोमवार शाम व्हाइट हाउस से रवाना होंगे और मंगलवार दोपहर अंकारा पहुँचेंगे। व्हाइट हाउस ने स्पष्ट किया है कि इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य रक्षा खर्च बढ़ाने,सदस्य देशों के बीच सुरक्षा दायित्वों का संतुलित बँटवारा सुनिश्चित करने और रक्षा औद्योगिक सहयोग को नई गति देना होगा। इसके साथ ही ट्रंप की तुर्किए के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन, यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की और सीरिया के अंतरिम राष्ट्रपति अहमद अल-शरा के साथ महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठकें भी प्रस्तावित हैं,जिनमें क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा से जुड़े कई अहम मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है।

व्हाइट हाउस की प्रवक्ता एना केली के अनुसार राष्ट्रपति ट्रंप के अंकारा पहुँचने पर उनका औपचारिक स्वागत किया जाएगा। तुर्किए के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन स्टेट अराइवल सेरेमनी में उनका स्वागत करेंगे और इसके बाद ऑनर गार्ड का निरीक्षण किया जाएगा। इस औपचारिक कार्यक्रम के बाद दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय वार्ता होगी,जिसमें अमेरिका और तुर्किए के संबंधों को मजबूत करने,रक्षा सहयोग बढ़ाने और क्षेत्रीय चुनौतियों से निपटने की रणनीति पर विचार-विमर्श किया जाएगा। मंगलवार शाम राष्ट्रपति ट्रंप नाटो सदस्य देशों के नेताओं के लिए आयोजित सोशल डिनर में हिस्सा लेंगे,जहाँ अनौपचारिक बातचीत के माध्यम से कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर प्रारंभिक चर्चा होने की संभावना है।

बुधवार को सम्मेलन का सबसे महत्वपूर्ण चरण शुरू होगा। राष्ट्रपति ट्रंप आधिकारिक स्वागत समारोह और सभी नेताओं के साथ पारिवारिक तस्वीर में शामिल होंगे। इसके बाद नाटो नेताओं के कार्य सत्र में भाग लेंगे,जहाँ रक्षा खर्च,सैन्य तैयारियों और गठबंधन की भविष्य की रणनीति पर विस्तृत चर्चा होगी। सम्मेलन के समापन से पहले ट्रंप की यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की तथा सीरिया के अंतरिम राष्ट्रपति अहमद अल-शरा के साथ अलग-अलग द्विपक्षीय बैठकें भी निर्धारित हैं। इन बैठकों के बाद राष्ट्रपति ट्रंप मीडिया को संबोधित करेंगे और फिर अमेरिका के लिए रवाना होंगे। व्हाइट हाउस के अनुसार बुधवार शाम तक उनके वाशिंगटन लौटने का कार्यक्रम तय किया गया है।

इस बार का नाटो शिखर सम्मेलन कई कारणों से विशेष माना जा रहा है। सबसे महत्वपूर्ण विषय सदस्य देशों द्वारा रक्षा बजट बढ़ाने की प्रतिबद्धता है। नाटो में अमेरिका के राजदूत मैथ्यू जी. व्हिटेकर ने सम्मेलन से पहले कहा कि अंकारा शिखर सम्मेलन में पिछले वर्ष हेग में हुए समझौते की प्रगति का विस्तृत आकलन किया जाएगा। उस सम्मेलन में सदस्य देशों ने अपनी सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी का पांच प्रतिशत रक्षा क्षेत्र पर खर्च करने की दिशा में काम करने का संकल्प लिया था। अब यह देखा जाएगा कि विभिन्न देशों ने इस लक्ष्य की दिशा में कितनी प्रगति की है और आगे की रणनीति क्या होगी।

मैथ्यू जी. व्हिटेकर ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप की स्पष्ट अपेक्षा है कि सभी सहयोगी देश रक्षा खर्च बढ़ाने के अपने वादे को केवल कागजों तक सीमित न रखें,बल्कि जल्द-से-जल्द उसे व्यवहार में भी लागू करें। उनके अनुसार मौजूदा वैश्विक सुरक्षा परिस्थितियाँ पहले की तुलना में कहीं अधिक चुनौतीपूर्ण हो चुकी हैं। ऐसे माहौल में केवल अमेरिका पर सुरक्षा का बोझ डालना व्यावहारिक नहीं है। उन्होंने कहा कि सभी सदस्य देशों को रक्षा क्षेत्र में पर्याप्त निवेश करना होगा,ताकि नाटो सामूहिक रूप से किसी भी खतरे का प्रभावी ढंग से मुकाबला कर सके।

