विजय देवरकोंडा की नई पीरियड फिल्म ‘रणबाली’ की पहली झलक जारी (तस्वीर क्रेडिट@urshemanthrko2)

‘रणबाली’ का पोस्टर बना यादगार पल: राहुल सांकृत्यायन बोले- विजय और रश्मिका को देखकर लगा जैसे 1800 के दशक में पहुँच गए हों

मुंबई,2 मार्च (युआईटीवी)- दक्षिण भारतीय सिनेमा के चर्चित सितारे विजय देवरकोंडा और रश्मिका मंदाना की शादी के ठीक एक दिन बाद उनकी बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘रणबाली’ का शादी थीम वाला पोस्टर रिलीज किया गया था,जिसने सोशल मीडिया पर जबरदस्त चर्चा बटोरी। अब फिल्म के निर्देशक राहुल सांकृत्यायन ने इस खास पोस्टर की शूटिंग से जुड़ा अपना अनुभव साझा करते हुए बताया कि वह सिर्फ एक प्रमोशनल पोस्टर नहीं था,बल्कि उनके लिए एक भावनात्मक और कलात्मक यात्रा जैसा अनुभव था।

राहुल सांकृत्यायन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक लंबा नोट साझा करते हुए लिखा कि ‘रणबाली’ का शादी वाला पोस्टर महज एक प्रचार सामग्री नहीं था,बल्कि वह एक विशेष क्षण को सहेजने की कोशिश थी। उन्होंने बताया कि उन्हें हमेशा पुरानी तस्वीरों में खास दिलचस्पी रही है। अपने माता-पिता और दादा-दादी की तस्वीरों को याद करते हुए उन्होंने लिखा कि उस दौर की तस्वीरों में कोई बनावटी मुस्कान या कृत्रिम पोज नहीं होता था। लोग कैमरे के सामने जैसे होते थे,वैसे ही खड़े हो जाते थे। उनमें सच्चाई और उपस्थिति झलकती थी,किसी तरह की दिखावट नहीं।

निर्देशक के अनुसार,वे उसी ईमानदारी और स्वाभाविकता को ‘रणबाली’ की दुनिया में उतारना चाहते थे। उन्होंने बताया कि फिल्म की कहानी 1800 के दशक के उत्तरार्ध की पृष्ठभूमि में रची गई है,जो कोई ग्लैमरस या चमकदार दौर नहीं था,बल्कि कठोर यथार्थ और संघर्ष से भरा समय था। उस समय के लोगों का जीवन प्रकृति,परंपराओं और जीविका से गहराई से जुड़ा हुआ था। ऐसे में पोस्टर को शूट करते समय भी उन्होंने उसी सादगी और प्रामाणिकता को पकड़ने की कोशिश की।

राहुल सांकृत्यायन ने शूटिंग के दिन को याद करते हुए लिखा कि जब विजय देवरकोंडा और रश्मिका मंदाना शादी के परिधान में सेट पर पहुँचे,तो माहौल ही बदल गया। उन्होंने महसूस किया कि वे सिर्फ अभिनेता नहीं लग रहे थे,जो किसी भूमिका के लिए वेशभूषा पहनकर आए हों,बल्कि ऐसा प्रतीत हो रहा था जैसे वे सचमुच समय में पीछे चले गए हों। निर्देशक के शब्दों में, “कुछ बदल गया था। वे सिर्फ किरदार निभा नहीं रहे थे,बल्कि उस दौर को जी रहे थे।”

उन्होंने आगे कहा कि उन्हें सबसे अधिक प्रभावित करने वाली बात यह थी कि दोनों कलाकारों ने उस पल को कितनी सहजता से आत्मसात कर लिया। उन्होंने समय को मानो थाम लिया हो और उसे साकार कर दिया हो। राहुल के मुताबिक,कभी-कभी सिनेमा और जीवन एक-दूसरे को संकेत देते हैं और उस दिन उन्हें ऐसा ही महसूस हुआ। वास्तविक जीवन में शादी के बाद उसी भाव में फिल्म के पोस्टर के लिए खड़ा होना,एक अनोखा संगम था,जहाँ रील और रियल की सीमाएँ धुंधली हो गई थीं।

‘रणबाली’ का पोस्टर रिलीज होते ही प्रशंसकों ने इसे खूब सराहा था। शादी के पारंपरिक परिधान में सजे विजय और रश्मिका की जोड़ी बेहद आकर्षक और भावनात्मक लगी। दोनों के चेहरे पर गंभीरता और स्थिरता थी,जो पुराने जमाने की तस्वीरों की याद दिलाती है। यह पोस्टर केवल ग्लैमर पर आधारित नहीं था,बल्कि उसमें एक ऐतिहासिक और सांस्कृतिक गहराई भी झलक रही थी।

फिल्म 11 सितंबर को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है और इसे मलयालम, कन्नड़, तमिल,तेलुगू और हिंदी सहित कई भाषाओं में प्रस्तुत किया जाएगा। बहुभाषी रिलीज से साफ है कि निर्माता इसे पैन-इंडिया स्तर पर बड़े पैमाने पर दर्शकों तक पहुँचाना चाहते हैं। विजय देवरकोंडा और रश्मिका मंदाना की जोड़ी पहले भी दर्शकों के बीच लोकप्रिय रही है और उनकी वास्तविक जीवन की शादी के बाद यह फिल्म और भी ज्यादा चर्चा में आ गई है।

सिनेमा समीक्षकों का मानना है कि ‘रणबाली’ केवल एक प्रेम कहानी या पीरियड ड्रामा नहीं होगी,बल्कि इसमें उस दौर की सामाजिक और सांस्कृतिक जटिलताओं को भी दर्शाया जाएगा। निर्देशक राहुल सांकृत्यायन की पिछली फिल्मों में भी भावनात्मक गहराई और ऐतिहासिक संदर्भ देखने को मिले हैं,ऐसे में दर्शकों की उम्मीदें इस फिल्म से और बढ़ गई हैं।

‘रणबाली’ का शादी पोस्टर केवल एक प्रमोशनल रणनीति नहीं,बल्कि एक कलात्मक अभिव्यक्ति के रूप में सामने आया है। निर्देशक के अनुभव ने यह स्पष्ट कर दिया है कि फिल्म के हर फ्रेम में प्रामाणिकता और संवेदनशीलता लाने की कोशिश की गई है। अब दर्शकों को 11 सितंबर का इंतजार है,जब यह फिल्म बड़े पर्दे पर रिलीज होगी और यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह ऐतिहासिक एहसास दर्शकों के दिलों तक भी उसी तरह पहुँच पाता है,जैसा निर्देशक ने महसूस किया।