मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय (तस्वीर क्रेडिट@rashtra_press)

तमिलनाडु में नवजातों को मिलेगी एक ग्राम सोने की अँगूठी, 28 सितंबर से योजना की शुरुआत

चेन्नई,19 सितंबर (युआईटीवी)- तमिलनाडु सरकार नवजात शिशुओं के सम्मान और सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति लोगों का भरोसा मजबूत करने के उद्देश्य से एक नई कल्याणकारी योजना शुरू करने जा रही है। मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय 28 सितंबर को ‘थाईमामन गोल्ड रिंग योजना’ का औपचारिक शुभारंभ करेंगे। इस योजना के तहत सरकारी अस्पतालों में जन्म लेने वाले पात्र प्रत्येक बच्चे को एक ग्राम सोने की अँगूठी प्रदान की जाएगी। सरकार का कहना है कि यह पहल नवजात शिशुओं के स्वागत के साथ-साथ सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था में संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है।

मुख्यमंत्री ने शुक्रवार को सचिवालय में योजना के शुभारंभ और इसके कार्यान्वयन से जुड़ी तैयारियों की समीक्षा की। बैठक में योजना को प्रभावी तरीके से लागू करने,पात्र बच्चों की पहचान करने और लाभार्थियों तक अंगूठियाँ पहुँचाने की व्यवस्था का आकलन किया गया। सरकार ने मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को अपनी प्राथमिकताओं में शामिल करते हुए गर्भवती महिलाओं और नवजात बच्चों के लिए पहले से कई योजनाएँ और स्वास्थ्य सेवाएँ संचालित कर रखी हैं। नई सोने की अँगूठी योजना को इसी व्यापक सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था के एक हिस्से के तौर पर देखा जा रहा है।

सरकार के अनुसार,गर्भवती महिलाओं को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने से लेकर मुफ्त प्रसव और नवजात शिशुओं की देखभाल तक कई स्तरों पर सुविधाएँ दी जा रही हैं। आपातकालीन प्रसूति उपचार,पोषण संबंधी सहायता और संस्थागत प्रसव की अग्रिम योजना के माध्यम से मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत किया गया है। गर्भवती महिलाओं और बच्चों की निगरानी के लिए गर्भावस्था एवं शिशु समूह निगरानी और मूल्यांकन प्रणाली का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। इस डिजिटल व्यवस्था के जरिए गर्भावस्था से लेकर नवजात शिशु की देखभाल तक आवश्यक जानकारी को एकीकृत तरीके से मॉनिटर करने का प्रयास किया जाता है।

सरकार का दावा है कि इन पहलों के कारण राज्य के मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य संकेतकों में महत्वपूर्ण सुधार हुआ है। इसी पृष्ठभूमि में ‘थाईमामन गोल्ड रिंग योजना’ को शुरू किया जा रहा है। योजना का उद्देश्य केवल सोने की अँगूठी देना नहीं है,बल्कि सरकारी अस्पतालों में प्रसव कराने वाले परिवारों के बीच सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति विश्वास को और मजबूत करना भी है। इसके साथ ही यह योजना नवजात बच्चे के जन्म को सम्मान देने की परंपरा से भी जुड़ी हुई है।

योजना के नाम और इसकी अवधारणा का संबंध तमिल संस्कृति में मामा की पारंपरिक भूमिका से भी बताया गया है। तमिल सामाजिक और पारिवारिक परंपराओं में बच्चे के मामा की भूमिका विशेष मानी जाती है। इसी सांस्कृतिक भाव को सरकारी कल्याण योजना के साथ जोड़ते हुए नवजात शिशुओं को सोने की अंगूठी देने की व्यवस्था की गई है। सरकार के मुताबिक,इससे एक ओर नवजात के जन्म का सम्मान होगा और दूसरी ओर परिवार तथा सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था के बीच जुड़ाव को बढ़ावा मिलेगा।

इस योजना के तहत 22 जून 2026 या उसके बाद सरकारी अस्पताल में जन्म लेने वाले सभी पात्र नवजात शिशुओं को एक ग्राम सोने की अँगूठी दी जाएगी। योजना को अधिकृत करने वाला सरकारी आदेश 23 जून को जारी किया गया था। यानी औपचारिक शुभारंभ 28 सितंबर को होने के बावजूद पात्रता अवधि में पहले से जन्म ले चुके बच्चों को भी इसका लाभ दिया जाएगा। इसके लिए विशेष वितरण व्यवस्था तैयार की गई है,ताकि योजना शुरू होने से पहले जन्मे पात्र बच्चों को भी अंगूठियाँ उपलब्ध कराई जा सकें।

