मुंबई,8 जुलाई (युआईटीवी)- देश की आर्थिक राजधानी मुंबई एक बार फिर भारी बारिश की चपेट में है। पिछले कई दिनों से लगातार हो रही मूसलाधार वर्षा ने शहर की रफ्तार को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। मंगलवार को भी सुबह से आसमान में घने बादल छाए रहे और तेज हवाओं के साथ रुक-रुककर बारिश का सिलसिला जारी रहा। लगातार हो रही वर्षा के कारण शहर के कई इलाकों में जलभराव की स्थिति बनी रही,जिससे सड़क यातायात,रेल सेवाओं और दैनिक जीवन पर व्यापक असर देखने को मिला। मौसम विभाग ने हालात को देखते हुए मुंबई और उसके उपनगरों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी रखा है, जिसके तहत बुधवार तक भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना जताई गई है। प्रशासन ने नागरिकों से सतर्क रहने और अनावश्यक यात्रा से बचने की अपील की है।
भारतीय मौसम विभाग के अनुसार अरब सागर से आ रही नमी और सक्रिय मानसूनी प्रणाली के कारण मुंबई,ठाणे,पालघर और आसपास के क्षेत्रों में लगातार भारी वर्षा हो रही है। विभाग का कहना है कि आने वाले घंटों में भी कई स्थानों पर तेज बारिश के साथ तेज हवाएं चल सकती हैं। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार,कुछ इलाकों में बहुत भारी वर्षा दर्ज होने की संभावना है,जिससे जलभराव और यातायात संबंधी समस्याएँ और बढ़ सकती हैं। इसी कारण प्रशासन ने सभी संबंधित एजेंसियों को अलर्ट मोड पर रखा है,ताकि किसी भी आपात स्थिति से तुरंत निपटा जा सके।
बारिश की गंभीरता को देखते हुए मंगलवार को मुंबई के सभी सरकारी,निजी तथा नगर निगम द्वारा संचालित स्कूलों और कॉलेजों में अवकाश घोषित किया गया। यह निर्णय विद्यार्थियों और शिक्षकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया गया। लगातार बारिश और जलभराव के कारण बच्चों का स्कूल पहुँचना जोखिम भरा हो सकता था। कई अभिभावकों ने भी प्रशासन के इस फैसले का स्वागत किया और इसे समय रहते उठाया गया आवश्यक कदम बताया।
सोमवार से ही मुंबई और उसके आसपास के क्षेत्रों में बारिश का असर साफ दिखाई देने लगा था। कई प्रमुख सड़कें पूरी तरह पानी में डूब गईं,जिससे वाहनों की आवाजाही प्रभावित हुई। कई इलाकों में लंबा ट्रैफिक जाम लगा रहा और लोगों को अपने गंतव्य तक पहुँचने में घंटों का समय लगा। कार्यालय जाने वाले कर्मचारियों,व्यापारियों और आम यात्रियों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। शहर के निचले इलाकों में जलभराव के कारण कई वाहन बीच रास्ते में बंद हो गए,जबकि कुछ स्थानों पर लोगों को पैदल पानी के बीच से गुजरना पड़ा।
भारी बारिश के चलते शहर में कई स्थानों पर पेड़ उखड़ने,दीवारें गिरने और होर्डिंग टूटकर गिरने की घटनाएँ भी सामने आईं। तेज हवाओं के कारण कई इलाकों में बिजली आपूर्ति भी कुछ समय के लिए बाधित हुई। नगर निगम और आपदा प्रबंधन विभाग की टीमें लगातार प्रभावित क्षेत्रों में पहुँचकर रास्ते साफ करने,पेड़ों को हटाने और यातायात बहाल करने के प्रयासों में जुटी रहीं। प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त कर्मचारियों की तैनाती की है,ताकि किसी भी दुर्घटना की स्थिति में तत्काल राहत कार्य शुरू किया जा सके।
