विपक्ष के हंगामे से संसद के दोनों सदन की कार्यवाही स्थगित (तस्वीर क्रेडिट@FltLtAnoopVerma)

हंगामे के साथ शुरू हुआ संसद का मानसून सत्र,विपक्ष के शोर-शराबे के बीच लोकसभा दोपहर तक स्थगित

नई दिल्ली,20 जुलाई (युआईटीवी)- संसद का मानसून सत्र सोमवार को जोरदार राजनीतिक टकराव और विपक्ष के हंगामे के साथ शुरू हुआ। सत्र के पहले ही दिन लोकसभा में विपक्षी सांसदों ने विभिन्न मुद्दों को लेकर जोरदार नारेबाजी की और सदन के वेल में पहुँचकर विरोध प्रदर्शन किया। लगातार बढ़ते शोर-शराबे और व्यवधान के कारण सदन की कार्यवाही सुचारु रूप से नहीं चल सकी। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कई बार विपक्षी सदस्यों से शांति बनाए रखने और सदन की गरिमा का सम्मान करने की अपील की,लेकिन जब हंगामा नहीं थमा तो उन्हें कार्यवाही दोपहर तक के लिए स्थगित करनी पड़ी।

लोकसभा की कार्यवाही निर्धारित समय पर शुरू हुई। अध्यक्ष ओम बिरला ने सबसे पहले दिवंगत सांसदों को श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके योगदान को याद किया। सदन ने दिवंगत जनप्रतिनिधियों के सम्मान में मौन रखकर श्रद्धांजलि दी। हालाँकि,श्रद्धांजलि की औपचारिक प्रक्रिया पूरी होते ही विपक्षी सांसद अपनी सीटों से उठकर नारेबाजी करने लगे। देखते ही देखते कई सदस्य सदन के वेल में पहुँच गए और सरकार के खिलाफ नारे लगाने लगे। इससे सदन का माहौल पूरी तरह शोरगुल में बदल गया।

लोकसभा अध्यक्ष ने विपक्षी सांसदों से बार-बार आग्रह किया कि वे अपनी सीटों पर लौटें और सदन की कार्यवाही को आगे बढ़ने दें। उन्होंने कहा कि संसद लोकतंत्र का सर्वोच्च मंच है और यहाँ हर सदस्य को अपनी बात रखने का पूरा अवसर दिया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि यदि सभी सदस्य नियमों का पालन करेंगे तो प्रत्येक मुद्दे पर सार्थक चर्चा संभव होगी। बावजूद इसके विपक्षी सांसदों का विरोध जारी रहा और सदन में शोर-शराबा थमने का नाम नहीं लिया।

लगातार व्यवधान के कारण अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि ऐसे माहौल में सदन की कार्यवाही चलाना संभव नहीं है। इसके बाद उन्होंने लोकसभा की कार्यवाही दोपहर तक के लिए स्थगित करने की घोषणा कर दी। मानसून सत्र के पहले ही दिन कार्यवाही बाधित होने से यह स्पष्ट संकेत मिल गया कि आने वाले दिनों में सरकार और विपक्ष के बीच कई मुद्दों पर तीखी राजनीतिक बहस देखने को मिल सकती है।

सत्र शुरू होने से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद भवन परिसर में मीडिया को संबोधित करते हुए सभी सांसदों से रचनात्मक भूमिका निभाने की अपील की थी। उन्होंने कहा कि जब देश तेजी से विकास के मार्ग पर आगे बढ़ रहा है,तब संसद की सकारात्मक भूमिका उस गति को और अधिक ऊर्जा प्रदान कर सकती है। प्रधानमंत्री ने कहा कि देश की प्रगति और राष्ट्रीय लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए संसद का स्वस्थ और सार्थक संचालन अत्यंत आवश्यक है।

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि संसद में विभिन्न राजनीतिक दलों के कई ऐसे सांसद मौजूद हैं,जिनके पास वर्षों का संसदीय अनुभव है। उन्होंने कहा कि ऐसे अनुभवी जनप्रतिनिधियों का ज्ञान और अनुभव देश तथा संसद दोनों के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सभी सदस्य अपने अनुभव का उपयोग सकारात्मक बहस और रचनात्मक सुझाव देने में करेंगे,जिससे देश को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।