व्हिटेकर ने यह भी जानकारी दी कि नाटो सहयोगी देशों ने अब तक लगभग 139 अरब अमेरिकी डॉलर के अतिरिक्त रक्षा खर्च का वादा किया है। उन्होंने कहा कि इस राशि का लगभग आधा हिस्सा अमेरिका में निर्मित हथियारों,सैन्य उपकरणों और गोला-बारूद की खरीद पर खर्च किया जाएगा। उनके अनुसार यह शुरुआत सकारात्मक है,लेकिन अभी भी कई देशों को अपनी प्रतिबद्धताओं के अनुरूप अधिक प्रयास करने की आवश्यकता है। उन्होंने विशेष रूप से पोलैंड,नॉर्डिक देशों और बाल्टिक देशों की सराहना करते हुए कहा कि इन देशों ने रक्षा खर्च बढ़ाने के मामले में उल्लेखनीय प्रगति दिखाई है। वहीं जर्मनी भी वर्ष 2029 तक निर्धारित लक्ष्य हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

अमेरिका लंबे समय से यह तर्क देता रहा है कि नाटो के अधिकांश सदस्य देश अपनी सुरक्षा के लिए अमेरिका पर अत्यधिक निर्भर रहे हैं। राष्ट्रपति ट्रंप पहले भी कई बार यह कह चुके हैं कि यदि सभी सदस्य समान रूप से जिम्मेदारी नहीं निभाते हैं,तो गठबंधन की प्रभावशीलता प्रभावित हो सकती है। इस बार भी उनका प्रमुख संदेश यही रहने वाला है कि सुरक्षा का बोझ सभी देशों के बीच संतुलित तरीके से बाँटा जाए। उनका मानना है कि आर्थिक रूप से सक्षम देशों को अपनी सैन्य क्षमता बढ़ाने में अधिक निवेश करना चाहिए,ताकि सामूहिक सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत बन सके।

रक्षा औद्योगिक सहयोग भी इस सम्मेलन का प्रमुख विषय रहेगा। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि केवल रक्षा बजट बढ़ाना पर्याप्त नहीं होगा,बल्कि हथियारों और सैन्य उपकरणों के उत्पादन की क्षमता में भी तेजी से विस्तार करना होगा। नाटो के नए सैन्य लक्ष्यों को पूरा करने के लिए यूरोप और उत्तरी अमेरिका दोनों को रक्षा उत्पादन बढ़ाने की आवश्यकता है। इसी उद्देश्य से सम्मेलन में रक्षा उत्पादन,संयुक्त विनिर्माण और नई औद्योगिक साझेदारियों पर विस्तृत चर्चा होगी।

मैथ्यू जी. व्हिटेकर ने कहा कि अमेरिका चाहता है कि यूरोप अपने पारंपरिक रक्षा दायित्वों का बड़ा हिस्सा स्वयं सँभाले। उनके अनुसार अमेरिका नाटो का मजबूत और प्रतिबद्ध सदस्य बना रहेगा,लेकिन दुनिया की एक प्रमुख शक्ति होने के कारण उसकी जिम्मेदारियाँ केवल यूरोप तक सीमित नहीं हैं। इंडो-पैसिफिक क्षेत्र,पश्चिम एशिया और अन्य रणनीतिक क्षेत्रों में भी अमेरिका की भूमिका महत्वपूर्ण है। इसलिए यूरोपीय देशों को अपनी रक्षा क्षमताओं को इतना मजबूत बनाना होगा कि वे क्षेत्रीय सुरक्षा की जिम्मेदारी अधिक प्रभावी ढंग से निभा सकें।

व्हाइट हाउस की प्रवक्ता एना केली ने सम्मेलन को नाटो के लिए एक नए युग की शुरुआत बताया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप के नेतृत्व में गठबंधन की संरचना में ऐतिहासिक बदलाव शुरू हुआ है। उनके अनुसार पहले नाटो की सुरक्षा व्यवस्था काफी हद तक अमेरिका पर निर्भर थी,लेकिन अब इसे वास्तविक दायित्व साझेदारी और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ाया जा रहा है। उनका कहना है कि सदस्य देशों के बीच रक्षा सहयोग को मजबूत करने के साथ-साथ रक्षा खरीद की प्रक्रियाओं को भी अधिक प्रभावी और तेज बनाया जाएगा।

सम्मेलन के दौरान रक्षा खरीद के लिए नए ढांचे और अमेरिकी रक्षा कंपनियों के उत्पादों को सहयोगी देशों तक तेजी से पहुँचाने के उपायों पर भी चर्चा होगी। अमेरिकी प्रशासन का मानना है कि यदि सदस्य देश आधुनिक हथियार प्रणालियों की खरीद और संयुक्त उत्पादन को बढ़ावा देते हैं,तो इससे न केवल उनकी सैन्य क्षमता मजबूत होगी,बल्कि रक्षा उद्योग को भी नई गति मिलेगी। अधिकारियों के अनुसार सम्मेलन के दौरान रक्षा सह-उत्पादन,नई विनिर्माण इकाइयों की स्थापना और अत्याधुनिक अमेरिकी हथियार प्रणालियों की खरीद से जुड़े अरबों डॉलर के समझौतों की घोषणा भी हो सकती है।