पालघर जिले के वसई-विरार क्षेत्र में भी सोमवार सुबह से जलभराव की गंभीर स्थिति बनी रही। कई आवासीय कॉलोनियों और बाजार क्षेत्रों में पानी भर गया,जिससे स्थानीय लोगों की मुश्किलें बढ़ गईं। हालाँकि,शाम के समय बारिश की तीव्रता कुछ कम होने के बाद जलस्तर धीरे-धीरे घटने लगा और राहत की स्थिति बनने लगी। स्थानीय प्रशासन ने लगातार पंपों की सहायता से पानी निकालने का कार्य जारी रखा,जिससे कई क्षेत्रों में सामान्य स्थिति लौटने लगी। फिर भी लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है क्योंकि अगले कुछ दिनों तक बारिश जारी रहने की संभावना बनी हुई है।
लगातार हो रही बारिश का एक सकारात्मक पहलू भी सामने आया,जब मुंबई को पेयजल उपलब्ध कराने वाली सात झीलों में से एक विहार झील मंगलवार रात लगभग नौ बजे ओवरफ्लो हो गई। झील के जलग्रहण क्षेत्र में लगातार हुई भारी वर्षा के कारण उसका जलस्तर तेजी से बढ़ा और अंततः वह पूरी क्षमता तक भर गई। लगभग 27.698 अरब लीटर उपयोगी जल भंडारण क्षमता वाली यह झील प्रतिदिन लगभग 90 मिलियन लीटर पानी मुंबई को उपलब्ध कराती है। पिछले वर्ष यह झील 18 अगस्त को भरकर ओवरफ्लो हुई थी,जबकि इस बार अपेक्षाकृत पहले ही इसकी क्षमता पूरी हो गई। वर्ष 1859 में निर्मित विहार झील मुंबई की सबसे छोटी जलापूर्ति झीलों में गिनी जाती है,लेकिन शहर की पेयजल व्यवस्था में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है। झील के ओवरफ्लो होने के बाद अतिरिक्त पानी मीठी नदी में छोड़ा जाता है,जिसके कारण नदी के आसपास रहने वाले लोगों को भी सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
बारिश का असर मुंबई की जीवनरेखा कही जाने वाली उपनगरीय रेल सेवाओं पर भी पड़ा। पश्चिम रेलवे के अनुसार विरार से चर्चगेट के लिए पहली लोकल ट्रेन मंगलवार तड़के निर्धारित समय पर रवाना की गई,लेकिन पूरे दिन ट्रेनों का परिचालन प्रभावित रहा। यात्रियों के अनुसार पश्चिम रेलवे की अधिकांश लोकल ट्रेनें औसतन 20 से 25 मिनट की देरी से चलती रहीं,जबकि मध्य रेलवे की सेवाओं में भी 10 से 15 मिनट तक का विलंब दर्ज किया गया। इसके बावजूद रेलवे कर्मचारियों ने लगातार प्रयास कर सेवाओं को पूरी तरह बाधित नहीं होने दिया। हजारों दैनिक यात्रियों को हालाँकि भीड़,देरी और प्लेटफॉर्म पर लंबा इंतजार करना पड़ा।
दूसरी ओर मुंबई मेट्रो और बृहन्मुंबई विद्युत आपूर्ति एवं परिवहन उपक्रम की बस सेवाएँ सामान्य रूप से संचालित होती रहीं। इससे बड़ी संख्या में यात्रियों को राहत मिली और कई लोगों ने रेल सेवाओं में देरी के कारण मेट्रो और बसों का सहारा लिया। प्रशासन ने सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए अतिरिक्त निगरानी भी रखी।
भारी बारिश के कारण लंबी दूरी की रेल सेवाएँ भी प्रभावित हुई हैं। पश्चिम रेलवे ने जानकारी दी कि 7 जुलाई को चलने वाली भुज-दादर सयाजी नगरी एक्सप्रेस को गांधीधाम स्टेशन पर ही शॉर्ट टर्मिनेट कर दिया गया। इसके चलते यह ट्रेन गांधीधाम और दादर के बीच संचालित नहीं हुई। रेलवे का कहना है कि लगातार बारिश और ट्रैक पर पानी भरने की आशंका को देखते हुए यात्रियों की सुरक्षा के लिए यह निर्णय लिया गया।
