पाकिस्तान के हवाई हमलों का तालिबान ने किया कड़ा विरोध (तस्वीर क्रेडिट@vishalpcbvisha1)

पाकिस्तान के हवाई हमलों का तालिबान ने किया कड़ा विरोध,अफगानिस्तान में बढ़ते तनाव पर उठे गंभीर सवाल

काबुल,29 जून (युआईटीवी)- अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच लंबे समय से जारी सीमा तनाव एक बार फिर गंभीर मोड़ पर पहुँच गया है। तालिबान सरकार ने दावा किया है कि पाकिस्तानी सेना ने एक बार फिर अफगानिस्तान के कई रिहायशी इलाकों में हवाई हमले किए हैं,जिनमें महिलाओं और बच्चों सहित बड़ी संख्या में नागरिकों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य घायल हो गए। तालिबान ने इन हमलों को “कायरतापूर्ण आक्रमण” बताते हुए इसकी कड़ी निंदा की है और इसे अंतर्राष्ट्रीय कानून तथा मानवीय सिद्धांतों का खुला उल्लंघन करार दिया है। इस घटना के बाद दोनों पड़ोसी देशों के बीच पहले से मौजूद तनाव और अधिक गहरा गया है।

तालिबान के मुख्य प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने सोमवार को सोशल मीडिया मंच एक्स पर जारी बयान में कहा कि रविवार रात पाकिस्तान की सेना ने अफगानिस्तान के पक्तिका प्रांत के गयान जिले,पक्तिया प्रांत के त्सामकानी जिले और कुनार प्रांत के मानोगाई जिले में स्थित नागरिक आबादी वाले क्षेत्रों को निशाना बनाया। उनके अनुसार इन हमलों में कई घर क्षतिग्रस्त हुए और महिलाओं तथा बच्चों सहित अनेक निर्दोष नागरिकों की जान चली गई। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में लोग घायल भी हुए हैं,जिनमें कई की हालत गंभीर बनी हुई है।

मुजाहिद ने अपने बयान में कहा कि अफगानिस्तान के नागरिक इलाकों को निशाना बनाना किसी भी स्थिति में उचित नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने कहा कि यह कार्रवाई न केवल अपराध है,बल्कि अत्यंत क्रूर और अमानवीय भी है। तालिबान प्रवक्ता ने कहा कि अफगान जनता लगातार ऐसे हमलों का सामना कर रही है और निर्दोष लोगों को इसकी सबसे बड़ी कीमत चुकानी पड़ रही है। उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से इस घटना का संज्ञान लेने और नागरिकों के खिलाफ हो रही सैन्य कार्रवाइयों की निष्पक्ष जाँच कराने की माँग भी की।

पिछले कई महीनों से पाकिस्तान और अफगानिस्तान के संबंध लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं। दोनों देशों की साझा सीमा पर कई बार गोलीबारी,सीमा पार सैन्य कार्रवाई और हवाई हमलों के आरोप लगते रहे हैं। इन घटनाओं के कारण सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले नागरिक लगातार भय के माहौल में जीवन बिताने को मजबूर हैं। दोनों देशों के बीच सुरक्षा और आतंकवाद से जुड़े मुद्दों पर लंबे समय से मतभेद बने हुए हैं,जिनका असर अब सीधे नागरिकों पर दिखाई देने लगा है।

इस ताजा घटनाक्रम पर अफगानिस्तान में अमेरिका के पूर्व राजदूत जल्मय खलीलजाद ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने पाकिस्तान की सैन्य कार्रवाई की आलोचना करते हुए कहा कि बातचीत और कूटनीतिक समाधान की अपीलों की अनदेखी कर बार-बार सैन्य शक्ति का इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि दुनिया के कई देशों और स्वयं पाकिस्तान के अनेक लोगों ने भी यह सुझाव दिया था कि दोनों देशों के बीच मौजूद मतभेदों को बातचीत के माध्यम से सुलझाया जाना चाहिए,लेकिन इसके बावजूद सैन्य कार्रवाई जारी है।

जल्मय खलीलजाद ने अपने बयान में कहा कि उन्होंने हमेशा निर्दोष अफगान नागरिकों की हत्या की निंदा की है और इस बार भी उनकी यही स्पष्ट राय है। उन्होंने कहा कि इस्लामाबाद ने उन कई प्रस्तावों पर कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं दी है,जिन पर तालिबान सरकार अपनी सहमति जता चुकी थी। उनके अनुसार यदि बातचीत के अवसरों को लगातार नजरअंदाज किया जाता रहेगा,तो क्षेत्र में स्थायी शांति स्थापित करना और अधिक कठिन हो जाएगा।

उन्होंने पाकिस्तान की मंशा पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि अब यह पूछना जरूरी हो गया है कि क्या इस्लामाबाद वास्तव में किसी समाधान की दिशा में आगे बढ़ना चाहता है या नहीं। उनके अनुसार यदि किसी भी विवाद के समाधान के लिए प्रस्तुत प्रस्तावों पर प्रतिक्रिया नहीं दी जाती और केवल सैन्य कार्रवाई को प्राथमिकता दी जाती है,तो इससे यह संदेह पैदा होता है कि कहीं इसके पीछे कोई व्यापक रणनीतिक उद्देश्य तो नहीं है।

