अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ (तस्वीर क्रेडिट@globalmarketss)

दक्षिण कोरिया को युद्धकालीन सैन्य नियंत्रण सौंपने पर अमेरिका का संतुलित रुख,रक्षा मंत्री ने सहयोग और तैयारी पर दिया जोर

सिंगापुर,30 मई (युआईटीवी)- अमेरिका और दक्षिण कोरिया के बीच लंबे समय से चर्चा का विषय रहे युद्धकालीन ऑपरेशनल कंट्रोल (ओपीसीओएन) के हस्तांतरण को लेकर एक बार फिर महत्वपूर्ण बयान सामने आया है। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने स्पष्ट किया है कि दक्षिण कोरिया को युद्धकालीन सैन्य नियंत्रण सौंपने की प्रक्रिया का अमेरिका स्वागत करता है,लेकिन यह बदलाव ऐसे संतुलन के साथ होना चाहिए,जिसमें दशकों से निभाई जा रही अमेरिकी सैन्य जिम्मेदारियों और क्षेत्रीय सुरक्षा में उसकी भूमिका का सम्मान भी बना रहे। उन्होंने यह टिप्पणी सिंगापुर में आयोजित एशिया सुरक्षा शिखर सम्मेलन,जिसे शांगरी ला डायलॉग के नाम से भी जाना जाता है, के दौरान की।

हेगसेथ का यह बयान ऐसे समय आया है,जब दक्षिण कोरिया की सरकार युद्धकालीन ऑपरेशनल कंट्रोल को अपने हाथों में लेने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। दक्षिण कोरिया लंबे समय से चाहता रहा है कि युद्ध की स्थिति में उसकी सेना का अंतिम संचालन नियंत्रण उसके अपने सैन्य नेतृत्व के पास हो। वर्तमान व्यवस्था के तहत युद्धकालीन परिस्थितियों में दक्षिण कोरियाई सेना का परिचालन नियंत्रण अमेरिका के नेतृत्व वाले संयुक्त सैन्य कमांड के अधीन आता है। यह व्यवस्था कोरियाई युद्ध के बाद बनी सुरक्षा संरचना का हिस्सा रही है और पिछले कई दशकों से दोनों देशों के रक्षा सहयोग की आधारशिला मानी जाती है।

सिंगापुर में आयोजित रक्षा सम्मेलन के दौरान हेगसेथ ने कहा कि अमेरिका दक्षिण कोरिया की इस आकांक्षा को समझता है और उसका सम्मान करता है। उन्होंने कहा कि किसी भी संप्रभु राष्ट्र की तरह दक्षिण कोरिया भी अपनी रक्षा क्षमताओं को स्वतंत्र रूप से संचालित करने का अधिकार रखता है। हालाँकि,उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस प्रक्रिया में सैन्य योजनाओं,जिम्मेदारियों और क्षेत्रीय सुरक्षा हितों के बीच उचित संतुलन बनाए रखना अत्यंत आवश्यक होगा। उनके अनुसार जल्दबाजी में लिया गया कोई भी निर्णय दोनों देशों की साझा सुरक्षा व्यवस्था पर प्रभाव डाल सकता है।

दक्षिण कोरिया की समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार सियोल सरकार वर्ष 2028 तक अमेरिका से युद्धकालीन ऑपरेशनल कंट्रोल वापस लेने की योजना पर काम कर रही है। माना जा रहा है कि राष्ट्रपति ली जे म्युंग अपने कार्यकाल के दौरान इस प्रक्रिया को पूरा करना चाहते हैं। यदि यह लक्ष्य निर्धारित समय के भीतर हासिल हो जाता है,तो यह दक्षिण कोरिया की रक्षा नीति में एक ऐतिहासिक परिवर्तन होगा और देश की सैन्य स्वायत्तता को नई दिशा देगा।

हालाँकि,इस समयसीमा को लेकर दोनों देशों के बीच कुछ मतभेदों की संभावना भी दिखाई दे रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि दक्षिण कोरिया राजनीतिक स्तर पर इस प्रक्रिया को तेज करना चाहता है,जबकि अमेरिका सैन्य तैयारी और व्यावहारिक परिस्थितियों को प्राथमिकता दे रहा है। यही कारण है कि हस्तांतरण की प्रक्रिया को लेकर दोनों पक्षों के बीच गहन विचार-विमर्श जारी है।

