तेहरान,8 अप्रैल (युआईटीवी)- मध्य पूर्व में लंबे समय से जारी तनाव के बीच एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक मोड़ सामने आया है,जहाँ ईरान और अमेरिका के बीच टकराव में अस्थायी नरमी के संकेत मिले हैं। ईरान ने बुधवार को ऐलान किया कि वह अपनी सैन्य कार्रवाई रोकने को तैयार है,बशर्ते उसके खिलाफ हो रहे हमले पूरी तरह बंद कर दिए जाएँ। इसके साथ ही उसने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दो हफ्तों के लिए अस्थायी रूप से खोलने का भी फैसला किया है।
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है,जब वैश्विक स्तर पर ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार को लेकर चिंताएँ लगातार बढ़ रही थीं। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज,जो खाड़ी क्षेत्र को अंतर्राष्ट्रीय बाजारों से जोड़ता है,लंबे समय से भू-राजनीतिक तनाव का केंद्र रहा है। ऐसे में इसका अस्थायी रूप से खुलना वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए राहत भरी खबर मानी जा रही है।
ईरान के विदेश मंत्री सईद अब्बास अराघची ने एक आधिकारिक बयान में कहा कि यह फैसला मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए लिया गया है,जहाँ युद्धविराम को लेकर बातचीत में प्रगति हो रही है और दोनों पक्षों के बीच नरमी के संकेत मिल रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि अगले दो हफ्तों तक अंतर्राष्ट्रीय जहाजों को इस जलमार्ग से गुजरने की अनुमति होगी, लेकिन इसके लिए ईरानी अधिकारियों के साथ समन्वय और तय सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन करना अनिवार्य होगा।
अराघची ने यह भी बताया कि इस निर्णय के पीछे कूटनीतिक प्रयासों की अहम भूमिका रही है। उनके अनुसार,अमेरिका द्वारा 15 सूत्रीय प्रस्ताव पर बातचीत की पहल और डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के 10 सूत्रीय प्रस्ताव को वार्ता के आधार के रूप में स्वीकार करने के बाद यह सकारात्मक कदम उठाया गया है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ईरान की यह पेशकश पूरी तरह सशर्त है और आगे की कार्रवाई दूसरे पक्ष के व्यवहार पर निर्भर करेगी।
ईरानी विदेश मंत्री ने कहा कि अगर ईरान पर हमले बंद होते हैं,तो उसकी सशस्त्र सेनाएँ भी अपनी रक्षात्मक कार्रवाई रोक देंगी। उन्होंने दोहराया कि यह कोई स्थायी समझौता नहीं है, बल्कि विश्वास बहाली की दिशा में एक अस्थायी कदम है। इस दौरान समुद्री यातायात को सुचारू बनाए रखने के लिए तकनीकी और सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन किया जाएगा।
दूसरी ओर,अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए एक बड़ा ऐलान किया। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने ईरान पर प्रस्तावित सैन्य हमलों को दो हफ्तों के लिए टालने पर सहमति दे दी है। ट्रंप ने इसे एक “दोतरफा युद्धविराम” करार देते हुए कहा कि यदि ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पूरी तरह,तुरंत और सुरक्षित रूप से खोलता है,तो अमेरिका भी इस अवधि के दौरान किसी तरह की सैन्य कार्रवाई नहीं करेगा।
ट्रंप ने यह दावा भी किया कि अमेरिकी सेना अपने रणनीतिक उद्देश्यों को पहले ही हासिल कर चुकी है और अब ध्यान दीर्घकालिक शांति स्थापित करने पर केंद्रित है। उन्होंने कहा कि ईरान द्वारा प्रस्तुत 10 सूत्रीय प्रस्ताव वार्ता के लिए एक मजबूत आधार प्रदान करता है और अधिकांश विवादित मुद्दों पर सहमति बन चुकी है। उनके मुताबिक,अगर मौजूदा गति बनी रहती है,तो अगले दो हफ्तों में एक व्यापक समझौते को अंतिम रूप दिया जा सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटनाक्रम मध्य पूर्व में स्थिरता लाने की दिशा में एक सकारात्मक संकेत है,लेकिन चुनौतियाँ अभी भी बरकरार हैं। ईरान और अमेरिका के बीच वर्षों से चली आ रही अविश्वास की खाई को पाटना आसान नहीं होगा। हालाँकि,दोनों देशों द्वारा एक साथ कदम पीछे खींचना इस बात का संकेत है कि वे टकराव के बजाय बातचीत के रास्ते को प्राथमिकता दे रहे हैं।
इस पूरे घटनाक्रम का वैश्विक असर भी स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में तेल की कीमतों में स्थिरता आई है और शिपिंग कंपनियों ने राहत की सांस ली है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के खुलने से खाड़ी क्षेत्र से तेल और गैस की आपूर्ति में आने वाली बाधाओं के कम होने की उम्मीद जताई जा रही है।
हालाँकि,यह भी साफ है कि यह स्थिति बेहद नाजुक है और किसी भी छोटे घटनाक्रम से फिर से तनाव बढ़ सकता है। दोनों पक्षों के लिए यह दो हफ्तों की अवधि एक परीक्षा की तरह होगी,जिसमें यह तय होगा कि क्या वे स्थायी शांति की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं या फिर पुराने टकराव की स्थिति में लौट जाएंगे।
अमेरिका और ईरान के बीच यह अस्थायी समझौता न केवल क्षेत्रीय बल्कि वैश्विक राजनीति के लिए भी बेहद अहम है। अगर यह पहल सफल होती है,तो यह लंबे समय से चले आ रहे विवाद के समाधान की दिशा में एक निर्णायक कदम साबित हो सकती है। वहीं,अगर बातचीत विफल होती है,तो इसके गंभीर परिणाम भी सामने आ सकते हैं। ऐसे में पूरी दुनिया की नजरें अब इस कूटनीतिक प्रयास के अगले चरण पर टिकी हुई हैं,जहाँ से भविष्य की दिशा तय होगी।