तमिलनाडु में हर वर्ष करीब 7.80 लाख जन्म दर्ज किए जाते हैं। राज्य में अस्पतालों में होने वाले प्रसव का अनुपात भी काफी अधिक है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-6 के आँकड़ों के अनुसार,राज्य में लगभग 99.9 प्रतिशत प्रसव स्वास्थ्य संस्थानों में होते हैं। इनमें सरकारी अस्पतालों की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। उपलब्ध आँकड़ों के मुताबिक,सरकारी अस्पतालों में करीब 42 लाख प्रसव होते हैं,जो कुल प्रसव का लगभग 53 प्रतिशत है।

सरकार के अनुसार,सरकारी अस्पतालों में होने वाले करीब 90 प्रतिशत प्रसव ऐसे केंद्रों में होते हैं,जहाँ व्यापक आपातकालीन प्रसूति और नवजात शिशु देखभाल की सुविधा उपलब्ध है। इससे सार्वजनिक स्वास्थ्य ढाँचे की उस भूमिका का पता चलता है,जो सुरक्षित प्रसव और नवजात शिशुओं की बेहतर देखभाल सुनिश्चित करने में निभाई जा रही है। सरकार का कहना है कि सोने की अँगूठी योजना इसी सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था में लोगों की भागीदारी और भरोसे को बढ़ाने में मदद करेगी।

योजना के तहत वितरित की जाने वाली प्रत्येक सोने की अँगूठी पर एक विशिष्ट क्रमांक अंकित होगा। साथ ही अंगूठियों की आपूर्ति छेड़छाड़-रोधी पैकेजिंग में की जाएगी,जिससे वितरण प्रक्रिया में पारदर्शिता और सुरक्षा बनाए रखने में मदद मिले। पहले चरण में सरकार ने कुल 1.28 लाख सोने की अंगूठियाँ खरीदी हैं। लाभार्थियों की संख्या और योजना के क्रियान्वयन के आधार पर आगे की जरूरतों के अनुसार व्यवस्था को बढ़ाया जा सकता है।

इस योजना का लाभ तमिलनाडु में स्थायी रूप से रहने वाली माताओं के नवजात बच्चों को मिलेगा। इसके लिए गर्भावस्था एवं शिशु समूह निगरानी और मूल्यांकन प्रणाली के पोर्टल पर पंजीकरण आवश्यक होगा। लाभार्थी के पास प्रजनन एवं बाल स्वास्थ्य पहचान संख्या भी होनी चाहिए। इन शर्तों के जरिए पात्र लाभार्थियों की पहचान और योजना के तहत वितरण प्रक्रिया को व्यवस्थित करने की व्यवस्था की गई है।

22 जून से 28 सितंबर के बीच जन्म लेने वाले पात्र बच्चों को अंगूठियाँ उपलब्ध कराने के लिए राज्य में 107 नामित केंद्रों पर विशेष व्यवस्था की गई है। इन केंद्रों पर 28 सितंबर से प्रतिदिन करीब 100 बच्चों को सेवा देने की योजना है। इसके बाद योजना के तहत पात्र नवजात शिशुओं को सरकारी अस्पताल से छुट्टी मिलने के समय ही सोने की अँगूठी सौंपने की व्यवस्था की जाएगी।

इस तरह ‘थाईमामन गोल्ड रिंग योजना’ को तमिलनाडु सरकार ने मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं, संस्थागत प्रसव और सांस्कृतिक परंपरा को जोड़ने वाली पहल के रूप में तैयार किया है। 28 सितंबर से इसके औपचारिक रूप से शुरू होने के बाद सरकारी अस्पतालों में जन्म लेने वाले पात्र नवजातों तक इसका लाभ पहुँचाया जाएगा। सरकार के लिए योजना को पारदर्शी तरीके से लागू करना, पात्र परिवारों तक समय पर अंगूठियाँ पहुँचाना और वितरण व्यवस्था को सुचारु बनाए रखना इसके कार्यान्वयन का महत्वपूर्ण हिस्सा होगा।