इसी संदर्भ में दक्षिण कोरिया में तैनात अमेरिकी बलों के कमांडर जनरल जेवियर ब्रूनसन का हालिया बयान भी काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उन्होंने कहा कि ऑपरेशनल कंट्रोल का हस्तांतरण केवल एक राजनीतिक निर्णय नहीं हो सकता,बल्कि इसके लिए व्यापक सैन्य तैयारी और आवश्यक क्षमताओं का विकास अनिवार्य है। उनके अनुसार किसी भी बदलाव से पहले यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि दक्षिण कोरियाई सेना के पास वह सभी संसाधन,तकनीकी क्षमता और कमांड संरचना मौजूद हो जो युद्धकालीन परिस्थितियों में प्रभावी नेतृत्व प्रदान कर सके।

जनरल ब्रूनसन ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि सही क्षमता,सही स्थान और सही समय का सिद्धांत इस पूरी प्रक्रिया का आधार होना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि इन तीनों पहलुओं पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया,तो क्षेत्रीय सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। उनके बयान को अमेरिका की उस रणनीतिक सोच के रूप में देखा जा रहा है,जिसमें सैन्य तैयारी को राजनीतिक समयसीमा से अधिक महत्व दिया जा रहा है।

अपने संबोधन में अमेरिकी रक्षा मंत्री ने दक्षिण कोरिया द्वारा रक्षा क्षेत्र में किए जा रहे निवेश की भी सराहना की। उन्होंने राष्ट्रपति ली जे म्युंग के उस निर्णय को दूरदर्शी और व्यावहारिक बताया,जिसमें रक्षा खर्च को सकल घरेलू उत्पाद के 3.5 प्रतिशत तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। हेगसेथ ने कहा कि वर्तमान वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए सहयोगी देशों को अपनी रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में अधिक निवेश करना चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि दक्षिण कोरिया ने हाल के वर्षों में रक्षा आधुनिकीकरण के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। आधुनिक हथियार प्रणालियों,उन्नत निगरानी तकनीकों और स्वदेशी सैन्य उत्पादन क्षमता के विकास ने देश को क्षेत्रीय सुरक्षा परिदृश्य में अधिक सक्षम बनाया है। अमेरिकी रक्षा मंत्री के अनुसार ऐसी पहलें न केवल दक्षिण कोरिया की सुरक्षा को मजबूत करेंगी,बल्कि पूरे क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने में भी योगदान देंगी।

हेगसेथ ने दक्षिण कोरिया के परमाणु ऊर्जा संचालित पनडुब्बी कार्यक्रम के प्रति भी समर्थन व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि समुद्री सुरक्षा वर्तमान समय की सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक प्राथमिकताओं में से एक है और सहयोगी देशों की नौसैनिक क्षमताओं में वृद्धि क्षेत्रीय प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करेगी। उनके अनुसार उन्नत पनडुब्बी बेड़े और समुद्री निगरानी प्रणाली किसी भी संभावित खतरे का प्रभावी ढंग से मुकाबला करने में मदद करेंगे।

विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका और दक्षिण कोरिया के बीच रक्षा सहयोग आने वाले वर्षों में और अधिक महत्वपूर्ण होने वाला है। उत्तर कोरिया की सैन्य गतिविधियों,क्षेत्रीय शक्ति संतुलन और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ती रणनीतिक प्रतिस्पर्धा के बीच दोनों देशों के संबंध सुरक्षा दृष्टि से बेहद अहम बने हुए हैं। ऐसे में ऑपरेशनल कंट्रोल का हस्तांतरण केवल प्रशासनिक बदलाव नहीं,बल्कि क्षेत्रीय सुरक्षा संरचना से जुड़ा एक बड़ा रणनीतिक निर्णय माना जा रहा है।

फिलहाल दोनों देशों के बीच बातचीत जारी है और यह स्पष्ट है कि अमेरिका इस प्रक्रिया का विरोध नहीं कर रहा,बल्कि यह सुनिश्चित करना चाहता है कि बदलाव पूरी तैयारी और समन्वय के साथ हो। आने वाले महीनों में इस मुद्दे पर होने वाली चर्चाएँ यह तय करेंगी कि दक्षिण कोरिया अपनी सैन्य स्वायत्तता की दिशा में कितनी तेजी से आगे बढ़ पाता है और अमेरिका किस प्रकार इस परिवर्तन को समर्थन देता है। यह प्रक्रिया न केवल दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों को प्रभावित करेगी,बल्कि पूरे एशिया-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था पर भी इसका महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ सकता है।