इसके अलावा 8 जुलाई को संचालित होने वाली कई महत्वपूर्ण ट्रेनों को पूरी तरह निरस्त कर दिया गया है। इनमें दादर-भुज सयाजी नगरी एक्सप्रेस,अहमदाबाद-बांद्रा टर्मिनस कर्णावती एक्सप्रेस,बांद्रा टर्मिनस-अहमदाबाद कर्णावती एक्सप्रेस,अहमदाबाद-मुंबई सेंट्रल एसी डबल डेकर एक्सप्रेस,मुंबई सेंट्रल-अहमदाबाद एसी डबल डेकर एक्सप्रेस, अहमदाबाद-मुंबई सेंट्रल तेजस एक्सप्रेस,मुंबई सेंट्रल-अहमदाबाद तेजस एक्सप्रेस तथा अहमदाबाद-मुंबई सेंट्रल वंदे भारत एक्सप्रेस और मुंबई सेंट्रल-अहमदाबाद वंदे भारत एक्सप्रेस शामिल हैं। इन ट्रेनों के रद्द होने से हजारों यात्रियों की यात्रा योजनाएँ प्रभावित हुई हैं।
रेलवे प्रशासन ने यात्रियों से अपील की है कि वे यात्रा शुरू करने से पहले राष्ट्रीय ट्रेन पूछताछ प्रणाली अथवा रेल मदद सेवा के माध्यम से अपनी ट्रेन की ताजा स्थिति अवश्य जाँच लें। रेलवे ने यात्रियों को हुई असुविधा के लिए खेद व्यक्त करते हुए कहा है कि यात्रियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और मौसम सामान्य होने के बाद सेवाओं को पूरी तरह बहाल कर दिया जाएगा।
मुंबई नगर निगम,आपदा प्रबंधन प्राधिकरण,पुलिस,अग्निशमन विभाग और अन्य एजेंसियाँ लगातार हालात पर नजर बनाए हुए हैं। संवेदनशील इलाकों में राहत एवं बचाव दलों को तैनात किया गया है। जलभराव वाले क्षेत्रों में मोटर पंपों के माध्यम से पानी निकालने का कार्य जारी है। इसके अलावा नालों की सफाई,यातायात प्रबंधन और आपातकालीन सहायता के लिए नियंत्रण कक्ष चौबीसों घंटे सक्रिय हैं।
प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे मौसम विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें,जलभराव वाले क्षेत्रों में जाने से बचें और अत्यंत आवश्यक होने पर ही घर से बाहर निकलें। समुद्र तटों और नदियों के आसपास भी लोगों को नहीं जाने की सलाह दी गई है क्योंकि तेज लहरों और बढ़ते जलस्तर के कारण दुर्घटना की आशंका बनी हुई है।
इस बीच पुणे से भी सतर्कता संबंधी संदेश सामने आया है। पुणे की महापौर मंजूषा नागपुरे ने कहा कि बांध के जलग्रहण क्षेत्र में लगातार भारी बारिश हो रही है,जिसके कारण नदी का जलस्तर बढ़ सकता है। उन्होंने नदी किनारे रहने वाले सभी नागरिकों से सतर्क रहने और प्रशासन द्वारा जारी निर्देशों का पालन करने की अपील की। उन्होंने बताया कि नगर निगम की टीमें पूरी तरह तैयार हैं तथा नदी किनारे विभिन्न स्थानों पर अधिकारियों और कर्मचारियों की तैनाती की गई है। प्रशासन लगातार स्थिति की निगरानी कर रहा है और आवश्यकता पड़ने पर तुरंत राहत एवं बचाव कार्य शुरू किए जाएँगे।
मानसून के इस दौर ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि मुंबई जैसे महानगर में भारी बारिश सामान्य जनजीवन को किस तरह प्रभावित कर सकती है। हालाँकि,प्रशासन और विभिन्न एजेंसियाँ स्थिति को नियंत्रित करने के लिए लगातार प्रयास कर रही हैं,लेकिन मौसम विभाग की चेतावनी को देखते हुए अगले कुछ दिन चुनौतीपूर्ण बने रह सकते हैं। ऐसे में नागरिकों की सतर्कता,प्रशासन की तैयारी और समय पर जारी होने वाली मौसम संबंधी सूचनाओं का पालन ही संभावित जोखिमों को कम करने में सबसे अधिक प्रभावी साबित होगा।