जल्मय खलीलजाद ने यह भी कहा कि यह विचार करने की आवश्यकता है कि क्या पाकिस्तान वास्तव में उन्हीं कारणों से कार्रवाई कर रहा है जिनका वह सार्वजनिक रूप से उल्लेख करता है या फिर उसके कुछ अन्य रणनीतिक उद्देश्य भी हैं। उन्होंने यह संभावना भी व्यक्त की कि क्या अफगानिस्तान को अस्थिर बनाए रखना किसी व्यापक रणनीति का हिस्सा हो सकता है। साथ ही उन्होंने यह प्रश्न भी उठाया कि क्या चीन क्षेत्र में अपना प्रभाव बढ़ाने के उद्देश्य से पाकिस्तान को ऐसी परिस्थितियाँ बनाने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है। हालाँकि,उन्होंने इन सवालों को संभावनाओं के रूप में प्रस्तुत किया और कहा कि इन पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।

पूर्व अमेरिकी राजदूत के अनुसार यदि क्षेत्र में अस्थिरता लगातार बढ़ती रही तो इसका लाभ चरमपंथी संगठनों को मिल सकता है। उन्होंने कहा कि ऐसी परिस्थितियों में इस्लामिक स्टेट खुरासान जैसे आतंकवादी संगठनों को नए सुरक्षित ठिकाने मिल सकते हैं,जिससे न केवल अफगानिस्तान,बल्कि पूरे क्षेत्र की सुरक्षा प्रभावित होगी। उन्होंने यह भी कहा कि यदि ऐसी स्थिति बनती है,तो यह अमेरिका और अन्य देशों के सुरक्षा हितों के भी विपरीत होगी।

उन्होंने अपने बयान में कहा कि यदि वास्तव में पाकिस्तान की रणनीति के पीछे ऐसे उद्देश्य हैं तो यह समझा जा सकता है कि पाकिस्तानी प्रतिष्ठान उन्हें सार्वजनिक रूप से स्वीकार क्यों नहीं करता। उनके अनुसार क्षेत्र में स्थायी शांति के लिए सभी पक्षों को पारदर्शिता और विश्वास के साथ आगे बढ़ना होगा।

यह पहली बार नहीं है,जब अफगानिस्तान ने पाकिस्तान पर अपने हवाई क्षेत्र के उल्लंघन का आरोप लगाया हो। इसी महीने अफगानिस्तान के विदेश मंत्रालय ने काबुल में पाकिस्तान के प्रभारी राजनयिक को तलब कर औपचारिक विरोध दर्ज कराया था। उस समय भी अफगानिस्तान ने आरोप लगाया था कि पाकिस्तानी विमानों ने उसके हवाई क्षेत्र का उल्लंघन करते हुए आवासीय इलाकों पर हमले किए थे।

विदेश मंत्रालय ने उस समय कहा था कि इन हमलों में 13 नागरिकों की मौत हुई थी और कई अन्य घायल हुए थे। तालिबान प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने भी पुष्टि की थी कि 9 जून की रात कुनार,खोस्त और पक्तिका प्रांतों में हुए हवाई हमलों में 11 बच्चों,एक महिला और एक बुजुर्ग की जान चली गई थी,जबकि 14 महिलाएँ और बच्चे घायल हुए थे। उन घटनाओं के बाद भी तालिबान सरकार ने पाकिस्तान के खिलाफ कड़ा विरोध दर्ज कराया था और भविष्य में ऐसी घटनाएं रोकने की मांग की थी।

विश्लेषकों का मानना है कि अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच बढ़ता तनाव पूरे क्षेत्र की सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है। दोनों देशों के बीच सीमा सुरक्षा,आतंकवाद, सीमा पार गतिविधियों और शरणार्थियों जैसे कई मुद्दों पर पहले से मतभेद मौजूद हैं। यदि इन विवादों का समाधान संवाद और कूटनीतिक प्रयासों के माध्यम से नहीं किया गया,तो स्थिति और अधिक जटिल हो सकती है।

मानवीय संगठनों का भी कहना है कि किसी भी सैन्य कार्रवाई का सबसे अधिक प्रभाव आम नागरिकों पर पड़ता है। सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले लोग लगातार भय,विस्थापन और असुरक्षा का सामना कर रहे हैं। महिलाओं और बच्चों की मौत की खबरों ने अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की चिंता और बढ़ा दी है।

फिलहाल पाकिस्तान की ओर से इन ताजा आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वहीं अफगानिस्तान की तालिबान सरकार ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि वह इस मुद्दे को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उठाएगी। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव को कम करने के लिए कूटनीतिक प्रयास किस दिशा में आगे बढ़ते हैं। यदि संवाद की प्रक्रिया को प्राथमिकता नहीं दी गई,तो यह विवाद केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं रहेगा,बल्कि पूरे दक्षिण और मध्य एशिया की सुरक्षा तथा स्थिरता को प्रभावित कर सकता है।