उन्होंने कहा कि वर्तमान समय की मांग है कि संसद पूरी जिम्मेदारी के साथ चले और सभी सदस्य मिलकर देश के विकास के लिए काम करें। प्रधानमंत्री ने कहा कि सार्थक चर्चा और सहयोग की भावना ही लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने यह भी कहा कि संसद केवल राजनीतिक मतभेदों का मंच नहीं है,बल्कि यह देश के भविष्य की दिशा तय करने वाली सर्वोच्च संस्था है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने युवाओं की आकांक्षाओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि देश का युवा वर्ग तेजी से आगे बढ़ना चाहता है और उसकी अपेक्षाएँ लगातार बढ़ रही हैं। ऐसे में संसद की जिम्मेदारी और भी अधिक बढ़ जाती है। उन्होंने कहा कि राष्ट्र के प्रति समर्पित और देशहित में सोचने वाली आवाजों को संसद में उचित स्थान मिलना चाहिए ताकि वे अपने विचारों के माध्यम से देश को नई दिशा दे सकें।

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में तर्क और तथ्यों के महत्व पर भी विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में बहस और असहमति स्वाभाविक है,लेकिन यदि चर्चा तथ्यों और मजबूत तर्कों पर आधारित हो तो किसी प्रकार के शोर-शराबे या टकराव की आवश्यकता नहीं होती। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण और गरिमापूर्ण वातावरण में भी अपनी बात प्रभावी ढंग से रखी जा सकती है।

उन्होंने आगे कहा कि संसद में हर सदस्य की आवाज महत्वपूर्ण है और प्रत्येक विचार को सम्मान मिलना चाहिए। उनके अनुसार लोकतंत्र की खूबसूरती इसी बात में है कि अलग-अलग विचारों को सुनने और उन पर चर्चा करने का अवसर मिले। उन्होंने उम्मीद जताई कि मानसून सत्र के दौरान सभी सांसद जनता की अपेक्षाओं के अनुरूप अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करेंगे और सदन की कार्यवाही को सार्थक बनाएंगे।

मानसून सत्र ऐसे समय शुरू हुआ है,जब कई महत्वपूर्ण विधेयकों,नीतिगत फैसलों और राष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। सरकार की ओर से कई अहम विधायी प्रस्ताव पेश किए जाने की उम्मीद है,वहीं विपक्ष भी विभिन्न मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने की तैयारी में है। ऐसे में पहले ही दिन का हंगामा इस बात का संकेत माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में संसद के भीतर राजनीतिक माहौल काफी गर्म रह सकता है।

संसदीय कार्यवाही के पहले दिन की घटनाओं ने एक बार फिर यह बहस तेज कर दी है कि लोकतंत्र के सर्वोच्च मंच पर विरोध और चर्चा के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए। एक ओर विपक्ष अपने मुद्दों को प्रमुखता से उठाने की कोशिश कर रहा है,तो दूसरी ओर सरकार चाहती है कि सदन की कार्यवाही बिना बाधा के चले और महत्वपूर्ण विधायी कार्य पूरे किए जाएं। ऐसे में अध्यक्ष की भूमिका भी अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है,क्योंकि उन्हें सभी पक्षों के बीच संतुलन बनाए रखते हुए सदन की गरिमा और नियमों का पालन सुनिश्चित करना होता है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मानसून सत्र के दौरान सरकार और विपक्ष के बीच कई राष्ट्रीय और आर्थिक मुद्दों पर तीखी बहस देखने को मिल सकती है। हालाँकि,लोकतंत्र की मजबूती इसी में है कि मतभेदों के बावजूद संवाद जारी रहे और संसद देशहित से जुड़े विषयों पर गंभीर चर्चा का मंच बनी रहे।

फिलहाल मानसून सत्र की शुरुआत जिस तरह हंगामे के साथ हुई है,उसने आने वाले दिनों की राजनीतिक तस्वीर का संकेत दे दिया है। अब सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि क्या सरकार और विपक्ष के बीच सहमति बन पाती है और सदन की कार्यवाही सुचारु रूप से आगे बढ़ती है या फिर टकराव और विरोध का सिलसिला जारी रहता है।