यूक्रेन युद्ध इस सम्मेलन का दूसरा सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा होगा। राष्ट्रपति ट्रंप और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की की प्रस्तावित बैठक को लेकर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर विशेष रुचि है। व्हाइट हाउस के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि दोनों नेता रूस-यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने के प्रयासों पर विस्तार से चर्चा करेंगे। ट्रंप का मानना है कि युद्ध जितना लंबा चलेगा,उतना ही अधिक मानवीय और आर्थिक नुकसान होगा। इसलिए युद्धविराम और स्थायी समाधान की दिशा में नए प्रयास किए जाने चाहिए।

अमेरिकी अधिकारियों ने यह भी संकेत दिया है कि जेलेंस्की से मुलाकात के बाद राष्ट्रपति ट्रंप रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से भी बातचीत कर सकते हैं। यदि ऐसा होता है,तो यह यूक्रेन संकट के समाधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक पहल मानी जाएगी। हालाँकि,इस बातचीत का स्वरूप और संभावित एजेंडा अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है।

सीरिया के अंतरिम राष्ट्रपति अहमद अल-शरा के साथ ट्रंप की बैठक भी विशेष महत्व रखती है। पश्चिम एशिया में बदलते राजनीतिक हालात,आतंकवाद विरोधी सहयोग, शरणार्थी संकट और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे विषय इस बैठक में प्रमुखता से उठ सकते हैं। अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के लिए सीरिया की स्थिति अभी भी एक महत्वपूर्ण रणनीतिक मुद्दा बनी हुई है।

सम्मेलन के दौरान यूरोप में अमेरिकी सैनिकों की तैनाती और सैन्य अड्डों की समीक्षा का मुद्दा भी चर्चा में रहेगा। अमेरिकी अधिकारियों ने पुष्टि की है कि पेंटागन इस संबंध में व्यापक समीक्षा कर रहा है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि यूरोपीय सहयोगी अपनी सुरक्षा की जिम्मेदारी अधिक प्रभावी ढंग से निभाएँ और अमेरिका अपनी सैन्य संसाधनों का उपयोग वैश्विक प्राथमिकताओं के अनुरूप कर सके। हालाँकि,अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि समीक्षा अभी जारी है और इस संबंध में अंतिम निर्णय बाद में लिया जाएगा।

अमेरिका ने यह भी बताया कि पिछले वर्ष उसने यूरोपीय और कनाडाई सहयोगी देशों को लगभग 50 अरब अमेरिकी डॉलर के रक्षा उपकरणों की बिक्री की थी। इसके अलावा अमेरिकी रक्षा उद्योग के पास लगभग 300 अरब अमेरिकी डॉलर के बैक ऑर्डर मौजूद हैं। इससे स्पष्ट है कि वैश्विक स्तर पर रक्षा उपकरणों की माँग लगातार बढ़ रही है और नाटो देशों द्वारा रक्षा खर्च बढ़ाने से इस क्षेत्र में और तेजी आने की संभावना है।

विशेषज्ञों का मानना है कि रूस-यूक्रेन युद्ध ने नाटो की रणनीतिक सोच को पूरी तरह बदल दिया है। कई यूरोपीय देशों ने अपने रक्षा बजट में उल्लेखनीय वृद्धि की है और आधुनिक सैन्य तकनीक में निवेश बढ़ाया है। हालाँकि,अभी भी कई सदस्य देश पाँच प्रतिशत रक्षा खर्च के लक्ष्य से काफी दूर हैं। ऐसे में अंकारा शिखर सम्मेलन यह तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा कि आने वाले वर्षों में नाटो किस दिशा में आगे बढ़ेगा।

इस सम्मेलन से यह भी स्पष्ट संकेत मिलने की संभावना है कि अमेरिका भविष्य में यूरोप के साथ अपने सुरक्षा संबंधों को किस रूप में देखता है। यदि सदस्य देश रक्षा खर्च बढ़ाने और सैन्य क्षमता विकसित करने की दिशा में ठोस कदम उठाते हैं,तो नाटो की सामूहिक सुरक्षा व्यवस्था पहले की तुलना में अधिक मजबूत हो सकती है। वहीं यदि अपेक्षित प्रगति नहीं होती है,तो अमेरिका की ओर से सहयोगियों पर दबाव और बढ़ सकता है।

अंकारा में होने वाला यह नाटो शिखर सम्मेलन केवल एक नियमित वार्षिक बैठक नहीं,बल्कि बदलते वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य में गठबंधन की नई दिशा तय करने वाला महत्वपूर्ण मंच माना जा रहा है। रक्षा खर्च,सैन्य आधुनिकीकरण,रक्षा उद्योग,यूक्रेन युद्ध, पश्चिम एशिया की स्थिति और अमेरिका-यूरोप संबंधों जैसे कई अहम मुद्दों पर होने वाली चर्चाएं आने वाले वर्षों की वैश्विक सुरक्षा नीति को प्रभावित कर सकती हैं। यही कारण है कि पूरी दुनिया की नजरें इस सम्मेलन और उसमें होने वाले फैसलों पर टिकी हुई हैं।