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सेबी डेरिवेटिव एक्सपायरी के सेटलमेंट प्राइस की व्यवस्था की करेगा समीक्षा,अगले सप्ताह आएगा परामर्श पत्र

मुंबई,4 सितंबर (युआईटीवी)- भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड यानी सेबी ने डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स की एक्सपायरी पर सेटलमेंट प्राइस तय करने की मौजूदा व्यवस्था की समीक्षा करने का फैसला किया है। यह समीक्षा इक्विटी कैश सेगमेंट में क्लोजिंग ऑक्शन सेशन यानी सीएएस लागू होने के बाद सामने आए शुरुआती अनुभव और बाजार सहभागियों से मिली प्रतिक्रियाओं के आधार पर की जाएगी। नियामक ने कहा है कि वह इस संबंध में लगभग एक सप्ताह के भीतर एक परामर्श पत्र जारी करेगा। इसके जरिए डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स के सेटलमेंट प्राइस को निर्धारित करने की मौजूदा पद्धति में संभावित बदलावों पर बाजार सहभागियों से सुझाव माँगे जाएँगे।

सेबी के अनुसार,16 जनवरी 2026 को जारी किए गए सर्कुलर के तहत इक्विटी कैश सेगमेंट में क्लोजिंग ऑक्शन सेशन की व्यवस्था 3 अगस्त 2026 से लागू की गई थी। इस व्यवस्था के तहत सीएएस के दौरान तय होने वाले क्लोजिंग प्राइस को डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स की एक्सपायरी के समय सेटलमेंट प्राइस निर्धारित करने का आधार बनाया गया था। हालाँकि,व्यवस्था लागू होने के बाद बाजार सहभागियों से मिली प्रतिक्रियाओं में इस प्रावधान को लेकर कई सवाल और सुझाव सामने आए हैं।

नियामक ने बताया कि सीएएस की व्यवस्था अचानक लागू नहीं की गई थी,बल्कि इसके लिए व्यापक विचार-विमर्श और विभिन्न हितधारकों के साथ परामर्श किया गया था। इस प्रक्रिया के तहत दिसंबर 2024 और अगस्त 2025 में दो चरणों में सार्वजनिक परामर्श आयोजित किए गए थे। इसके अलावा स्टॉक एक्सचेंजों, ब्रोकर संगठनों, संस्थागत निवेशकों,बाजार सहभागियों और अन्य संबंधित पक्षों के साथ भी विस्तृत चर्चा की गई थी। इन चर्चाओं का उद्देश्य बाजार की जरूरतों और संभावित परिचालन चुनौतियों को समझते हुए सीएएस की व्यवस्था तैयार करना था।

सेबी ने कहा कि सीएएस लागू होने के बाद भी उसने विभिन्न हितधारकों के साथ लगातार संवाद बनाए रखा। इनमें स्टॉक एक्सचेंज, ब्रोकर, अपने खाते से कारोबार करने वाले कारोबारी, सॉफ्टवेयर विक्रेता, म्यूचुअल फंड, उद्योग संगठन और विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक शामिल रहे। नियामक के मुताबिक, इस संवाद का उद्देश्य नई व्यवस्था के क्रियान्वयन से जुड़ी परिचालन संबंधी समस्याओं की पहचान करना और उनका समाधान तलाशना था।

सीएएस लागू होने के बाद सेबी ने पहले महीने के दौरान इसके कामकाज और बाजार पर पड़ने वाले प्रभाव की भी निगरानी की। इस दौरान बाजार सहभागियों की ओर से सोशल मीडिया, विभिन्न मीडिया मंचों और अन्य माध्यमों से कई सुझाव और प्रतिक्रियाएँ नियामक तक पहुँचीं। इन प्रतिक्रियाओं का अध्ययन करने के बाद सेबी को यह संकेत मिला कि डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स की एक्सपायरी पर सेटलमेंट प्राइस तय करने की मौजूदा व्यवस्था बाजार सहभागियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण चिंता का विषय बनकर सामने आई है।

