सलमान खान (तस्वीर क्रेडिट@Motivational__G)

पान मसाला विज्ञापन विवाद में सलमान खान को राहत,राजस्थान हाईकोर्ट ने जमानती वारंट पर लगाई रोक

जयपुर, 8 अप्रैल (युआईटीवी)- बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान को पान मसाला विज्ञापन से जुड़े मामले में बड़ी कानूनी राहत मिली है। राजस्थान हाईकोर्ट ने जयपुर जिला उपभोक्ता आयोग-II द्वारा उनके खिलाफ जारी किए गए जमानती वारंट पर रोक लगा दी है। इस फैसले के बाद अब सलमान खान को 13 अप्रैल को आयोग के समक्ष पेश होने की आवश्यकता नहीं रहेगी,जिससे उन्हें फिलहाल कानूनी दबाव से राहत मिली है।

यह आदेश जस्टिस अनूप सिंघी की एकल पीठ ने सुनाया,जिसमें सलमान खान और अन्य संबंधित पक्षों द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई की गई। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आयोग की कार्यवाही पर अंतरिम रोक लगाते हुए यह स्पष्ट किया कि अगली सुनवाई तक जमानती वारंट प्रभावी नहीं रहेगा।

पूरा मामला एक उपभोक्ता शिकायत से जुड़ा है,जिसे योगेंद्र सिंह बडियाल नामक व्यक्ति ने जयपुर जिला उपभोक्ता आयोग में दायर किया था। शिकायतकर्ता का आरोप है कि राजश्री पान मसाला और उसके ब्रांड एंबेसडर सलमान खान ने भ्रामक विज्ञापन के जरिए उपभोक्ताओं को गुमराह किया है। इन विज्ञापनों में उत्पाद को ‘केसर-युक्त इलायची’ और ‘केसर-युक्त पान मसाला’ के रूप में प्रचारित किया गया,जिससे उपभोक्ताओं को इसकी गुणवत्ता और सामग्री को लेकर भ्रम हुआ।

मामले में एक अहम मोड़ 6 जनवरी 2026 को आया,जब उपभोक्ता आयोग ने इन उत्पादों के विज्ञापनों पर अंतरिम रोक लगा दी थी। आयोग ने स्पष्ट निर्देश दिए थे कि संबंधित कंपनियाँ और उनके ब्रांड एंबेसडर इन विज्ञापनों का प्रचार-प्रसार तुरंत बंद करें। हालाँकि,इसके बावजूद 9 जनवरी को जयपुर,कोटा और अन्य शहरों में इन उत्पादों के होर्डिंग्स दिखाई दिए,जिसे आयोग ने अपने आदेश की अवहेलना माना।

इस घटनाक्रम के बाद आयोग ने कड़ा रुख अपनाते हुए सलमान खान के खिलाफ जमानती वारंट जारी किए। आयोग ने अपनी टिप्पणी में कहा था कि मशहूर हस्ती होने का मतलब यह नहीं है कि कोई कानून से ऊपर हो जाए। आयोग ने यह भी कहा कि बार-बार नोटिस और वारंट जारी होने के बावजूद पेश न होना न्याय व्यवस्था में आम जनता के भरोसे को कमजोर करता है।

बताया गया कि आयोग ने सलमान खान के खिलाफ चार बार जमानती वारंट जारी किए, लेकिन वे तामील नहीं हो सके। हालिया सुनवाई के दौरान आयोग ने इस पर नाराजगी जताते हुए चेतावनी दी थी कि यदि अगली तारीख पर भी पेशी नहीं होती है,तो गिरफ्तारी वारंट जारी किया जा सकता है। 13 अप्रैल को इस मामले में अंतिम अवसर के रूप में पेशी की तारीख तय की गई थी।

इसी बीच सलमान खान ने हाईकोर्ट का रुख किया और आयोग की कार्यवाही को चुनौती दी। उनकी ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आर.पी. सिंह,जी.एस. बाफना,दिवेश शर्मा,वरुण सिंह और शिवांग्शु नवल ने अदालत में विस्तृत दलीलें पेश कीं। बचाव पक्ष ने कहा कि अभिनेता को बिना पर्याप्त आधार के बार-बार तलब किया जा रहा है और जमानती वारंट जारी करना उचित नहीं है।

हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद फिलहाल आयोग के आदेश पर रोक लगा दी। अदालत ने माना कि मामले की गहराई से जाँच और उचित सुनवाई आवश्यक है, इसलिए अंतरिम राहत देना न्यायसंगत है। इस फैसले के बाद अब सलमान खान को तत्काल किसी प्रकार की कानूनी कार्रवाई का सामना नहीं करना पड़ेगा।

हालाँकि,यह राहत अस्थायी है और मामले की अगली सुनवाई में स्थिति स्पष्ट होगी। यदि अदालत को लगता है कि शिकायत में दम है,तो आगे की कार्यवाही फिर से शुरू हो सकती है। वहीं,शिकायतकर्ता पक्ष भी अपनी दलीलों को मजबूत करने में जुटा हुआ है।

इस पूरे विवाद ने एक बार फिर सेलिब्रिटी एंडोर्समेंट और उपभोक्ता अधिकारों के मुद्दे को केंद्र में ला दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि मशहूर हस्तियों द्वारा किए गए विज्ञापनों का समाज पर व्यापक प्रभाव पड़ता है,ऐसे में उनकी जिम्मेदारी भी बढ़ जाती है। यदि कोई विज्ञापन भ्रामक पाया जाता है,तो उसके लिए केवल कंपनी ही नहीं,बल्कि उसका प्रचार करने वाले चेहरे भी जवाबदेह हो सकते हैं।

फिलहाल,हाईकोर्ट के इस फैसले से सलमान खान को बड़ी राहत जरूर मिली है,लेकिन यह मामला अभी खत्म नहीं हुआ है। आने वाले दिनों में अदालत की आगे की कार्यवाही और फैसले पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी,जो यह तय करेगा कि इस विवाद का अंतिम परिणाम क्या होगा।