प्रम्बानन मंदिर पहुँचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो (तस्वीर क्रेडिट@rashtra_press)

प्रम्बानन मंदिर पहुँचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो,सांस्कृतिक विरासत संरक्षण को मिला नया आयाम

जकार्ता,8 जुलाई (युआईटीवी)- भारत और इंडोनेशिया के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और सभ्यतागत संबंधों को नई मजबूती देने की दिशा में बुधवार को एक महत्वपूर्ण अवसर देखने को मिला,जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने दक्षिण-पूर्व एशिया के सबसे बड़े हिंदू मंदिर परिसर प्रम्बानन मंदिर का संयुक्त दौरा किया। दोनों नेताओं की यह यात्रा केवल एक धार्मिक या सांस्कृतिक कार्यक्रम तक सीमित नहीं रही,बल्कि इसे भारत और इंडोनेशिया के सदियों पुराने रिश्तों तथा साझा विरासत को संरक्षित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इस अवसर पर दोनों नेताओं ने मंदिर परिसर के संरक्षण और पुनर्स्थापन परियोजना का संयुक्त उद्घाटन भी किया,जो दोनों देशों के बीच बढ़ते सांस्कृतिक सहयोग का प्रतीक है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस विशेष अवसर की जानकारी अपने आधिकारिक सोशल मीडिया मंच पर साझा की। उन्होंने राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के साथ योग्याकार्ता से प्रम्बानन मंदिर जाते समय की एक तस्वीर साझा करते हुए लिखा कि वह राष्ट्रपति के साथ इस ऐतिहासिक मंदिर की यात्रा पर हैं। इसके अलावा उन्होंने हेलीकॉप्टर से दिखाई दे रहे प्रम्बानन मंदिर परिसर का एक हवाई दृश्य भी साझा किया और इसकी भव्यता की सराहना करते हुए इसे अद्भुत सांस्कृतिक धरोहर बताया। प्रधानमंत्री की इस टिप्पणी ने मंदिर परिसर की ऐतिहासिक और स्थापत्य महत्ता को वैश्विक स्तर पर फिर से चर्चा का विषय बना दिया।

प्रधानमंत्री मोदी ने एक दिन पहले इंडोनेशियाई संसद को संबोधित करते हुए भी प्रम्बानन मंदिर का विशेष उल्लेख किया था। उन्होंने अपने संबोधन में कहा था कि वह राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के साथ योग्याकार्ता स्थित इस विश्वप्रसिद्ध मंदिर परिसर का दौरा करेंगे, जो इंडोनेशिया का सबसे बड़ा हिंदू मंदिर है और जिसे संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक,वैज्ञानिक एवं सांस्कृतिक संगठन की विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया है। उन्होंने कहा कि यह मंदिर केवल एक ऐतिहासिक स्मारक नहीं,बल्कि भारत और इंडोनेशिया के साझा सांस्कृतिक मूल्यों तथा प्राचीन संबंधों का जीवंत प्रतीक है।

इस यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण पहलू प्रम्बानन मंदिर के संरक्षण और पुनर्स्थापन परियोजना का शुभारंभ रहा। दोनों नेताओं ने संयुक्त रूप से इस परियोजना का उद्घाटन कर यह संदेश दिया कि भारत और इंडोनेशिया अपनी साझा सांस्कृतिक धरोहर को सुरक्षित रखने के लिए मिलकर काम करेंगे। इस परियोजना का उद्देश्य मंदिर परिसर के संरक्षण, उसकी ऐतिहासिक संरचना को सुरक्षित रखने तथा आने वाली पीढ़ियों के लिए इस विरासत को संरक्षित करना है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस पहल से दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक सहयोग को नई दिशा मिलेगी और पुरातात्विक संरक्षण के क्षेत्र में भी साझेदारी मजबूत होगी।

इससे पहले 7 जुलाई को भारत और इंडोनेशिया के बीच प्रम्बानन मंदिर परिसर के संरक्षण और पुनर्स्थापन के लिए भारत समर्थित परियोजना पर आशय पत्र का आदान-प्रदान किया गया था। यह समझौता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के बीच हुई द्विपक्षीय वार्ता के बाद संपन्न हुआ। दोनों नेताओं ने इस दौरान व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने,आर्थिक सहयोग बढ़ाने, रक्षा एवं सुरक्षा संबंधों को नई गति देने तथा हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति,स्थिरता और समृद्धि सुनिश्चित करने पर विस्तार से चर्चा की। दोनों देशों ने इस बात पर सहमति व्यक्त की कि साझा सांस्कृतिक विरासत उनके संबंधों की मजबूत नींव है और इसे संरक्षित करना दोनों की समान जिम्मेदारी है।