दरअसल,सीएएस लागू होने के बाद इक्विटी कैश सेगमेंट में नीलामी प्रक्रिया के जरिए निर्धारित क्लोजिंग प्राइस को डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स की एक्सपायरी पर सेटलमेंट प्राइस का आधार बनाया गया। बाजार सहभागियों की ओर से इस व्यवस्था पर पुनर्विचार करने का सुझाव दिया गया है। उनका मानना है कि डेरिवेटिव्स के सेटलमेंट प्राइस के निर्धारण की प्रक्रिया में बदलाव की आवश्यकता हो सकती है। सेबी ने भी शुरुआती अनुभव और प्राप्त प्रतिक्रियाओं को ध्यान में रखते हुए इस व्यवस्था की समीक्षा करने का फैसला किया है।

नियामक ने स्पष्ट किया कि सीएएस की पूरी व्यवस्था व्यापक परामर्श प्रक्रिया के बाद तैयार की गई थी। इसके बावजूद किसी भी नई बाजार व्यवस्था को लागू करने के बाद उसके वास्तविक प्रभाव का आकलन करना जरूरी होता है। शुरुआती अनुभव से सामने आने वाली समस्याओं और बाजार सहभागियों की प्रतिक्रिया के आधार पर नियमों में आवश्यक सुधार किए जा सकते हैं। सेबी की आगामी पहल को इसी प्रक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है।

डेरिवेटिव बाजार में सेटलमेंट प्राइस की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है,क्योंकि इसी के आधार पर एक्सपायरी के समय कॉन्ट्रैक्ट्स का अंतिम वित्तीय निपटान किया जाता है। ऐसे में सेटलमेंट प्राइस निर्धारित करने की पद्धति में किसी भी बदलाव का असर बाजार सहभागियों,ट्रेडिंग रणनीतियों और एक्सपायरी के दौरान कारोबार पर पड़ सकता है। इसलिए सेबी की ओर से इस मुद्दे पर सार्वजनिक परामर्श के जरिए सुझाव लेना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

सेबी के आगामी परामर्श पत्र में डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स की एक्सपायरी के समय सेटलमेंट प्राइस निर्धारित करने की मौजूदा पद्धति में संभावित बदलावों का प्रस्ताव रखा जा सकता है। हालाँकि,अंतिम फैसला बाजार सहभागियों से प्राप्त सुझावों और नियामक के विस्तृत मूल्यांकन के बाद ही लिया जाएगा। इसका मतलब है कि फिलहाल मौजूदा व्यवस्था में तत्काल बदलाव नहीं किया गया है और प्रस्तावित संशोधनों पर आगे की प्रक्रिया परामर्श पत्र जारी होने के बाद शुरू होगी।

सीएएस को लागू करने का उद्देश्य इक्विटी बाजार में क्लोजिंग प्राइस तय करने की प्रक्रिया को एक निर्धारित नीलामी व्यवस्था के माध्यम से संचालित करना था। अब इसके शुरुआती अनुभव के आधार पर सेबी यह सुनिश्चित करना चाहता है कि डेरिवेटिव बाजार में सेटलमेंट की प्रक्रिया भी बाजार की जरूरतों और व्यवहारिक परिस्थितियों के अनुरूप बनी रहे।

सेबी की यह समीक्षा भारतीय पूँजी बाजार में नियामकीय व्यवस्था को लगातार बेहतर बनाने की उसकी प्रक्रिया को दर्शाती है। नियामक ने संकेत दिया है कि वह बाजार सहभागियों से मिले सुझावों को गंभीरता से लेते हुए आवश्यक बदलावों पर विचार करेगा। अगले सप्ताह प्रस्तावित परामर्श पत्र के जारी होने के बाद बाजार के विभिन्न पक्षों को इस व्यवस्था में संभावित बदलावों पर अपनी राय रखने का अवसर मिलेगा। इसके बाद प्राप्त सुझावों और समीक्षा के आधार पर डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स की एक्सपायरी पर सेटलमेंट प्राइस तय करने की व्यवस्था को लेकर आगे का फैसला किया जाएगा।