प्रम्बानन मंदिर विश्व के सबसे महत्वपूर्ण हिंदू मंदिर परिसरों में से एक माना जाता है। इसका निर्माण दसवीं शताब्दी में हुआ था और यह मुख्य रूप से भगवान शिव को समर्पित है। मंदिर परिसर अपनी अद्भुत वास्तुकला, ऊँचे शिखरों और अत्यंत बारीक पत्थर की नक्काशी के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है। यहाँ भगवान शिव के अलावा भगवान विष्णु और भगवान ब्रह्मा को समर्पित भव्य मंदिर भी स्थित हैं। इनके साथ-साथ उनके दिव्य वाहनों को समर्पित मंदिर भी इस परिसर का हिस्सा हैं। मंदिर की दीवारों पर उकेरी गई रामायण की विस्तृत कथाएँ भारतीय संस्कृति और दक्षिण-पूर्व एशिया के बीच हजारों वर्षों से चले आ रहे सांस्कृतिक आदान-प्रदान की सशक्त गवाही देती हैं।

इतिहासकारों के अनुसार प्रम्बानन मंदिर केवल धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं है,बल्कि यह उस दौर का प्रतीक भी है,जब भारतीय संस्कृति,साहित्य,दर्शन और कला का प्रभाव पूरे दक्षिण-पूर्व एशिया में व्यापक रूप से दिखाई देता था। रामायण और महाभारत जैसे भारतीय महाकाव्यों का प्रभाव आज भी इंडोनेशिया की संस्कृति,कला,संगीत,नृत्य और लोक परंपराओं में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। यही कारण है कि भारत और इंडोनेशिया के संबंध केवल आधुनिक कूटनीति तक सीमित नहीं हैं,बल्कि वे हजारों वर्षों पुराने सांस्कृतिक और सभ्यतागत रिश्तों पर आधारित हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अपने संसदीय संबोधन में इन्हीं ऐतिहासिक संबंधों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत और इंडोनेशिया के बीच का रिश्ता केवल दो देशों का संबंध नहीं,बल्कि दो प्राचीन सभ्यताओं का आत्मीय जुड़ाव है। उन्होंने कहा कि रामायण और महाभारत जैसी साझा विरासत दोनों देशों को सांस्कृतिक रूप से जोड़ती है और यही विरासत भविष्य में भी दोनों देशों के संबंधों को नई ऊर्जा प्रदान करती रहेगी। प्रधानमंत्री ने इस बात पर भी बल दिया कि सांस्कृतिक सहयोग के माध्यम से दोनों देश नई पीढ़ी को अपनी साझा ऐतिहासिक विरासत से जोड़ सकते हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस समय इंडोनेशिया की तीन दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर हैं। इस दौरान उन्होंने राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के साथ व्यापक द्विपक्षीय वार्ता की, जिसमें व्यापार,निवेश,समुद्री सुरक्षा,रक्षा सहयोग,डिजिटल प्रौद्योगिकी,शिक्षा,स्वास्थ्य और सांस्कृतिक आदान-प्रदान सहित कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई। उन्होंने इंडोनेशियाई संसद को भी संबोधित किया,जहाँ दोनों देशों के ऐतिहासिक संबंधों और भविष्य की साझेदारी पर विस्तार से अपने विचार रखे। इसके अलावा प्रधानमंत्री ने इंडोनेशिया में रह रहे भारतीय समुदाय के प्रतिनिधियों से भी मुलाकात की और उन्हें भारत तथा इंडोनेशिया के बीच मजबूत होते संबंधों का महत्वपूर्ण भागीदार बताया।

प्रम्बानन मंदिर की संयुक्त यात्रा और उसके संरक्षण के लिए शुरू की गई परियोजना ने भारत और इंडोनेशिया के संबंधों को एक नई सांस्कृतिक पहचान प्रदान की है। यह पहल केवल एक ऐतिहासिक धरोहर के संरक्षण तक सीमित नहीं है,बल्कि दोनों देशों की उस साझा विरासत का सम्मान भी है,जिसने सदियों से उन्हें एक-दूसरे के करीब रखा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस सहयोग से न केवल सांस्कृतिक संबंध और मजबूत होंगे, बल्कि पर्यटन,पुरातत्व,शिक्षा और शोध के क्षेत्रों में भी दोनों देशों के बीच सहयोग के नए अवसर विकसित होंगे।